लातूर के मतीन 200 घरों को मुफ्त देते हैं पानी

Submitted by Hindi on Sat, 04/30/2016 - 10:42
Source
राजस्थान पत्रिका, 28 अप्रैल, 2016

लातुर में जल संकटदेश के कई क्षेत्र सूखे की चपेट में हैं। वहीं महाराष्ट्र का मराठवाड़ा क्षेत्र इससे बुरी तरह प्रभावित है। सूखे के आँकड़ों को लेकर राजनीति के तवे पर रोटियाँ भी सेंकी जा रही है। इस मुद्दे को लेकर संसद में भी चर्चा हो रही है। मराठवाड़ा और लातूर में जलसंकट की कहानी पूरे देश में गूँजी। ‘वाटर एक्सप्रेस’ के सहारे वहाँ के लोगों को पानी पहुँचाई जा रही है। ऐसे में आप कल्पना करें कि पिछले तीन महीने से अपने घर का 10 हजार लीटर पानी रोजाना किसी सूखे क्षेत्र में बाँटने वाले व्यक्ति को क्या दर्जा दिया जाए। बिना किसी का धर्म, जाति, रंग, पूछे और बिना किसी राजनीति के रोजाना लोगों की प्यास बुझाने वाले उस शख्स को क्या कहा जाए। उसे भगवान का दूत कहा जाए या मानवता कि मिसाल। इस शख्स की जितनी भी प्रशंसा की जाए वह कम है। यह शख्स हैं लातूर में रहने वाले शेख मतीन मुसा यानि मतीन भाई हैं। मतीन रोजाना अपने घर के बोरवेल का 10 हजार लीटर पानी अपने आस-पास के करीब 200 घरों को मुफ्त बाँट रहे हैं। अपने काम को नहीं मानते परोपकार मतीन भाई कहते हैं कि मेरे बोरवेल से आ रहा पानी जमीन का है। जमीन के पानी पर हक सभी का है। मैं तो एक साधन हूँ लोगों तक इसे पहुँचाने का। मैं कोई परोपकार नहीं कर रहा। पानी मेरा नहीं हो सकता, इस पर सभी लोगों का हक है।

पैसे का ऑफर नकारा


स्थानीय महिला ने बताया कि जब हम लोगों ने मतीन से कहा कि पानी के बदले आप पैसे भी लो तो वे इस बात पर गुस्सा हो गए। पानी के बदले पैसे लेने से साफ मना कर दिया। कहा, बस एक काम करो, जितनी जरूरत हो उतनी हीं पानी लेना, उससे ज्यादा नहीं।

सूखने का डर नहीं


मतीन से पूछा गया कि जब बोरवेल सूख जाएगा तो आप क्या करेंगे। उन्होंने हँसते हुए कहा, फिर मैं भी बर्तन लेकर लोगों के साथ पानी की तलाश में जाऊँगा। फिलहाल पानी आ रहा है तो कोई परवाह नहीं। जब सूखेगा तो देखेंगे क्या करना है।

पेशे से शिक्षक हैं


लातूर के ही एक निजी विद्यालय में गणित के शिक्षक मतीन को स्थानीय लोग मतीन सर के नाम से जानते हैं। उनके एक पड़ोसी ने बताया कि मतीन सर किसी आदमी का नाम नहीं बल्कि एक एक्शन का नाम हैं। यह नाम मानवता का मिसाल है।

 

मैं कुछ भी अलग हटकर नहीं कर रहा। मेरी जगह पर कोई और होता तो शायद वह भी यही करता जो मैं कर रहा हूँ। मैं ऐसा कोई खास काम नहीं कर रहा जिससे मुझे आम आदमी से विशेष बनाए।- शेख मतीन मुसा

 



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