मानचित्र इतिहास और विकास

Submitted by Hindi on Thu, 10/27/2016 - 14:22
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विज्ञान आपके लिये, जनवरी-मार्च, 2016

सेलेस्टियल नक्शाजब कभी भी हम किसी जगह, प्रदेश या देश की राजनीतिक या भौतिक सीमाओं की बात करते हैं या किसी स्थलाकृति, जनसंख्या, जलवायु आदि को दर्शाने की कोशिश करते हैं तो हम मानचित्र अथवा नक्शे का सहारा लेते हैं। क्या आप जानते हैं कि मानचित्र की उत्पत्ति कैसे हुई, मानचित्र कितने प्रकार के होते हैं और इनकी क्या उपयोगिता है?

मानचित्र को अंग्रेजी में मैप (Map) और उर्दू में नक्शा कहा जाता है। ‘‘मैप’’ शब्द मध्यकालीन लैटिन ‘‘मापा मुंडी’’ से आता है, जहाँ ‘‘मापा’’ का मतलब नैपकिन या कपड़ा है और ‘‘मुंडी’’ का मतलब दुनिया है। इस प्रकार, ‘‘नक्शा’’ दुनिया की सतह के द्विआयामी स्वरूप को दर्शाने वाला शब्द बन गया।

मैपों का अस्तित्व संभवतः 8000 साल से भी पहले का है। नक्शा बनाने की विधियों को प्राचीन ग्रीस में काफी उन्नत बनाया गया था। एक गोलाकार पृथ्वी की धारणा को अरस्तू के समय तक यूनानी दार्शनिकों के बीच मान्यता प्राप्त हो गई थी और तब से समस्त भूगोलविदों द्वारा इसे स्वीकारा गया है। नक्शे के इतिहास की शुरुआत में रॉक नक्काशियों से बनाए गए ग्रीस, बेबीलोन और एशिया के प्राचीन नक्शे शुमार हैं। प्राचीन समय से आज तक लोगों ने पहचानने, समझने और आस-पास निगेटिव करने के लिये आवश्यक उपकरण के रूप में नक्शे का उपयोग किया है।

17वीं से 19वीं सदी के दौरान, नक्शे और अधिक सटीक और तथ्यात्मक हो गए। वैज्ञानिक तकनीक के उपयोग के साथ, विभिन्न देशों ने राष्ट्रीय नक्शों के कार्यक्रमों को अपनाया और उनकी शुरुआत की। प्रथम विश्वयुद्ध के बाद, हवाई फोटोग्राफी के व्यापक उपयोग से नक्शे बनाने की प्रक्रिया में काफी मदद मिली।

फील्ड सर्वे और रिमोट सेंसिंग का संयोजन आधुनिक नक्शा निर्माण का आधार है। नक्शा एक क्षेत्र विशेष का एक द्विआयामी दृश्य है। यह वस्तुओं, क्षेत्रों, विषयों एवं अंतरिक्ष के तत्वों के बीच के संबंधों को उजागर करने के लिये एक प्रतीकात्मक चित्रण है। मैप राजनीतिक सीमाओं, भौतिक सुविधाओं, सड़कों, स्थलाकृति, जनसंख्या, जलवायु, प्राकृतिक संसाधनों और आर्थिक गतिविधियों को दर्शाने का प्रयास करते हैं।

स्थलाकृतिक नक्शे


आधुनिक नक्शों में एक स्थलाकृतिक नक्शे की विशेषता बड़े पैमाने पर विस्तार एवं मात्रात्मक ऊँचाई से है। आजकल, इन नक्शों में समोच्च (एक जैसी ऊँचाई) रेखाओं का उपयोग किया जाता है। एक समोच्च रेखा बराबर ऊँचाई के स्थानों को जोड़ने के लिये एक लकीर है।

