बाँधों के बारे में मूलभूत जानकारियाँ

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बाँधों, नदियों एवं लोगों का दक्षिण एशिया नेटवर्क (सैण्ड्रप), द्वारा हिन्दी मार्गदर्शिका प्रकाशित, जून 2007

बाँध क्या होता है?


बाँध नदियों के आर-पार बनायी जाने वाली एक दीवार होती है। बाँध मिट्टी, पत्थर या कंक्रीट से बनाया जा सकता है। वे नदी के बहाव को रोकते हैं, कृत्रिम झीलों का निर्माण करते हैं जिन्हें जलाशय कहा जाता है। जलाशय में जमा जल का इस्तेमाल बिजली उत्पादन, सिंचाई एवं पेयजल की आपूर्ति, नौकाओं के लिये आवागमन व्यवस्था, बाढ़ नियंत्रण एवं मनोरंजन के लिये किया जा सकता है। कुछ बाँध इनमें से एक से ज्यादा उपयोग के लिये (बहुउद्देशीय) बनाये जाते हैं।

विश्व भर में 52,000 से ज्यादा बड़े बाँध (15 मीटर से ऊँचे) बनाए जा चुके हैं। चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका (यू.एस.ए.) एवं भारत में सबसे ज्यादा बड़े बाँध हैं। विश्व के सबसे बड़े बाँध 250 मीटर से ज्यादा ऊँचे (या 60 तल के इमारत से ऊँचा) एवं कई किमी चौड़े होते हैं। इनकी कीमत अरबों रूपये में होती है एवं इन्हें बनने में 10 साल से ज्यादा समय लगता है।

भारत सरकार के केन्द्रीय जल आयोग के 2002 के प्रकाशन के अनुसार भारत में 4525 बड़े बाँध हैं, जिनमें से 475 बड़े बाँधों पर तब काम जारी था। लेकिन इस सूची में भारत के सभी बड़े बाँध शामिल नहीं किये गये हैं। जैसे हिमाचल प्रदेश में रावी नदी पर बना चमेरा 1, 2 तथा 3 (काम जारी है) का इस सूची में जिक्र नहीं है।

बाँध क्या करते हैं?


बांध, नदी एवं अधिकार- जल आपूर्ति एवं सिंचाई के लिये बने बाँध जलाशय में पानी इकट्ठा करते हैं। इस पानी को शहरों एवं खेतों तक पहुँचाने के लिये काफी लम्बे पाइपों एवं नहरों का सहारा लिया जाता है।

- पनबिजली बाँध से पानी को बिजली पैदा करने के लिये मशीन में डालते हैं जिन्हें टरबाइन कहा जाता है। उत्पादित बिजली को पारेषण (Transmission) लाइनों द्वारा शहरों एवं फैक्ट्रियों में भेजा जाता है। टरबाइन से गुजरने के बाद, पानी को वापस नदी में बाँध के नीचे छोड़ा जाता है।

- बाढ़ नियंत्रण बाँध भारी बारिश के समय डाउनस्ट्रीम में बाढ़ में कमी लाने के लिये पानी इकट्ठा करते हैं।

- जल आवागमन बाँध पानी इकट्ठा करते हैं एवं जब नदी में पानी का स्तर कम होता है तो पानी छोड़ते हैं ताकि पूरे साल नौकाओं का ऊपर एवं नीचे की ओर आवागमन हो सके। ये विशिष्ट किस्म के अवरोधों या तरीकों द्वारा बनाए जाते हैं जो नौकाओं को ऊपर एवं नीचे कर सकते हैं ताकि वे बाँध के पीछे आवागमन कर सके।

किनको लाभ होता है? किनको नुकसान होता है?


