रिसर्च : गुड़गाँव (हरियाणा) में भूजल का कृत्रिम पुनःपूरण-एक वस्तुस्थिति अध्ययन

Submitted by Hindi on Sat, 12/05/2015 - 11:32
Source
राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान, रुड़की, पाँचवीं राष्ट्रीय जल संगोष्ठी, 19-20 नवम्बर, 2015

सारांशः


हरियाणा राज्य के गुड़गाँव जिले में भूजल विकास का स्तर 209 प्रतिशत है तथा जिले के चारों प्रखण्ड भूजल के अतिउगाही/अतिउपभोगी की श्रेणी में आ गया है। पिछले 20 वर्षों के दौरान जिले के भूजल स्तर में ह्रास की दर 0.77 मीटर प्रतिवर्ष से 1.20 मीटर प्रतिवर्ष तक रही है। इसके अतिरिक्त गुड़गाँव जिले का ऊपरी/छिछले भूजल स्तर संभूर क्षारीय प्रकृति (जलयोजन विभव 7.25 से 8.13) का है। गुड़गाँव जिले में भूजल की उपभोग निवल पुनर्भरण से अधिक होने के कारण भूजल के स्तर में लगातार गिरावट को रोकने हेतु जिले में भूजल पुनःपूरण योजना का क्रियान्वयन अनिवार्य हो गया है। इस हेतु गुड़गाँव जिले के सोहना प्रखण्ड में भूजल के कृत्रिम पुनःपूरण हेतु एक विस्तृत परियोजना आख्या (डी.पी.आर.) तैयार की गई। इस आख्या में सोहना प्रखण्ड के 12 गाँवों के समीप कुल 8.17 वर्ग सहस्त्रमीटर अपवाह क्षेत्रों के 14 कार्यस्थल, वर्षाजल से 16.10 लाख घनमीटर उपलब्ध वार्षिक जल का संवर्धन भूजल पुनर्भरण करने हेतु चयन किये गये। योजना में कुल 1121.00 मीटर लम्बाई के 14 रोक बाँध, 35 मीटर से 50 मीटर गहरे अन्तःक्षेपण कूप तथा 13 प्रेक्षण कूपों का प्रावधान किया गया है। योजना की कुल लागत रू. 1206 लाख आँकी गई है।

Abstract:
The situation of ground water development in Gurgaon district of Haryana state is 209% and all the four blocks have come under over-exploited categories. During the last 20 years, the rate of declination of ground water table in the district is in the range of 0.77 to 1.2 m/yr. In addition to above, Shallow ground water table aquifer in Grugaon district is alkaline in nature (pH 7.25 to 8.13). Due to more withdrawal of ground water than net recharge in Gurgaon district, it becomes mandatory to implement the ground water recharge schemes in the district in order to stop the continuous declination of ground water level. Consequently, a detailed project report (DPR) for artificial recharge to ground water in Sohna Block of Gurgaon district has been prepared. In this report, 14 sites near 12 villages of Sohna Block having a total catchment area of 8.17 km2 were identified for ground water recharge to augment 1.61 MCM annual available water from rainfall. 14 Nos. check dams of a total length of 1121.00 m, 219 nos. injection wells of 35.00m to 50.00 depth and 13 nos. observation wells have been provided in the scheme. A total cost of Rs. 1206.00 lacs for the proposed scheme has been estimated.