कनाडा स्थलाकृतिक सूचना सेन्टर के अनुसार, ‘‘स्थलाकृतिक नक्शा जमीन पर सांस्कृतिक और प्राकृतिक सुविधाओं का एक विस्तृत एवं सटीक ग्राफिक दर्शन है।’’

नक्शानवीसी


सपाट सतह पर पृथ्वी को दर्शाना तथा इसके अध्ययन एवं निरूपण की प्रक्रिया को नक्शानवीसी या नक्शा बनाना कहते हैं और जो व्यक्ति इस क्राफ्ट को करता है, उसे नक्शानवीस कहा जाता है।

सड़क के नक्शे आज के दौर में शायद सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाले नक्शे हैं, जिनमें शामिल हैं वैमानिक और समुद्री मार्ग चार्ट, रेल नेटवर्क के नक्शे, लम्बी पदयात्रा और साइकिल नक्शे आदि। नगरपालिकाओं, कर आकलन संस्थाओं, आपातकालीन सेवाओं के प्रदाताओं और अन्य स्थानीय एजेंसियों द्वारा स्थानीय सर्वेक्षण करके नक्शे बनाए जाते हैं।

भारतीय सर्वेक्षण विभाग नक्शों और सर्वेक्षण के लिये भारत में मानक केन्द्रीय इंजीनियरिंग एजेंसी है। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी के प्रदेशों को मजबूत करने में मदद करने के लिये 1767 में स्थापित, यह भारत सरकार के सबसे पुराने अभियांत्रिकी विभागों में से एक है भारतीय सर्वेक्षण के प्रतिष्ठित इतिहास में विलियम और जाॅर्ज एवरेस्ट के तत्वाधान में महान त्रिकोणमितीय सर्वेक्षण की हैंडलिंग और माउंट एवरेस्ट की खोज शामिल है।

सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा प्रकाशित नक्शे और अप्रतिबंधित श्रेणी के नक्शे इनके कई भू-स्थानिक डेटा केन्द्रों से प्राप्त किये जा सकते हैं। प्रतिबंधित श्रेणी के नक्शों के लिये सक्षम अधिकारियों से अनुमोदन की आवश्यकता होती है। कई अन्य नियम भारतीय सर्वेक्षण के नक्शों की बिक्री और उपयोग को नियंत्रित करते हैं। केवल भारतीय नागरिक ही इन स्थलाकृतिक नक्शों को खरीद सकते हैं और ये किसी भी कारण से भारत से निर्यात नहीं किए जा सकते हैं।

नक्शे के प्रकार


प्रायः नक्शे अग्रलिखित प्रकार के हो सकते हैं: जलवायु नक्शे, भौतिक नक्शे, राजनीतिक नक्शे, सड़क के नक्शे, विषयगत नक्शे, मौसम के नक्शे, ऊँचाई के नक्शे और विश्व नक्शा। एक ही साइज के विभिन्न प्रकार के नक्शों का संकलन एटलस कहलाता है।

विश्व नक्शा

नक्शों के उपयोग


नक्शे सभी के लिये उपयोगी हैं, चाहे वो कोई आम आदमी हो या कोई टेक्नोक्रेट। क्योंकि नक्शों में अथाह जानकारी होती है। नक्शे आमतौर पर कई कार्यों के लिये इस्तेमाल किए जाते हैं जैसे कि विश्लेषण, पुष्टि, संचार, सजावट, संग्रह, निवेश, अन्वेषण, परिकल्पना प्रोत्साहन, संचालन एवं नेवीगेशन, नियंत्रण और योजना, सूचना संग्रहण एवं ऐतिहासिक संदर्भ।

नक्शे कैसे बनाये जाते हैं?