बाँधों में संग्रहित जल से होने वाले ऊर्जा उत्पादन एवं जल आपूर्ति से ज्यादातर लाभ फैक्ट्रियों एवं शहरों के निवासियों को होता है। बड़े किसान एवं बड़ी कृषि कम्पनियों को सिंचाई के सस्ते पानी से लाभ होता है। बाँध अक्सर ग्रामीण एवं आदिवासी समुदायों से संसाधनों को छीनकर उनका लाभ उद्योगों एवं शहरों में रहने वाले लोगों को देते हैं। कई बार ये उद्योग एवं लोग अन्य देशों के होते हैं।

बाँधों से सम्बन्धित निर्माण एवं प्रौद्योगिकी कम्पनियों को भी लाभ होता है। वे बाँधों के डिजाइन तय करने एवं उन्हें बनाने एवं मशीनों की आपूर्ति के लिये करोड़ो रुपये हासिल करती हैं। सरकारों को बाँधों के निर्माण एवं संचालन के दौरान कर संग्रहण से लाभ हो सकता है। चूँकि बाँधों में काफी मात्रा में रकम खर्च की जाती है, भ्रष्ट सरकार या कम्पनी के अधिकारी कई बार अपने फायदे के लिये पैसे ले लेते हैं।

बड़े बाँधों की वजह से जो सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं वे ग्रामीण किसान एवं आदिवासी लोग हैं। बाँधों एवं जलाशयों को बनाने देने के लिये लाखों लोग अपने घरों से विस्थापित हुए हैं। बड़े बाँधों के डाउनस्ट्रीम में निवासरत लाखों लोगों ने अपने संसाधन एवं पारम्परिक आजीविका खो दी है।

इस मामले में सबसे बुरी बात यह यह है कि बाँध प्रभावित लोगों को बाँधों को बनाए जाने या नहीं बनाए जाने से सम्बन्धित निर्णयों में उन्हें कभी शामिल नहीं किया जाता है। वे सामान्यतया अपनी जानकारियों व जन सुनवाइयों के अधिकार, नयी जमीन एवं आजीविका की माँग के अधिकार एवं यहाँ तक कि बाँधों के विरोध करने के उनके अधिकारों के बारे में नहीं जानते हैं। खासतौर पर उन्हें बिजली एवं पानी का लाभ नहीं मिलता है जबकि वे बाँधों के आस-पास निवासरत होते हैं।

बांध, नदी एवं अधिकारबांध, नदी एवं अधिकार

बाँध कैसे कार्य करते हैं?


हालाँकि बाँध कुछ लाभ प्रदान कर सकते हैं, वे अक्सर उतनी बिजली नहीं पैदा करते या उतनी जमीन की सिंचाई नहीं करते जितने दावे किए जाते हैं। जल आपूर्ति वाले बाँध अक्सर दावे से कम पानी प्रदान करते हैं। ऐसा सामान्यतया होता है क्योंकि बाँध निर्माता इस बात का वास्तविकता से ज्यादा अनुमान कर लेते हैं कि नदी में इस्तेमाल के लिये कितना पानी है।

 

जब बाँध अच्छी तरह काम नहीं करते, सरकारें एवं लोग परेशानी झेलते हैं


अर्जेण्टीना के पूर्व राष्ट्रपति कार्लोस मेनन ने याकरेटा बाँध को ‘‘भ्रष्टाचार का स्मारक’’ कहा था। बाँध की लागत 110.7 अरब रुपए से बढ़कर 471.5 अरब रुपए हो गई है एवं परियोजना अभी भी पूरी नहीं हुई है।


बाँध अर्जेण्टीना एवं पराग्वे में स्थित है एवं उसे जितना बिजली पैदा करना था उसका 60 प्रतिशत ही पैदा करती है। बाँध का प्रबंधन करने वाले समूह पर अरबों डॉलर की उधारी है एवं वह उसे लौटा पाने की स्थिति में नहीं है क्योंकि परियोजना लाभकारी नहीं है।


सरकारें अक्सर बाँध बनाने के लिये रकम उधार लेती हैं। वे बहुत ज्यादा लाभ कमाने की उम्मीद करती हैं। जबकि, यदि बाँध उम्मीद के अनुरूप बिजली पैदा नहीं कर पाती हैं तो, सरकारों के पास उधारी लौटाने के लिये पर्याप्त धन नहीं होता है। इस हालत में सरकारें शिक्षा एवं स्वास्थ्य के खर्च में कमी कर सकती हैं, जिससे लोगों को परेशानी होती है।


