फ्लोराइड मुक्ति योजना का बुरा हाल

Submitted by RuralWater on Thu, 08/20/2015 - 12:56

धार। जिले में फ्लोराइडमुक्ति के लिये जो योजना बनाई गई है उनकी बुरी दशा है। बारिश शुरू हो चुकी है लेकिन गाँव की महिलाओं व बच्चियों को पीने के पानी के लिये संघर्ष करना पड़ रहा है। ग्राम मोहनपुरा क्षेत्र में यह स्थिति है कि फ्लोराइडमुक्ति के लिये जो योजना बनाई गई थी उससे कुछ भी लाभ नहीं मिल पाया है।

लोग पीने के पानी के लिये तरस रहे हैं। कहीं भी कोई साधन नहीं है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि फ्लोराइमुक्ति के लिये जो संरचना बनाई गई थी वह अनुपयोगी साबित हो रही है। जब से योजना चालू हुई है तब से एक या दो बार ही पीने का पानी मिला है। लोगों को फ्लोराइडमुक्त पानी के लिये तो ठीक है, सामान्य पानी के लिये भी तरसना पड़ रहा है।

जिला मुख्यालय से पाँच से सात किमी दूर के इस गाँव में यदि बुरे हालात हो तो इससे अन्दाजा लगाया जा सकता है कि ग्रामीण क्षेत्र में प्रशासन की मॉनीटरिंग की क्या स्थिति है। समीपस्थ ग्राम मोहनपुरा सहित आसपास के क्षेत्रों में ग्रामीणों को कभी भी पीने के पानी के लिये मशक्कत करना पड़ रहा है। कुएँ में पानी है लेकिन पीने की योजना फेल है। टंकियों को भरे को बरसों हो गए हैं ऐसे में इस क्षेत्र के कई गाँव में टंकियाँ दयनीय स्थिति में पहुँचती जा रही है।
 

क्यों है बन्द योजनाएँ


दरअसल ग्रामीण क्षेत्र में विभाग द्वारा कोई ध्यान ही नहीं दिया जा रहा है। इस वजह से योजनाएँ पूरी तरह से बन्द पड़ी हुई हैं। विभाग द्वारा तिरला विकासखण्ड के इन भीतरी ग्रामों में कभी भी व्यवस्था का जायजा ही नहीं लिया जाता है। पंचायत क्षेत्र में एक बड़ा कुआँ बनाकर उससे स्वच्छ पानी लेने की यूनिट तैयार की गई थी।

उल्लेखनीय है कि इन आदिवासी क्षेत्रों में पानी में प्रति लीटर 1.5 पीपीएम यानी पार्ट पर मिलियन से अधिक फ्लोराइड पाया जाता है। इस अधिक फ्लोराइड के कारण विकलांगता आदि की स्थिति बनती है। इस बारे में शासन द्वारा करोड़ों रुपए की लागत से योजना बनाई गई लेकिन योजनाओं की दशा बहुत बुरी है। योजना बन्द होने का प्रमुख कारण है निगरानी नहीं होना।

 

महिलाओं ने कहा नहीं मिलता पानी


गुरुवार को फ्लोराइडमुक्ति के लिये बनाए गए कुएँ के ठीक दस कदम दूरी से महिलाएँ व बच्ची पानी भर रही थी। इन महिलाओं ने कहा कि फ्लोराइडमुक्त पानी तो दूर की बात है। हमें सामान्य पानी भी नहीं मिल पाता है। बच्चियों को स्कूल छोड़कर पानी भरना पड़ता है। किसी भी मौसम में हमें पानी नहीं मिल पाता। पूरे साल यही परेशानी है और गर्मी में तो हम अपनी परेशानी से बेहद परेशान हैं।

 

 

 

 

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