अंटार्कटिका की जैवविविधता : एक संक्षिप्त परिचय (Bio-diversity of Antarctica : a brief introduction)

Submitted by Hindi on Tue, 08/15/2017 - 15:38
Source
अनुसंधान विज्ञान शोध पत्रिका, 2016

सारांश


अंटार्कटिका हिमाच्छादित, निर्जन, अद्भुत, अनोखा एवं विश्व का पाँचवा सबसे बड़ा महाद्वीप है। वास्तव में यह प्राकृतिक रूप में प्रकृति का अनुपम उपहार है। मुझे भारतीय वैज्ञानिक अभियान दल के साथ अंटार्कटिका के ‘‘लार्सेमान हिल्स’’ जाने का सुअवसर प्राप्त हुआ। लार्सेमान हिल्स 69020’ से 6903’ द. अक्षांस, 750 55’ से 76030’ पू. देशान्तर पर लगभग आधे रास्ते पर वेस्टफोरट हिल्स एवं आमरी आइस सेल्फ के मध्य अवस्थित है। यह तटीय, कम बर्फ वाला, विस्तृत भूदृश्य, सदृश्य क्षेत्र होने के कारण लार्सेमान हिल्स में मानवीय गतिविधियों को बढ़ावा मिला है एवं ऑस्ट्रेलियन रिसर्च बेस, चाईनीस रिसर्च स्टेशन (जॉनशन) एवं रशियन रिसर्च स्टेशन (प्रोग्रेस) एक दूसरे स्टेशन से 3 किमी. के अन्दर पूर्व ब्रोकनीस में स्थापित होने के कारण इन रिसर्च स्टेशन के स्थापित होने के पश्चात आधारभूत सुविधाओं में तेजी से विकास हुआ एवं वैज्ञानिक अनुसंधान तथा पर्यटकों के भ्रमण के परिणाम स्वरूप लार्सेमान हिल्स के इस क्षेत्र में पर्यावरण में बदलाव हुआ है जिसने इस क्षेत्र की जैव विविधता को प्रभावित किया है। अन्य महाद्वीपों की तुलना में अंटार्कटिका का पर्यावरण मानवीय गतिविधियों के लिये बहुत संवेदनशील है। यहाँ के वातावरण में पुनः सामान्य स्थिति में आने की कम प्राकृतिक क्षमता होती है। यह बदलाव यहाँ के पर्यावरण एवं जीवों की वृद्धि को प्रभावित करते हैं। लार्सेमान हिल्स धुर दक्षिणी तटीय मरुद्यान क्षेत्र में विविध पादप समूह एवं जन्तु समूह पाये जाते हैं। यहाँ के पादप एवं जन्तु समूह के अध्ययन से ज्ञात हुआ है कि यहाँ पादप में हरितोद्भिद शैवाक एवं शैवाल पाये जाते हैं। शैवाल में मुख्यतः कॉसमेरियम, डायटम, डायनोफ्लेजीलेट्स एवं सायनोजीवाणु प्रेक्षित हैं। जन्तु समूह में स्नोपीट्रएल, विलसन स्टोम, साउथ पोल स्कुआ, इत्यादि पाये गये। इसके अतिरिक्त सील, इडली पेंगुइन और एग्परर पेंगुइन कभी-कभी लार्सेमान हिल्स क्षेत्र में दिखाई देते हैं। झीलों एवं जल स्रोतों में प्रोटोजोआ, प्लेटीहेलीमेन्थीस, रोटीफर, टार्डीग्रेड्स, निमेटोड आर्थोपोड्स, इत्यादि यहाँ से प्रतिवेदित हैं।

