पानी के विनाशकारी रूप को बदलकर उसे लाभकारी बनायेंगे: उमा भारती

Submitted by Hindi on Sat, 05/30/2015 - 10:24

गंगा बाढ़ नियन्त्रण परिषद की 17वीं बैठक


.पटना। नेपाल में मल्टीपरपज डैम बनेगा तो इसका फायदा नेपाल को ही होगा। भारत में बाढ़ नियन्त्रण हो पायेगा, इससे हमारे यहाँ फ्लड मोर्डेट हो सकता है। डैम का फायदा अन्ततोगत्वा नेपाल को ही ज्यादा होगा। नेपाल को डैम से जितनी विद्युत की आवश्यकता होगी, उसकी आपूर्ति जल विद्युत परियोजना से होगी। नेपाल को भूटान से सबक लेने की जरूरत है। भूटान में विद्युत जल परियोजनाओं से विद्युत की अावश्यकता पूरी होती है, साथ ही वे दूसरे देश को भी विद्युत देने की स्थिति में हैं। नेपाल में मल्टीपरपज डैम के निर्माण से वहाँ की आर्थिक स्थिति में उछाल आयेगा। जल विद्युत परियोजनाओं से नेपाल को सर्वाधिक लाभ मिलेगा। मुख्यमन्त्री ने कहा कि उन्हें खुशी है कि इसके लिए राजनीतिक स्तर पर भी पहल की गई है। आज मुख्यमन्त्री श्री नीतीश कुमार मुख्यमन्त्री सचिवालय के संवाद सभाकक्ष में गंगा बाढ़ नियन्त्रण परिषद की 17वीं बैठक को सम्बोधित कर रहे थे।

मुख्यमन्त्री ने कहा कि उन्हें खुशी है कि केन्द्रीय जल संसाधन मन्त्री सुश्री उमा भारती जी ने पटना में परिषद की 17वीं बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया। यह बैठक आज हो रही है, इस बैठक में आये तमाम लोगों का मैं स्वागत करता हूँ। केन्द्रीय जल संसाधन मन्त्री सुश्री उमा भारती जी ने गंगा बाढ़ नियन्त्रण एवं गंगा बेसिन से सम्बन्धित बहुत सारे मुद्दों पर प्रकाश डाला है। भारत और नेपाल के बीच सप्तकोशी से सम्बन्धित योजना लम्बित है। नेपाल की नदियों के कारण बिहार को बाढ़ की विभिषिका झेलनी पड़ती है, इसकेलिए एवं अन्य योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए नेपाल के साथ मामले लम्बित चली आ रही है।

उन्होंने कहा कि जब वे केन्द्र में मन्त्री थे, उस समय बिहार का एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमण्डल केन्द्रीय जल संसाधन मन्त्री से मिला था और बिहार में नेपाल की नदियों के कारण हर वर्ष होने वाली बाढ़ की विभिषिकाओं से अवगत कराया था और माँग किया कि नेपाल में एक संयुक्त प्रोजेक्ट आॅफिस स्थापित किया जाए। निर्णय के कार्यान्वयन में 2004 में नेपाल के विराट नगर में एक आॅफिस खोला गया। 2015 में इस आॅफिस के अवधि विस्तार की पुनः आवश्यकता बताई गई। इस आॅफिस का अवधि विस्तार किया जाना चाहिए।

मुख्यमन्त्री ने कहा कि प्रदेश के अन्दर नदियों को जोड़ने की योजना बाढ़ नियन्त्रण में सहायक होगी, इस पर ध्यान देने से बाढ़ नियन्त्रण की समस्याओं को सुलझाने में सहुलियत मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य में नदियों को जोड़ने की तीन योजना का प्रारूप तैयार है। इस पर केन्द्र सरकार ध्यान दे और इन परियोजना को स्वीकृति दिलाये।

मुख्यमन्त्री ने कहा कि गंगा नदी को लेकर जो मेरी समझ है, उसको वे प्रकट करना चाहते हैं। उनका लगाव गंगा नदी से जुड़ा हुआ है। पटना से पचास किलोमीटर पूरब बख्तियारपुर में उनका जन्म हुआ था। तब से वे गंगा नदी को बहुत नजदीक से देखते रहे हैं। गंगा नदी के तट पर सभ्यता का विकास हुआ है। गंगा नदी के निर्मलता के साथ-साथ उसकी अविरलता पर ध्यान देना होगा। गंगा की अविरल धारा प्रभावित हो रही है। अविरलता के बिना निर्मलता सम्भव नहीं है।

.गंगा जल की खासियत भी बाधित हो रही है। यह शोध का विषय है कि गंगोत्री से निकले गंगा का कितना पानी वाराणसी तक पहुँच रही है। फरक्का में बराज के कारण सिल्ट डिपोजिट होता चला आ रहा है। समस्या गंगा के अपस्ट्रीम में है। बचपन से लेकर लगातार गंगा नदी से लगाव रहा है। गंगा का प्रवाह घटता जा रहा है। गंगा नदी छिछली होती जा रही है, जिसके कारण थोड़े से जल ग्रहण से भी बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होती है। गंगा नदी में हो रहे पूरा का पूरा परिवर्तन देखकर रोना आता है। गंगा नदी अपनी जगह से हटती जा रही है। इन सबके जड़ में फरक्का का बराज है। तत्कालीन केन्द्रीय जल संसाधन मन्त्री श्री पवन बंसल जब बिहार आये थे तो उन्हें चौसा से लेकर फरक्का तक की यात्रा कराकर उन्हें गंगा की दुर्दशा की जानकारी दी गई थी।

