हरियाली के नाम बहा रहे ‘अमृत’, आमजन बेहाल

Submitted by Hindi on Tue, 05/03/2016 - 12:16
Source
राजस्थान पत्रिका, सोमवार, 02, मई, 2016

शहर में अमीनशाह नाला और सी-स्कीम का गंदा नाला प्रमुख हैं। सरकार यदि इन नालों के गंदे पानी को साफ कर बगीचों में सिंचाई की व्यवस्था की जाए तो शहर के गिरते भूजल स्तर को काफी हद तक रोका जा सकता है।

राजधानी को सुंदर और हरा-भरा बनाने के लिये सरकार ही भूजल भंडार को खत्म कर रही है। ट्रीटमेंट प्लांटों में परिशोधित सैकड़ों एमएलडी पानी को बिना उपयोग लिये फिर से नालों में बहाया जा रहा है, वहीं ऑक्सीजन टैंक बाग-बगीचों को लोगों की प्यास बुझाने वाले भूगर्भीय जल से सींचा जा रहा है। सेंट्रल पार्क, अशोक उद्यान और सचिवालय समेत आस-पास की सभी सरकारी इमारतों, सिविल लाइंस के सरकारी बंगलों के बड़े-बड़े बगीचों को हरा-भरा बनाने के लिये जमीन से पानी खींचा जा रहा है, जिसके चलते शहर का जलस्तर भी लगातार घट रहा है। निजी भवनों में बोरिंग पर रोक लगने के बाद अब सरकारी कार्योलयों और बगीचों में सबसे ज्यादा भूजल दोहन हो रहा है।

सबसे ज्यादा लॉन यहाँ पर


सबसे ज्यादा लॉन सी-स्कीम इलाके में है। इनमें सचिवालय, स्टेच्यू सर्किल व आस-पास की इमारतें, उद्योग भवन, उच्च न्यायालय, पंत कृषि भवन, एसएमएस स्टेडियम, विधानसभा के साथ-साथ निजी भवनों में सेंट जेवियर और महावीर पब्लिक स्कूल, रामबाग पोलो ग्राउंड में बड़े-बड़े लॉन बने हुए हैं। इन लॉन में भूजल का दोहन कर सिंचाई की जा रही है।

ऐसा करें तो गंदा पानी भी भूजल बचाएगा


शहर में अमीनशाह नाला और सी-स्कीम का गंदा नाला प्रमुख हैं। सरकार यदि इन नालों के गंदे पानी को साफ कर बगीचों में सिंचाई की व्यवस्था की जाए तो शहर के गिरते भूजल स्तर को काफी हद तक रोका जा सकता है। नाले के किनारों पर वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने के लिये सरकारी जमीन भी उपलब्ध है।

अगर यहाँ ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित होते हैं तो उनसे साफ किए पानी से पूरे शहर के बगीचों के साथ-साथ फुटपाथ और रोड डिवाइडरों पर लगे पेड़-पौधों को साफ पानी नसीब हो पाएगा।

नाले के पानी से गोल्फ कोर्स हरा-भरा


सेंट्रल पार्क के बीच बह रहे नाले के पानी को साफ कर गोल्फ क्लब ने अपने कोर्स को हरा-भरा बनाया है। क्लब ने चार-पाँच साल से पानी को परिशोधित करने का प्लांट लगा रखा है। इससे साफ हुए पानी से गोल्फकोर्स के पेड़-पौधों व घास की सिंचाई होती है। जबकि जेडीए ने आज तक यहाँ ट्रीटमेंट प्लांट नहीं बनाया है। दिन-रात भूजल खींच कर सेंट्रल पार्क को हरा-भरा बनाने की कोशिश की जा रही है, इसके बावजूद सेंट्रल पार्क गोल्फ कोर्स जितना हरा-भरा नजर नहीं आ पाता।

ताल के लिये खींच रहे पानी


इसी इलाके में स्थित अशोक विहार पार्क में तीन बड़े लॉन, नर्सरी और डीयर गार्डन में बने ताल के लिये रोजाना जमीन से लाखों लीटर पानी का दोहन किया जा रहा है। इसके लिये पार्क में चार बड़े बोरिंग लगाए गए हैं।

 

निगम द्वारा 870 उद्यानों की देखरेख की जा रही है। अधिकांश में बोरिंग से सिंचाई हो रही है। प्रतापनगर के कुछ उद्यानों में दहलावास ट्रीटमेंट प्लांट से पानी पहुँचाया जा रहा है। जल्द ऐसी योजनाएं बनाएंगे कि बेकार बहाया जा रहा परिशोधित पानी अन्य उद्यानों में भी पहुँचाया जाए। - विमलेश मीणा, अध्यक्ष, नगर निगम उद्यान समिति


 



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