प्यासों को पहले पानी दो!

Submitted by Hindi on Sat, 04/09/2016 - 10:29
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दोपहर का सामना, 07 अप्रैल, 2016

महाराष्ट्र में महायुद्ध


जल संकट तीसरा महायुद्ध पानी के लिये लड़ा जायेगा इस तरह की शापवाणी का उच्चारण कई लोगों ने किया है। वह सच होती हुई दिखाई दे रही है। महाराष्ट्र में इस महायुद्ध की चिंगारी गिर चुकी है और पानी के लिये दंगा, मारपीट शुरु होने की तस्वीर बेचैन करने वाली है। इन दिनों ‘भारत माता की जय’ की राजनीति जोर-शोर से चल रही है। कुर्सी गई तो भी चलेगा, लेकिन ‘भारत माता की जय’ बोलूँगा ही ऐसा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया यह अच्छा ही हुआ, लेकिन भारत माता के बच्चे पानी के लिये दर-दर भटक रहे हैं, तड़प रहे हैं, पानी के लिये एक-दूसरे का खून पीने तक को उतारू हो गये हैं। महाराष्ट्र के हर गाँव, घर में पीने का पानी दूँगा अन्यथा कुर्सी को लात मार दूँगा, ऐसी गर्जना की होती तो वह अधिक अच्छा होता। मराठवाड़ा के कुछ जिलों में पानी के लिये धारा 144 लागू की गई है।

मराठवाड़ा पूर्णतः रेगिस्तान में बदल गया है और लातूर, धाराशीव जैसे जिलों में 40 दिन के बाद पानी मिल रहा है। पानी की टंकी और टैंकर पर पुलिस का पहरा बिठाया गया है और पानी के कारण कानून सुव्यवस्था का सवाल खड़ा हो गया है। यह तस्वीर खतरनाक है। अन्याय के खिलाफ शस्त्र उठाकर नक्सलवाद की राह कई युवकों ने स्वीकार की। मराठवाड़ा के युवक घूँट भर पानी के लिये शस्त्र हाथ में लेकर आतंकवादी तो नहीं बनेंगे न? ऐसा हुआ तो ‘भारत माता की जय’ का कोई मतलब ही नहीं रह जायेगा। जनता सुखी तो भारत माता सुखी।

‘भारत माता की जय’ कहना अर्थात जनता की जय, लेकिन जनता के लिये घूँट भर पानी नहीं, पशु तड़पकर मर रहे हैं और खेत शमशान में तब्दील हो गये हैं। इस शमशान में खड़े होकर कोई राष्ट्रभक्ति का चीत्कर करेगा तो भी भारत माता रोमांचित होकर उठने वाली नहीं। स्वतंत्रता से पहले ‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूँगी’ ऐसी भारत माता की आवाज थी, लेकिन त्राहि-त्राहि करना पड़ रहा है। पहले की सरकार की जल विषयक नीतियाँ गलत होंगी, लेकिन आज सत्ता तुम्हारे हाथ में है। तुम पिछले लोगों पर ठीकरा फोड़कर लोगों को इस तरह प्यासा नहीं रख सकते। परभणी में पानी की टंकी के पास 3 मई तक जमाबंदी का आदेश लागू किया गया है। पानी की डकैती करने का मामला बढ़ने लगा है। सटाणा तहसील में पानी के लिये महिलाओं द्वारा ग्राम सेवक और सरपंच को ही बंदी बनाने का मामला भले ही पुराना हो गया है फिर भी इससे भयंकर नये मामले तनाव बढ़ा रहे हैं।

मराठवाड़ा, उत्तर महाराष्ट्र में सूखा उग्र रूप धारण कर चुका है और सिर्फ ‘भारत माता की जय’ बोलने से सूखे की दाहकता कम नहीं होनेवाली। पानी के लिये पश्चिम महाराष्ट्र, कोंकण, ठाणे और मुंबई मुंबई में भी संघर्ष शुरू है। ठाणे जिले और शहर में बहुत ही औसत जल बचा है। ठाणे में भी पानी के लिये दंगा हो सकता है ऐसा भय ठाणे के पुलिस आयुक्त ने जताया है। यह सब तस्वीर महाराष्ट्र की गम्भीर अवस्था को दिखानेवाली है। पानी नहीं इसलिये उद्योग बंद होंगे और बेरोजगारी का संकट खड़ा हो जायेगा। भारत माता के स्वप्नों के महाराष्ट्र में इस तरह कोहराम मचा है और भारत माता के नाम पर राजनीति का ढोल बजाया जा रहा है। ‘भारत माता की जय’ बोलना ही पड़ेगा, लेकिन वह बोलने के लिये लोगों को जिंदा रहना होगा। मराठवाड़ा सहित कई क्षेत्रों में पानी के लिये आदमी ही आदमी का दुश्मन बन गया है। भारत माता के स्वप्नों का यह महाराष्ट्र नहीं है। मुख्यमंत्री, कुर्सी पर बैठो और महाराष्ट्र को पानी दो!

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