नक्शे अपने प्रकार और दिखावे में अलग-अलग हो सकते हैं, किन्तु उन्हें बनाने की विधि समान है। अच्छे नक्शों के उत्पादन में बेहतरीन योजना एवं डिजाइन की आवश्यकता होती है। प्रमुख बिन्दु जिन्हें नक्शा बनाते हुए ध्यान में रखा जाना है वो इस प्रकार हैं :

1. उत्पाद परिभाषित करना : नक्शा बनाने के लिये कारण, लक्षित दर्शक, बजट और उपलब्ध प्रौद्योगिकी, नक्शा आकार और स्वरूप निर्धारित करने में मदद करता है।

2. डिजाइन : डिजाइन की प्रक्रिया एक अच्छे नक्शे का निर्माण करने के लिये महत्त्वपूर्ण है। रेखाचित्र, किसी न किसी लेआउट और विकल्प नक्शों के अनुरूप होते हैं।

3. डेटा प्राप्‍त करना : कुछ नक्शे क्षेत्र सर्वेक्षण या हवाई तस्वीरों से लिये गये नये डेटा का उपयोग करते हैं, लेकिन ज्यादातर नक्शे मौजूदा नक्शों से ही बनाये जाते हैं। अपरिक्षित विशेषताएँ, चयनित, सम्पादित और अतिरिक्त जानकारी के स्रोतों के समर्थन द्वारा शामिल की जाती हैं।

4. नक्शा उत्पादन : नक्शा एक कलाकृति है जोकि मैन्युअल या डिजिटल रूप में बनाया जाता है। यह जानकारी के स्रोत पर निर्भर करता है कि किसी नक्शे को स्कैन करके उसका डिजिटलीकरण किया जाए या इसे मौजूदा डेटासेट से चयनित तत्वों से बनाया जाए या फिर इसे सावधानी से हस्त संकलित किया जाए। शैली जो भी हो नक्शा तैयार करते समय रंग, डिजाइन, रेखाओं का वजन, प्रतीक/आकार आदि उपयोग के सभी प्रकार के नियम लागू रहते हैं।

5. जाँच और प्रूफिंग : जारी करने से पहले नक्शों की त्रुटियों के लिये जाँच की जाती है। त्रुटियों को सही करके अंतिम अनुमोदन के लिये नये नक्शे बनाए जाते हैं।

6. अन्तिम उत्पादन : स्क्रीन उपयोग के लिये नक्शे डिजिटल फार्म में रहते हैं तथा कागजी नक्शे को आमतौर पर चार रंगों - सियान, मैजेंटा, यलो एंड ब्लैक को संयुक्त करके रंगों की पूरी रेंज बनाई जाती है।

भारतीय स्थलाकृतिक नक्शा

नक्शों को कैसे समझें


नक्शों को प्रभावी ढंग से पढ़ा जा सके इसके लिये पहले प्रतीकों, निर्देशों, रेखाओं और लेजेंड आदि सबको समझने की आवश्यकता होती है।

1. कम्पास पढ़ना : सभी नक्शों के शीर्ष पर उत्तर दिशा को दर्शाया जाता है, जिसके द्वारा उस जगह की दिशा का अनुमान लगाया जा सके। कम्पास नक्शे की क्रॉस जैसी आकृति के रूप में दर्शाया जा सकता है। यदि कुछ भी नहीं बताया गया है तो नक्शे के शीर्ष को उत्तर दिशा माना जाता है।

2. नक्शा स्केल : अलग-अलग स्‍क्‍ेलों पर भिन्न-भिन्न आकारों में नक्शे बनाए जाते हैं। स्केल (जोकि नक्शे पर और वास्तविक जमीन पर फासलों/दूरी का अनुपात है) नक्शों के नीचे एक अनुपात के रूप में दर्शाया जाता है। यह कुछ इस तरह से दिखाई देंगे जैसे 1:50,000 जो इंगित करता है कि नक्शे पर 1 यूनिट वास्तविक जीवन में 50,000 यूनिट के बराबर है।

