बिहार गंगा गाद और अविरलता पर दिल्ली में सेमिनार

Submitted by Hindi on Mon, 05/15/2017 - 13:35


दिनांक : 18-19 मई, 2017
समय : प्रातः 09 बजे से 05 पाँच बजे सायं तक
स्थान : इण्डिया इंटरनेशनल सेंटर, लोदी एस्टेट, नई दिल्ली -110003

सेमिनार का विषय : बिहार में गंगा की अविरलता में बाधक गाद : समस्या और समाधान

आयोजक : जल संसाधन विभाग, बिहार शासन, पटना

गंगा के पास भले ही 'राष्ट्रीय नदी' और 'जीवित इकाई' का दर्जा हो, लेकिन उसकी सांस को बाधित करने के प्रयास अभी रुके नहीं हैं। उत्तराखण्ड की गंगा के गले के लगी फाँसों से हम परिचित ही हैं। हल्दिया से इलाहाबाद तक राष्ट्रीय जलमार्ग - एक परियोजना की ज़िद ठाने केन्द्र सरकार, एक ओर गंगा की कृत्रिम ड्रेजिंग यानी उडाही करके नदी की गाद से छेड़-छाड़ कर रही है, तो दूसरी ओर टर्मिनल, जलपोतों की मरम्मत आदि के लिये निर्माण के जरिए गंगा नदी भूमि पर बाधायें खड़ी करने जा रही है। इस पूरे परिदृश्य के बीच में फरक्का बैराज दुष्परिणाम के पीड़ितों ने अवाज उठानी शुरू कर दी है। खासकर, पश्चिम बंगाल के माल्दा टाउन और मुर्शिदाबाद ज़िले कटान से बुरी तरह प्रभावित हैं।

ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि बिहार की गंगा के मध्य में पटना तक बढ़ रही गाद का कारण भी फरक्का बैराज ही है। इस अनुमान के आधार पर ही फरक्का बैराज गत वर्ष 2016 से ही बिहार मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के निशाने पर है। इस अनुमान की जाँच एक ज़रूरत है। गंगा के मध्य बढ़ती गाद के अन्य कारणों की पहचान, दूसरी ज़रूरत है। तीसरी ज़रूरत, गंगा की अविरलता में समस्त बाधाओं को चिन्हित कर उन्हें हटाने के लिये एकजुटता की है। शीर्षक से लगता है कि गाद भी गंगा की अविरलता में बाधक है। इसकी भी जाँच की जरूरत होगी कि गाद, गंगा की अविरलता में बाधक है अथवा बाधाओं का दुष्परिणाम है? समाधान क्या होगा? ऐसे कई प्रश्नों के उत्तर तलाशने की कोशिश इस सेमिनार में की जायेगी।

इस कोशिश को अंजाम देने के लिये बिहार शासन का जलसंसाधन विभाग आयोजक की भूमिका में है। विशेषज्ञ विमर्श के लिये कई तकनीकी सत्र रखे गये हैं। इन सत्रों के लिये गंगा और इसकी पारिस्थितिकी के कई जानकार विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है। नामचीन वक्ताओं के रूप में बनारस विद्यामठ के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी, प्रो़ जी डी. अग्रवाल के पूर्व नाम वाले स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद जी, नामी सामाजिक कार्यकर्ता श्री अन्ना हजारे, जलपुरुष राजेन्द्र सिंह जी, पूर्व पर्यावरण मंत्री एवं वर्तमान सांसद श्री जयराम रमेश जी तथा माननीय न्यायमूर्ति श्री वी, गोपाल गौड़ा जी का जिक्र किया गया है। बिहार मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी स्वयं इस कार्यक्रम में उपस्थित होंगे। गंगा मार्ग के कई सांसदों और विधायकों को भी आमंत्रित किए जाने की सूचना है।

सूत्रों के मुताबिक, 16 मई को बिहार भवन में प्रेस वार्ता का भी प्रस्ताव है।

ज्ञात हो कि इस सेमिनार से पूर्व पटना में भी इस विषय पर एक गहन् विमर्श आयोजित किया गया था। उस विमर्श में श्री चण्डीप्रसाद भट्ट जी, डाॅ, वंदना शिवा जी, डाॅ, भरत झुनझुनवाला जी, श्री राजेन्द्र सिंह जी, श्री अनिल प्रकाश जी से लेकर गंगा से संबद्ध कई खास हस्तियों ने अपनी राय साझा की थी। विमर्श पश्चात बंगाल के दुष्प्रभावितों की अगुवाई कर रहे स्थानीय कार्यकर्ताओं द्वारा फरक्का बैराज दुष्प्रभाव को लेकर एक अध्ययन यात्रा का समाचार भी सामने आया था। हालाँकि कार्यक्रम का विस्तृत विवरण अभी प्राप्त नहीं हुआ है; फिर भी अब तक की जानकारी के मुताबिक, इस दिल्ली सेमिनार में फरक्का दुष्प्रभाव पर एक रिपोर्ट तथा अविरलता में बाधा सम्बंधी पहलुओं पर एक फिल्म भी पेश की जायेगी। कार्यक्रम के अंत में विषय पर ‘दिल्ली घोषणापत्र’ भी जारी किया जाना है।

जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में आयोजित इस सेमिनार में प्रतिभागिता हेतु चुनींदा लोगों को ही आमंत्रित किया गया है। अधिक विवरण के लिये आप www.incessantganga.com देख सकते हैं। विवरण एवं सम्पर्क हेतु मूल दस्तावेज भी संलग्न है। कृपया देखें।
 

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