Abstract: Antarctica is the coldest, driest, amazing place and fifth largest continent of this world covered with ice. This is a gift of nature in natural form. I have got an opportunity to visit the Larsemann Hills, Antarctica during Indian Scientific Expedition to Antartica. The Larsemann Hills (69020’S to 69030’S Latitude., 75055’E to 76030’E Longitude) is located approximately halfway between Vest fold Hills and Amery Ice Shelf on South-eastern coast of Prydz Bay. Iluman activities in Larsemann Hills is promoted due to its coastal location, icc free landscape, Australian summer research base (Law base), Chinese research station (Zhongshan) and Russian research stations (Progress) were established within the area of 3 km from each other on eastern broknes. After that there was rapid infrastructure development in the area and further scientific research and the potential for tourist visits resulted in notable localized alteration of the environment, ultimately affecting the biodiversity. The Antarctic environment/climate is highly susceptible to the impacts of human activities and has much less natural ability to recover from disturbance than the environment of other continents. These changes ultimately affect the environment and growth of organisms. Larsemann Hills represent the southernmost coastal oasis contains diverse flora and fauna. In flora – Bryophytes, Lichens and Algae were observed. Among Algae mainly Cosmarium, Diatioms, Dinoflagellates and Cyanobacterial mats were observed from different water bodies and terrestrial habitats. As for as fauna is concerned breeding sea bird like Snow petrels, Wilson’s Strom Petrel, South polar Skuas was found. Besides this, Seals, Adelie Penguin and Emperor Penguin were occasionally observed in Larsemann Hills area. However, very little is known about the terrestrial micro fauna. In lakes and streams species of protozoans, platyhelminthes, rotifers, tardigrades, nematodes, arthropods etc. have been reported.

1. प्रस्तावना- अंटार्कटिका हिमाच्छादित, अत्यन्त ठण्डा, सूखा एवं वातावरण में सूखापन आर्द्रता के बर्फ बनने के कारण होता है। विश्व का पाँचवा सबसे बड़ा महाद्वीप है। यह प्रकृति का सबसे बड़ा प्राकृतिक उपहार है। यह महाद्वीप वैज्ञानिकों को अध्ययन हेतु अपनी ओर आकर्षित करता है। यहाँ पर 1 दिसम्बर से 28 फरवरी तक गर्मी (गर्मी का अधिकतम तापमान 5-80 से. रहता है), 1 मार्च से 30 नवम्बर तक सर्दियों का मौसम रहता है यहाँ 6 महीने का दिन एवं 6 महीने की रात होती है। यहाँ पर कोई भी स्थायी रूप से नहीं रह सकता।

2. लार्सेमान हिल्स- लार्सेमान हिल्स दक्षिणी ध्रुव का कम हिमाच्छादित, दक्षिण पूर्वी क्षेत्र है। इसके दक्षिण-दक्षिण पूर्वी क्षेत्र हल्की लहरदार, स्थलाकृति मिलकर बर्फ से ढक जाती है। यह तीनों ओर से समुद्र से घिरा हुआ है। लार्सेमान हिल्स में दो मुख्य प्रायद्वीप हैं- स्टोनीस एवं ब्रोकनीस साथ में अन्य प्रायद्वीप एवं फैले हुये दूर तटीय द्वीप समूह हैं। 40 कि.मी. की परिधि में लार्सेमान हिल्स मुख्य चार कम हिमाच्छादित मरुद्यान में दूसरे स्थान है। लार्सेमान हिल्स में 150 से अधिक स्वच्छ जल की झीलें हैं। जिसमें छोटे क्षणभंगुर तालाब से लेकर बड़े जलाशय जैसे प्रोगरेस झील आते हैं। गर्मी के महीनों में इनमें से कुछ जलाशयों में जलाशयों का कुछ भाग बर्फ रहित होता है या लगभग आधा जल, आधा बर्फ रहता है। गर्मी के महीने के अतिरिक्त लगभग 8-10 महीने में जलाशय 2 मी. तक बर्फ से ढके रहते हैं। यहाँ की झीलें बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। यह सामान्य प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र और भौतिक, रासायनिक एवं जैविकी के लिये संवेदनशील होती हैं। इलीस-इवान्जस इत्यादि ने बताया कि लार्सेमान हिल्स की झीलों में अधिक विविधता जीव विज्ञान संबंधी एवं भौतिकी के चिन्ह पाये गये जिससे पूर्व के पर्यावरण के बारे में जानकर कोई राय बनायी जा सके या किसी निष्कर्ष पर पहुँचा जा सके। पूर्व ब्रोकनीस प्रायद्वीप की कुछ झीलें एवं लार्सेमान हिल्स क्षेत्र की अन्य झीलों का वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अत्यन्त महत्व है एवं गर्मी के मौसम में सूक्ष्म जलवायु की स्थिति एवं स्वच्छ जल की झीलें, जीवों के रहने योग्य वातावरण बनाते हैं। लार्सेमान हिल्स की जैव-विविधता पर दूसरे देशों के वैज्ञानिकों ने अध्ययन किया है लेकिन भारत वर्ष के वैज्ञानिकों द्वारा बहुत कम कार्य किया गया क्योंकि भारतीय रिसर्च स्टेशन भारती मार्च 2012 में ही बनकर तैयार हुआ है।

