ट्राईबेन्यूरॉन-मेथाइल की मृदा और जल में भवितव्यता (Fate of tribenuron-methyl in soil and water)

Submitted by Hindi on Tue, 08/30/2016 - 16:03
Source
भारतीय वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान पत्रिका, 01 जून, 2012

सारांश


ट्राईबेन्यूरॉन के स्थायित्व का अध्ययन विभिन्न मृदा प्रकारों और पी.एच. मान वाली मृदा नामतः दोमट, काली और लाल मृदा में विभिन्न नमी स्तरों पर स्थिर खेतीय क्षमता पर और जल में विभिन्न पीएच मानों यथा 4.7 और 9.2 पर प्रयोगशाला में 1.0 और 2.0 मिलीग्राम/किग्रा के सान्द्रण पर किया गया। नमूनों का निष्कर्षण निश्चित समयान्तराल पर विश्लेषण एचपीएलसी से किया गया है। ट्राईबेन्यूरॉन का क्षय दोमट और काली मिट्टी में 91.04-90.41% होता है जबकि लाल मृदा में यह पीएच मान 6.64 पर प्रबलीकरण के 5 दिन बाद 94.7% होता है। अर्द्ध आयु मान की गणना प्रथम कोटि गतिकी से की गई जो लाल मृदा में पीएच मान 6.1 पर 1.67 और दोमट मृदा में पीएच मान 8.1 पर 3.47 दिन पायी गई है जो यह प्रदर्शित करती है कि ट्राईबेन्यूरॉन क्षारीय मृदा के साथ अधिक स्थायी और अम्लीय मृदा में तेजी से निम्नीकृत होता है। उदासीन पीएच मान पर धीमा क्षय दर्ज किया गया।

Abstract


Persistence of tribenuron in different soil types (namely alluvial, black and red soil) having different PH values maintained at field capacity moisture regime and in water at three different pH level i.e. 4, 7 and 9.2 respectively was studied under laboratory condition at two levels of application, 1.0 and 2.0 mg-1. Samples were processed periodically and analyzed by HPLC. Tribenuron dissipated to 91.04-90. 41% in alluvial and black soil, whereas in red soil with PH 6.64 it dissipated to 94.7% by day 5 after fortification. The half-life values calculated from the first order dissipation kinetics varied from 1.67 in red soil with pH 6.1 to 3.47 in alluvial soil with pH 8.1, indicating that tribenuron is more persistent in soil with basic pH and degrades faster in acidic soil. Slowest dissipation was record at neutral and basic pH.

प्रस्तावना


गेहूँ की फसल के साथ प्रमुख प्रतिद्वद्वी खरपतवरों में एविना स्टेरिलिस प्रजाति ल्यूडोविसिना, एविना फैटुआ, फैलेरिस माइनर, पोआ एनुआ, सर्सियम आर्वेन्सिस, कॉनवॉल्वुलस आर्वेन्सिस, कीनोपोडियम एल्बम, कीनोपोडियम म्यूरेल, फ्यूमेरिया, पार्वीफ्लोरा, कार्थमस, ऑक्सीएकेन्था और यूफोर्बिया हेलियोस्कोपिया, स्पर्गुला आर्वेन्सिस, कोरोनोपस, डिडीमस आदि सम्मलित हैं। ये मृदा उर्वरता/पोषक तत्वों, उपलब्ध नमी, स्थान और सूर्य के प्रकाश के लिये फसलों से प्रतिस्पर्धा करते हैं। जिसके परिणामस्वरूप उपज घट जाती है। खरपतवारों का नियंत्रण मानव बहुत पहले से स्वयं और पशु चलित यंत्रों से करता रहा है। ये क्रियाएं बहुत महँगी और परिश्रम आधारित हैं। भूपरिष्करण की बढ़ती यांत्रिक क्रियाओं और लगातार बढ़ती हुई मजदूरों के कारण रासायनिक खरपतवारनाशियों के प्रयोग में रुचि बढ़ी है। तथापि खरपतवारनाशियों का अविवेकपूर्ण प्रयोग उत्पादकता में लाभ के बजाय हानिकारक सिद्ध होता है। अधिक लाभ के लिये सर्वोत्तम शाकनाशी का चयन, उचित समय और उचित प्रयोग पर विचार करना आवश्यक है विभिन्न पर्यावरणीय दशाओं में पीड़कनाशी भिन्न व्यवहार करते हैं।

पीड़कनाशी के प्रभावों का मूल्यांकन करने के लिये मृदा प्रकार, मृदा नमी, जलीय, पीएच अवसाद प्रकारों की जानकारी आवश्यक होती है। एक पीड़कनाशी की जैवीय उपलब्धता जीवों में विषालुता प्रदर्शित करने का संकेत है। एक बलुई मिट्टी पीड़कनाशी कणों के साथ इतनी नहीं जुड़ती जितनी कि चिकनी मिट्टी। इसलिये बलुई मिट्टी में पीड़कनाशी की चलनता ज्यादा होती है और बलुई मिट्टी में रहने वाले जीवों को ज्यादा खतरा रहता है। मृदा नमी और पीएच. पीकड़नाशी की निम्नीकरण दर को बहुत प्रभावित कर सकते हैं। इसलिये पर्यावरण में इनका स्थायित्व और जैव उपलब्धता का अध्ययन किया जाना आवश्यक है। इसलिये यह प्रयोग न्यू सल्फोनिल यूरिया शाकनाशी, ट्राईबेन्यूरॉन-मेथाइल के विभिन्न मृदा प्रकार और जलीय माध्यम में स्थायित्व के आकलन के लिये आलेखित किया गया है (चित्र 1)।

