गम्भीर जल संकट की तरफ बढ़ता देश

Submitted by RuralWater on Fri, 04/17/2015 - 12:27

वर्तमान में 1600 जलीय प्रजातियाँ जल प्रदूषण के कारण लुप्त होने के कगार पर हैं। विश्व में 1.10 अरब लोग दूषित पेयजल पीने को मजबूर हैं और साफ पानी के बगैर अपना गुजारा कर रहे हैं। पानी की कमी से जूझ रहे दुनिया के 20 शहरों में दूसरे नम्बर पर है दिल्ली। जापान की राजधानी टोक्यो इस मामले में नम्बर एक पर है। इतना ही नहीं इस सूची में दिल्ली के अलावा भारत के चार शहर कोलकाता, चेन्नई, बंगलुरू और हैदराबाद भी शामिल हैं। पिछले दिनों आई वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की एक रिपोर्ट ने जल संकट को 10 शीर्ष वैश्विक खतरों में सबसे ऊपर रखा है। फोरम की 10वीं ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट में जल संकट को शामिल किया गया। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट में ऐतिहासिक रूप से यह पहली बार हुआ है जब ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट में वैश्विक जल संकट को बड़ा और संवेदनशील मुद्दा माना गया हो।

एक दशक पहले ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट में वित्तीय चिन्ताएँ और चीन की प्रगति, स्टॉक और बांड्स में तेज बदलाव, तेल बाजार के उतार-चढ़ाव इत्यादि को जगह मिलती थी। इस बार फोरम ने पानी की कमी को तरजीह दी है। भारत में भी गर्मियाँ शुरू हो गई हैं ऐसे में कई जगह जल संकट की आहट सुनाई पड़ने लगी हैं क्योंकि गर्मियों में जल के कई स्रोत सूखने या जल स्तर कम होने से पानी की किल्लत होने लगती है। लेकिन अब यह जल संकट देश के कई हिस्सों में विकराल रूप धारण करने लगा है।

भारत में “जल ही जीवन है” का मुहावरा काफी प्रचलित है लेकिन इसका वास्तविक अर्थ देश की अधिकांश जनसंख्या को नहीं पता है क्योंकि वो पानी के महत्व को न ठीक से समझते हैं ना ही ठीक से समझना चाहते हैं। पानी के बिना जिन्दगी की क्या स्थिति हो जाती है इसे पिछले दिनों मालदीव में आए भयंकर जलसंकट से समझ सकते हैं।

जहाँ भीषण जल संकट की वजह से आपातकाल लगाना पड़ा। पीने के पानी को लेकर मालदीव में कई जगह हिंसा और झड़प भी हुई। मालदीव की राजधानी माले में डेढ़ लाख लोग पीने के पानी के लिये तरस गए जहाँ बाद में कुछ देशों ने पानी भेजा लेकिन सबसे पहले भारत ने मालदीव की मदद करते हुए 1200 टन पानी भेजा।

मालदीव के ये हालात वहाँ के सबसे बड़े वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में लगी आग की वजह से हुई। बाद में मालदीव सरकार को भारत के अलावा श्रीलंका, चीन और अमेरिका से भी मदद माँगनी पड़ी। कुल मिलाकर “जल ही जीवन है” का असली अर्थ मालदीव को समझ में आया जहाँ पानी के बिना आपातकाल लगाना पड़ा।

सच्चाई यह है कि भारत भी पानी के मामले में गम्भीर जल संकट की स्थिति से गुज़र रहा है और अगर समय रहते इसके लिये प्रबन्ध नहीं किए गए तो आने वाले समय में यहाँ विकराल स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। देश में पानी के अधिकांश स्थानीय स्रोत सुख चुके हैं या उनका अस्तित्व नहीं रह गया है।

देश की सैकड़ों छोटी नदियाँ विलुप्ति के कगार पर हैं ,देश के अधिकांश गाँव और कस्बों में तालाब और कुएँ भी बिना संरक्षण के सुख चुके हैं। देश के अधिकांश जगहों में गंगा और यमुना अत्यधिक प्रदूषित है जिसकी वजह से इसका पानी भी पीने योग्य नहीं रह गया है। कुल मिलाकर देश में जल संकट और जल संरक्षण को लेकर बहुत ज्यादा संजीदगी नहीं दिख रही है।

