बिहार में हरित आवरण पन्द्रह फीसदी करने का लक्ष्य : मुख्यमन्त्री

Submitted by Hindi on Tue, 08/11/2015 - 09:32
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मुख्यमन्त्री नीतीश कुमार ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन एवं ग्लोबल वार्मिंग की समस्या को कम करने के मक्सद से पर्यावरण सनतुलन बनाये रखने हेतु राज्य में हरित आवरण को 9 से बढ़ाकर 15 फीसदी करने का लक्ष्य तय किया गया है तथा मौजूदा उपलब्ध आकड़ों के आधार पर हरित आवरण 13 फीसदी हो चुका है। विकास के मॉडल को समझना होगा। समावेशी विकास का मतलब है कि हम अपने पर्यावरण की रक्षा करें और उसके सन्तुलन को कायम रखें। अलग-अलग क्षेत्रों की जलवायु पर आधारित कृषि अनुसंधान कार्य होना चाहिए इसके लिए अलग-अलग क्षेत्रों में कृषि महाविद्यालय की स्थापना की जा रही है। कृषि अनुसंधान को प्रयोगशाला से खेतों तक ले जाना होगा। प्राकृतिक संसाधन की उपलब्धता और उसके संरक्षण को ध्यान में रखकर अनुसंधान होना चाहिए। यह तो तय है कि आने वाले कल का विकास कृषि के विकास के आधार पर ही सम्भव है। इसलिए अधिक से अधिक युवाओं को कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में आगे आना चाहिए। वे पूर्णियाँ में भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय के नवनिर्मित भवनों के उद्घाटन के बाद आयोजित समारोह को सम्बोधित कर रहे थे।

मुख्यमन्त्री ने फीता काटकर कृषि महाविद्यालय के नवनिर्मित भवन का उद्घाटन किया तथा मुख्य भवन में ही भोला पासवान शास्त्री की प्रतिमा का अनावरण भी किया।

बिहार एक कृषि प्रधान प्रदेश है, यहाँ की 76 फीसदी आबादी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है। खेती के विकास के बिना देश एंव प्रदेश का टिकाऊ विकास सम्भव नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कृषि के क्षेत्र में इन्द्रधनुषी क्रान्ति के मक्सद से कृषि रोड मैप के आधार पर कार्य कर रही है। इसके लिए 250 आबादी वाले प्रत्येक बसावट को पक्की सड़क से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है ताकि किसान अपने उत्पादों को आसानी से बाजार तक ले जा सकें। भंडारण क्षमता में वृद्धि के लिए नये गोदामों का निर्माण तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा देने का कार्य भी किया जा रहा है।

मुख्यमन्त्री ने कहा कि कृषि के विकास के लिए तकनीकी विकास आवश्यक है, इसके लिए कृषि के क्षेत्र में अनुसंधान आवश्यक है। अनुसंधान के लिये उन्नत कृषि संस्थानों की आवश्यकता होती है, इसी उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा राज्य के द्वितीय कृषि विश्वविद्यालय के रूप मे बिहार कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना की गई। इसी विश्वविद्यालय से अंगीभूत कोसी तथा सीमांचल क्षेत्र में तीन कृषि महाविद्यालयों की स्थापना सहरसा, पूर्णियाँ एवं किशनगंज में की गई है। कृषि अनुसंधान में लगे छात्रों को विदेश जाने का भी मौका मिलता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कृषि महाविद्यालयों में नामांकन बढ़ाने हेतु सभी छात्र एवं छात्राओं को 2500 रूपये हर माह छात्रवृति के रूप में देगी जिसके तहत दो हजार रूपये प्रतिमाह एवं प्रतिवर्ष 6 हजार रूपये पुस्तक क्रय हेतु दिया जायेगा।

मुख्यमन्त्री ने कहा कि सुखाड़ से निबटने हेतु राज्य सरकार द्वारा तमाम आदेश निर्गत किये जा चुके हैं तथा राशि की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा चुकी है। सरकार ने डीजल अनुदान हेतु निर्धारित राशि को 25 रूपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 30 रूपये प्रति लीटर कर दिया है तथा तीन पटवन से बढ़ाकर पाँच पटवन कर दिया है।

कृषि मन्त्री श्री विजय कुमार चौधरी ने अपने सम्बोधन में कहा कि देश में दूसरे हरित क्रांति की सम्भावना उत्तर-पूर्व के राज्यों में है। प्रदेश में भी उत्तर-पूर्व के कोसी एवं सीमांचल क्षेत्र में कृषि की उन्नति से ही प्रदेश में हरित क्रांति सम्भव हो सकेगी।

इस मौके पर ऊर्जा मन्त्री श्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, समाज कल्याण मन्त्री, श्रीमती लेशी सिंह, पिछड़ा एवं अतिपिछड़ा कल्याण मन्त्री श्रीमती बीमा भारती, श्रम संसाधन मन्त्री, श्री दुलालचंद गोस्वामी, सांसद श्री संतोष कुशवाहा, विधानसभा के अन्य सदस्यगण, कृषि उत्पादन, आयुक्त श्री विजय प्रकाश, बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कार्यकारी कुलपति प्रो. अरूण कुमार, भूतपूर्व कुलपति डाॅ मेवालाल चौधरी, आयुक्त, पूर्णियाँ प्रमंडल श्री सुधीर कुमार, पुलिस उप महानिरीक्षक, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, कृषि महाविद्यालय के प्राचार्य श्री राजेश कुमार सहित कृषि विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय के अन्य शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक कर्मी तथा अन्य गणरमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
 

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