जंगल कटेंगे, पहाड़ खनन की बलि चढ़ जाएँगे तो नर्मदा कैसे बचेगी

Submitted by Hindi on Mon, 05/15/2017 - 09:38
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नवदुनिया, 09 मई 2017

नीलकंठ में नर्मदानीलकंठ में नर्मदाभोपाल। नवदुनिया प्रतिनिधि : नर्मदा हिमालय से निकलने वाली नदी नहीं है। ये निकलती है सतपुड़ा के जंगलों से ये जंगल और पहाड़ इसका जलस्रोत है। अगर जंगल कट जाएँगे और पहाड़ रेत खनन की बलि चढ़ जाएँगे तो नर्मदा खत्म हो जायेगी।

यह बात सोमवार को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे ने प्रशासन अकादमी में राष्ट्रीय नदी, जल और पर्यावरण संरक्षण पर आयोजित सेमिनार में कही। यहाँ देशभर के 175 विशेषज्ञों ने नर्मदा नदी को बचाने का लिये मास्टर प्लान तैयार किया। उद्घाटन सत्र में नर्मदा सेवा यात्रा पर लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई। कार्यक्रम में अमृतलाल बैगड़ की नर्मदा यात्रा पर केंद्रित फिल्म और बायोडायवर्सिटी बोर्ड की दो फिल्म का विमोचन किया। उन्होंने विश्व जल दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के प्रतिवेदन का लोकार्पण भी किया।

राजनीति न करें, संरक्षण ऐसा हो कि उदाहरण बने, परिणाम दें


दवे ने कहा म.प्र की पैदावार 20 प्रतिशत से ज्यादा इसलिए बढ़ी क्योंकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पानी को खेतों तक पहुँचाया। नर्मदा पर वे बोले कि नर्मदा के एक लाख वर्ग किमी के अन्दर जितने भी छोटे-बड़े जलस्रोत हैं उन्हें पुर्नजीवित कर लिया जाए तो म.प्र को नक्शा बदल जायेगा। नर्मदा के जल ग्रहण क्षेत्र में प्राकृतिक खेती होनी चाहिये, रसायनिक खेती से अंतर नही आयेगा। उन्होंने कहा राजनीति मत कीजिये। संरक्षण ऐसा हो कि उदाहरण बने शब्दों में नहीं परिणाम लेकर आये।

निश्चित मात्रा में चीज निकालो तो उसमें गलत नही: सीएम


मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्खनन एक मामला है उसमें वैध और अवैध दोनों हैं। उन्होंने कहा एक निशचित मात्रा में अगर जो चीज निकाली जा सकती है तो उसमें गलत नहीं है। शोषण और दोहन में अंतर है। आम के पेड़ से एक आम तोड़कर खा लो यह हो गया दोहन और कुल्हाड़ी लेकर पेड़ को ही काट डालो वो हो गया शोषण। मुख्य सचिव बीपी सिंह यह कह गये कि हमें नर्मदा नदी को नशा मुक्त करना है। क्योंकि आस्था की प्रतीक हैं वे रुके ही नही इस दौरान बीच में उन्हें टोका, तब बात संभली।

सहायक नदियों को पुनर्जीवित करना होगा


जल पुरुष राजेन्द्र सिंह ने कहा नर्मदा बहुत सारी छोटी-छोटी नदियों से मिलकर बनी है और जब तक हम अपनी छोटी-छोटी चीजों को ठीक नहीं करते तब तक बड़ी चीज ठीक नहीं हो सकती। इसलिए नर्मदा की जितनी भी सहायक नदियाँ हैं उन सबकों पुर्नजीवित करने के लिये काम करना होगा। उन्होंने कहा नदियों को सबसे ज्यादा गंदा करने वाले का नाम है राज। क्योंकि सारी पंचायतें राज, म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन राज गंदा पानी नदियों में प्रवाहित कर रहे हैं।