पिछले दिनों संयुक्त राष्ट्र ने विश्व के सभी देशों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पानी की बर्बादी को जल्द नहीं रोका गया तो जल्दी ही विश्व गम्भीर जल संकट से गुजरेगा। दुनिया की आबादी जिस तरह से बढ़ रही है सबको स्वच्छ पेयजल मुहैया कराना विश्व के सभी देशों खासकर विकासशील देशों के लिये एक चुनौती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अध्ययन के अनुसार दुनिया भर में 86 फीसदी से अधिक बीमारियों का कारण असुरक्षित व दूषित पेयजल है। वर्तमान में 1600 जलीय प्रजातियाँ जल प्रदूषण के कारण लुप्त होने के कगार पर हैं। विश्व में 1.10 अरब लोग दूषित पेयजल पीने को मजबूर हैं और साफ पानी के बगैर अपना गुजारा कर रहे हैं। पानी की कमी से जूझ रहे दुनिया के 20 शहरों में दूसरे नम्बर पर है दिल्ली।

देश की राजधानी दिल्ली पानी की कमी से जूझ रहे दुनिया के 20 शहरों में दूसरे नम्बर पर है। जापान की राजधानी टोक्यो इस मामले में नम्बर एक पर है। इतना ही नहीं इस सूची में दिल्ली के अलावा भारत के चार शहर कोलकाता, चेन्नई, बंगलुरू और हैदराबाद भी शामिल हैं। चीन के भी कुछ शहर जल संकट से दो-चार हो रहे हैं। इसमें राजधानी बीजिंग भी है।

 

 

क्या कहता है अध्ययन


1. नेचर कंजरवेंसी ने साढ़े सात लाख से अधिक आबादी वाले 500 शहरों के जल ढाँचे का अध्ययन कर यह निष्कर्ष निकाला है।
2. आर्थिक गतिविधियों (4.8 खरब अमेरिकी डॉलर अनुमानित) के कारण एक चौथाई शहर पानी की कमी से जूझ रहे हैं।
3. बड़े शहर दुनिया की कुल भूमि के एक फीसद हिस्से पर बसे हुए हैं। जो शहर आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं, उन्हें ज्यादा जल संकट झेलना पड़ रहा है। उन्हें नज़दीक के जल स्रोत पर निर्भर करना पड़ता है।
4. अध्ययन के मुताबिक कम प्रति व्यक्ति आय वाले शहर औसतन 26 किलोमीटर दूर के जल स्रोत पर निर्भर होते हैं। उच्च प्रति व्यक्ति आय वाले शहर औसतन 57 किलोमीटर दूर स्थित पानी के स्रोत का इस्तेमाल कर लेते हैं।
5. बड़े शहर अपनी जरूरत का 78 प्रतिशत पानी सतह स्रोत से प्राप्त करते हैं जो कि काफी दूर स्थित होते हैं। इन शहरों में 1.20 अरब लोग निवास करते हैं। 20 प्रतिशत पानी भूमिगत स्रोत और दो फीसदी जल विलवणीकरण से मिलता है।
6. बड़े शहरों को शहरी जल ढाँचे से प्रतिदिन 668 अरब लीटर पानी आपूर्ति होती है। इनमें से 504 अरब लीटर पानी सतह स्रोत से मिलता है।

 

 

 

 

दुनिया के 20 सबसे जल संकट वाले शहर

 

 

 

क्रम संख्या

शहर

1.

टोक्यो

2.

दिल्ली

3.

मैक्सिको सिटी

4.

शंघाई

5.

बीजिंग

6.

कोलकाता

7.

कराची

8.

लास एजेंलिस

9.

रिओ डि जेनरिओ

10.

मॉस्को

11.

इस्ताम्बुल

12.

शेनडोन

13.

चोंगकिंग

14.

लीमा

15.

लंदन

16.

वुहान

17.

तियानजिन

18.

चेन्नई

19.

बंगलुरू

20.

हैदराबाद

 

 

 

बड़े जल संकट की तरफ बढ़ती दिल्ली


पिछले दिनों पानी की कमी की आशंका को लेकर दिल्ली के मुख्यमन्त्री अरविन्द केजरीवाल ने विधानसभा में कहा कि अगर दिल्ली में पानी की कटौती करनी पड़ी तो पूरी दिल्ली में एक समान तरीके से पानी की कटौती की जाएगी। इसमें गरीब और वीआईपी और मन्त्रियों को लेकर भेदभाव नहीं किया जाएगा। असल में गर्मी के मौसम में दिल्ली के अन्दर जल संकट बढ़ जाता है और उसे पड़ोसी राज्य हरियाणा से अतिरिक्त पानी लेना पड़ता है। इस बार पानी को लेकर दोनों राज्यों में ठन गई है। फिलहाल हरियाणा जितना पानी पहले से दे रहा है उतना ही देते रहने को तैयार है लेकिन गर्मी में अतिरिक्त पानी देने को तैयार नहीं है। इससे दिल्ली में जल संकट होना तय है।

