गंगा सफाई का छेड़ा अभियान

Submitted by Hindi on Thu, 12/10/2015 - 13:26
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यथावत, 1-15 दिसम्बर 2015

हरिद्वार के युवाओं की इस टोली ने गंगा सफाई के लिये जो अभियान चलाया है, उसका प्रभाव गहरा होगा। ऐसी कोशिश देश के अन्य भागों में भी हो रही हैं। यदि गंगा सफाई का अभियान बड़े जन-अभियान का स्वरूप धारण कर ले तो निर्मल गंगा कोई असंभव कार्य नहीं रह जाएगा।

उत्तराखंड गंगा सफाई‘गंगा मैली है।’ हरिद्वार में युवाओं की एक टोली इस सच को बदल देने के लिये बेताब है। वह टोली हफ्ते में एक दिन गंगा की साफ-सफाई में अपना श्रम और समय लगाती है। इसके लिये बुधवार का दिन निश्चित है। वे लोग अब तक कई टन कचरा गंगा नदी से बाहर निकाल चुके हैं।

नरेन्द्र मोदी सरकार ने गंगा नदी को स्वच्छ और अविरल बनाने का जनता से वादा किया है। सरकारी काम तो अपनी गति से चल रहा है, लेकिन इस दिशा में निजी प्रयास भी हो रहे हैं। अब तो यह नहीं कहा जा सकता है कि सरकार की गंगा सफाई की योजना जन-अभियान का स्वरूप धारण कर चुकी है, लेकिन जागरूकता तेजी से बढ़ी है। कई स्थानों से सार्थक पहल की खबर आई है। हरिद्वार की इस युवा टोली के प्रयास को इसी अर्थों में देखा-समझा जाना चाहिए। दरअसल, हिंदू धर्म के मूल्यों के संरक्षण और रूढ़िवादिता के खिलाफ हरिद्वार के कुछ युवाओं ने ‘माँ गंगा आह्वान अखाड़ा’ गठित किया है।

लेकिन, इससे जुड़े युवाओं ने हरिद्वार में गंगा को साफ करने का जिम्मा अपने कंधों पर उठा लिया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक हरिद्वार में ही गंगा में प्रति दिन 24 हजार ट्रीलियन मलीय अपशिष्ट के साथ-साथ 20 टन जीवांश और 37.5 टन ठोस अपशिष्ट बहाया जा रहा है। हरकी-पौड़ी के निकट सुभाषघाट पर गंगा में गिरने वाला नाला प्रतिदिन 2.4 मिलियन लीटर कचरा बहा लाता है। हरिद्वार के दो बड़े नाले ललताराव और ज्वालापुर से 140 लाख लीटर से अधिक मलजल सीधे गंगा में डाले जाते हैं। ऐसी स्थिति में माँ गंगा आह्वान अखाड़ा से जुड़े युवाओं की कोशिश यकीनन सराहनीय है।

स्मरण रहे कि पूर्व प्रधानमन्त्री राजीव गाँधी ने गंगा नदी को साफ करने के लिये बड़ी योजना शुरू की थी। वह करीब हजार करोड़ रुपए की योजना थी। दुर्भाग्य से उसका चवन्नी भर असर नहीं हुआ। प्रधानमन्त्री पद की जिम्मेदारी लेने से पहले ही नरेन्द्र मोदी गंगा के प्रति अपनी गहरी आस्था जाहिर कर चुके थे। अब वे देश का नेतृत्व कर रहे हैं। उनकी सरकार ने नदी विकास और गंगा सफाई नामक नया मन्त्रालय गठित किया है। बोल-चाल की भाषा में यह गंगा मन्त्रालय है। गंगा के निर्मल और अविरल होने को लेकर जिसके अपने दावे हैं। वे दावे कितने सही हैं या गलत, यह तो आने वाले दिनों में जाहिर होगा। पर, सच्चाई यही है कि प्रधानमन्त्री मोदी की गंगा के प्रति दिलचस्पी ने बड़ी संख्या में लोगों को जागरूक कर दिया है। प्रधानमन्त्री ने स्वयं बनारस के अस्सी घाट पर सफाई के कार्य में हिस्सा लिया। इसका असर हरिद्वार में दिख रहा है।

