पौधों, पर्यावरण और मनुष्यों पर अन्त: पादप सूक्ष्मजीवियों का प्रभाव - एक समीक्षा (Impact of Endophytic Microorganisms on plants, environment and human-A review)

Submitted by Hindi on Mon, 07/11/2016 - 16:58
Source
अनुसंधान (विज्ञान शोध पत्रिका) अक्टूबर 2014

सारांश


अन्त:पादप सूक्ष्मजीवी जैसे- (जीवाणु, कवक, एक्टिनोमाइसिटीस) होते हैं, जो पौधे के सुदृढ़ ऊतकों में रहते हैं, तथा इनसे एक सहजीवी संबंध रखते हैं। यह आज के काल में सर्वत्र रूप से अध्ययन किये गए अधिकतर पौधों से संबंध रखते हैं। कुछ सामान्य रूप से पाए जाने वाले अन्त:पादप-एन्टिरोवैक्टर, कोलैटोट्राइकम, फोमोप्सिस, फाइलोस्टिक्टा, क्लैडोस्पोरियम प्रजातियों से संबंधित होते हैं। अन्त:पादप आबादी सामान्यत: जलवायु परिस्थितियों व स्थान से प्रभावित होती है, जहाँ पोषक पौधा विकसित होता है। यह बड़ी संख्या में यौगिकों को उत्पन्न करते हैं, जो पौधे के विकास, पर्यावरण की स्थिति, सुरक्षा और स्थिरता के लिये उपयोगी होते हैं। अन्त:पादप पौधों की शाकाहारी जन्तुओं से सुरक्षा करते हैं, कुछ निश्चित यौगिकों को उत्पन्न करके कभी-कभी यह जैव-नियंत्रक घटक के रूप में कार्य करते हैं। यह बड़ी संख्या में जैव-नियंत्रक यौगिकों को उत्पन्न करते हैं, जो कि न केवल पौधों बल्कि मनुष्यों के लिये आर्थिक महत्व रखते हैं। यह प्रतिजैविक तथा दवाओं के रूप में उपयोगी होते हैं तथा अनुसंधान के क्षेत्र में उच्च प्रासंगिक यौगिकों अथवा खाद्य उद्योग में भी उपयोगी हैं। इनकी पोषक तत्व चर्क, जैवे-निम्नीकरण तथा जैविक उपचार में महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। इस समीक्षा में हमने अन्त: पादपों का पौधों, मनुष्यों तथा पर्यावरण पर पड़ने वाले महत्त्वपूर्ण प्रभावों को समझने का प्रयनत किया है।

Abstract


Endophytes are microorganisms (bacteria or fungi or actinomycetes) that dwell within robust plant tissues by having a symbiotic association. They are ubiquitously associated with almost all plants studies till date. Some commonly found endophytes are those belonging to the genera Enterobacter, Colletotrichum, Phomopsis, Phyllosticta, Cladosporium and so forth. Endophytic population is greatly affected by climatic conditions and location where the host plant grows. They produce a wide range of compounds useful for plants for their growth, protection to environmental conditions, and sustainability, in favour of a good dwelling place within the hosts. They protect plants from herb ivory by producing certain compounds which will prevent animals from further grazing on the same plant and sometimes act as biocontrol agents. A large amount of bioactive compounds produced by them not only are useful for plants but also are of economical importance to humans. They serve as antibiotics, drugs and medicines, or the compounds of high relevance in research besides useful to food industry. They are also found to have some important role in nutrient cycling, biodegradation and bioremediation. In this review, we have tried to comprehend different roles of endophytes in plants and their significance and impacts on man and environment.