विशेषज्ञ बोले-भूजल संरक्षण जरूरी
भूजल दोहन रोकें


दिल्ली विश्वविद्यालय के भूगर्भ विभाग के प्रोफेसर डॉ शशांक शेखर का कहना है कि नर्मदा को अविरल और सदी बहती हुई नदी बनाए रखने के लिये खेती के लिये भूजल दोहन को रोकना होगा। उन्होंने बताया कि नदी के नीचे ग्राउंड वाटर होता है, जो गर्मियों में भी बुलबुलों के शक्ल में बाहर निकलता है।

ईको सेंसेटिव जोन बने


गंगा अभियान के हेमंत ध्यानी ने सुझाव दिया कि अब इसके किनारे कल्चरल और ईको सेंसेटिव जोन विकसित किये जाने चाहिये। किनारों पर मेडिटेशन सेंटर बने। वहीं जीवों की वनस्पति की सुरक्षा के लिये ईको सेंसेटिव जोन हों। इसके नैसर्गिक स्वरूप को बरकरार रखा जाए।

अॉफ शोर रिजर्वायर बने


यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क के शोधकर्ता डॉ फैयाज खुदसार ने बताया कि कृष्णा व गोदावरी की तरह नर्मदा नदी के आस-पास भी अॉफ शोर रिजर्वायर हैं। किनारों के आस-पास यहाँ पानी जमा होता है, लेकिन अब यहाँ सिल्ट जमा हो गई है। अगर सिल्ट हटा दी जाए तो यहाँ फिर पानी जमा होने लगेगा। इसका लाभ नदी की मुख्य धारा को मिलेगा।

रह-वासियों का रखें ख्याल


पर्यावरणविद डॉ. सुनील दुबे का कहना है कि नर्मदा नदी के संरक्षण के लिये जरूरी है कि इसके आस-पास रहने वाले रहवासी विशेषकर आदिवासी समुदाय का ख्याल रखा जाए। उन्हें रोजगार दिए जाएँ, ताकि उनकी जंगल व नदी पर निर्भरता कम हो। नदी के संरक्षण के लिये उनकी सहभागिता करवाएँ।

ये भी निकला मंथन से जो होगा शामिल


- सभी प्रदूषण की स्रोतों की जीआईएस मैपिंग होगी।
- सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाकर सीवेज का उपयोग खेती में होगा।
- वही पौधे लगाए जाएँगे जो कटाव रोके पानी अवशोषित करे।
- नर्मदा बेसिन में सांस्कृतिक आर्थिक व प्रतिबंधित क्षेत्र भी बनाए जाएँगे।
- समन्वय के लिये एक विभाग होगा, नर्मदा घाटी प्राधिकरण को इसका दायित्व सौंपा जायेगा।
- नदी के कैचमेंट इलाके का सीमांकन कर उसको रेखांकित करेंगे।
- रिवर जोन और फ्लड जोन चिन्हित किए जायेंगे।
- अमरकंटक पहाड़ में खनन नहीं होगा।
- हर पंचायत में एक वाटर बॉडी मनरेगा से बनेगी।
- नर्मदा घाटों पर मेडिटेशन के लिये क्षेत्र बनाये जायेंगे।

डिंडौरी से आया आइडिया


नर्मदा सेवा यात्रा को लेकर मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्हें इसका आइडिया डिंडौरी में एक पुल के उद्घाटन करने के दौरान आया। उन्होंने बताया कि जब वहाँ पुल तो था लेकिन नीचे पानी नहीं था। जब उन्होंने स्थानीय लोगों से पूछा कि पानी नहीं रहता तो लोगों ने बताया कि गर्मी है अभी इसलिए नहीं है, लेकिन जब मैंने पूछा कि हमेशा ऐसी ही स्थिति रहती है तो पुराने लोगों ने बताया कि नहीं 25 साल पहले यहाँ खूब पानी होता था। तब मुझे लगा कि क्षिप्रा व अन्य नदियों की तरह कहीं नर्मदा भी विलुप्त न हो जाए। और तब सोचा कि लोगों का जागरूक करना होगा। और ऐसे शुरुआत नर्मदा सेवा यात्रा की।