3. पादप एवं जन्तु समूह विविधता- लार्सेमान हिल्स के तटीय मरुद्यान में विविध पादप एवं जन्तु समूह पाये जाते हैं। पादप समूह में जैसे हरितोद्भिद, शैवाक, शैवाल। शैवाल में मुख्यतः कॉसमेरियम, डायटक, डायनोफ्लेजिलेट एवं सायनोजीवाणु के जाल विभिन्न जलाशयों एवं स्थलीय प्राकृतिक वास स्थान से पाये गये। जन्तु समूह में प्रजनन समुद्री चिड़िया जैसे पागोड्रमा नाइविआ (स्ट्रोम पीट्रएल), ऑसिएनाइट्स ऑसिएनिकस (विलसनस्ट्रोम पीट्रएल), काथारेक्टा मार्कोमिकी (साउथ पोलर स्कुआ), पायी गयी। इसके अतिरिक्त लेप्टोनयकॉट्स वीडडेली (वीडेल सील), पाइगास्केलिस एडिली (एडली पैंगुईन) एवं एप्टीनोडायटिस फार्सटेरी (एम्परर पेंगुइन) यदा-कदा ही लार्सेमान हिल्स क्षेत्र में देखने को मिलती है। यहाँ के स्थलीय सूक्ष्म जन्तु समूह के बारे में बहुत कम ज्ञात है फिर भी यहाँ की झीलों एवं जलस्रोतों से प्रोटोजोअन्स, प्लेटीहेलमिन्थस, रोटीफर्स, टार्डीग्राडेस, निमेटोड्स, आर्थोपोड्स, इत्यादि प्रतिवेदित हैं।

4. हरितोद्भिद- लार्सेमान हिल्स से हरितोद्भिद की 8 जातियाँ प्रतिवेदित हैं जिनमें 7 जातियाँ ब्रयम ऐलगेन्स, ब्रयम अर्जेनटीयम, ब्रयम स्यूडोट्राइक्वेट्रम, सीराटोडॅन परपुरिअस, ग्रीमीआ अंटार्कटिकार्ड, ग्रीमीआ लावीआना, सार्कोनीयूरम ग्लासीअले मास की हैं एवं 1 जाति-सिफेलोजीएला एक्इलीफ्लोरा लीवरवर्ट की पायी गयी।

5. शैवाक- लार्सेमान हिल्स से शैवाक की 27 जातियाँ प्रतिवेदित हैं, जिनमें 20 जातियाँ- एक्रोस्पोरा गवयनाई, आर्थोनिआ लेपिडीकोला, बुऐलिया फ्रीजीडा, बुऐलिआ ग्रीगोरइ, क्लोप्लेका आथ्रेलीना, कालोप्लेका सिट्रीना, कालोप्लेका लुइस- रिमथाई, कालोप्लेका सक्सीकोला, कानडेलेसीएला प्लावा, काब्रोनिआ वर्टीकोसा, ह्यूइआ कॉरालीगेरा, लीकानोरा एक्सपेक्टान्स, लीकानोरा जियोफीला, लीसीडिआ कानक्रीकॉर्मिस, लीसीडीला पाटावीना, लीसीडीला साइप्लीइ, राइजोप्लाका मीलानोकथालमा, राइनोडीना ऑलीवेसिओब्रनीआ, राइनोडीना पिलोलीऊका, सर्कोगाइन प्रीविग्ना क्रसटोस, 05 जातियाँ- फिससिआकेसिआ, फिससिआ डुबीआ, अमबीलीकारिआ डेक्यूसाटा, जेन्थोरिआ एलीगेन्स, जेन्थोरिआ मावउसोनाई फॉलीओस एवं 02 जातियाँ- स्यूडोफीबी माइनसकुला एवं उसनिआ अंटार्कटिका फ्रक्टोस शैवाक की पायी गयी।

