हरित ईंधन योजना: पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में एक नई रोशनी

Submitted by Hindi on Mon, 03/21/2016 - 13:36
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योजना, जून 1995

प्रदूषण आज के सभ्य समाज की एक गम्भीर पर्यावरणीय समस्या है। इसे रोकने के लिए हर सम्भव उपाय किया जाना चाहिए, जिससे इसके खतरों से बचा जा सके तथा हम सभी के अस्तित्व की रक्षा हो सके। सीसा-रहित पेट्रोल के प्रयोग को आवश्यक बनाया जाना महानगरों में वाहनों द्वारा होने वाले प्रदूषणों को कम करने की दिशा में सरकार द्वारा उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह केन्द्र सरकार के पर्यावरण और वन मंत्रालय की एक नई कार्य योजना है, जिसके तहत देश के चार महानगरों दिल्ली, बम्बई, कलकत्ता तथा मद्रास में 1 अप्रैल, 1995 से सभी नई कारों में ईंधन के रूप में ‘हरित ईंधन’ (ग्रीन फ्यूल स्कीम) अर्थात् सीसा-रहित पेट्रोल (अनलेडेड-पेट्रोल) का प्रयोग आवश्यक बना दिया गया है, जिससे इन महानगरों में वाहनों द्वारा होने वाला प्रदूषण कम किया जा सकेगा। कारों को सीसा-रहित पेट्रोल के अन्तर्गत लाने के बाद पेट्रोल से चलने वाले सभी दो पहिए, तीन पहिए तथा चार पहिए वाले अन्य वाहन इसके अंतर्गत लाए जाएंगे। यह कार्य योजना-सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशानुसार लागू की जा रही है।

उद्देश्य


हरित ईंधन योजना महानगरों में सीसा-रहित पेट्रोल नेटवर्क का उपयोग करेगी तथा वायु की गुणवत्ता में वास्तविक अन्तर उत्पन्न करने पर अपना ध्यान केन्द्रित करेगी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य महानगरों में वाहनों के धुएं से होने वाले प्रदूषण को रोकना है। वाहनों में सीसा-रहित पेट्रोल के प्रयोग से जहरीली गैस जैसे- कार्बन मोनोआक्साइड, कार्बन डाइआॅक्साइड तथा विषाक्त धातुएं जैसे- सीसा आदि की अधिक मात्रा वायुमंडल में नहीं मिलने पायेगी, जिससे महानगरों में वायु-प्रदूषण कम किया जा सकेगा। इस योजना को प्रभावी ढंग से कार्यान्वित करने के लिए इस पर अमल न करने वालों को दंड देने का भी प्रावधान किया गया है। ऐसे वाहन मालिक जो हरित ईंधन का प्रयोग नहीं करेंगे उन पर जुर्माना किया जाएगा।

सीसा-रहित पेट्रोल क्या है?


ईंधन के रूप में प्रयोग किया जाने वाला पेट्रल जिसमें सीसा की मात्रा नहीं होती सीसा-रहित पेट्रोल कहलाता है। सीसा के अलावा इसमें बेंजीन तथा अन्य एरोमैटिक रसायन होते हैं। इस पेट्रोल के इस्तेमाल के लिए वाहनों में एक विशेष तरह के यंत्र ‘उत्प्रेरक परिवर्तक’ (कैटालिटिक कनवर्टर) लगाया जाना आवश्यक है। उत्प्रेरकीय परिवर्तन लगी मोटर-गाड़ियों में सीसा-रहित पेट्रल के इस्तेमाल से प्रदूषण रूपी काला धुआँ वायुमंडल में नहीं मिलने पाएगा।

उत्प्रेरकीय परिवर्तक किसे कहते हैं?


यह मधुमक्खी के छत्ते के आकार का एक प्रदूषण नाशक यंत्र है, जिसे यदि मोटर-गाड़ियों के साइलेन्सर में फिट कर दिया जाए तो ईंधन की दहन प्रक्रिया के फलस्वरूप हानिकारक गैसों तथा धातुओं का प्रदूषण नहीं होने पाता। उत्प्रेरकीय परिवर्तक की इस शुद्धिकरण की प्रक्रिया में नोबेल धातुओं का प्रयोग किया जाता है। कनवर्टर लगे वाहन में केवल सीसा-रहित पेट्रोल का ही इस्तेमाल किया जाता है। यदि सीसा युक्त पेट्रोल का प्रयोग किया जाए तो इसमें उपस्थित सीसा उत्प्रेरकों के प्रभाव को नष्ट कर देता है, जिससे कनवर्टर में गैसों के शुद्धिकरण की प्रक्रिया नहीं होने पाती, परिणामस्वरूप प्रदूषण उत्पन्न होता है। वाहनों में इस्तेमाल के लिए सीसा रहित पेट्रल पम्पों की स्थापना की जायेगी। इनमें से 40 पेट्रल पम्प तो राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के आसपास ही होंगे। धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़ाई जाती रहेगी।

