योगी और बालियान के गाँवों में हाँफ रही योजना

Submitted by Hindi on Sun, 08/07/2016 - 10:40
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Source
दैनिक जागरण, 06 अगस्त, 2016

आदर्श गाँव घोषित होने के बाद 130 घरों में शौचालय बनवाए गए हैं। अब सिर्फ 35 घर शौचालय से वंचित हैं। ग्राम प्रधान सुनीता चौधरी विकास न हो पाने की मूल वजह प्रशासनिक उदासीनता बताती हैं। ग्रामीण बिजेंद्र सिंह मानते हैं कि कृषि क्षेत्र में कुछ काम जरूर हुआ है।भाजपा शासित राज्य मध्य प्रदेश में सांसद आदर्श ग्राम योजना की हकीकत से रू-ब-रू होने के बाद हम देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश का रुख करते हैं। यहाँ भाजपा की धुर विरोधी समाजवादी पार्टी की सरकार है। लोकसभा चुनावों में यहाँ मोदी की आँधी में सभी दलों के तंबू उखड़ गए थे। भाजपा को अकेले दम पर यहाँ 80 में से 71 सीटें मिलीं। लोगों में उम्मीद जगी कि मोदी के सांसद सब कुछ नहीं तो कम से कम अपने अधिकार क्षेत्र के तहत आने वाली चीजों को ठीक करेंगे। सांसद आदर्श ग्राम योजना इन्हीं में से एक है। मोदी सरकार के दो वर्ष पूरे हो चुके हैं। सवाल है कि यूपी के आदर्श गाँवों का हाल क्या है। प्रदेश के कुछ नामचीन सांसदों के गोद लिये गाँवों का हाल देखकर तो ऐसा ही लगता है कि प्रधानमंत्री की यह महत्त्वाकांक्षी योजना अभी सांसदों के साथ-साथ राज्य सरकार की भी प्राथमिकता में नहीं आ पाई है। भाजपा सांसदों की दलील है कि सपा सरकार इस योजना के साथ सौतेला रवैया अपना रही है। बहरहाल, आज हम सूबे के पूरब और पश्चिम के विपरीत छोरों पर स्थित दो आदर्श गाँवों की स्थिति की पड़ताल करेंगे।

योगी के जंगल औराही में अभी मंगल नहीं


गोरखपुर से भाजपा के सांसद योगी आदित्यनाथ ने जिले के जंगल औराही गाँव को गोद लिया है। करीब पाँच हजार की आबादी का यह गाँव दो वर्ष में आदर्श बनना तो दूर, विकास का औसत लक्ष्य भी नहीं हासिल कर पाया है। चयन के बाद ग्रामीणों ने सबसे पहले सड़क, नाली और शौचालय बनवाने का अनुरोध किया। योगी ने इनका प्रस्ताव भी बनवाया, लेकिन पिछले दो सालों में कुछ हो नहीं पाया। जर्जर सड़कें, टूटी नालियाँ, बजबजाती गंदगी इसकी उपेक्षा की कहानी बयां कर रही हैं। ज्यादातर घरों में शौचालय नहीं होने के कारण लोग सड़कों पर शौच करते हैं। पड़ोस का लोहिया गाँव मिश्रोलिया कहीं ज्यादा साफ-सुथरा दिखता है। सांसद राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के असहयोग की शिकायत करते हैं। कई ग्रामीणों का भी कहना है कि गाँव को सांसद के गोद लेने के बाद राज्य सरकार ने मदद से हाथ खींच लिया है।

1. देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में भी योजना का हाल बेहाल

2. पूरब से पश्चिम तक चयनित गाँवों का हाल करीब-करीब एक जैसा
3. योगी और बालियान के गोद लिये गाँवों में भी समस्याओं का अंबार

 

मैंने डीएम को सड़क, नाली और शौचालय बनाने का प्रस्ताव दे रखा है। राज्य सरकार के असहयोग के चलते विलंब हो रहा है। जिला पंचायत राज अधिकारी विकास कार्यों में बाधक हैं। सड़क के लिये ज्यादा बजट लगेगा। इसलिये इसे सांसद निधि से कराने में कठिनाई है। फिर भी इस निधि से ही एक सीसी रोड के अलावा विद्युतीकरण भी कराया गया है। - योगी आदित्यनाथ, सांसद गोरखपुर”

 

 

मैंने हर मुमकिन कोशिश की है। किसानों को अत्याधुनिक कृषि यंत्र और उन्नत बीज उपलब्ध कराए हैं। जमीन न मिलने के कारण कॉलेज, खेल का मैदान, बैंक शाखा व अस्पताल का निर्माण नहीं हो पाया है। - डा. संजीव बालियान, सांसद मुजफ्फरनगर”

 

 

कृषि क्षेत्र में काफी काम हुआ है। बिजलीघर के लिये भूमि उपलब्ध करा दी है। बाकी योजनाओं के लिये जमीन तलाशी जा रही है। - अंकित कुमार अग्रवाल, सीडीओ मुजफ्फरनगर”

 

बालियान का रसूलपुर जाटान


मुजफ्फरनगर के सांसद और केन्द्रीय मंत्री संजीव बालियान के चयनित आदर्श गाँव रसूलपुर जाटान की तस्वीर भी कुछ अलग नहीं है। राज्य सरकार की उदासीनता और तालमेल की कमी का यही नतीजा होना था। सवाल है कि साढ़े चार हजार की आबादी वाले इस गाँव में होना क्या था और हुआ क्या? यहाँ अस्पताल खुलना था, नहीं खुला। बैंक की शाखा खुलनी थी, नहीं खुली। कॉलेज और खेल के मैदान का प्रस्ताव भी बना था, बना ही रह गया क्योंकि इन योजनाओं के लिये अभी तक जमीन ही नहीं मिली। अब जरा दूसरी तरफ चलें। गाँव में शाम को बिजली पहले भी नहीं आती थी, अब भी गायब रहती है। गाँव में 25 सोलर स्ट्रीट लाइटें लगी हैं, जिनमें 10 खराब पड़े हैं। यहाँ 28 सरकारी मार्का हैंडपम्प हैं। इनमें से 20 का पानी पीने लायक नहीं (टीडीसी ज्यादा) है। गाँव में सफाईकर्मी नियुक्त है, फिर भी हर तरफ गंदगी के दर्शन होते हैं। गाँव वालों को इलाज के लिये 20 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल जाना पड़ता था, आज भी वहीं जाना पड़ता है। शौचालयों की स्थिति जरूर बेहतर हुई है। आदर्श गाँव घोषित होने के बाद 130 घरों में शौचालय बनवाए गए हैं। अब सिर्फ 35 घर शौचालय से वंचित हैं। ग्राम प्रधान सुनीता चौधरी विकास न हो पाने की मूल वजह प्रशासनिक उदासीनता बताती हैं। ग्रामीण बिजेंद्र सिंह मानते हैं कि कृषि क्षेत्र में कुछ काम जरूर हुआ है।

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