भूकम्प अवरोधक घर निर्माण पुस्तिका : मिट्टी

Submitted by Hindi on Fri, 09/25/2015 - 15:04
Printer Friendly, PDF & Email
Source
भूकम्प अवरोधक घर निर्माण पुस्तिका, लोक विज्ञान संस्थान, अप्रैल 2007

परिशिष्ट - I
मकान बनाने के लिए मिट्टी एक ऐसा साधन है जो देश के हर कोने में उपलब्ध है और जिसे ग्रामीण लोग सदियों से इस्तेमाल करते आ रहे हैं। यह मकान बनाने का एक सस्ता और आसान साधन है।

मिट्टी आम तौर पर तीन प्रकार की होती हैः

रेतीली मिट्टी: यह ऐसी मिट्टी होती है जिसमें रेत की मात्रा 80 प्रतिशत से ज्यादा होती है। यह मकान बनाने के लिए अन-उपयुक्त है परन्तु चिकनी मिट्टी के साथ मिश्रण तैयार करके इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

चिकनी मिट्टी: इस मिट्टी में रेत की मात्रा नहीं के बराबर होती है। नमी रहने पर इसे आसानी से गूँथा व दबाया जा सकता है। परन्तु सूख जाने पर यह मिट्टी सिकुड़ जाती है। इसमें दरारें पड़ जाती हैं और काफी सख्त भी हो जाती है। इसके इन्हीं अवगुणों की वजह से, ठोस व मजबूत होने के बावजूद यह मकान बनाने के लिए अन-उपयुक्त है। मगर इसमें रेत इसे भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

मिश्रित या दोमट मिट्टी:- यह रेत और चिकनी मिट्टी का मिश्रण होता है। मकान बनाने के लिए इस तरह की मिट्टी एकदम उपयुक्त होती है।

मिट्टी की पहचान


क्योंकि हर तरह की मिट्टी मकान बनाने के लिए उपयुक्त नहीं होती है इसलिए यह जानना बहुत जरूरी है कि उपलब्ध मिट्टी किस प्रकार की है। इसके पहचान के लिए निम्न प्रयोग किए जा सकते हैं:

1. हाथ धोकर परखना: मिट्टी में पानी डालकर हाथ से मिलाइए जिससे हाथ पूरी तरह से गंदा हो जाए। फिर साफ पानी से हाथ धोइए।

मिट्टी(अ) यदि आपके हाथ जल्दी साफ हो जाएँ तो इसका अर्थ है कि यह रेतिली मिट्टी है।
(ब) यदि आपके हाथों को साबुन का एहसास हो रहा हो और वे फिसल रहे हों तो आपके हाथ में चिकनी मिट्टी है।
(स) यदि हाथ में रेत के कणों के साथ-साथ फिसलती चिकनी मिट्टी भी महसूस हो रही हो तो इसका अर्थ है कि यह दोमट मिट्टी है और मकान बनाने के लिए उपयुक्त है।

2. बिस्कुट टेस्टः मिट्टी में पानी डालकर उसका करीब 3 सूत मोटा, ढाई ईंच लम्बा और 2 ईंच चौड़ा एक बिस्कुट बनाइए और धूप में अच्छी तर सुखा लीजिए।

बिस्कुट टेस्ट(अ) यदि बिस्कुट उठाते वक्त या हल्का बल लगाने पर ही वह टूट जाए तो मिट्टी रेतली है।
(ब) परन्तु यदि उसे तोड़ने में थोड़ा बल लगता है तो मकान बनाने के लिए यह मिट्टी उपयुक्त होगी।
(स) यदि बिस्कुट ऊपर से कड़क हो गई हो और तोड़ने में ज्यादा बल लगाना पड़े तो यह चिकनी मिट्टी होगी।

अनुभव के बाद, बिस्कुट के टूटने की आवाज से ही मिट्टी की पहचान की जा सकती है।

3. सिगार टेस्ट: मुट्ठी भर मिट्टी में थोड़ा पानी डालकर अच्छी तरह गूँथ लें। फिर इससे अँगूठे और उंगली की मदद से सिगार अथवा सिगरेट जितनी मोटाई का लोई बनाने की कोशिश करें।

सिगार टेस्ट(अ) अगर मिट्टी का लोई बनाना मुश्किल है या लोई बार-बार टूट जाती है तो यह रेतीली मिट्टी है।

(ब) यदि लोई दो या तीन ईंच की बनकर टूटती है तो इसमें रेत और चिकनी मिट्टी लगभग सही अनुपात में हैं और घर बनाने के लिए उपयुक्त है।
(स) यदि लोई छः ईंच या उससे भी लम्बी बन सकती है तो इसका मतलब इसमें चिकनी मिट्टी की मात्रा ज्यादा है। इसे थोड़ी रेत मिलाने के बाद ही इस्तेमाल किया जा सकता है।

मिट्टी का गारा


गारे में इस्तेमाल के लिए सबसे पहले उपरोक्त विधि से उपयुक्त मिट्टी का चयन कर लें। इस मिट्टी के बड़े ढेलों को अच्छी तरह तोड़ लें। फिर इसे अच्छी तरह छन्नी से छान लें ताकि कंकड़, रोड़ी इत्यादि छन कर बाहर हो जाए।

गारा यदि किसी गड्ढे में बनाएँ तो उत्तम होगा। गड्ढा करीब डेढ़ से दो फिट गहरा होना चाहिए। इसकी लम्बाई तथा चौड़ाई गारे की मात्रा और जगह की उपलब्धता पर निर्भर करेगी। गड्ढा बनाने का फायदा यह है कि इसमें मिट्टी को अच्छी तरह से गूँथा जा सकता है और पानी भी बेकार नहीं होगा।

