सौर ऊर्जा चालित मिनी पाइप जलापूर्ति योजनाओं का उद्घाटन

Submitted by RuralWater on Thu, 07/21/2016 - 16:13
Printer Friendly, PDF & Email


हर घर नल का जल देने के निश्चय की ओर एक महत्त्वपूर्ण शुरुआत - मुख्यमंत्री
खैरा की योजना पूरी न होने पर चिन्ता का इजहार


.मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित ‘संवाद’ में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग की 215.47 करोड़ रुपए की प्राक्कलित राशि से पूर्ण की गई 75 ग्रामीण पाइप जलापूर्ति योजनाओं एवं 265 सौर ऊर्जा चालित मिनी पाइप जलापूर्ति योजनाओं का रिमोट के माध्यम से समेकित उद्घाटन करते हुए हर घर नल का जल देने के निश्चय की ओर एक महत्त्वपूर्ण शुरुआत की।

मुख्यमंत्री द्वारा उद्घाटित 75 ग्रामीण जलापूर्ति योजनाएँ 20 जिलों के 75 ग्राम पंचायतों में अधिष्ठापित है और 3976 परिवार अपने घर में टैप द्वारा जलापूर्ति योजना से लाभान्वित है और लगभग दस हजार परिवार 1468 स्टैंड पोस्ट से स्वच्छ पेयजल प्राप्त कर रहे हैं। इसी प्रकार 265 मिनी पाइप जलापूर्ति योजनाएँ शुद्धिकरण संयंत्र के साथ अधिष्ठापित की गई है।

मुख्यमंत्री ने अपने सम्बोधन में कहा कि इन योजनाओं का बेहतर लाभ लोगों को मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के सात निश्चय का प्रमुख अंग हर घर नल का जल अर्थात हर घर में नल का पानी पहुँचाना है। उन्होंने कहा कि लोग ग्रामीण क्षेत्रों में जाने पर चर्चा करते थे कि जैसे शहरों में नल का जल उपलब्ध होता है, वैसे ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भी बिहार में 4 से 5 प्रतिशत से ज्यादा नल का जल नहीं पहुँचाया जा सका है और पीएचईडी की जितनी योजनाएँ अभी तक स्वीकृत है, उसके कार्यान्वयन के बाद 22 प्रतिशत लोगों को नल का जल उपलब्ध हो सकेगा। उन्होंने कहा कि यह निश्चय बड़ा निश्चय है और इसके तहत बड़े पैमाने पर सर्वेक्षण कार्य चल रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हर घर नल का जल योजना का क्रियान्वयन उन पंचायतों में जहाँ पीएचईडी की योजनाएँ स्वीकृत हैं, वहाँ पीएचईडी के द्वारा तथा जिन पंचायतों में पीएचईडी की योजना स्वीकृत नहीं है, वहाँ ग्राम पंचायतों को जिम्मेवारी दी जा रही है। उन्होंने खैरा, मुंगेर जहाँ पूरा गाँव फ्लोराइड से प्रभावित है, के सम्बन्ध में कहा कि योजना स्वीकृत हुई और आज कार्यान्वित हो रही है किन्तु यह योजना समय से पहले बन जाता तो मेरे दिल को तसल्ली होती और वहाँ के लोगों को भी बीमारी का शिकार नहीं होना पड़ता। उन्होंने कहा कि हम सौ प्रतिशत काम में विश्वास करते हैं और हम सभी के लिये काम करते हैं। उन्होंने कहा कि योजना बनाते समय उसके रखरखाव की भी व्यवस्था होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा जो आँकड़ा उन्हें उपलब्ध कराया गया है, उसके अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में 90 प्रतिशत जलापूर्ति चापाकल के माध्यम से तथा 6 प्रतिशत पाइप के माध्यम से उपलब्ध होता है किन्तु मात्र 2 प्रतिशत लोग ही पाइप के जल का उपयोग करते हैं। उन्होंने लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के इंजीनियरों को नसीहत दी कि जगह-जगह टैप लगा होता है और खुला छोड़ दिया जाता है और उसे कोई देखने वाला नहीं है।