प्रस्तावना


अन्त:पादप, जीवाणु तथा कवकीय सूक्ष्मजीवी होते हैं, जो पौधों के स्वस्थ ऊतकों में अन्त:कोशिकीय रूप से निवास करते हैं।1 बिना किसी रोग के स्पष्ट लक्षण को प्रदर्शित करते हुए यह सर्वत्र रूप से पौधे में निवास करते हैं, आधुनिक समय में अन्त:पादपों को लगभग सभी पौधों से पृथक कर लिया गया है। यह अपने पोषक के साथ जटिल पारस्परिक क्रिया प्रदर्शित करते हैं, जिसमें सहजीविता और प्रतिरोध भी सम्मिलित हैं।2-4 पौधे सख्ती से अन्त:पादपों के विकास को नियमित करते हैं तथा यह अन्त:पादप कई क्रियाविधियों को धीरे-धीरे ग्रहण करके उन्हें वातावरण के अनुरूप बनाते हैं।5 स्थिर सहजीवन बनाए रखने के लिये, अन्त:पादप पौधों के विकास के लिये अनेक यौगिकों का उत्पादन करते हैं तथा उन्हें पर्यावरण के लिये बेहतर अनुकूलन में सहायता करते हैं।6-7 अन्त:पादपी संसाधनों में उन्नति से हमें विविध प्रकार के लाभ हो सकते हैं, जैसे- नवीन, प्रभावी यौगिक, जो कि रासायनिक प्रतिक्रियाओं द्वारा संश्लेशित नहीं किए जा सकते हैं।

2. पृथकीकरण और पहचान (आइसोलेशन एवं आइडेन्टिफिकेशन)


अन्त:पादपीय जीव पौधों के विभिन्न भागों से पृथक किए जाते हैं। यह एक बड़े पैमाने पर पौधों की जड़ों तनों, छाल, पत्ती, डंठल, कलियों तथा राल नलिकाओं से पृथक किए गए हैं। अनुक्रम आधारित दृष्टिकोण से पिन्यूमोन्टिकोला, वेस्टर्नव्हाइट पाइन के बीजों तथा सुइयों में विविध कवकीय सूक्ष्मजीवियों के प्रसारण के लिये उपयोग किया गया था।8 इससे 750 सतह-निश्कीटित सुई से 2003 कवकीय सूक्ष्मजीवी पृथक किए गए। इसके विपरीत केवल 16 अन्त:पादप, 800 सतह-निश्कीटित बीजों से प्राप्त किए गए हैं। अन्त:पादप सूक्ष्मजीव प्रारम्भिक सतह-निश्कीटित से पृथक किए जाते हैं, जैसे कि सतह ऊतकीय अर्क के संवर्धन से अथवा माध्यम में पादप ऊतकों के प्रत्यक्ष संवर्धन से जो जीवाणु कवकों तथा एक्टिनोमाइसिटीस के लिये उपयुक्त हो।9 प्रारम्भिक समय में सूक्ष्मजीवी प्रजाति जैसे- एक्रेमोनियम टेरिकोला, मोनोडिक्टाइस कैस्टनी, पेनिसिलियमग्लेन्डिकोला, फोमा ट्रॉपिका तथा टेट्राप्लोआ एरिस्टाटा अन्त:पादप कवक के रूप में सूचित किए गए हैं।

परम्परागत, अन्त:पादप की पहचान कवक, जीवाणु तथा एक्टिनोमाइसिटीस की संरचना के लक्षणों के आधार पर होती है, तथा इनके रासायनिक परीक्षण के द्वारा भी की जाती है। आण्विक जीव विज्ञान के विकास के साथ-साथ राइबोसोमल डीएनए आन्तरिक लिखित स्पेसर (आईटीएस) अनुक्रम विश्लेषण व्यापक रूप से पहचान के लिये प्रयोग किए जाते हैं।

3. जलवायु का अन्त:पादप आबादी पर प्रभाव


अन्त:पादप आबादी पौधों से पौधों के लिये प्रजातियों से प्रजातियों के लिये भिन्न होती है। यह एक ही प्रजाति के भीतर न केवल क्षेत्र से क्षेत्र तक बल्कि एक ही क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन से बनी भिन्न प्रजाति होती है। अन्त:पादप कवक की संबंधी आवृत्ति में अस्थायी परिवर्तन का अध्ययन चैरेप्रासर्ट एवं अन्य10 द्वारा किया गया। उन्होंने अपने अध्ययन में यह पाया कि सागौन (टेक्टोना ग्रेन्डिस एल Tectona grandis L.) और बारिश के पेड़ो (समैनी समन मेर Samanea saman Merr.) की परिपक्व पत्तियों में पीढ़ी और प्रजातियों की संख्या उपनिवेश आवृत्ति के साथ-साथ उच्च होती है, जबकि युवा पत्तियों में इनकी पाए जाने की संख्या बरसात के मौसम में बढ़ती है।