1.0 भारत में भूजल के स्थिति की एक झलक


पृथ्वी के अधिकांश भू-भाग के जलापूर्ति का मुख्य स्रोत वर्षा के विभिन्न प्रारूप हैं। वर्षा होने की शुरूआत में उसके कुछ भाग वायुमण्डल द्वारा अनुग्रहित कर लिये जाते हैं। अनुग्रहण (इन्टरसेप्टिंग) से अधिक मात्रा में वर्षा होने पर वर्षाजल धरती पर पहुँचता है और अन्तःस्यंदन (इन्फिल्ट्रेशन) व अपवाह आरम्भ हो जाता हैै। अन्तःस्यंदन भौमजल भण्डारण का मुख्य स्रोत है। भारत की औसत वार्षिक वर्षा लगभग 1170 मिलीमीटर है जिससे प्राप्त कुल जल का लगभग 47 प्रतिशत ही नदियों में प्रवाह के रूप में तब्दील होता है तथा कुल मात्रा का 28 प्रतिशत जल ही उपयोगी परिगणित किया गया है। उक्त 28 प्रतिशत उपयोगी जल में 61 प्रतिशत सतही तथा 39 प्रतिशत भौमजल का अंश रहता है। कुल उपलब्ध उपयोगी जल (28 प्रतिशत) में से 2025 तक जल की माँग लगभग 26 प्रतिशत हो जायेगी तथा यही माँग वर्ष 2050 में लगभग 36 प्रतिशत होने का पूर्वानुमान किया गया है। उक्त से स्पष्ट है कि अगले 35 वर्ष में जल की माँग उपलब्ध जल की तुलना में काफी अधिक हो जायेगी। वर्तमान में कुल भौमजल का लगभग 55 प्रतिशत प्रयोग में लाया जाता है तथा भारत में समग्र भौमजल विकास स्तर 58 प्रतिशत है।

भारत में कुल जल का लगभग 83 प्रतिशत जल सिंचाई हेतु प्रयोग में लाया जाता है जिसमें कुछ भूभाग में अधिकांश हिस्सा भूजल का होता है जिस कारण देश के कई क्षेत्र अतिभूजलदोहन/अधिशोषित क्षेत्र में आ गये हैं। विभिन्न राज्य के भूजल विभाग तथा केन्द्रीय भूजल बोर्ड द्वारा पूरे देश में कुल 5723 आकलन इकाइयों के किये गये जायजों के मुताबिक 4078 (71 प्रतिशत), 550(10 प्रतिशत), 226 (4 प्रतिशत), तथा 839(15 प्रतिशत) इकाइयाँ क्रमशः सुरक्षित, अर्द्वक्रांतिक, क्रांतिक तथा अधिशोशित क्षेत्र हैं। उक्त 29 प्रतिशत अर्द्वक्रांतिक, क्रांतिक तथा अधिशोषित इकाइयों में लगभग 54 प्रतिशत इकाइयाँ मात्र छः राज्य यथा गुजरात, हरियाणा, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान व तमिलनाडु के हैं। अतः इन क्षेत्रों में भूजल के पुनःपूरण हेतु आवश्यक उपाय किया जाना अति आवश्यक हो गया है।

2.0 हरियाणा के गुड़गाँव जिले के सोहना प्रखण्ड में कृत्रिम भूजल पुनःपूरण सम्बन्धी वस्तुस्थिति पर किये अध्ययन का लेखा-जोखा


2.1 परिचयः


हरियाणा के गुड़गाँव जिले में भूजल विकास का स्तर 209 प्रतिशत है तथा जिले के चारों विकास प्रखण्डों में भूजल विकास उपलब्ध भूजल की तुलना में कहीं अधिक हुआ है जिसका मुख्य कारण सिंचाई, घरेलू तथा औद्योगिक खपत हेतु आवश्यक जलापूर्ति के लिये भूजल पर ही निर्भर होना है। तालिका-1 में गुड़गाँव जिले के प्रखण्डवार भूजल सम्बन्धी विवरण अंकित हैं जिससे स्पष्ट है कि यहाँ भूजल के पुनःपूरण की योजना का क्रियान्वन कितना आवश्यक है। गुड़गाँव जिले में दीर्घकालिक भूजल ह्रासदर 0.10 मी. से 0.70 मी. प्रतिवर्ष अवलोकित की गई है जबकि गुड़गाँव शहर में यही दर 1.06 मी. प्रतिवर्ष दर्ज की गई है। प्रस्तुत लेख में सोहना प्रखण्ड में भूजल पुनःपूरण योजना हेतु विस्तृत परियोजना आख्या तैयार करने के कार्य को उल्लेखित किया गया है।

