जापान के तोहोकू क्षेत्र में आया ग्रेट भूकम्प

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Source
अश्मिका, जून 2011

11 मार्च, 2011, दिन शुक्रवार, समय 11 बजकर 16 मिनट (भारतीय समय) पर पूर्वी जापान के तोहोकू शहर के पास एक बहुत ही विनाशकारी भूकम्प आया जिसका परिमाण 9.0 (Mw) था और यह भूकम्प तोहोकू भूकम्प के नाम से जाना गया। हालाँकि सरकार तौर पर इसका नाम ‘ग्रेट ईस्ट जापान भूकम्प रखा गया। अभिकेंद्र तोहोकू के ओहीका पेन्निसुला से लगभग 70 किमी दूर पूर्व में था। उद्गम स्थान लगभग 32 किमी गहराई में पानी के नीचे था (चित्र 1)।

Fig-1यह जापान को हिलाने वाला बहुत ही शक्तिशाली भूकम्प था। यह संसार के पाँच शक्तिशाली भूकम्पों (M>9.0); में से एक है जो कि आधुनिक भूकम्प रिकॉर्डिंग सिस्टम, 1900 में स्थापित होने के बाद रिकॉर्ड किए गए हैं।

पाँच शक्तिशाली भूकम्पों में, 1952 में आया कामचातका, रसिया भूकम्प (Mw =9.0); 1960 में आया वालडिकिया, चिली (Mw =9.5); 1964 में आया अलास्का, यू.एस.ए. भूकम्प (Mw=9.2); 2004 में आया इंडियन ओशन भूकम्प (Mw =9.3) एवं हाल में आया तोहोकू भूकम्प (Mw =9.0) हैं। इस भूकम्प ने 38.9 मीटर ऊँची विनाशकारी सूनामी लहरें उत्पन्न की। इन प्रलयकारी लहरों ने समुद्र तट से 10 किमी दूर तक तबाही मचाई। विनाशकारी भूकम्प के बाद आई सूनामी जापान में बहुत ही भयानक मंजर छोड़ गई है। जापान के अलावा प्रशांत महासागर से सटे देशों इंडोनेशिया, ताइवान, फिलीपींस, न्यूजीलैंड, आस्ट्रेलिया, रूस सहित लगभग 20 देशों में भी सूनामी की चेतावनी जारी की गई थी (चित्र 2)।

Fig-2सूनामी लहरों के उठने के वैसे कई कारण होते हैं। लेकिन सबसे ज्यादा असरदार कारण भूकम्प है। जब तेज भूकम्प की वजह से समुद्र की ऊपरी परत अचानक खिसक कर आगे बढ़ जाती है तो समुद्र अपनी समानान्तर स्थिति में ऊपर की तरफ बढ़ने लगता है जो लहरें उस वक्त बनती हैं वो सूनामी लहरें होती है। लहरों के बनने से समुद्र के अंदर अचानक बड़ी तेज हलचल होने लगती है तो उसमें उफान उठता है और बड़ी तरंगदैर्ध्य की लंबी लहरों का रेला उठना शुरू हो जाता है जो जबरदस्त आवेग के साथ आगे बढ़ता है उन्हीं लहरों के रेले को सूनामी कहते हैं। जैसे-जैसे रेला समुद्र तट के निकट आता है तो यह लहरें बेहद ऊँची होती जाती हैं क्योंकि समुद्र तट के समीप पानी का स्तर कम होता जाता है। दरअसल सूनामी जापानी शब्द है जो सू और नामी से मिलकर बना है ‘सू’ का अर्थ है समुद्र तट और ‘नामी’ का अर्थ है लहरें।

भूकम्प से सूनामी लहरों के बनने के लिये भूकम्प का केंद्र समुद्र के अंदर या उसके आस-पास होना जरूरी है। सूनामी लहरें समुद्री तटों पर भीषण तरीके से हमला करती हैं और जानमाल का बहुत नुकसान करती हैं। 11 मार्च, 2011 से पहले 12 जुलाई 1993 को जापान में आए सूनामी ने बड़ी तबाही मचाई थी। इसमें 120 लोग मारे गए थे। सूनामी की वजह बने इस भूकम्प का परिणाम रिक्टर स्केल पर 7.8 आंका गया था (इस सूनामी से जापान का होक्कईदो द्वीप इसका शिकार हुआ था)। हाल ही में आए इस भूकम्प में जापान के शहर सेंदाई, मियामी और फुकूशिमा पूरी तरह तबाह हो गए हैं (चित्र 3)।