हरिद्वार में युवाओं का गंगा सफाई से खुद को जोड़ना एक सकारात्मक कदम है। ‘माँ गंगा आह्वान अखाड़ा’ के चालीस-पचास युवक सप्ताह में एक दिन गंगा नदी की सफाई के लिये श्रमदान करते हैं। प्रत्येक बुधवार को वे अपने-अपने घरों से निकलते हैं और गंगा की सफाई में लग जाते हैं। इन युवाओं को हरिद्वार के पंतद्वीप घाट, हरकी-पौड़ी जैसे महत्त्वपूर्ण घाटों पर सफाई करते कोई भी देख सकता है। पिछले छह माह से वे इस मुहिम में जुटे हैं। संगठन से जुड़े एक युवक ने बताया कि ‘‘पहले दिन दो ट्रैक्टर ठोस अपशिष्ट को गंगा नदी से निकाला गया था। 60 से ज्यादा बड़ी मूर्तियों को भी जेसीबी की मदद से हटाया जा चुका है।’’ युवाओं के इस प्रयास को देखकर धीरे-धीरे इनका कुनबा विस्तार ले रहा है। अखाड़े को शुरू करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता जेपी बडोनी कहते हैं, ‘‘पहले दिन हमारे साथ हरिद्वार के ही कॉलेज और स्कूलों के कुछ छात्र थे। हम लोगों ने उस दिन करीब दो ट्रैक्टर अपशिष्ट निकाले। हमारे काम को देखकर पंतद्वीप के कुछ व्यापारी और हरिद्वार के कुछ आध्यात्मिक संस्थाएं भी इससे जुड़ी हैं।’’ वे आगे कहते हैं, ‘‘हमें सबसे ज्यादा खुशी तो तब हुई जब पहले बुधवार को हमारे काम को देखकर दिल्ली से हरिद्वार घूमने आए युवा भी हमसे जुड़ गए। अब वे नियमित हो गए हैं।’’

तो क्या नरेन्द्र मोदी का गंगा सफाई अभियान जन अभियान का स्वरूप धारण कर रहा है? इस पर टीम के एक युवक ने कहा, ‘देखिए क्या होता है?’ इन दिनों देश में ‘नमामि गंगे’ और उत्तराखण्ड में स्पर्श गंगा, निर्मलगंगा जैसे न जाने कितनी योजनाएं बन रही हैं और नारे लग रहे हैं! कई संस्थाओं का गठन भी गंगा के नाम पर हुआ है। मसलन, गंगा रक्षा मंच, गंगा सेवा समिति आदि। इन संगठनों के जरिए तरह-तरह के प्रयास हो रहे हैं, लेकिन गंगा जल पर इसका सीधा कोई असर दिखाई नहीं पड़ रहा है। गंगा का जल अभी आचमन करने के लायक नहीं हो पाया है।

‘माँ गंगा आह्वान अखाड़ा’ के वे युवा दावा करते हैं कि उन्होंने किसी से प्ररेणा नहीं ली है, बल्कि वे गंगा के वर्तमान स्वरूप से आहत थे। जब नहीं रहा गया तो खुद खड़े हो गए। अखाड़े के सदस्य और गंगा सफाई में अहम भूमिका निभा रहे अजय शर्मा बताते हैं, ‘‘गंगा की सफाई पर विभिन्न संस्थाओं और सरकारों के वादे सुनकर थक चुका हूँ। सरकार को छोड़ भी दें तो गंगा के नाम पर जितने लोग अपनी दुकान चला रहे हैं, यदि उनमें से दो-तीन ने भी गम्भीर प्रयास किए होते तो आज गंगा कुछ बेहतर स्थिति में होती।’’ अजय आगे कहते हैं, ‘‘उनकी कथनी और करनी देख ली। इसलिये अब हमलोग स्वयं जहाँ तक हो सकता है, गंगा नदी को साफ करने में जुटे हैं।’’ प्रत्येक बुधवार को अखाड़े के कुछ युवा सफाई के काम में जुट जाते हैं तो कुछ युवा घाटों पर घूम-घूमकर लोगों को जागरूक करते हैं।

दरअसल, गंगा स्नान करने आने वाले अधिकतर श्रद्धालु बड़ी मात्रा में पूजन सामग्री लेकर आते हैं। वे युवा उन श्रद्धालुओं को पूजन सामग्री गंगा में विसर्जित करने की जगह जमीन में दबाने के लिये प्रेरित करते हैं। दिल्ली में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे सुधांशु मिश्रा कहते हैं, ‘‘अधिकतर लोग हमारे आग्रह को मान लेते हैं। इक्का-दुक्का लोग ही ऐसे होते हैं जो हमारी बात नहीं मानते। उन्हें प्रशासन या फिर दंड का भय दिखाना पड़ता है।’’ सुधांशु भी इस टोली से जुड़े हैं। हरिद्वार के व्यापारी और इन युवाओं के काम में हाथ बंटा रहे दिनेश जोशी कहते हैं, ‘‘गंगा के नाम पर अरबों रुपए खर्च हो रहे हैं, लेकिन कहीं कोई असर नहीं दिख रहा है। हाँ, इन युवाओं ने उम्मीद जगाई है।’’ इसी दौरान सामाजिक कार्यकर्ता कमलेश कांत से बात हुई तो उन्होंने कहा, ‘‘गंगा को हम सभी पूजते हैं। इसलिये हमारी जिम्मेदारी और जवाबदेही बनती है कि गंगा नदी को साफ रखें। हमारी गंगा पर बढ़ते शहरीकरण का दबाव है। लेकिन, हम अपनी जिम्मेदारी निभाने का प्रयास कर रहे हैं।’’

हरिद्वार के युवाओं की इस टोली ने गंगा सफाई के लिये जो अभियान चलाया है, उसका प्रभाव गहरा होगा। ऐसी कोशिश देश के अन्य भागों में भी हो रही हैं। यदि गंगा सफाई का अभियान बड़े जनअभियान का स्वरूप धारण कर ले तो निर्मल गंगा कोई असम्भव कार्य नहीं रह जाएगा।

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