ग्लेशियोलॉजिस्ट प्राकृतिक संरक्षण में कमाई

Submitted by Hindi on Sat, 04/30/2016 - 15:25
Source
राष्ट्रीय सहारा, 23 फरवरी, 2016

क्या आपने कभी बर्फ से भरे इलाके में चलने की कल्पना की है? प्रकृति से प्रेम तो बहुत लोग करते हैं, लेकिन उसी प्रकृति के निकट जाकर उसे संरक्षित रखने का साहस बहुत कम लोग दिखा पाते हैं। पिछले कुछ दशकों से ग्लोबल वार्मिंग के कारण जिस प्रकार ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। वह न सिर्फ मानव, बल्कि पर्यावरण के लिये भी खतरे का संकेत है। ग्लेशियर को पिघलने से रोकने और पर्यावरण में सन्तुलन बनाए रखने के लिये वैज्ञानिक निरन्तर शोध में लगे हैं। ग्लेशियर का अध्ययन करने वाले ऐसे प्रोफेशनल ग्लेशियोलॉजिस्ट कहलाते हैं। आप चाहें तो करियर से जुड़े इस कूल रास्ते की ओर अपने कदम बढ़ा सकते हैं…

कोर्स व योग्यता


ग्रेजुएशन और पीजी लेवल पर इससे सम्बन्धित कोर्स उपलब्ध हैं। पाठ्यक्रमों में फिजिकल साइंस, बायोलॉजिकल साइंस, केमिकल साइंस, अर्थ और एन्वॉयरमेंटल साइंस से सम्बन्धित बातों की जानकारी दी जाती है। बैचलर कोर्स में दाखिले के लिये साइंस विषय के साथ 12वीं उत्तीर्ण होना आवश्यक है, जबकि मास्टर डिग्री में कोर्स करने के लिये साइंस विषय या इंजीनियरिंग में बैचलर डिग्री होनी चाहिए। ग्लेशियोलॉजिस्ट बनने के लिये ग्लेशियोलॉजी में विशेषज्ञता प्राप्त करनी होती है। ग्लेशियोलॉजी के पाठ्यक्रम में सैद्धान्तिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी अनिवार्य रुप से दिया जाता है। फिजिकल और एनवॉयरमेंट साइंस से सम्बन्धित कोर्स करके भी इस क्षेत्र में कदम बढ़ाया जा सकता है। जियोलॉजी, अर्थ साइंस से बीएससी या एमएससी करके भी राहें बनती हैं। ग्लेशियोलॉजी से सम्बन्धित पीएचडी से करियर को निश्चय ही बल मिलेगा।

कार्य


एक ग्लेशियोलॉजिस्ट का मुख्य काम ग्लेशियरों और बर्फ के बीच होने वाली गतिविधियों का अध्ययन करना व रिपोर्ट तैयार करना होता है। ग्लेशियोलॉजिस्ट द्वारा की जाने वाली रिसर्च से ही लोगों को ग्लेशियरों की स्थिति में होने वाले परिवर्तन से समुद्र जल के स्तर व जलवायु परिवर्तन के बारे में पता चलता है।

व्यक्तिगत गुण


इस क्षेत्र में कदम रखने की पहली शर्त है कि आप प्रकृति से प्रेम करें व प्रकृति को लेकर कुछ नया करने की चाहत रखें। चूँकि एक ग्लेशियोलॉजिस्ट को अनेक प्रकार की बाधाओं व कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, इसलिए व्यक्ति को मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए। इसके अतिरिक्त एक ग्लेशियोलॉजिस्ट को रिसर्च कार्य के लिये महीनों घर से दूर रहकर कठिन परिस्थितियों में रहना पड़ता है, इसलिए उनमें हर परिस्थिति में खुद को ढाल लेने की क्षमता भी होनी चाहिए। शोध और विश्लेषण करने की बेहतर क्षमता का होना भी बेहद जरूरी है। इसके अलावा कम्युनिकेशन स्किल भी दुरुस्त होनी चाहिए।

अवसर


पर्यावरण प्रदूषण और बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग के मद्देनजर इसके विशेषज्ञों की मांग निरन्तर बढ़ती जा रही है। ग्लेशियोलॉजिस्ट के लिये जितने अवसर देश में मौजूद हैं, उतने ही विदेशों में भी हैं। आप चाहें तो बिना किसी संस्थान से जुड़कर खुद भी रिसर्च कार्य कर सकते हैं या फिर किसी शिक्षण संस्थान में बतौर प्रोफेसर भी अपना भविष्य बना सकते हैं।

प्रमुख संस्थान
1. जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय नई दिल्ली
2. डिपार्टमेंट ऑफ अर्थ साइंस, आईआईटी मुंबई
3. वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी, देहरादून
4. सेंटर फॉर अर्थ साइंस आईआईएससी बेंगलुरु

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