तालिका-1 गुड़गाँव जिले के जल संसाधन तथा विकास विभव का आकलन

2.2 सर्वेक्षण व अन्वेषण कार्य


सर्वप्रथम कृत्रिम भूजल पुनःपूरण सम्बन्धी विस्तृत योजना आख्या तैयार करने हेतु स्थलीय सर्वेक्षण किया गया। उक्त कार्य हेतु अरावली पहाड़ी के तलहटी में उपलब्ध बंजर अनुपोयगी राजकीय भूभाग का चयन किया गया जिसमें 12 गाँव के समीप कुल 14 उपयुक्त कार्यस्थलों को चयनित कर अध्ययन कार्य आरम्भ किया गया। उक्त सभी कार्यस्थलों का स्थलाकृतिक व पुरातत्वीय, भूजल स्तर व गुणवत्ता, मृदा/शैल अभिलाक्षणिक व भूगर्भीय, निर्माण सामग्री उपलब्धता, आदि सर्वेक्षण व अन्वेशणात्मक कार्य किये गये।

जलविज्ञान सम्बन्धी अध्ययनअवलोकित औसत वार्षिक वर्षाजल का सतही प्रवाह का आकलन प्रचलित विभिन्न विधियों यथा विन्नि विधि, बार्लो विधि, स्ट्रेंज तालिका विधि, इंग्लेव डीसूजा सूत्र, लेसी सूत्र, मानक वक्र संख्या विधि, खोसला विधि आदि के आधार पर औसत 21.6 प्रतिशत आँकलित किया गया।

2.4 कृत्रिम भूजल पुनःपूरक हेतु आवश्यक संरचनाओं का परिकल्पन


उक्त योजना में वर्षाजल को अरावली पहाड़ी से आनेवाले अपवाह जल को 1 से 2 मीटर ऊँचे रोक बाँध का निर्माण कर आवश्यकतानुसार अन्तःक्षेपण कूप के माध्यम से भूजल पुनःपूरण करने का अभिकल्पन किया गया। रोक बाँध व अन्तःक्षेपण कूप का प्रारूपिक आलेख क्रमशः चित्र 1 एवं 2 में दिखाये गये हैं। तालिका-3 में कुल 14 कार्यस्थलों में प्रस्तावित रोक बाँध की लम्बाई व अन्तःक्षेपण कूपों की संख्या को दर्शाया गया है।

चित्र 1 रोकबांध का प्रारुपिक परिच्छेद
चित्र 2- प्रारुपिक अन्तःक्षेपण कूप का विस्तृत रेखाचित्र
तालिका-3 सोहना प्रखण्ड में प्रस्तावित रोक बांध व अन्तःक्षेपण कूपों का विविरण

2.5 लागत आँकलन


उक्त योजना में गुड़गाँव जिले में प्रचलित दरों के आधार पर विभिन्न कार्यों का दर विश्लेषण किया गया। उक्त योजना में आवश्यक संरचनाओं के दरों के साथ-साथ आवश्यक अन्य व्यय यथा पहुँच मार्ग का निर्माण, वृक्षारोपण, संचार सुविधा आदि का प्रावधान करते हुए वर्ष 2013-14 के आधार पर योजना की कुल लागत रू. 12.64 करोड़ आँकलित की गई।

2.6 वित्तीय मूल्यांकन


उक्त योजना का केन्द्रीय भूजल बोर्ड, जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मन्त्रालय भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा निर्गत कृत्रिम भूजल पुनःपूरण हस्त पुस्तिका 2007 के अनुच्छेद 9.2 में निहित प्रावधानों के अंतर्गत सामाजिक व आर्थिक तथा वित्तीय मूल्यांकन किया गया। उक्त हस्त पुस्तिका में निहित प्रावधानों का समावेश करते हुए योजना से होने वाले वित्तीय लाभ को आंका गया तथा योजना का समग्र लाभ-लागत अनुपात लगभग 0.25 आँकलित किया गया।

3 उपसंहार


हालाँकि कोई भी योजना एक से अधिक लाभ-लागत अनुपात का आकर्षक होता है। चूँकि भूजल पुनःपूरण से सम्बन्धित अधिकांश योजनाओं पर व्यय सरकार द्वारा सामाजिक आवश्यकतायें/बाध्यता के अन्तर्गत किये जाते हैं, अतः इन योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु लाभ-लागत अनुपात के सापेक्ष अधिक महत्व देते हुए प्राथमिकता दी जानी चाहिये।

सन्दर्भ
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सिंचाई अनुसंधान संस्थान, रुड़की, सिंचाई परिकल्प संगठन, रुड़की

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