प्रेस वार्ता कर बतायी अधिनियम की विफलता

Submitted by Hindi on Thu, 10/29/2015 - 13:02
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प्रेस वार्ताउत्तराखण्ड वन पंचायत संघर्ष मोर्चा, कल्पवृक्ष फाउंडेशन के संयुक्त तत्व-धान में वनाधिकार अधिनियम 2006 को लेकर देहरादून स्थित कमला पैलेस में एक प्रेस वार्ता की गयी। प्रेस वार्ता को नदी बचाओ अभियान के संयोजन सुरेश भाई, उत्तराखण्ड वन पंचायत संघर्ष मोर्चा के संयोजक तरूणजोशी, कल्पवृक्ष फाउंडेशन की नीना पाठक, मधु सरीन, सिद्धार्थ नेगी, नैनीताल के आमडण्डा खता से आये ग्रामीण मोहन थपलियाल ने सम्बोधित किया।

सुरेश भाई ने कहा कि राज्य में वनाधिकार अधिनियम 2006 के क्रियान्वयन के लिए जो ग्राम एवं जनपद व ब्लाॅक स्तर पर जो ग्राम वन समितियाँ बनी है वह सिर्फ कागजी खानापूर्ति के लिए है और निष्क्रिय है। तरुण जोशी का आरोप है कि जिस विभाग को इस कानून के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी है उसे कानून की ना तो जानकारी है और ना ही विभाग कानून का प्रचार-प्रसार कर रहा है। इस दौरान पिछले दो दिन से चल रही कार्यशाला के अनुभव को बताते हुए उन्होंने पत्रकारों को बताया कि वे अब गाँव-गाँव जाकर संगठन निर्माण करेंगे तथा ग्राम वनाधिकार समितियों को जागरूक करने के लिए लोगों के साथ शिक्षण-प्रशिक्षण का कार्य करेंगे। कहा कि वनाधिकार अधिनियम 2006 के कानून को क्रियान्वय करने के लिए राज्य व जिला स्तर पर दबाव समूहों का निर्माण करेंगे।

इस दौरान राज्य के आठ जनपदों के वन ग्रामों से आये लोगों ने कहा कि उन्हें थोड़ा-बहुत वन कानून 2006 की जानकारी है, मगर राज्य सरकार व संबधित विभाग कानून को क्रियान्यवन करने की बात लोगों के साथ नहीं कर रहा है। कहा कि ब्लाॅक व जिला स्तर पर बनी वन अधिनियम 2006 के क्रियान्वयन के लिए कमेटियाँ अपनी बैठकें तक नहीं करती है। बताया गया कि राज्य में अब तक 20 हजार लोगों ने व्यक्तिगत दावा फार्म भरे हैं और 500 गाँवों ने सामूहिक दावा फार्म भरे हैं। लेकिन अब तक एक भी दावा फार्म पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है। कॉर्बेट रिजर्व पार्क रामनगर से आये मोहम्मद सफी ने बताया कि उनके गाँव को ‘वन विभाग’ ने चार माह पूर्व उजाड़ दिया है। नैनीताल के आमडाण्डा खाते से आये मोहन थपलियाल ने कहा कि उन्होंने मानव अधिकार आयोग, जनजाति आयोग, राज्य सरकार को अपने गाँव बावत कई बार आधारभूत सुविधाओं हेतु ज्ञापन देकर मांग की है। मगर उनकी मांग पर अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि उनके गाँवों को अभी तक वोट देने तक का अधिकार नहीं है।
 

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प्रेम पेशे से स्वतंत्र पत्रकार और जुझारु व्यक्ति हैं, विभिन्न संस्थानों और संगठनों के साथ काम करते हुए बहुत से जमीनी अनुभवों से रूबरू हुए। उन्होंने बहुत सी उपलब्धियाँ हासिल की।

 

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