 

 

 

 

पानी की किल्लत से जूझते शहरों का हाल


1. 32 प्रमुख भारतीय शहरों में से 22 पानी की किल्लत से जूझ रहे, जमशेदपुर में सबसे ज्यादा संकट, माँग और आपूर्ति में है 70 फीसदी के करीब अन्तर।
2. 30 फीसदी कम पानी की आपूर्ति होती है फरीदाबाद, मेरठ, कानपुर, आसनसोल, धनबाद, विशाखापत्तनम, मदुरै और हैदराबाद जैसे शहरों में।
3. 415.8 करोड़ लीटर रोज़ाना है दिल्ली में पानी की जरूरत, लेकिन 315.6 करोड़ लीटर की ही हो पाती है आपूर्ति।
4. 52 फीसदी अधिक पानी की आपूर्ति होती है नागपुर में, लुधियाना, राजकोट, कोलकाता, इलाहाबाद और नासिक जैसे शहर भी पानी की जरूरत पूरी करने में सक्षम

 

 

 

 

देश में बढ़ता जल संकट


भारत में जनसंख्या वृद्धि और अनियन्त्रित शहरीकरण से जल संकट गहरा गया है। आइए जानें कुछ तथ्य

देश की जनसंख्या
1. एक अरब 25 करोड़
2. 54% देश में जल संकट कहीं गम्भीर तो कहीं अत्यधिक गम्भीर स्थिति में।
3. 2030 में पानी की माँग के कारण राष्ट्रीय आपूर्ति में गिरावट 50% नीचे जाने की आशंका

 

 

 

 

सतह पर पानी संकट


कम सतह पर उपलब्ध वार्षिक जल में से 10% से भी कम उपयोग होता है

1. कम-मध्यम 10-20% इस्तेमाल
2. मध्यम-उच्च 20-40% उपयोग
3. उच्च 40-80% इस्तेमाल
4. अत्यधिक 80% से ज्यादा उपयोग
5. एक अरब लोग ऐसे इलाकों में रहते हैं जहाँ पानी की गुणवत्ता बेहद खराब है
6. 4000 से ज्यादा भूमिगत जलस्रोतों में जलस्तर लगातार कम हो रहा है

 

 

 

 

शीर्ष वैश्विक खतरा


वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ने भी जल संकट को शीर्ष वैश्विक खतरा माना ऐसा शायद पहली बार हुआ है कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ने जल संकट को 10 शीर्ष वैश्विक खतरों में सबसे ऊपर रखा है। जनवरी में दावोस में हुई बैठक में फोरम की 10वीं ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट में जल संकट को शामिल किया गया।एक दशक पहले ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट में वित्तीय चिन्ताएँ और चीन की प्रगति, स्टॉक और बांड्स में तेज बदलाव, तेल बाजार के उतार-चढ़ाव इत्यादि को जगह मिलती थी। इस बार फोरम ने पानी की कमी को तरजीह दी है

 

 

 

 

2015 की वैश्विक रिपोर्ट में खतरे

 

 

 

10 खतरे सम्भावना के आधार पर

10 खतरे असर के आधार पर

1. अन्तरराज्य संघर्ष

1. जल संकट

2. एक्सट्रीम वेदर

2. संक्रामक बीमारियाँ

3. राष्ट्रीय शासन की विफलता

3. जनसंहार के हथियार

4. राज्य की विफलता या संकट

4. अन्तरराज्य संघर्ष

5. बेरोजगारी या अल्प रोजगार

5. जलवायु परिवर्तन अनुकूलन में विफलता

6. प्राकृतिक विनाश

6. ऊर्जा मूल्य आघात

7. जलवायु परिवर्तन अनुकूलन में विफलता

7. संकट सूचना ढाँचे का ढहना

8. जल संकट

8. वित्तीय संकट

9. डाटा धोखाधड़ी या चोरी

9. बेरोजगारी या अल्प रोज़गार

10. साइबर हमला

10. जैवविविधता हानि और पारिस्थितिकी तन्त्र की विफलता

 

 

 

 

 

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.सम्पादक, विज्ञानपीडिया डॉट कॉम
एबीपी न्यूज द्वारा विज्ञान लेखन के लिए सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर का सम्मान
विज्ञान और तकनीकी विषय पर लिखने वाले वरिष्ठ लेखक (पिछले 10 वर्षों से देश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में स्वतन्त्र लेखन)
असिसटेंट प्रोफेसर, इलेक्ट्रॉनिक्स एण्ड कम्युनिकेशन

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