3. अक्षांश और देशांतर : अक्षांश भूमध्य रेखा के उत्तर या दक्षिण से डिग्री में दूरी है। देशांतर ग्रीनविच रेखा के पूर्व या पश्चिम से डिग्री में दूरी है। अक्षांश और देशांतर नक्शे पर दायें-बाएँ, ऊपर-नीचे संख्या के रूप में दर्शाए जाते हैं।

4. ऊँचाई की रेखाएँ : यह रेखाएँ नक्शे पर जमीन की ऊँचाई या समतलता को दर्शाती हैं। प्रत्येक रेखा समुद्र के स्तर से ऊपर एक औसत ऊँचाई का प्रतीक है। जब ये रेखाएँ साथ दिखाई देती हैं तब इसका मतलब है ढाल खड़ी है अन्यथा ढाल तुलनात्मक रूप से कम है।

5. मुद्रा लेख (लेजेंड) या कुंजी : मैप्‍स विशेष वस्‍तुओं को विशेष प्रतीकों से दर्शाते हैं। चूँकि नक्शों के स्रोत अनिवार्य रूप से किसी भी मानक के अनुरूप नहीं हैं, इसलिये मुद्रालेख नक्शों पर ही दिए जाते हैं और हमेशा उपयोगकर्ता को सबसे पहले इन्हें देखना चाहिए।

सामान्यतः जो लेजेंड या कुंजी नक्शे में उपयोग होते हैं, वे इस प्रकार हैं:

i. सड़कों, गलियों और रास्तों को विभिन्न आकार व रंग की रेखाओं में चित्रित करके दिखाया जाता है।
ii. पहाड़ सफेद या भूरे रंग के रूप में दिखाए जाते हैं।
iii. नदियाँ, झील, समुद्र और अन्य जल निकायों को नीले रंगों से दिखाया जाता है।
iv. वन, पार्क या बड़े क्षेत्र की हरियाली तथा गोल्फ कोर्स हरे रंग से दिखाए जाते हैं।
v. इमारतें भूरे या काले रंग में दिखाई जाती हैं।

नक्शा बनाने के लिये उपकरण


नक्शा बनाने के लिये बाजार में विभिन्न प्रकार के उपकरण उपलब्ध हैं जैसे कि :

आर्कजीआईएस/क्युजीआईएस : आर्कजीआईएस/क्युजीआईएस का नक्शे बनाने, डेटा संकलन, विश्लेषण, भौगोलिक जानकारी साझा करने, जानकारी का उपयोग और जानकारी डेटाबेस के आयोजन के लिये प्रयोग किया जाता है।

एडोब इलस्ट्रेटर : एडोब इलस्ट्रेटर एडोब सिस्टम्स द्वारा विकसित ग्राफिक्स डिजाइन सॉफ्टवेयर है। यह ग्राफिक्स बनाने के लिये प्रमुख वेक्टर ड्राइंग सॉफ्टवेयर में से एक है। यह विंडोज और मैप आॅपरेटिंग सिस्टम दोनों पर उपलब्ध है।

मापबिलषर : मापबिलषर एडोब इलस्ट्रेटर एक प्लगइन है जो नक्शे की उच्च गुणवत्ता के निर्माण, मुद्रण और प्रकाशन के लिये भौगोलिक सूचना प्रणाली है जो शक्तिशाली ग्राफिक्स के बीच की खाई को आपस में जोड़ता है।

मैपइन्फो : मैपइन्फो एक प्रभावशाली नक्शों का उपकरण है जो अब पिटनी बोवेस सॉफ्टवेयर कहलाता है। यह डेटा और भूगोल के बीच साहचर्य डिजाइन को आसानी से प्रदर्शित करने के लिये बनाया गया है।

सम्पर्क


ए. पी. खान
वैज्ञानिक-डी, जियोस्पेटियल सॉफ्टवेयर डिविजन, डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स एप्लिकेशन लेबोरेटरी (डीआरडीओ), देहरादून (उत्तराखंड), ई-मेल : ajazepk@gmail.com


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