मीडिया कॉन्क्लेव 2016 (Media Conclave 2016)

Submitted by RuralWater on Tue, 08/09/2016 - 12:20
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कान्हा मीडिया कॉन्क्लेव का विकास के मुद्दों पर औपचारिक और अनौपचारिक संवाद की प्रक्रिया को बढ़ावा देगा। कान्हा मीडिया कॉन्क्लेव में जिन प्रमुख वक्ताओं ने मुख्य वक्तव्य के लिए अपनी सहमति दी है उनमें सर्वोच्च न्यायलय के वकील प्रशांत भूषण, खेती के मामलों के जनपैरवीकार देविंदर शर्मा, सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वार्यमेंट के ​उपनिदेशक चंद्रभूषण, जैसलमेर के रामगढ़ गांव में रहने वाले किसान चतरसिंह जाम और पर्यावरणीय मुद्दों पर जमीनी काम करने वाले राजस्थान के ही लक्ष्मण सिंह हैं। इसके अलावा संवाद की इस प्रक्रिया में संपादकों और वरिष्ठ पत्रकारों का एक बड़ा समूह शामिल है, जिनकी सक्रिय भूमिका के कारण ही यह आयोजन महत्वपूर्ण हो पाता है।

 

 

( एजेंडा निम्नलिखित है, एजेंडा पर अभी काम चल रहा हैं, इसके वक्ताओं में और नाम जुड़ेंगे। आपके कुछ सुझाव हों तो आयोजक टीम को बताएं)  

 

विकास संवाद के साथियों के नंबर...

 

राकेश मालवीय : 9977958934, संतोष वैष्णव : 9407271884, अरविन्द : 9589477370,  गुंजन : 9425079680, कमलेश : 9827786440, मनोज गुप्ता : 9752071393, आरती : 8349737104, राजेश भदोरिया : 9827839633, सचिन जैन : 9977958934, राकेश दीवान : 9826066153, सौमित्र रॉय : 8889104455,

 

 

दसवां राष्ट्रीय मीडिया संवाद (13 से 15 अगस्त 2016, कान्हा)

विकास के नाकाम माडल

समय

कार्यक्रम

वक्ता

पहला दिन ,13 अगस्त

01:30 से  2:00 तक

पंजीयन स्वागत और भागीदारों का परिचय

 

दोपहर 2.00 से 2:15 बजे तक

पूर्व में हुए मीडिया कान्क्लेव से परिचय और झाबुआ में हुए संवाद की प्रस्तुति

राकेश मालवीय

दोपहर 2:15 से 2:30 बजे तक

विकास का माडल – कहाँ से कहाँ तक ?

राकेश दीवान

दोपहर 2:30 से 2:40 बजे तक

विकास और विकास के लक्ष्यों के मायने (सहस्त्राब्दि विकास लक्ष्यों से लेकर टिकाऊ विकास लक्ष्यों की तरफ)

सचिन जैन

दोपहर 2:40 से 3:00 बजे तक  

हम कान्हा में क्यों हैं और कान्हा ही क्यों?

ईशान अग्रवाल

दोपहर 3:00 से 5:00 बजे तक

देश की स्वतंत्रता के बाद का विकास का माडल – नजरिया, नीति और अब तक का हासिल - प्राकृतिक पर्यावरण, पारिस्थितिकी, स्वास्थ्य, समानता के परिप्रेक्ष्य में

चंद्रभूषण (निदेशक, सेंटर फार साइंस एंड एनवायरनमेंट, नई दिल्ली) , अरुण त्रिपाठी, अन्नू आनंद , अरविन्द मोहन

शाम 5:00 से 6:00  बजे तक

क्या विकास का मतलब केवल आर्थिक वृद्धि है?

आनन्द प्रधान, बाबा मायाराम,  गिरीश उपाध्याय,

भोजन संग संवाद सत्र, खुला और अनौपचारिक

दूसरा दिन, 14 अगस्त

सुबह 9:30 से 11:00 बजे तक  

देश की स्वतंत्रता के बाद अपनाया गया विकास का माडल – लोकतंत्र और न्याय के परिप्रेक्ष्य में  

प्रशांत भूषण (वरिष्ठ अधिवक्ता और लोक अधिकारों के सिपाही)

अम्बरीश मिश्र, भाषा सिंह

सुबह 11:00 से दोपहर 12:00 बजे तक

विकास और हिंसा के नए प्रतिमान – क्या विकास की प्रक्रिया में मानवीय मूल्यों का ह्रास हो रहा है?

चिन्मय मिश्र, श्रावणी सरकार, पशुपति शर्मा  

दोपहर 12:10 से 12:45 बजे तक

विकास मतलब वह स्थिति जिसमें अभाव के साथ सह-जीवन की तकनीक विकसित हो;

चतर सिंह जाम, (रामगढ़, जैसलमेर, राजस्थान, भूपेन सिंह

दोपहर 12:45 बजे से 01:.30 बजे तक

समाज का पर्यावरण और पर्यावरण का समाज – प्रचलित विकास की धारा से मुक्त होने का मतलब

लक्ष्मण सिंह, ग्राम विकास नवयुवक मंडल (लापोडिया, राजस्थान)

01:.30 बजे से 02:30 तक

भोजन सत्र

   
 

02:30 से 04.30 बजे तक  

देश की स्वतंत्रता के बाद अपनाया गया विकास का माडल – भारत के मूल क्षेत्र कृषि और विकास के मूल सूचक खाद्य संप्रभुता के सन्दर्भ में

देविंदर शर्मा (जाने माने खाद्य और कृषि नीति विश्लेषक), राकेश दीवान, जयदीप हार्डिकर, कश्मीर सिंह उप्पल, विनय प्रकाश त्रिपाठी   

चायकाल (10 मिनिट )

शाम 04.40 से 05.30 बजे तक

क्या विकास के जरिये हम स्वस्थ समाज की तरफ बढ़ रहे हैं या विकास के लिए स्वास्थ्य भी महज़ एक बाज़ार है ? विकास की रूपरेखा में भारतीय समाज का मूल स्वभाव कितना महत्वपूर्ण रहा? (आदिवासियों, बच्चों, महिलाओं और दलित समाजों के सन्दर्भ में)

अरविन्द मोहन,  चिन्मय मिश्र, जयराम शुक्ल, एम अख़लाक़,

शाम 05:30 से 06:30 बजे तक

विकास और मीडिया : क्या वास्तव में मीडिया विकास के स्वरुप और उसके माडल की समीक्षा करता है ?

शुभ्रांशु चौधरी, प्रकाश हिन्दुस्तानी, प्रसून मिश्र, पशुपति शर्मा,  विश्व दीपक    

 

सांस्कृतिक संध्या

 

तीसरा दिन, 15 अगस्त

सुबह 09.00 बजे से 11:30 बजे तक

मीडिया के साथ संवाद की प्रक्रिया – आगे का स्वरुप क्या हो? इसे एक खुली हुई और साझा पहल के आकार में कैसे ढाला जा सकता है?


समापन

 

 

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