पानी को बनाया जा रहा है मुनाफे का साधन

Submitted by RuralWater on Thu, 03/10/2016 - 16:15
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पानी प्रकृति से सबको नि:शुल्क मिलता है, तो कुछ लोगों का ही पानी क्यों? इस पर समाज का पहला हक़ है तो सरकार क्यों कुछ लोगों को पानी पर मुनाफा कमाने की लूट करने की छूट दे रखी है। पानी पर समाज का हक है और रहेगा। वक्ताओं ने कहा कि पानी हवा की तरह सबको मिलना ही चाहिए, कोई पानी बेचकर मुनाफा न कमाए, पानी को कैसे साफ रखे और बचाए, इसे रखने के बर्तनों, कुएँ, तालाब, बावड़ी, झीलों, नदियों की रखवाली अपने ही हाथ में रखे। रेमन मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित डॉ. सन्दीप पांडे ने कहा कि जल जीवन का आधार है, लेकिन अब एक साजिश के तहत इसे चन्द लोगों के मुनाफे का साधन बनाया जा रहा है। चुनी हुई सरकारें नीतियाँ बनाकर लोगों का हक छिन रही है। वे वाराणसी में ‘जन आन्दोलनों के राष्ट्रीय समन्वय’ (एनएपीएम) तथा ‘मनरेगा मजदूर यूनियन’ के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित जल अधिकार सम्मेलन को सम्बोधित कर रहे थे। सिंचाई डाक बंगला में आयोजित जल अधिकार सम्मेलन का शुभारम्भ श्रीमती वीणा शर्मा ग्राम प्रधान मेहंदीगंज, सीमा पटेल जिला पंचायत सदस्य, रेड ब्रिगेड की उषा विश्वकर्मा आदि ने दीप प्रज्जवलित कर किया।

प्रो पांडे ने सरकार की नीतियों का खुलासा करते हुए कहा कि इसका जीता-जागता सबूत इस इलाके के लोगों के सामने कोका कोला का बाटलिंग प्लांट है। आज इस कम्पनी के जल दोहन से पूरा आराजी लाइन ब्लॉक के लोगों का जीवन खतरे में पड़ गया है। इसका पुख्ता सबूत है केन्द्रीय भूजल प्राधिकरण द्वारा इस ब्लॉक अधिक दोहित क्षेत्र घोषित करना है।

इस सवाल को लेकर वर्षों से लगातार इस कम्पनी की जल लूट और प्रदूषण के खिलाफ लड़ रहे हैं कि यह बन्द हो पर राज्य और देश कि सरकारें इस लूट में शामिल होकर इसे निरन्तर जारी रखे हुए हैं। हम सबको कोक पेप्सी जैसी देशी-विदेशी पानी लूटने वाली कम्पनियों और सरकारों को एकता बनाकर उखाड़ फेकना होगा।

उन्होंने कहा कि पानी ने कई सभ्यताएँ आबाद की है पर पानी की कमी ने कई-कई गाँवों-शहरों की सभ्यताओं को उजाड़ भी दिया है। एक समय था जब समाज खुद अपने पीने, सींचने यानी जीने के लिये पानी की व्यवस्था करता था, राज्य और सरकार पर निर्भर नहीं रहता था।

.सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए समाजवादी जन परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री अफलातून देसाई ने कहा कि अपने जीवन गाँवों खेतों, शहरों के लिये पानी चाहिए। पानी की जरूरत हमेशा से रही है पर अब कम्पनियों को पानी की जगह मुनाफे की प्यास बढ़ती जा रही है। हम विज्ञान और तकनीक का गलत उपयोग करना सीख गए हैं या अपने लोग लालच के तहत मुनाफे के लिये कर रहे हैं। और प्रकृति का विनाश कर रहे हैं पहले पानी लूटा गया अब पानी के संचय के नाम पर योजनाएँ बनाकर पैसा खर्च करने के दिखावे के नाम पर लूटा जाएगा यह पानी का भ्रष्टाचार है।

सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अरविन्द मूर्ति ने कहा कि देश की राजनीति का स्तर बहुत नीचे गिर गया है। इस पानी का स्तर भी नीचे गिर रहा है इसलिये पानी का स्तर ऊपर लाने के लिये अच्छी राजनीति करनी होगी इस देश मे पानी का एक अर्थ इज्जत है हमारी आँखों का पानी गिर गया है। हमें पानी को खरीदना और बेचना सामाजिक और कानूनी अपराध घोषित करना चाहिए।

सम्मेलन के प्रारम्भ में प्रेरणा कला मंच की सांस्कृतिक टीम द्वारा मुंशी प्रेमचन्द की रचना 'पानी की कहानी' पर आधारित नाटक के माध्यम से पानी के महत्त्व को दर्शाया गया। कलाकारों ने अपने अभिनय से लोगों को आ​कर्षित किया।

.सम्मेलन में इस बात की चर्चा की गई कि जल ही जीवन है, पर अब जल का ही जीवन खतरे में है, तो इंसान के जीवन का क्या होगा? बिना पानी भी मौतें होंगी और दूषित पानी से भी मौते होंगी, पानी प्रकृति से सबको नि:शुल्क मिलता है, तो कुछ लोगों का ही पानी क्यों? इस पर समाज का पहला हक़ है तो सरकार क्यों कुछ लोगों को पानी पर मुनाफा कमाने की लूट करने की छूट दे रखी है। पानी पर समाज का हक है और रहेगा। वक्ताओं ने कहा कि पानी हवा की तरह सबको मिलना ही चाहिए, कोई पानी बेचकर मुनाफा न कमाए, पानी को कैसे साफ रखे और बचाए, इसे रखने के बर्तनों, कुएँ, तालाब, बावड़ी, झीलों, नदियों की रखवाली अपने ही हाथ में रखे।

सम्मेलन को मुख्य रूप से चंचल मुखर्जी, वल्लभाचार्य पाण्डेय, एकता सिंह, रवि शेखर, जागृति राही, उषा विश्वकर्मा, सुरेश राठोर, अजय पटेल, पूजा, उर्मिला विश्वकर्मा, चिन्तामणी सेठ, विनोद, हीरालाल, अनूप श्रमिक, शकुन्तला, प्रेम, गीता, आरती, नगीना, रीता, प्रेमा, ममता, धनंजय त्रिपाठी, विनय सिंह, दीपक मौर्या, मनोज सिंह, योगिराज पटेल, प्रभाकर सिंह, प्रेम सोनकर आदि लोग शामिल रहे। सम्मेलन का संचालन महेन्द्र कुमार ने तथा धन्यवाद ज्ञापन मेंहदीगंज की ग्राम प्रधान वीणा शर्मा ने किया।

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