गाँवों में सफाई से हो शुरुआत

Submitted by Hindi on Sat, 12/26/2015 - 12:32
Source
हस्तक्षेप, 16-30 जून 2015

गाँवों में विधायक, सांसद निधि से शौचालय बनाने और स्कूली स्तर पर जागरुकता कार्यक्रम चला जाना जरूरी है

आम जन तक मीडिया की लोकप्रियता है इसे देखते हुए स्वच्छ भारत मिशन में प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को भी खुले में शौच की प्रथा को समाप्त किये जाने के प्रयास में भागीदार बनाया जाना चाहिए, एवं ग्राम पंचायतों को गोद लिये जाने के लिये मीडिया को प्रोत्साहित किया जाना उचित होगा। अधिकतर राज्यों में स्वच्छ भारत मिशन का क्रियान्वयन ग्राम विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा किया जा रहा है...

स्वच्छ भारत मिशन के लिये गठित मुख्यमंत्रियों के उप समूह की बैठक में शामिल होने पहुँचे उत्तराखण्ड के वन पर्यावरण एवं खेल मंत्री दिनेश अग्रवाल ने मिशन के सन्दर्भ बिन्दुओं के सम्बन्ध में उत्तराखण्ड के हित में सुझााव रखते हुए कहा कि स्वच्छ भारत मिशन एक प्रशंसनीय पहल है, जिसमें सम्पूर्ण भारत की शुचिता को महत्त्व दिया गया है। इस सन्दर्भ में स्पष्ट दिशा निर्देश न होने से कारपोरेट घरानों की भागीदारी अत्यन्त कम रही है। क्षेत्रों में ठोस-तरल अपशिष्ट प्रबन्धन हेतु अपेक्षाकृत बड़ी मात्रा में धन की आवश्यकता होती है क्योंकि इसके अन्तर्गत 0-150 परिवारों के लिये सात लाख रुपए, 150-300 परिवारों के लिये 12 लाख रुपए, 300 से 500 परिवारों के लिये 15 लाख तथा 500 से अधिक परिवारों वाली ग्राम पंचायतों के लिये 20 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2015-16 के लिये वार्षिक कार्य योजना में 244 करोड़ रुपए वार्षिक परिव्यय के सापेक्ष 92.28 करोड़ रुपए केवल ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबन्धन के कार्यों के लिये राज्य की कुल 7969 ग्राम पंचायतों में से केवल 1041 ग्राम पंचायतों में होने वाले कार्यों पर व्यय किया जाना है।

दूसरी ओर ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबन्धन की तकनीक मुख्यत: भौगोलिक परिस्थितियों पर निर्भर करती है, अत: जिस प्रकार की तकनीक केरल राज्य में संचालित की जा सकती है वह उत्तराखण्ड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में लागू नहीं की जा सकती। इसलिये अपशिष्ट प्रबन्धन के लिये किसी विशिष्ट एजेंसी को राज्य की परिस्थितियों के अनुरूप काम करने के लिये जिम्मेदारी दी जा सकती है। वहीं शौचालयों के निर्माण के लिये भी बहुस्तरीय सेवादायी संस्थाओं का सहयोग लिया जा सकता है, विधायक निधि एवं सांसद निधि हेतु आवंटित धनराशि में से एक निश्चित धनराशि शौचालय निर्माण के लिये निर्धारित की जाये तो स्वच्छता कार्यक्रम में तेजी लाई जा सकती है। ग्राम पंचायतों को दी जाने वाली विभिन्न अनुदान राशियों को स्वच्छता सम्बन्धी कार्यों के साथ जोड़ा जाये। भारत स्वच्छता मिशन में गैर सरकारी संगठनों, आश्रम तथा ट्रस्टों को भी ग्राम पंचायतों में संचालित की जानी वाली स्वच्छता गतिविधियों के लिये ग्राम पंचायतों को गोद लेने के लिये प्रोत्साहित किया जा सकता है।

आम जन तक मीडिया की लोकप्रियता है इसे देखते हुए स्वच्छ भारत मिशन में प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को भी खुले में शौच की प्रथा को समाप्त किये जाने के प्रयास में भागीदार बनाया जाना चाहिए, एवं ग्राम पंचायतों को गोद लिये जाने के लिये मीडिया को प्रोत्साहित किया जाना उचित होगा। अधिकतर राज्यों में स्वच्छ भारत मिशन का क्रियान्वयन ग्राम विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा किया जा रहा है, उत्तराखण्ड राज्य में जहाँ 8 से 10 ग्राम पंचायतों पर मात्र एक ही ग्राम पंचायत विकास अधिकारी तैनात है, यह योजना के तीव्र क्रियान्वयन में बाधक है।

कैबिनेट मंत्री अग्रवाल ने कहा कि प्रत्येक ग्राम पंचायत के लिये एक अधिकारी को नियुक्त किये जाने से योजना के आशा के अनुरूप परिणाम आएँगे और इन अधिकारी व कर्मिकों के पर्यवेक्षण का दायित्त्व सम्बन्धित उपजिलाधिकारी एवं जिलाधिकारी का होना चाहिए। विशेष रूप से उत्तराखण्ड राज्य में स्वच्छता के लिये जन समुदाय की भागीदारी से ही समाज के सभी वर्गों को जागरूक किया जा सकता है। जिसमें नेहरू युवा केन्द्र, महिला मंगल दल, महिला स्वयं सहायता समूह, राष्ट्रीय सेवा योजना, राष्ट्रीय कैडेट कोर, स्काउट एवं गाइड, रेडक्रास, लॉयंस एवं रोटरी क्लब, रेजिडेंट वेलफेयर सोसायटी, व्यापार संघ एवं निजी स्कूलों आदि को व्यक्तिगत प्रेरणादायी संस्थाओं के रूप में खुले में शौच की आदत में बदलाव के लिये लोगों को प्रेरित करने की ज़िम्मेदारी दी जा सकती है। जिसमें स्कूल और छात्र महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। क्योंकि स्कूली छात्रों में बचपन से ही स्वच्छता की भावना का विकास इस मिशन को अधिक सुदृढ़ बनाएगा। वहीं स्कूलों में छात्रों को स्वच्छता के प्रति प्रेरित करने के लिये स्कूलों में पेंटिंग, निबन्ध, लेखन, भाषण, वाद-विवाद जैसी विभिन्न प्रतियोगिताएँ आयोजित कराई जाएँ जिससे कि ये बच्चे बड़े होने तक स्वच्छता के महत्त्व को आत्मसात कर सकें।

श्री अग्रवाल ने स्वच्छता के क्षेत्र में राज्य की विशेष उपलब्धियों को भी बैठक में रखा। उन्होंने कहा कि बेस लाइन सर्वे को इंटरनेशनल मैनेजमेंट इनफॉरमेशन सिस्टम (आइएमआइएस) पर आॅनलाइन एंट्री करने वाला देश का प्रथम राज्य तथा निर्मित शौचालयों के फोटोग्राफ को आइएमआइएस वेबसाइट पर डालने वाले राज्यों में उत्तराखण्ड का तीसरा स्थान रहा है।

‘‘स्वच्छ भारत मिशन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिये कारपोरेट घरानों के सामाजिक उत्तरदायित्त्व को बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। सम्पूर्ण ग्राम पंचायतों को लक्ष्य के रूप में ऐसे कारपोरेट घरानों को आवंटित किया जा सकता है।’’... दिनेश अग्रवाल, मंत्री, वन पर्यावरण एवं खेल, उत्तराखण्ड सरकार

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