मिट्टी का गारा

स्टेबिलाइजर


स्टेबिलाइजर वह वस्तु है जिसका मिट्टी में मिश्रण से अन-उपयुक्त मिट्टी को उपयुक्त बनाया जा सकता है। यह मिट्टी को ज्यादा मजबूत एवं अधिक स्थाई बनाता है। रेत, चिकनी मिट्टी, गोबर, भूसा, चूना, सीमेन्ट इत्यादि को स्टेबिलाइजर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

स्टेबिलाइजरउदाहरण के लिए रेतीली मिट्टी यदि चिकनी मिट्टी (या चिकनी मिट्टी में रेतिली मिट्टी) मिला दी जाए तो इसे चिनाई के लिए उपयुक्त बनाया जा सकता है। मिश्रित मिट्टी में भी यदि चूना या सीमेन्ट मिलाया जाए तो यह और मजबूत बन सकती है। भूसे को भी स्टेबिलाइजर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

गारे में, स्टेबिलाइजर के रूप में, भूसा मिलाया जा सकता है। नमी के कारण भूसा सड़ने लगता है और महीन रेशों में बदल जाता है। यह रेशे मिट्टी के कणों को एक दूसरे के साथ इस तरह बाँधते हैं जैसे कि गारे में सिलाई की गई हो। इसको ‘रीइनफोर्समेन्ट इफेक्ट’ भी कहते हैं। इससे गारे में मजबूती आती है और सूखने पर दरारें नहीं पड़ती।

गारे में करीब 5 प्रतिशत चूना मिलाने से गारे की स्थिरता एवं मजबूती बढ़ जाती है। आज भी चूने को ग्रामीण क्षेत्रों में इस्तेमाल किया जाता है। इसके मिश्रण से, बारिश के दिनों में मिट्टी पानी या नमी को जल्दी नहीं सोख पाती है। इससे दीवालें अधिक टिकाऊ होती है। चूँकि चूना जमने में समय लेता है, इससे मकान के निर्माण में वक्त ज्यादा लगता है। चूने की जगह पर या उसके साथ यदि थोड़ा सीमेन्ट भी मिलाया जाए (यदि सिर्फ सीमेंट मिलाया जाए तो 5 प्रतिशत और यदि चूने के साथ सीमेन्ट मिलाया जाए तो चूना 3 प्रतिशत और सीमेन्ट 2 प्रतिशत), तो यह मिश्रण सेट हो जाता है और निर्माण में समय कम लगता है।

चिनाई के लिए मजबूत गारा


छनी हुई मिट्टी को गड्ढे में डालकर, इसकी स्थिरता और मजबूती के लिए इसमें थोड़ा सा स्टेबिलाइजर जैसे चूना या भूसा, मिला लें। फिर इसमें पानी डालें और दोनों पैरों से इसे अच्छी तरह गूँथ लें। गूँथने की प्रक्रिया से मिट्टी के छोटे से छोटे कण भी पानी में अच्छी तरह घुल जाएँगे। इससे मिट्टी का एक अच्छा पेस्ट बन जाएगा और गारे को चिकनाई और मजबूती प्रदान करेगा। परन्तु इसके लिए थोड़े धैर्य की जरूरत है। यदि गारा दो तीन घन्टे में ही बनाकर इस्तेमाल किया जाता है तो इसमें बहुत सारे ऐसे मिट्टी के ढेले मिलेंगे जो अन्दर से सूखे होंगे। इससे चिनाई कमजोर पड़ जाती है। इसलिए गारे को दो-तीन दिन तक भिगों कर रोज गूँथते रहें ताकि एक पेस्ट नुमा, मजबूत गारा तैयार हो सके।

मिट्टी में स्टेबिलाइजर डालकर उसकी ईंट भी बनाई जा सकती है। इस ईंट को छाए में ही सुखा कर इस्तेमाल करना चाहिए। दीवाल की मोटाई के हिसाब से ईंट के बनाने के लिए अलग-अलग नाप के फरमे बनाये जा सकते हैं। इतना अवश्य ध्यान रखना चाहिए कि फरमे का नीचे का नाम ऊपर के नाम से करीब 2 सूत ज्यादा हो जिससे फरमा आसानी से ऊपर की दिशा में निकाला जा सके।

गारा(विस्तृत जानकारी के लिए परिशिष्ट 2 देखें) इस तरह की ईंट से बनाई गई दीवाल काफी मजबूत होती है और इसमें दरारें भी कम पड़ती है।

मिट्टी के मकानों को यथासम्भव पानी से बचाना चाहिए। छत को दीवाल से ढाई से तीन फिट बाहर की तरफ निकाल कर दीवालों को पानी से बचाया जा सकता है। हर बरसात के बाद, दीवाल की लिपाई कर देनी चाहिए।

ऊपर लिखी गई तरकीबें नई नहीं है। सदियों से इसी तरह से मिट्टी का उपयोग किया गया है। उत्तरकाशी में आए भूकम्प में 100 से 150 वर्ष पुराने मिट्टी के मकानों में कोई क्षति नहीं होना, इसके जीते-जागते उदाहरण हैं। इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि मिट्टी की चिनाई कमजोर होती है। परन्तु यह सच है कि इसके इस्तेमाल से पहले इसे अच्छी तरह से परख लेना चाहिए।

Add new comment

This question is for testing whether or not you are a human visitor and to prevent automated spam submissions.

2 + 2 =
Solve this simple math problem and enter the result. E.g. for 1+3, enter 4.

More From Author

Related Articles (Topic wise)

Related Articles (District wise)

About the author

Latest