इंजीनियर प्रोजेक्ट पूर्ण करके छोड़ देते हैं जबकि प्रोजेक्ट पूर्ण करना जितना जरूरी है, उतना ही आवश्यक उसका रखरखाव भी है। उन्होंने कहा कि वे दस वर्षों से वर्षापात का विश्लेषण कर रहे हैं। दस वर्षों में दो वर्ष को छोड़कर 1000 मिमी से नीचे वर्षा हुई है। अब वह स्थिति नहीं है कि राज्य में बहुत पानी है। वर्षापात कम होने से भूजल स्तर नीचे जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने पाइप जलापूर्ति योजना में जलमीनार बनाए जाने के औचित्य पर प्रश्न उठाया। उन्होंने कहा कि जलमीनार का जो सिविल स्ट्रक्चर बनता है, उसकी उपयोगिता हर जगह नहीं है। जहाँ ऊँचाई पर पानी पहुँचाना है, उसको छोड़कर उसकी कोई उपयोगिता नहीं है। जलमीनार के स्थान पर ज्यादा जगहों पर डायरेक्ट जलापूर्ति की योजना ली जा सकती है, वहीं मुख्यमंत्री ने जलमीनार के रखरखाव, उसकी शुद्धता एवं स्वच्छता पर भी ध्यान रखने का निर्देश दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2005 में पहली बार सरकार बनी थी तो विद्यालयों में वर्ग कक्ष नहीं थे। यह प्रश्न उठा कि कैसे बनेगा। राशि की व्यवस्था कर ली गई थी। उन्होंने निर्णय लिया कि विद्यालय की शिक्षा समिति को माॅडल एस्टिमेट और नक्शा बनाकर दे दिया जाय और विद्यालय शिक्षा समिति स्कूल बनाएगी।

आज स्थिति सबके सामने है, दो लाख वर्ग कक्ष बनकर तैयार हो गए और विद्यालय ठीक से बन गया, उसी प्रकार मध्य विद्यालयों में चहारदीवारी का निर्माण पूर्ण हो गया। शिकायतें भी कम आई और इसका परिणाम यह हुआ कि स्थानीय अर्थव्यवस्था में उछाल आया। बिहार का विकास दर आज भी दहाई अंक में है, यह सब इन्हीं पहल के कारण सम्भव हो सका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हर घर नल का जल पहुँचाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है और लोगों को विश्वास नहीं होता किन्तु जब हर घर में नल का पानी पहुँच जाएगा तो विश्वास हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पाँच साल के अन्दर इस कार्य को कर देना है। हम सकारात्मक सोचते हैं और सकारात्मक सोच से यह कार्य सम्भव हो सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चापाकल बड़ी संख्या में लगा दिये गए हैं, उसकी मरम्मति भी जरूरी है। पीएचईडी को विभाग द्वारा लगाए गए चापाकलों के अतिरिक्त सार्वजनिक स्थलों पर लगाए गए चापाकलों का सर्वेक्षण कर उसका रखरखाव सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

इसके पूर्व मुख्यमंत्री के द्वारा पाँच अदद जल गुणवता जाँच चलंत प्रयोगशाला और चलंत जल शुद्धिकरण संयंत्रण ‘जलदूत’ को हरी झंडी दिखाकर लेाकार्पित किया। जल गुणवता जाँच, चलंत प्रयोगशाला बिहार सरकार की अभिनव पहल है, जिसके द्वारा दूरदराज के गाँवों के सार्वजनिक पेयजल स्रोतों की गुणवता की जाँच की जाती है और इसके परिणाम से ग्रामीणों को जागरूक एवं संवेदनशील बनाया जाता है।

ये जल गुणवता जाँच चलंत प्रयोगशाला पूर्णिया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर एवं पटना के विभिन्न गाँवों में घूम-घूमकर सार्वजनिक पेयजल स्रोतों की गुणवता जाँच करेगी। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री द्वारा लोकार्पित आठ जलदूत को बाढ़ अथवा जलजमाव से प्रभावित समुदाय को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के कार्य हेतु विभिन्न जिलों में लगाया जाएगा।

इस अवसर पर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की तकनीक पर आयोजित प्रदर्शनी का भी मुख्यमंत्री ने फीता काटकर उद्घाटन किया और प्रदर्शनी का अवलोकन किया। साथ ही मुख्यमंत्री द्वारा पीएचईडी द्वारा निर्मित मोबाइल आधारित अनुश्रवण प्रणाली ई-पेयजल और ई-चापाकल का भी शुभारम्भ किया गया।

इस मोबाइल एप की सहायता से पाइप जलापूर्ति योजनाओं एवं चापाकलों का सतत अनुश्रवण कार्यक्षमता प्रदर्शन का आकलन कर जल सुलभ को उपलब्ध कराया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री का स्वागत हर्बल मेडिशिनल प्लांट का गुलदस्ता भेंटकर किया गया और शाल तथा स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण एवं विधि मंत्री श्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा, विकास आयुक्त श्री शिशिर सिन्हा, प्रधान सचिव लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण श्रीमती अंशुली आर्या, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अतीश चन्द्रा, पीएचईडी के अभियंता प्रमुख श्री दिनेश्वर प्रसाद सिंह, पीएचईडी के अपर सचिव सह परियोजना निदेशक श्री शशिकान्त तिवारी, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी श्री गोपाल सिंह सहित लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के पदाधिकारी, जल की शुद्धता के क्षेत्र में कार्य करने वाले तथा जन चेतना पैदा करने वाले एनजीओ के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
 

More From Author

Related Articles (Topic wise)

Related Articles (District wise)

About the author

नया ताजा