बिहार में गंगा जब प्रवेश करती है तो उस समय वो जितना पानी ले कर आती है, उसका चार गुणा पानी राज्य से बाहर लेकर निकलती है। हम गंगा नदी का लाभ उठाना चाहते हैं, मगर हमें वह फायदा नहीं मिल पा रहा है। हमारे यहाँ गंगा नदी में पानी पूरा नहीं पहुँच पाता है। उन्होंने कहा कि गंगा नदी के अविरलता को नष्ट नहीं होने दें। सिल्ट मैनेजमेंट की कोई पाॅलिसी होनी चाहिये, इसके बारे में सोचिये। गंगा पर हमारी चिन्ता है, गंगा नदी प्रदूषित या विलुप्त होती है तो पूरी इकोलाॅजी प्रभावित होगी। गंगा की निर्मलता एवं अविरलता को बनाये रखने की जरूरत है, गंगा में प्रवाह को बनाये रखें, केन्द्रीय जल संसाधन मन्त्रालय का बजट बढ़े।

समारोह की अध्यक्षता केन्द्रीय जल संसाधन मन्त्री सुश्री उमा भारती ने किया। उन्होंने कहा कि 1972 में गंगा बाढ़ नियन्त्रण परिषद की स्थापना की गई थी। अब जो गंगा या गंगा बेसिन के अप्रत्याशित जगह पर भी बाढ़ आने लगी है, जिसकी कल्पना नहीं की जाती थी। गंगा बाढ़ नियन्त्रण परिषद का मुख्यालय पटना में है और यह मुख्यालय पटना में ही रहेगा, इसको और प्रभावी बनाने का प्रस्ताव बैठक में विचार कर मेरे समक्ष लायें। मन्त्रालय की ओर से प्रस्ताव को पूर्ण सहयोग दिया जायेगा।

मुख्यमन्त्री श्री नीतीश कुमार से भी मैंने बात किया है। सप्तकोशी के मामले को उठाने जा रहे हैं। बिहार में एक तरफ बाढ़ और दूसरी तरफ सुखाड़ की स्थिति बनी रहती है। बाढ़ की स्थिति को नियन्त्रित करने में लगे हुये हैं। गंगा बाढ़ नियन्त्रण परिषद को निर्देश दिया है कि बैठक कर समस्याओं का निदान खोजें। उतर प्रदेश का जल प्रबन्धन अच्छा है। इंटर लिंकिंग आॅफ रिवर की योजना को कार्यान्वित कराने के लिए विचार कर रहे हैं। पानी के विनाशकारी रूप को बदलकर उसे लाभकारी बनायेंगे। पानी का बेहतर प्रबन्ध देश में करेंगे।

.देश के पूरब और उतर राज्यों में जहाँ पर पानी सुलभ है, मगर वहाँ पर गरीबी बहुत है। दक्षिण एवं पश्चिम में पानी की कमी है, मगर वहाँ पर समृद्धि है। नदियों का मीठा पानी समुद्र में जाता है, वह भी पर्यावरण को सन्तुलित करने में सहयोग देता है। नदियों का मीठा पानी समुद्र में व्यर्थ नहीं जाता है। बाढ़ का पानी सिंचाई, पेयजल, बिजली के उत्पादन में सहयोग कर सकता है। पानी का सही इस्तेमाल के कारण ही गुजरात का विकास हुआ। हर तरफ भूगर्भ जल का वाटर लेवल गिर रहा है। किस चीज के लिए किस तरह के पानी का उपयोग हो, इसकी व्यवस्था करनी होगी। पानी के उपयोग को नियन्त्रित करना है, वाटर मैनेजमेंट की नई कार्ययोजना आयेगी। अच्छे परिणाम सामने आयेंगे, सप्तकोशी के लिये योजना तैयार हुई है।

इस अवसर पर केन्द्रीय जल संसाधन मन्त्री सुश्री उमा भारती एवं मुख्यमन्त्री श्री नीतीश कुमार ने संयुक्त रूप से केन्द्रीय जल संसाधन मन्त्रालय की दो पुस्तिका- ‘एनुअल रिपोर्ट 2014-15’ एवं ‘समरी रिकोमेंडेशन्स आॅफ कम्प्रीहेन्सिव मास्टर प्लान मई 2015’ का लोकार्पण किया।

बैठक को जल संसाधन मन्त्री श्री विजय कुमार चौधरी, उतर प्रदेश के जल संसाधन मन्त्री श्री शिवपाल सिंह यादव, छत्तीसगढ़ के जल संसाधन मन्त्री श्री ब्रजमोहन अग्रवाल, नीति आयोग के सदस्य ड़ा. बी.के. सरस्वत एवं झारखण्ड, उतराखण्ड, छतीसगढ़, पश्चिमबंगाल, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, दिल्ली राज्य के प्रतिनिधि अधिकारी ने भी सम्बोधित किया और अपने सुझाव दिये। बैठक में उतर प्रदेश के जल संसाधन राज्य मन्त्री श्री सुरेन्द्र सिंह पटेल, मुख्य सचिव श्री अंजनी कुमार सिंह, अध्यक्ष गंगा बाढ़ नियन्त्रण परिषद श्री ए.बी. पांडया, अपर सचिव, संयुक्त सचिव, जल संसाधन विभाग भारत, सचिव जल संसाधन बिहार श्री दीपक कुमार सिंह, मुख्यमन्त्री के प्रधान सचिव श्री डी.एस. गंगवार सहित जल संसाधन विभाग, बिहार, केन्द्रीय जल संसाधन विभाग एवं गंगा बाढ़ नियन्त्रण परिषद के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया।

मुख्यमन्त्री श्री नीतीश कुमार ने केन्द्रीय जल संसाधन मन्त्री सुश्री उमा भारती को प्रतीक चिह्न भेंटकर सम्मानित किया
 

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