नगद लाभ के लिये गरीब देश जोखिम वाले बाँधों में निवेश कर देते हैं, जिससे विश्व बैंक जैसी संस्थाओं से उनकी उधारी बढ़ जाती है। ऐसे मामलों में, गरीबी घटाने के लिये बनाए जाने वाले बाँध वास्तव में गरीबी बढ़ा सकते हैं।

 

बाढ़ नियंत्रक बाँध हल्के बाढ़ रोक सकते हैं, लेकिन वे भारी बाढ़ से होने वाले नुकसान को ज्यादा बदतर बना सकते हैं। लोग बाँध के डाउनस्ट्रीम में ज्यादा घर एवं मकान बना लेते हैं, क्योंकि वे उसे सुरक्षित समझते हैं और सरकारें अक्सर ऐसी मान्यता को बल देती हैं। जबकि, भारी बाढ़ आने पर जब जलाशय बाढ़ के पानी को संग्रह नहीं कर पाता है तो, एकाएक भारी मात्रा में पानी छोड़ा जाता है और डाउनस्ट्रीम में ज्यादा लोग अपनी सम्पत्ति एवं यहाँ तक कि जान गँवा बैठते हैं।

बाँध हमेशा के लिये उपयोगी नहीं रहते हैं। वे सामान्यतया कुछ निर्धारित सालों तक संचालन के लिये बनाए जाते हैं। बाँध की उम्र नदी में उपलब्ध गाद सहित कई कारकों पर निर्भर होती है। कुछ अवधि के बाद, जलाशय गाद से भर जाता है। जैसे-जैसे गाद बढ़ता जाता है, बाँध कम प्रभावी हो जाते हैं।

बाँधों की कीमत कौन अदा करता है?


बाँधों पर हर साल करीब 1640 अरब रुपए, खर्च होते हैं। चूँकि बाँध बनाना काफी महँगा काम है, इसलिये सामान्यतया सरकारें कई वित्तपोषकों से उधार लेती हैं। विश्व बैंक बाँध के सबसे महत्त्वपूर्ण वित्तपोषकों में से एक है। इस सार्वजनिक विकास बैंक ने विश्व भर में 600 बाँधों के लिये 2460 अरब रुपए खर्च किए हैं। एशियाई विकास बैंक (Asian Development Bank), अफ्रीकी विकास बैंक (African Development Bank) एवं अंतर-अमेरिकी विकास बैंक (Inter-American Development Bank) जैसी क्षेत्रीय विकास बैंक भी बाँध बनाने के लिये सरकारों एवं कम्पनियों को उधार देती हैं।

जब सार्वजनिक विकास बैंक बाँध निर्माण में आंशिक वित्तपोषण करते हैं, तो इससे सरकारों को निजी बैंकों से भी उधार लेना आसान हो जाता है। जापान, जर्मनी और अब चीन जैसे सम्पन्न देश भी उन देशों को अनुदान एवं उधार देती हैं जो बाँध बनाना चाहते हैं।

बांध, नदी एवं अधिकारजब बाँध बन जाता है तो, सरकारों को इन ऋणों की वापसी करनी होती है। यहाँ तक कि बाँध से उम्मीद के अनुरूप लाभ नहीं होने पर भी, सरकारों को उधार की वापसी करनी होती है।

सम्पन्न देशों के लोग बाँध निर्माण से दो तरीके से लाभान्वित होते हैं। बाँध निर्माता कम्पनियाँ बाँध बनाने के लिये रकम हासिल करती हैं एवं जब गरीब देश उधार लौटाते हैं तो सरकारें ब्याज हासिल करती हैं।

 

बाँध, नदी एवं अधिकार

(इस पुस्तक के अन्य अध्यायों को पढ़ने के लिए कृपया आलेख के लिंक पर क्लिक करें)

क्रम

अध्याय

1

पुस्तक परिचय - बाँध, नदी एवं अधिकार

2

कठिन शब्द

3

बाँधों के बारे में मूलभूत जानकारियाँ

4

बाँधों के असर

5

विनाशकारी बाँधों के खिलाफ अन्तरराष्ट्रीय आन्दोलन

6

विनाशकारी बाँधों के खिलाफ कैसे संघर्ष करें

7

बाँधों के विकल्प की दिशाएँ

 

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