जिले के चिकित्सकों को बताए गए फ्लोरोसिस के लक्षण और कारण

Submitted by RuralWater on Sun, 09/13/2015 - 11:15

.धार। राष्ट्रीय फ्लोरोसिस निवारण एवं नियंत्रण कार्यक्रम के अन्तर्गत पहली बार शासकीय चिकित्सकों को इस बात का प्रशिक्षण दिया गया है कि वे जिले में फ्लोरोसिस की बीमारी के लक्षण वाले लोगों को किस तरह से चिन्हित करें। अब तक कभी भी चिकित्सकों को इस तरह का कोई प्रशिक्षण नहीं दिया गया।

इस वजह से परेशानी यह हो रही थी कि मरीजों को कई बार हड्डी के रोग से पीड़ित होना मानकर उपचार हो जाता था। हालांकि विशेषज्ञ चिकित्सक इस बारे में पहले से ही ध्यान रख रहे हैं।

शासन की मंशा थी कि फ्लोराइड जैसे मामले में सरकारी स्तर पर चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिया जाये। इसी के तहत यहाँ कार्यक्रम हुआ। इस एक दिवसीय कार्यशाला में बड़ी संख्या में चिकित्सक शामिल हुए। बीमारी के लक्षण और रोकथाम तथा पानी की जाँच के सम्बन्ध में प्रशिक्षण डॉ. एलके शर्मा उज्जैन ने दिया।

इस मौके पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के केमिस्ट एनआर पवित्रन ने पानी की जाँच और फ्लोराइड की मात्रा आदि के बारे में जानकारी दी। किस तरह से साफ दिखने वाला पानी फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने के कारण लोगों के लिये नुकसानदायक हो सकता है। इस मौके पर महिला स्वास्थ्य शिविरों के सम्बन्ध में भी चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिया गया।

फ्लोरोसिस से लड़ने के लिये प्रशिक्षण

प्रशिक्षण के दौरान डॉ. ओपी तिवारी ओआयसी, सीएमएचओ डॉ. आरसी पनिका, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. वंदना खरे, डॉ. जेपी ठाकुर, डॉ. केसी शुक्ला, डॉ. एलडी फुंकवाल, डॉ. प्रमोद खरे, डॉ. अशोक कुमार पटेल, विजय भार्गव आदि उपस्थित थे।

 

हड्डी रोग का ही हो जाता था इलाज


सबसे बड़ी बात यह है कि फ्लोरोसिस को लेकर चिकित्सकों को जानकारी नहीं होने पर कई बार मरीजों को केवल हड्डी रोग के चिकित्सक द्वारा ही इलाज दे दिया जाता था। चिकित्सक इसकी गहराई में नहीं जा पाते थे। चिकित्सकों के लिये यह कठिन था कि किस तरह से इलाज हो। खासकर फ्लोराइड के मामले में दिक्कतें बनी रहती थी। जिले के 12 विकासखण्ड फ्लोराइड की इस गम्भीर बीमारी से पीड़ित हैं।
 

अब टेक्निशियन की जरूरत


सबसे बड़ी बात यह है कि अब टेक्निशियन की आवश्यकता है। इसके बिना चिकित्सकों का प्रशिक्षण भी काम का नहीं है। चिकित्सकों को प्रशिक्षण देने के लिये तो काम हो चुका है। लेकिन जब तक सही मायने में जाँच नहीं होती है तब तक कोई काम नहीं है। इस तरह की परेशानियों से बचने के लिये जरूरी है कि विभिन्न स्तरों पर ध्यान दिया जाये। तकनीकी कर्मचारी को केवल नियुक्त भर करना है। मशीनें उपलब्ध हैं।
 

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