भूजल रिचार्ज से दोगुना पानी खींच रहे हम

Submitted by Hindi on Tue, 03/22/2016 - 08:57
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राजस्थान पत्रिका, 22 मार्च, 2016

गाँवों में जलापूर्ति 2 ‘बिन पानी सब सून’ कहावत की जमीनी सच्चाई से आमजन से लेकर प्रशासन भले ही वाकिफ हो, लेकिन पानी सहेजने के सरारी प्रयास कागजों तक ही सिमटे हुए मालूम होते हैं। अकेले राजस्थान में सालाना वर्षा जल के रूप में 645 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी भूगर्भ पर पहुँचता है जबकि कृषि, पेयजल व औद्योगिक समेत अन्य उपयोग के लिये 1337 मिलियन क्यूबिक मीटर तक पानी दोहन किया जा रहा है। यह खुद भूजल विभाग की रिपोर्ट कह रही है। कानूनी बाध्यता के अभाव में कमोबेश हर जिले में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। इसके बावजूद न तो सरकार भूजल बचाने के लिये ठोस कदम उठा पाई है और न ही संबंधित अधिकारियों के पास कोई विशेष कार्ययोजना है। वे भूजल में गिरावट वाले इलाके को सिर्फ डार्कजोन घोषित करने तक सीमित दिखते हैं।

दनादन खोदे जा रहे हैं बोरिंग


जयपुर के भूजल स्तर में लगातार गिरावट होती जा रही है। यहाँ पिछले एक साल के भीतर 12 ब्लॉक में भूजल स्तर 2.0 से 3.60 फीसदी तक नीचे पहुँच चुका है। फिर भी प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से बोरिंग खोदने का काम धड़ल्ले से जारी है। सरकारी आँकड़ों में जहाँ बोरिंग की संख्या लगभग 650 बताई जा रही है, वहीं पूरे शहर में ये आँकड़ा 2000 को भी पार कर चुका है।

30 साल में 300 गुना बढ़ा उपयोग


जलदाय मंत्री किरण माहेश्वरी भी गिरते भूजल स्तर को लेकर कई बार चिन्ता जाहिर कर चुकी है। पिछले दिनों एक कार्यक्रम में माहेश्वरी ने ये आँकड़ा पेश कर चौंका दिया था कि 1984 के मुकाबले हम 300 गुना ज्यादा जल का उपयोग कर रहे हैं। जबकि इसके विपरीत जल बचत का आँकड़ा 20 फीसदी तक ही सिमटा हुआ है।

अधिकांश ब्लॉक में चिन्ताजनक हालात


राजस्थान कम पानी वाला प्रदेश है। यहाँ कुल 243 में से 172 ब्लॉक ऐसे हैं, जहाँ पानी के दोहन की श्रेणी काफी गम्भीर हो चुकी है। सिर्फ 25 ब्लॉक सुरक्षित श्रेणी में हैं जबकि लगभग 20 ब्लॉक कम संकटग्रस्त स्थिति में हैं। 24 ब्लॉक स्कट की स्थिति वाले हैं। यानी मरुधरा का 90 फीसदी हिस्सा पानी के संकट से जूझ रहा है। दूर-दराज के कई इलाकों में तो हालात इतने खराब हैं कि लोगों को पीने के पानी के जुगाड़ के लिये लम्बी दौड़ लगानी पड़ती है।

आँकड़ों का गणित (प्रतिशत में)

जिला

रिचार्ज के मुकाबले भूजल उपयोग

अजमेर

143.57

अलवर

179.30

बांसवाड़ा

48.52

बारां

119.87

बाड़मेर

124.01

भरतपुर

116.21

भीलवाड़ा

129.13

बीकानेर

142.66

बूँदी

100.23

चित्तौड़गढ़

140.01

चूरु

88.49

दौसा

169.97

धौलपुर

128.16

डूंगरपुर

72.41

गंगानगर

44.02

हनुमानगढ़

80.56

जयपुर

207.27

जैसलमेर

198.89

जालोर

194.41

झालावाड़

119.31

झुंझुनूं

225.72

जोधपुर

202.34

करौली

137

कोटा

91.54

नागौर

188.99

पाली

115.37

प्रतापगढ़

124.10

राजसमन्द

110.39

सवाईमाधोपुर

147.35

सीकर

125.84

सिरोही

113.01

टोंक

98.83

उदयपुर

103.30

आँकड़े केन्द्रीय भूजल विभाग की रिपोर्ट के अनुसार

 



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