पानी का उचित प्रबन्धन बहुत जरूरी है - डॉ. भीष्म कुमार

Submitted by Hindi on Mon, 12/21/2015 - 14:41
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जल चेतना तकनीकी पत्रिका, सितम्बर 2011

.राष्ट्रीय भाषा, हिन्दी में एक जल सम्बन्धी तकनीकी पत्रिका प्रकाशित करने का ख्याल आपको कैसे आया?
विगत दशक में पानी की उपलब्धता एवं जल गुणवत्ता से सम्बन्धित समस्याएँ काफी बढ़ गई हैं जिसका मुख्य कारण आम जनता में जल से सम्बन्धित जानकारियों की कमी है जिससे पानी का अनावश्यक प्रयोग करना एवं अनजाने में ही पानी की गुणवत्ता को खराब करना तथा अनुपयोगी पानी का इस्तेमाल करने पर विभिन्न प्रकार की बीमारियों का शिकार होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

‘जल चेतना’ पत्रिका के माध्यम से जनता को उपरोक्त के सम्बन्ध में आवश्यक जानकारी देने हेतु संस्थान में हिन्दी में एक जल सम्बन्धी तकनीकी पत्रिका प्रकाशित करने का निर्णय लिया।

इस पत्रिका का क्या प्रारूप होगा और इसकी पृष्ठभूमि एवं अन्तराल कैसे रखा जाएगा?
इस पत्रिका में जल से सम्बन्धित कुछ लेख विशेषज्ञों से आमंत्रित किये जाएँगे एवं कुछ लेख पानी की अलग-अलग समस्याओं एवं उनके समाधान से सम्बन्धित अनुभवों के आधार पर लेखकों से प्राप्त होने तथा उनका चयन करने पर शामिल किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त पानी से सम्बन्धित कुछ रोजमर्रा की जिन्दगी में उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी तथा कुछ जानकारी नियमित स्तम्भों द्वारा हर अंक में प्रसारित की जाएगी। अभी इस पत्रिका का अन्तराल साल में दो अंकों का फिर इसे त्रैमासिक करते हुए मासिक बनाने का प्रावधान है।

हिन्दी में तकनीकी लेखों का चयन करना कितना मुश्किल रहा?
हिन्दी में जल से सम्बन्धित लेखों को लिखने वालों की देश में कमी नहीं है हमने जब सी.एस.आई.आर. की काफी मशहूर मासिक हिन्दी पत्रिका, विज्ञान प्रगति में जल चेतना पत्रिका के प्रकाशन के सम्बन्ध में सूचना प्रकाशित की तो हमें जल से सम्बन्धित विभिन्न पहलुओं पर काफी लेख प्राप्त हुए जिनमें से हमें चयन करने में किसी विशेष मुश्किल का सामना नहीं करना पड़ा क्योंकि लेखकों द्वारा प्रेषित ज्यादातर लेख काफी उपयोगी थे।

फिर भी हम प्राप्त सभी लेखों को शामिल नहीं कर सके क्योंकि जल चेतना पत्रिका की सीमाओं के कारण हमें कुछ अच्छे लेखों को भी रोकना पड़ा जिनको हम आने वाले अंक में शामिल करेंगे।

गाँवों में अशिक्षित लोगों द्वारा अपनाई गई जल संरक्षण एवं खेती की तकनीकें वैज्ञानिकों द्वारा सुझाई तकनीकों से कैसे भिन्न हैं?
भारतवर्ष में वैज्ञानिक तकनीकों का प्रचार-प्रसार बहुत कम होने के कारण गाँवों में कम शिक्षित लोग वही पुरानी तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं जिससे जल संरक्षण एवं खेती की पैदावारी, किये गए प्रयासों के अनुकूल नहीं होती है।

गाँव में अभी भी अधिकतर खेतों में पानी फ्लडिंग तकनीक से दिया जाता है जिससे पानी काफी अधिक मात्रा में वाष्पित हो जाता है जबकि वैज्ञानिकों स्प्रिंक्लिंग अथवा ड्रिप विधि द्वारा सिंचाई का सुझाव देते हैं। इससे न केवल हमारा जल संरक्षण होता है बल्कि फसलों की पैदावार भी बढ़ती है।