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सामग्री एवं विधि


विभिन्न प्रकार की मृदाओं नामतः दोमट, काली, लाल और विभिन्न पीएच मान वाली मृदाओं में दो अनुप्रयोग दर 1.0 और 2.0 माइक्रोग्राम और स्थिर खेतीय क्षमता पर प्रयोगशाला में ट्राईबेन्यूरॉन के स्थायित्व का अध्ययन किया गया। एक निश्चित समयान्तराल पर नमूनों का निष्कर्षण किया गया और शोधन के पश्चात एच पी एल सी के द्वारा विश्लेषण किया गया।

तीन अलग-अलग पीए मानों क्रमशः 4,7 और 9.2 पर ट्राईबेन्यूरॉन के स्थायित्व का जल में अध्ययन किया गया। बफर टेबलेट (क्वालिजेन मेक) को जल में घोलकर पीएच 4.7 और 9.2 का (800 मिली) प्रत्येक का विलयन तैयार किया गया। बफर विलियन को 1 माइक्रोग्राम/मिली से प्रबलीकृत किया गया। इसके लिये विश्लेषण ग्रेड का ट्राईबेन्यूरॉन का माइक्रोग्राम/मिली सान्द्रता का संग्रह विलयन प्रयोग किया। नमूने 0,3,5,7,10,15,30,45,60,90 और 120 दिनों के अंतराल पर लिये गये। उपचारित विलयन को 500 मिली क्षमता वाले (20 मिली/टयूब) ट्यूब जुड़े फ्लास्क में 25±1डिग्री C और 90 प्रतिशत आपेक्षित आर्द्रता वाले बी ओ डी इन्क्यूबेटर में रखा गया। प्रत्येक नमूनों के दिन, नमूने प्रत्येक विलयन से तीन समान मात्रा में लिये गये। जलीय नमूनों को पृथक्कारी फलन में लेकर 10 प्रतिशत नमक के जलीय विलय में तनु करने के पश्चात (3x30 मिली) डाइक्लोरोमेथन से तीन बार पृथक्कीकरण किया गया। डाइक्लोरोमेथन निष्कर्षण को घूर्णक वाष्पीकरण यंत्र से वाष्पीकृत किया गया और अवशेष को एच पी एल सी ग्रेड एसीटोनाइट्राइल में घोला गया और एच पी एल सी से विश्लेषण किया गया।

परिणाम एवं विवेचना


ट्राईबेन्यूरॉन दोमट और काली मृदा में 91.04 प्रतिशत 90.41 प्रतिशत तक क्षयित होता है जबकि लाल मृदा में पीएच मान 6.64 के साथ यह प्रबलीकरण के 5 दिन बाद 94.7 प्रतिशत तक क्षयित होता है (चित्र 2) अर्द्ध आयु की गणना प्रथम काटि क्षय गतिकी से की गई जो लाल मृदा में पीएच 6.1 के साथ 1.67 और दोमट मृदा में पी एच 8.1 के 3.47 है (सारणी 1) जिससे यह पता चलता है ट्राईबेन्यूरॉन क्षारीय पी एच के साथ ज्यादा स्थाई है और अम्लीय मृदा में तेजी से निम्नीकृत होता है। पीएच 4.0, 7.0 और 9.2 पर प्रारम्भिक संचय क्रमशः 0.965 और 0.971 माइक्रोग्राम/मिली पाया गया (सारणी 2) 10 दिनों में उपस्थिति 39.8-84.9 पायी गई जबकि 60 दिनों में पीएच 7.0 और 9.2 पर क्षय 98.8 और 94.8 प्रतिशत पाया गया सम्पूर्ण क्षय पीएच 4 (22.3 प्रतिशत) पाया गया जो पीएच 9.2 (21.0 प्रतिशत) और पीएच 7 पर (8.5 प्रतिशत) था (चित्र 3)। ट्राईबेन्यूरॉन का अर्द्ध-आयु काल पीएच 4 से 9.2 पर 7.34-17.63 दिन पाया गया जो उदासीन और क्षारीय माध्यम में उच्च स्थायित्व और अम्लीय माध्यम में उच्च क्षय दर दर्ज की गई (चित्र 4)।

Fig-2SaraniFig-3,4परिणामों से ज्ञात हुआ है कि ट्राईबेन्यूरॉन मेथाइल का क्षारीय माध्यम की तुलना में अम्लीय माध्यम में तेजी से क्षय होता है उदासीन और क्षारीय माध्यम में मंद क्षय दर्ज किया गया। अम्लीय पीएच में ट्राईबेन्यूरॉन का जल में तेजी से क्षय यूरिया के अणु में यूरिया लिंकेज के जल अपघटन के कारण होता है।

संदर्भ
1. Khan MI, Hassan G, Khan IA & Khan I, Studies on post-emergent chemical weed control in wheat (Triticum aestivaum 1.) Pak J Weed Sci. Res, 9 (2003) 147-152.

2. Pasquer F, Ochsner U, Zarn J and Keller B, Common & distinct gene expression patterns induced by herbicides 2,4- dichlorophenoxyacetic acid, cinidon-ethyl and tribenuron methyl in wheat, Pest Manag Sci., 62 (2006) 1155-67.

3. Annonomous, EFSA Scientifice Report : Peer review of the pesticide risk assessment of the tribenuron, 15 (2004) 1-52.

4. Elliott JA & Cessna JA, Transport of two urea herbicides in runoff from border dyke irrigation J Soil Water Conservation 65 (2010) 298-303.

सम्पर्क


ईरानी मुखर्जी, अमन कुमार एवं टी के दास, Irani Mukherjee, Aman Kumar & T K Das
कृषि रसायन संभाग, सस्य विज्ञान संभाग, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली 110012, Division of Agricutural Chemicals, Division of Agronomy, IARI, New Delhi 110012


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