पर्यावरण पर एक दिवसीय कुरान कांफ्रेंस

Submitted by RuralWater on Sat, 12/12/2015 - 15:29
तिथि : 13 दिसम्बर, 2015
दिन : रविवार
स्थान: केदारनाथ साहनी सभागार, डा. एस पी मुखर्जी सिविक सेंटर, मिंटो रोड (नजदीक ज़ाकिर हुसैन कॉलेज), दिल्ली


जलवायु परिवर्तन रोकने की मौजूदा वैश्विक जद्दोजहद के बीच यह जान लेना निस्सन्देह, अच्छा ही होगा कि पर्यावरण को लेकर कुरान का मज़हबी फरमान क्या हैं? कार्यक्रम की जानकारी देते हुए कुलपति डॉ. मुहम्मद असलम खान परवेज ने कहा कि मज़हब का नाजायज इस्तेमाल, समाज में मज़हब के बारे में ग़लतफहमी का एक प्रमुख स्रोत बन गया है। वक्त की माँग है कि दुनिया के लोग अपने आचरण में सुधार करें और प्रकृति के नियमों का पालन करें। हम सभी अपने-अपने मज़हब की तालीम को भले ही पूरी तरह न मानते हों, किन्तु हम सभी किसी-न-किसी मजहब का होने का दावा तो करते ही हैं। अतः मज़हबी होने के नाते भी हम सभी को ज़रूर याद कर लेना चाहिए कि दुनिया का कोई मज़हब ऐसा नहीं, जो कुदरत के खिलाफ जाने का फरमान जारी करता हो अथवा इजाज़त देता हो।

असहिष्णुता, अनैतिकता, हिंसा, भ्रष्टाचार और प्रदूषण काफी हद तक कुदरत व कुदरत की नियामतों के खिलाफ उठ रहे कदम हैं। इस बारे में इस्लाम के पवित्र ग्रंथ कुरान की शिक्षा क्या है, जानने का एक खास मौका है चौथी कुरान कांफ्रेस।

विषय


बढ़ते भ्रष्टाचार, घटते सदाचार, बढ़ती गैर कुदरती सोच और जीवनशैली की रफ्तार और इसके खतरे की चिन्ता आज सभी को है, हिन्दू को भी मुसलमां को भी। सभी जानते हैं कि कुदरत का कहर मजहबी भेदभाव से दूर है। इसी के मद्देनज़र, चौथी एक दिवसीय सालाना कुरान कांफ्रेंस के आयोजकों ने जरूरी समझा कि रविवार को दिल्ली में हो रही बैठक का विषय रखा जाये- ‘कुरान और हमारा पर्यावरण’।

वक्ता


पर्यावरण विषय विशेष पर बतौर खास वक्ता मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी, हैदराबाद के कुलपति डॉ. मुहम्मद असलम खान परवेज के अलावा तीन अन्य प्रख्यात वक्ताओं को सुनने का मौका होगा :
खालिद सैफुल्लाह रहमानी,
तारिक अब्दुल्ला और
असलम अब्दुल्ला।

अपील


जलवायु परिवर्तन रोकने की मौजूदा वैश्विक जद्दोजहद के बीच यह जान लेना निस्सन्देह, अच्छा ही होगा कि पर्यावरण को लेकर कुरान का मज़हबी फरमान क्या हैं? कार्यक्रम की जानकारी देते हुए कुलपति डॉ. मुहम्मद असलम खान परवेज ने कहा कि मज़हब का नाजायज इस्तेमाल, समाज में मज़हब के बारे में ग़लतफहमी का एक प्रमुख स्रोत बन गया है। वक्त की माँग है कि दुनिया के लोग अपने आचरण में सुधार करें और प्रकृति के नियमों का पालन करें।

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