Fig-3ये शहर भूकम्प के झटकों को तो झेल गए थे लेकिन झटकों के बाद आई खूंखार सूनामी की लहरों ने सब कुछ तबाह कर दिया। जिस समय भूकम्प आया इमारतें डोलने लगी, सब घबराकर नीचे भागे वहाँ सूनामी का सैलाब उनका पीछा कर रहा था। देखते ही देखते प्रलयकारी लहरों ने जानमाल को बहुत नुकसान पहुँचाया। इस भूकम्प में हजारों लोगों की जान चली गई, अवसंरचना को भारी नुकसान हुआ बिजली, रेल और हवाई सेवा ठप्प हो गई। सूनामी लहरों से बहुत सारी परमाणु दुर्घटनायें हुईं। इस सदी की यह सबसे ज्यादा भयानक प्राकृतिक आपदा थी। इससे कुल 300 बिलियन यूएस डॉलर से ज्यादा का नुकसान हुआ। जापानी नेशनल पुलिस एजेंसी के अनुसार जापान के 18 जिलों में कुल 15,057 लोगों की मृत्यु हो गई, 5282 लोग घायल हुए, 9121 लोग लापता हैं तथा 1,25,000 मकान टूटे या पूरी तरह ध्वस्त हुए। भूकम्प तथा सूनामी से ज्यादातर संरचनाओं की तबाही हुई जैसे संचार व्यवस्था, आवागमन व्यवस्था, रोड तथा रेल नेटवर्क। कई जगहों पर आग लग गई एवं बाँध ध्वस्त हो गए (चित्र 4)।

Fig-4भूकम्प के बाद उत्तर-पूर्वी जापान में लगभग 4.4 मिलियन घरों में बिजली तथा 1.5 मिलियन घरों में पीने का पानी नहीं था। तीन परमाणु संयंत्रों में हाइड्रोजन गैस के कारण विस्फोट हो गया था। इन परमाणु संयंत्रों में ठण्डा रखने की व्यवस्था ध्वस्त होने कारण संयंत्रों के बाहरी आवरण वाले चैम्बरों में विस्फोट हाइड्रोजन गैस बनने की वजह से हुआ था। वहाँ परमाणु विकिरण से बचने के लिये जापानी सरकारी तंत्र ने फूकुसिमा परमाणु प्लांट-1 के 20 किमी के दायरे से तथा परमाणु पावर प्लांट-2 के 10 किमी के दायरे से सभी लोगों को हटा लिया था। अमेरिका ने अपनी सभी नागरिक 80 किमी के दायरे तक हटा लिये थे। 11 मार्च, 2011 के ग्रेट भूकम्प से पहले कई बड़े आकार के फोर शाक्स रिकार्ड हुए थे तथा सैकड़ों आफ्टर शॉक्स रिकार्ड किए गए थे। इनमें से 800 से ज्यादा आफ्टर शाक्स 4.5 परिमाण या उससे ज्यादा परिमाण के थे। जापान मौसम विभाग एजेंसी ने अपने भूकम्प की पूर्व चेतावनी व्यवस्था जिसमें लगभग 100 सिस्मोग्राफ प्रणाली कार्यरत है, का उपयोग करके भूकम्प के एक मिनट पहले ही लोगों को सचेतकर कई लोगों की जान बचाई। जिस क्षेत्र में यह भूकम्प आया वहाँ पैसिफिक प्लेट उत्तरी अमेरिकन प्लेट के नीचे घुस रही है जो उत्तरी होन्सू के नीचे है (चित्र 5)।

Fig-5पैसिफिक प्लेट 8 से 9 सेंटीमीटर प्रति वर्ष की दर से गतिमान है और होन्सू के नीचे बड़ी मात्रा में ऊर्जा उत्सर्जित कर रही है। यह भूकम्प स्थिति, गहराई तथा फोकल मैकेनिज्म के आधार पर थर्स्ट फाल्ट भूकम्प था जोकि प्लेट बाउंड्री के साथ घुसाव के कारण उत्पन्न हुआ था। इस भूकम्प में 1.9 ± 0.5 × 1017 जूल सतही ऊर्जा उत्सर्जित हुई। जिसने इतना तीव्र कंपन तथा सूनामी लहरें उत्पन्न की। यह ऊर्जा 2004 में 9.3 परिणाम के भारतीय समुद्र भूकम्प में उत्सर्जित ऊर्जा की लगभग दोगुनी थी।

जापान में आए इस भीषण भूकम्प ने पृथ्वी को अपनी धुरी पर चार इंच खिसका दिया है। इसके साथ ही इस भूकम्प के कारण जापान का एक द्वीप भी अपने मूल स्थान से खिसक गया। अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण के एक भू-भौतिकी विशेषज्ञ डा. केनेथ हडनट ने कहा कि एक जीपीएस स्टेशन अपनी जगह से आठ फीट खिसक गया है। डा. हडनट ने जब एक अधिकारिक नक्शे से उस भूभाग की ताजा स्थिति का मिलान किया तो पाया कि एक बड़ा भूभाग अपनी पूर्व स्थिति से इतने ही अंतर के साथ खिसक गया है। उधर इटली की एक वैज्ञानिक संस्था ने कहा है कि इस भूकम्प के कारण पृथ्वी अपनी धूरी पर चार इंच खिसक गई है। भू-भौतिकी विशेषज्ञ डॉ. शेंगजाओ चेन ने कहा कि टेक्टानिक प्लेट के 18 मीटर खिसक जाने के कारण पृथ्वी की सतह पर 400 किमी लंबे और 160 किमी चौड़े हिस्से में टूट-फूट हुई है।

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सुशील कुमार
वा.हि.भ.सं., देहरादून


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