हरित ईंधन का पर्यावरण पर प्रभाव


हरित ईंधन के प्रयोग से महानगरों में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सकेगा। उत्प्रेरकीय परिवर्तक लगे वाहनों में सीसा रहित पेट्रोल की दहन प्रक्रिया के फलस्वरूप गैसों तथा रसायनों की उतनी ही मात्रा निकलेगी जिससे प्रदूषण नहीं होगा। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा पर्यावरण और वन मंत्रालय ने हरित ईंधन के प्रयोग की आवश्यकता पर बल दिया है। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक वरिष्ठ विज्ञानी का कहना है कि सीसा रहित पेट्रोल के प्रयोग से इस सदी के अन्त तक राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की वायु में 55 टन प्रतिदिन के हिसाब से मिलने वाले सीसा की मात्रा में 8 टन प्रतिदिन की कमी आयेगी। ज्ञातव्य हो कि सीसा की अधिक मात्रा से स्वास्थ्य को खतरा पैदा हो जाता है। इसके शरीर में पहुँचते ही कई तरह के रोग हो जाते हैं जिनमें फेफड़े के रोग मुख्य हैं।

हरित वाहन वर्गीकरणएक अध्ययन के अनुसार, वायु में सीसा की मात्रा यदि 4.3 मिलीग्राम प्रतिक्यूबिक मीटर हो जाए तो इससे मस्तिष्क भी प्रभावित हो सकता है। बहुत से प्रदूषण विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि सीसा-रहित पेट्रोल के दहन से बेन्जीन तथा अन्य एरोमैटिक रसायन निकलेंगे, जिससे दमा तथा कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियां भी हो सकती हैं। इसके उत्पादन में कार्बन डाइआॅक्साइड काफी मात्रा में बनती है जिससे वातावरण में गर्मी भी बढ़ेगी। इण्डियन इन्स्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलाॅजी के एक प्रोफेसर का कहना है कि उत्प्रेरकीय परिवर्तक तथा सीसा रहित पेट्रोल ही वायु प्रदूषण को कम करने का एकमात्र ही नहीं है, फिर भी इससे महानगरों में वाहनों द्वारा होने वाले वायु-प्रदूषण को कम किया ही जा सकेगा।

योजना के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाएँ


पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि हरित ईंधन योजना के क्रियान्वयन में निम्नलिखित बाधाएँ हैं:
1. उत्प्रेरकीय परिवर्तकों का अपने देश में निर्माण न होने के कारण इसे दूसरे देशों से मँगाना पड़ेगा, जिससे कारों तथा अन्य मोटर-गाड़ियों के मूल्य में 15,000 से 20,000 रुपये तक की वृद्धि होगी। मूल्यों में वृद्धि हो जाने से लोग अपनी कार का ही इस्तेमाल करना अधिक पसन्द करेंगे। ऐसे में प्रदूषण घटने के बजाय अधिक होगा। पश्चिम के जिन देशों में हरित ईंधन का प्रयोग किया जाता है वहाँ उत्प्रेरकीय परिवर्तनों को बाहर से नहीं मँगाना पड़ता, वहाँ लोग अपने वाहनों को शीघ्रता से बदल देते हैं, इससे उन देशों में प्रदूषण कम होता है।

2. दूसरे अभी तक यह निश्चित नहीं हो सका है कि परिवर्तकों का आकार क्या होगा उन्हें किन देशों से निर्यात किया जायेगा तथा कौन-कौन सी भारतीय कम्पनियां इसे लगा सकेंगी।

3. चूँकि पेट्रोल पम्पों पर सीसा-युक्त तथा सीसा रहित दोनों तरह के पेट्रोल उपलब्ध रहेंगे, इसलिए उपभोक्ताओं से प्रायः यह भूल हो सकती है कि वे सीसा रहित पेट्रोल की जगह सीसा युक्त पेट्रोल भरवा लेंगे। ऐसी दशा में नयी तथा पुरानी दोनों तरह की कारों से प्रदूषण अधिक होगा।