विशेषज्ञों के समूहों के सुझाव: वैज्ञानिक आधार पर उत्खनन नीति बनाने पर जोर


01. आरएस जुलानिया, अपर मुख्य सचिव
सुझाव- नर्मदा नदी के तटों पर नैसर्गिक प्रजातियों का रोपण, जल के उपयोग की दक्षता पर काम, रासायनिक खाद के उपयोग को कम करें, वैज्ञानिक आधार पर उत्खनन नीति बने और नदी जागरुकता।

02. डॉ. राजेश राजौरा, प्रमुख सचिव कृषि
सुझाव- जल गुणवत्ता की सतत निगरानी और मॉनीटरिंग, विकास योजना में नदी संरक्षण के कार्यों को शामिल, प्राकृतिक जैविक खेती को प्रोत्साहन और समुदाय के माध्यम से वॉटर बजटिंग करें।

03. मनोज श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव वाणिज्यिक
सुझाव-
नर्मदा नदी प्रणाली के लिये एक विशेष अधिनियम, नर्मदा लोकपाल की स्थापना, सहायक नदियों को जीवित इकाई का दर्जा देने, नर्मदा निधि की स्थापना करने, नर्मदा तट पर मेडिटेशन क्षेत्र।

04. रजनीश वैश, मुख्य सचिव
सुझाव-
प्रदूषण स्रोतों की जीआईएस मैपिंग, बायोडायवर्सिटी व सामाजिक सर्वेक्षण करने, खनन प्रबंधन करने, औद्यौगिक निस्तार व ठोस अपशिष्ट प्रबंधन किया जाए।

05. एके गोसाई, प्रोफेसर आईआईटी
सुझाव-
नदी की ईकोलॉजिकल सेवाओं की महत्ता की गणना, नदी की आर्थिक सेवाओं के प्रभाव का आंकलन, नदी से सिंचाई की दक्षता को आंकलन किया जाए।

अपनी स्टाइल में बोले जैकी


अभी भी पानी बचाने का बोलना पड़ता है, नहीं बचेगा तो गेम सेट हो जायेगा..बॉस
बिल्ला लगाकर बैठे हैं आप भी पानी बचाने वाले हैं क्या। मैं सुना बड़े-बड़े एक्सपर्ट आएले हैं। अभी भी पानी को बचाने के लिये बोलना पड़ता है। पानी नहीं बचेगा तो गेम सेट हो जायेगा बॉस। समझना चाहिये ना...बाबा (राजेन्द्र सिंह) बराबर बोला नदी की इज्जत करो बात खतम हो गया... कितना बोलना पड़ता है। मुंबई के अंदर बिना हॉर्न मारे गाड़ी नहीं चलता है। जितना भी कचरा डालना है पानी के अंदर डाल देता है। मुझे बोलना नहीं आता सर। मेरे चेहरे का इस्तेमाल करो, जहाँ बोलेंगे वहाँ जाऊँगा। अपना तो गेम सेट हो गया, आधा कबर में है। पर बच्चों के बच्चों का सोचना शुरू करेंगे तो पानी में जहर डालना बंद कर देंगे। मैं गड्ढा खोदा 500 झाड़ लगाए, एक जगह एक हजार झाड़ लगाए, लेकिन पानी मुझे नहीं मिल रहा। हर बर्थ-डे पर पेड़ लगाने का बोलो, चॉकलेट वॉकलेट तो बाद में खाते रहेंगे। झाड़ तो लगाओ बच्चों को अकल तो आए कि ये क्या है। आखिर में दो लाइन सुनाई...पेड़ काटने कुछ लोग आये थे मेरे गाँव में, धूप बोहत है कहकर बैठ गए उसी की छाँव में।

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