रिसर्च : सुखना झील, चंडीगढ़ मे जल की कमी-एक समस्या

Submitted by Hindi on Mon, 11/30/2015 - 11:36
Source
राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान, रुड़की, पाँचवी राष्ट्रीय जल संगोष्ठी, 19-20 नवम्बर, 2015

सारांश


सुखना झील केन्द्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ की एक महत्त्वपूर्ण झील है। यह निचले हिमालय की शिवालिक रेंज की तलहटी में स्थित एक मानव निर्मित झील है। पर्यटन, मनोरंजन और मत्स्य पालन के लिये झील में पर्याप्त पानी की उपलब्धता होना, झील के लिये अतिआवश्यक है। लेकिन विगत कुछ वर्षों में झील में पानी की उपलब्धता घट रही है। झील 2012 की गर्मियों के दौरान लगभग पूरी तरह से सूख गयी थी।

झील के जलविज्ञान सम्बन्धी व्यवहार को समझने के लिये 2011-13 के दौरान विभिन्न जलविज्ञानिय अनुसंधान किए गए। वर्ष 2012-13 एक सामान्य वर्षा वर्ष था, जबकि वर्ष 2011-12 के दौरान वर्षा सामान्य से कम थी। अनुसंधान से प्राप्त परिणामों से यह देखा गया है कि जलग्रहण क्षेत्र से झील में आ रहा भूजल लगभग नगण्य है। वाष्पीकरण की दरों में विभिन्न वर्षों में तथा विभिन्न महीनों में काफी भिन्नता है। वर्ष 2011-13 के दौरान उच्चतम वाष्पीकरण दर (8.86 मि.मी. प्रतिदिन) जून, 2012 में तथा न्यूनतम दर (2.15 मि.मी. प्रतिदिन) जनवरी, 2013 के माह में देखा गया। 1958-2012 की अवधि का दीर्घकालिक वर्षा डेटा यह दर्शाता है कि चंडीगढ़ में बारिश में कोई निश्चित पैटर्न नहीं है। हालाँकि चंडीगढ़ क्षेत्र के लिये वर्षा में कोई गिरावट का रुख नहीं है।

जल सन्तुलन विश्लेषण (water balance analysis) से यह पाया गया कि एक साल में (जुलाई से जून तक) झील में लगभग 200-700 हेक्टेयर मीटर पानी आता है। इसमें जलग्रहण क्षेत्र से सतही अपवाह द्वारा योगदान लगभग 80 से 500 हेक्टेयर मीटर होता है जबकि झील में पड़ने वाली प्रत्यक्ष वर्षा का योगदान लगभग 120 से 200 हेक्टेयर मीटर होता है। सामान्य से कम वर्षा के वर्षों के दौरान झील में प्रत्यक्ष वर्षा से प्राप्त योगदान, जलग्रहण क्षेत्र से प्राप्त अपवाह की तुलना में अधिक हो सकता है। मॉनसून के मौसम (जुलाई-सितम्बर) के दौरान, झील लगभग 200-500 हेक्टेयर मीटर पानी प्राप्त करती है। झील से विभिन्न कारणों द्वारा बाहर जाने वाले पानी की मात्रा एक वर्ष में लगभग 300-450 हेक्टेयर मीटर होती है। वाष्पीकरण द्वारा घाटा लगभग 300 हेक्टेयर मीटर तक हो सकता है तथा रिसाव से बाहर जाने वाले जल की मात्रा 175 हेक्टेयर मीटर तक हो सकती है। यह भी देखा गया है कि जब मॉनसून के बाद झील के पानी का स्तर ऊँचाइयों पर (1160-1163 फीट के बीच) होता है तब रिसाव की दर ज्यादा होती है। 1156-1157 फीट स्तर के नीचे रिसाव लगभग नगण्य हो जाता है।

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