4. सरकार सीसा रहित पेट्रोल का दाम सीसा युक्त पेट्रोल से कम रखना चाहती है, जैसा कि पश्चिम के देशों में है। ऐसी दशा में प्रायः पुरानी कार वाले भी (बिना कन्वर्टर) के सीसा रहित पेट्रोल का प्रयोग कर लिया करेंगे, जिससे पुरानी कारें और अधिक प्रदूषण रूपी जहर उगलेंगी।

5. सरकार कहना है कि सीसा रहित पेट्रोल की प्राप्ति के लिए तेल-शोधक कारखानों (रिफाइनरियों) में ‘कैटालिटिक रिफारमर्स’ लगाए जाएंगे। इस संदर्भ में इंडियन आॅयल कारपोरेशन के एक सदस्य का कहना है कि केवल ‘कैटालिटिक रिफारमर्स’ का टाल लगा देने से ही रिफाइनरियों का आधुनिकीकरण नहीं हो जायेगा, बल्कि इसके साथ ही साथ ईंधन की त्वरित सप्लाई के लिए एक उन्नत किस्म का ‘सप्लाई सिस्टम’ भी लगाया जाना आवश्यक है। सदस्य का यह भी कहना है कि जब तक सीसा रहित पेट्रोल की व्यवस्था पूरे देश भर में नहीं की जाती, तब तक इस योजना का क्रियान्वयन सफलतापूर्वक नहीं किया जा सकता। मान लीजिए किसी को महनगरों के बाहर जाना हो तो उसे यह कहां से प्राप्त होगा?

मूल्याँकन


हरित ईंधन योजना के अन्तर्गत, सीसा-रहित पेट्रोल तथा उत्प्रेरकीय परिवर्तकों के प्रयोग से महानगरों में वाहनों के धुएं से हेने वाले प्रदूषण को कम किया जा सकेगा। शीघ्र ही हरित ईंधन का प्रयोग कारों के अलावा अन्य वाहनों में भी किया जाना चाहिए क्योंकि दुपहिया तथा तिपहिया वाहनों की संख्या बहुत अधिक है, जिससे इनसे प्रदूषण भी बहुत अधिक होता है। अभी इस योजना की 1 अप्रैल, 1995 से हुई शुरुआत में केवल चार महानगरों में आने वाली नई कारों में ही हरित ईंधान के प्रयोग को आवश्यक बनाया गया है। चार महानगरों के अलावा इस योजना को देश के अन्य नगरों में भी लागू किया जाना चाहिए, तभी वायु प्रदूषण को राष्ट्रीय स्तर पर कुछ कम किया जा सकता है, क्योंकि इन चार महानगरों के अलावा अन्य छोटे-बड़े नगर भी वाहनों के प्रदूषण से प्रभावित है।

योजना के पहले चरण की सफलता के लिए यह आवश्यक है कि हरित ईंधन (सीसा-रहित पेट्रोल) की व्यवस्था पूरे देश में की जानी चाहिए, जिससे कार मालिकों को पेट्रोल प्राप्त करने में कोई दिक्कत न हो। ऐसी भी व्यवस्था की जानी चाहिए कि उत्प्रेरकीय परिवर्तकों का निर्माण अपने ही देश में किया जा सके। इससे कारों के मूल्यों में अनावश्यक वृद्धि नहीं होगी। यदि ये यंत्र अपने देश में ही बनने लगेंगे तो लोग कारों को शीघ्रता से बदलने के लिए सोचेंगे अन्यथा मूल्य अधिक होने के कारण लोग अपनी पुरानी कारों को रिपेयर करा-कराकर ही इस्तेमाल करते रहेंगे, जिससे प्रदूषण घटने की बजाय बढ़ता रहेगा। इसके अलावा ईंधन की प्राप्ति में कोई कठिनाई न हो, इसके लिए तेल-शोधक कारखानों का आधुनिकीकरण किया जाना चाहिए।

प्रदूषण आज के सभ्य समाज की एक गम्भीर पर्यावरणीय समस्या है। इसे रोकने के लिए हर सम्भव उपाय किया जाना चाहिए, जिससे इसके खतरों से बचा जा सके तथा हम सभी के अस्तित्व की रक्षा हो सके। सीसा-रहित पेट्रोल के प्रयोग को आवश्यक बनाया जाना महानगरों में वाहनों द्वारा होने वाले प्रदूषणों को कम करने की दिशा में सरकार द्वारा उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। हरित ईंधन योजना को नई कारों के अलावा अन्य मोटर-गाड़ियों तथा महानगरों के अलावा देश के अन्य नगरों में भी लागू किए जाने की नितान्त जरूरत आवश्यकता है।

सम्पर्क
बी-63 गोविन्दपुर आवास योजना, गोविन्दपुर, इलाहाबाद-211004 (उ.प्र.)

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