क्या आप इस बात से सहमत हैं कि तीसरा विश्व युद्ध जल के लिये होना सम्भावित है?
आपको ज्ञात ही होगा कि विगत कुछ वर्षो में जो दक्षिण पूर्व एशिया में युद्ध हुए हैं वह अघोषित रूप से पेट्रोलियम के लिये लड़े गए हैं। लेकिन समय के साथ-साथ अन्तरराष्ट्रीय एवं अन्तरराज्यीय स्तर पर पानी के बँटवारे को लेकर विभिन्न देशों में कलह चल रही है।

इसलिये इस बात में कोई दो राय नहीं है कि आने वाले समय में पानी को लेकर भी कुछ देश आपस में युद्ध कर सकते हैं। लेकिन पानी को लेकर तीसरा विश्व युद्ध होगा इसकी सम्भावना कम ही है क्योंकि प्रकृति द्वारा पानी हमें प्रतिवर्ष मिलने वाला रिन्यूएबिल सोर्स है।

आपकी राय में भारत में जल संसाधनों की मौजूदा समय में क्या स्थिति है?
मौजूदा समय में भारत में उपलब्ध सतही जल एवं भूजल की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है लेकिन हमारा वाटर मैनेजमेंट अधिक बेहतर न होने के कारण एवं आम नागरिकों को पानी से सम्बन्धित आवश्यक जानकारी न होने के कारण चारों तरफ पानी की कमी महसूस की जा रही है।

भारतवर्ष में पानी स्टेट सब्जेक्ट है इसलिये प्रत्येक राज्य अपने-अपने ढंग से पानी का प्रबन्धन करता है। जो कि काफी प्रभावी नहीं है इसके अतिरिक्त पानी के प्रबन्धन के लिये देश में आवश्यक राजनैतिक इच्छा शक्ति का भी अभाव है जिसके चलते पानी का आवश्यक डिस्ट्रीब्यूशन एवं स्थानान्तरण नहीं हो पा रहा है।

क्या आने वाली पीढ़ी के लिये यह स्थिति इतनी भयावह हो जागी कि लोगों को पीने का पानी भी नसीब नहीं होगा?
यदि देश में पानी के प्रबन्धन की यही स्थिति रही तो आने वाले समय में सूखाग्रस्त क्षेत्रों में पानी की स्थिति काफी भयावह हो सकती है। शहरों में तो आजकल बोतलबन्द पानी मिलने के कारण पीने के पानी का समाधान हो जाता है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति ठीक नहीं रहती।

पानी की उपलब्धता के अलावा आजकल सबसे बड़ी समस्या पानी की गिरती हुई गुणवत्ता की है एवं कुछ क्षेत्रों में पानी में विषैले पदार्थ पाये जाने के कारण पानी उपलब्ध होते हुए भी वह पीने के लिये अनुपयोगी है। ऐसे में पानी की गुणवत्ता एवं उसके उचित प्रबन्धन की अत्यन्त आवश्यकता है।

इस पत्रिका के द्वारा आप जनता को क्या सन्देश देना चाहते हैं?
जल चेतना पत्रिका के माध्यम से हम जनता को यह सन्देश देना चाहते हैं कि वह पानी का दुरुपयोग न करें तथा पानी की गुणवत्ता को अपने स्तर से खराब न करें। आपको विदित ही है कि हमारी नदियाँ व अन्य जलस्रोत प्रदूषित होते जा रहे हैं जिसके लिये किसी-न-किसी रूप में जनता एवं प्रशासन दोषी हैं। इसके अलावा जनता को हम यह भी बताना चाहेंगे कि पानी द्वारा विभिन्न प्रकार के रोग फैलते हैं इसके लिये वह पीने के पानी का उपयोग करने से पहले उसकी जाँच अवश्य कर लें अथवा करवा लें।

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