जल संचयन के प्रति जागरूक होने लगे हैं जनपद के लोग

Submitted by Hindi on Sat, 07/23/2016 - 16:04
Source
नेशनल दुनिया, 10 जून, 2016

संकट क्यों?संकट क्यों?ग्रेटर नोएडा। मराठवाड़ा के लातूर तथा बुन्देलखण्ड से सबक लेते हुए जनपद के लोग जल संचयन के प्रति जागरूक हो चुके हैं। जिस कारण जनपद के विभिन्न कस्बों तथा गाँवों के लोग जहाँ सूख चुके तालाबों को भरने लगे हैं वहीं जर्जर हालत वाले तालाबों का सौंदर्यीकरण करने लगे हैं। ताकि जनपद के लोगों को बूँद-बूँद पानी के लिये मोहताज न रहना पड़े। जनपदवासियों द्वारा जल संचयन के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों में बराबर का साथ दे रहे हैं यहाँ के विभिन्न सामाजिक संगठन।

इसी क्रम में गुरुवार को दनकौर ब्लॉक के रीलखा गाँव में करप्शन फ्री इंडिया संगठन के कार्यकर्ताों ने जल-बचाओ-जीवन बचाओ मुहिम के अन्तर्गत जिलाध्यक्ष दिनेश नागर के नेतृत्व में एक सभा का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता शादिराम कसाना ने तथा संचालन विकास कसान ने किया। जिसमें गाँव के सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया।

संगठन के संस्थापक, चौ. परवीन भारतीय ने बताया कि हर प्राणी के जीवन में जल एक अनमोल कड़ी है। जल के बिना धरती पर जीवन सम्भव नहीं है। परन्तु गाँवों में लोग जल की महत्ता को समझ नहीं रहे हैं तथा जल का दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसी सिलसिले में संस्था द्वारा रीलखा गाँव के लोगों को जागरूक किया गया। जिससे लोग जल की उपयोगिता को समझकर उसका दुरुपयोग न करे। उन्होंने कहा कि संगठन के कार्यकर्ता शहर तथा कस्बों के गाँव-गाँव जाकर जल बचाओ अभियान को और मजबूती प्रदान करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि आने वाली पीढ़ी को पानी की समस्या से दो चार न होना पड़े।

संगठन के जिलाध्यक्ष दिनेश नागर ने बताया कि गाँवों का वाटर लेवल काफी नीचे चला गया है। गाँवों के नलकूपों ने पानी देना बन्द कर दिया है। जिससे गाँवों में पीने के पानी की भी काफी गम्भीर समस्या खड़ी हो गई है। इस मौके पर दिनेश नागर ने जिलाधिकारी की उस मुहिम की तारीफ की जिसके अंतर्गत गाँवों के तालाबों की साफ-सफाई कराकर उनमें गाँव से निकलने वाले जल की निकासी उन्हीं तालाबों में कराकर गाँवों के वाटर-लेवल को ऊँचा किया जा सकेगा।

बताते चलें कि जिला प्रशासन द्वारा भी तालाबों को अतिक्रमणमुक्त बनाने, जर्जर हालात वाले तालों के सौंदर्यीकरण तथा सूख चुके तालाबों को फिर से पानी से भरने के लिये भरपूर प्रयास किए जा रहे हैं। ताकि जनपद के भूजल का स्तर न्यूनतम न होने पाए।

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