Talika

4. अन्त:पादप तथा आण्विक जीव-विज्ञान


आधुनिक युग में जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विकास के साथ आण्विक स्तर पर अन्त:पादपों पर अधिक अध्ययन किया गया है, जिनमें मेटाजिनोमिक अध्ययन, आण्विक संकेतक का उपयोग, आण्विक क्लोनिंग तथा आनुवांशिक अभिव्यक्ति सम्मिलित हैं। अन्त:पादप के आण्विक अध्ययन में इन्टेरोबैक्टर प्रजाति 638 के जीनोम का सम्पूर्ण अध्ययन किया गया।

5. अन्त:पादपो के प्रयोग तथा भूमिका


पादप-उत्तेजनक (Phytostimulation)
रंजक निर्माण (Pigment Production)
उत्प्रेरक निर्माण (Enzyme Production)
जैवक्रियाशील तथा नवीन यौगिकों के श्रोत (Source of Bioactives and Novel Compounds)
जैवनियंत्रक घटक (Biocontrol Agents)
पोषक चक्र (Nutrient Cycling)
जैवोपचारण/जैव विघटन (Bioremediation/Biodegradation)
वाष्पशील यौगिकों का उत्पादन तथा उनके लाभ (Production of Volatile Organic Compounds and Their Benefits)

6. ऊतक संवर्धन में अन्त:पादप


ऊतक संवर्धन में अन्तःपादप

7. निष्कर्ष


आधुनिक काल में अन्त:पादप सूक्ष्मजीवियों के अध्ययन में आविष्कारकों का महान योगदान तथा रूचि पाई गई, उन्होंने अन्त:पादपों के अत्यंत विकसित पहचान तथा पृथकीकरण के आसान तरीकों तथा आण्विक जीव विज्ञान के उपकरणों के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। कई प्रकार के जैवक्रिया शील यौगिक जो अन्त:पादपों द्वारा उत्पन्न किए जाते हैं, दवाइयों, कृषि पर्यावरण तथा उद्योगों के लिये उपयोगी सिद्ध हुए हैं। अन्त:पादप कवक, जीवाणु या एक्टिनोमाइसिटीस हो सकते हैं। इस समीक्षा में यह निष्कर्ष निकाला गया कि यह ज्यादातर एक्टिनोमाइसिटीस होते हैं, जो पौधों के साथ महत्त्वपूर्ण यौगिकों के उत्पादन में सम्मिलित होते हैं। सामान्यत: कवक जैवोपचारण, जैव-विघटन तथा पोषक-चक्र में सम्मिलित होते हैं, इस प्रकार यह मलबे के भार को वातावरण से बेहतर रूप से कम कर देते हैं। सामान्यत: अन्त:पादपों का जीवाणुविक समुदाय विभिन्न प्रकार के वृद्धि हार्मोन्स का उत्पादन करके पौधों के उच्च विकास में सहायता करते हैं। निष्कर्षत: उपरोक्त सभी तथ्यों से यह सिद्ध होता है कि अन्त:पादप पौधों, पर्यावरण तथा मनुष्यों के ऊपर एक उचित रूप से अच्छा प्रभाव डालते हैं।

Sandarvशिप्रा शुक्ला, तृप्ति मिश्रा, प्रतीक दीक्षित व महेश पालशोध छात्र, वैज्ञानिक पादप रसायन विभाग, सीएसआईआर-राष्टीय वनस्पति अनुसंधान संस्था, लखनऊ-226001, यूपी, भारत, Drshipra.biotech@gmail.com, drmpal.nbri@rediffmail.com

Shipra Shukla, Tripti Misra, Pratik Dixit and Mahesh Pal
Research Scholar, Scientist, Phyto-chemistry Department C.S.I.R.-N.B.R.I., Lucknow-226001, U.P., India, Drshipra.biotech@gmail.com, drmpal.nbri@rediffmail.com

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