‘भूगर्भ जल प्रबन्धन’ पर ट्रेनिंग कार्यक्रम

Submitted by RuralWater on Thu, 03/19/2015 - 16:19
Source
इंडिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)

तारीख : 09-23 जून 2015
स्थान : देहरादून


पहाड़ी इलाकों में झरने न केवल पानी के लिये बल्कि जीविका का भी महत्वपूर्ण साधन हैं। झरने (स्प्रिंग) पहाड़ पर पेयजल के संकट को तो कम करते ही हैं, कृषि जल-प्रबन्धन में भी सहायक हैं। हिमालय के पूरे इलाके में झरनों की संख्या हजारों में है। हाँ! इनके अलग-अलग इलाकों में नाम अलग-अलग हैं। कहीं नौले तो कहीं धारे कहा जाता है। लेकिन पिछले कुछ समय से ये झरने सूखते जा रहे हैं। चूँकि झरने पहाड़ी लोगों की धरोहर हैं इसलिए इनको सूखने से बचाने में, सूखे झरनों के जीवित करने में कई लोग काफी समय से लगे हुए हैं। और कुछ झरनों को पुनर्जीवित करने में सफलता भी हासिल की गई है।

सिक्किम में सरकार की सहायता से पीएसआई झरनों को पुनर्जीवित करने के कार्य में लगी हुई है। थानाकासोगा पंचायत क्षेत्र में पीएसआई, अर्घ्यम की सहायता द्वारा 2010 से कार्यरत है।

यदि भूगर्भ के जल प्रबन्धन को समझ लिया जाए तो कई गाँवों की पानी की समस्या सुधर जाएगी साथ ही पानी की गुणवत्ता भी सुधरेगी।

भूगर्भ जल प्रबन्ध और झरनों को पुनर्जीवित करने की प्रकिया को समझने के लिए पीएसआई 9 से 23 जून तक देहरादून में अपना नौवाँ ट्रेनिंग कार्यक्रम का आयोजन कर रही है।

और अधिक जानकारी के लिए अटैचमेंट देखें-

सम्पर्क
अनीता शर्मा
पीएसआई, देहरादून
फोन : +91 135 2761258
फैक्स : +91 135 2763368
ईमेल l: eqmgpsi@gmail.com, psiddoon@gmail.com
वेबसाइट : www.peoplesscienceinstitute.org

नोट : कृपया आयोजकों से बात करके ही अपने कार्यक्रम बनाएँ।
 

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