6. शैवाल- लार्सेमान हिल्स की झीलों से डायटम की 7 जातियाँ प्रतिवेदित हैं- डायडेसमिस कॅस्टी, डायडेसमिस लांगीबेर्टालीटी, डायडेसमिस सबअंटार्कटिका, डायटोमेला बालफोउरीआना, सामोथीडीयम मार्जीलूलाटम, गोम्फोनीमा पार्वुलम, प्लेनोथीडीयम डेलीकेटुलम। पादप प्लवक में यहाँ की झीलों में पाये जाने वाले प्रायः स्वपोषी नेनोफ्लेजीलेट्स डायनोफ्लेजीलेट्स, डेसमिड सम्मिलित हैं। यहाँ की छिछली झीलों का अध्ययन करने से यह ज्ञात हुआ है कि यहाँ स्वपोषी नेनोफ्लेजीलेट्स की तुलना में परपोषी नेनोफ्लेजीलेट्स ज्यादा हैं जो कम जाति विविधता को दर्शाते हैं। परफाइसोमोनास प्रायः छिछली झीलों में पाया जाता है। होलियोफयरा की जातियाँ यहाँ की बहुत सी झीलों में पायी जाती हैं। कॉसिनोडिसकस, ईपीथीमिआ, निश्चिया, थालासीओसिरा, अॅसीलोटोरिआ एवं कीटोसीरोस लार्सेमान हिल्स की झीलों से प्रतिवेदित हैं।

7. समुद्री चिड़िया- लार्सेमान हिल्स क्षेत्र समुद्री चिड़ियों के लिये सुरक्षित प्रजनन स्थल है। समुद्री चिड़िया जैसे स्नो पीट्रल (पागेड्रॅमानाइविआ), विलसन स्ट्रोम पीट्रएल (ऑसिएनाइटिस ऑसिएनिकस) एवं वीडेल सील (लेप्टोनयकॉट्स वीडडेली) प्रजनन हेतु समुद्र के किनारे आ जाती हैं। ये तीनों समुद्री चिड़ियों की जातियाँ लार्सेमान हिल्स के पूर्व ब्रोकनीस प्रायद्वीप में प्रजनन करती हैं लेकिन इनका वितरण अन्य बचे हुए क्षेत्र में निश्चित नहीं है। इनके अतिरिक्त एडली पेंगुइन (पाइगोस्सेलिस एडिली) एवं एम्परर पेंगुइन (एप्टीनोडायटिस फॉर्सटेरी) कभी-कभी ही लार्सेमान हिल्स क्षेत्र में देखने को मिलती हैं क्योंकि इनकी प्रजनन बस्ती इस क्षेत्र में नहीं है।

8. सील्स- अवीडेल सील्स (लेप्टोनयकॉट्स वीडडेली) लार्सेमान हिल्स समुद्र तट पर बहुत है। कार्बिऐटर सील्स (लोबोडॅन कार्सिनोफागस) एवं लिओपार्ड सील्स (ह्यडुर्गा लेप्टोनिक्स) इस क्षेत्र में कभी-कभी देखे जाने वाले पर्यटक हैं।

9. स्थलीय सूक्ष्म जन्तु समूह- लार्सेमान हिल्स के स्थलीय सूक्ष्म जन्तु समूह पर अभी तक बहुत कम अध्ययन कार्य हुआ है। रोटीफर की जातियाँ (मोनोगोनोन्टा एवं बीडीलॅइडिया), टाडीग्राडेस, आर्थोपोड्स, प्रोटोजोन्स, प्लेटीहेलमिन्थस एवं निमेटोड्स प्रतिवेदित हैं। रोटीफर्स छुटपुट रूप से यहाँ की बहुत सी झीलों में पाये जाते हैं। क्लेडोसिरान डेफनीआॅपसिस स्टूडेराई यह स्वच्छ जलीय क्रसटेशियन में से एक है जो अंटार्कटिका महाद्वीप में पायी जाती हैं। लार्सेमान हिल्स की बहुत सी झीलों से इसको पहचाना गया है।

10. प्रोटोजोआ- प्रोटोजोआ की जातियाँ यहाँ से स्कैडेन्ट, डिस्कसन, सिबथोर्पी प्रोगरेस, राइड एवं चार बिना नाम की झीलों से प्रतिवेदित हैं। इन्हें स्वच्छ जल की झीलों की तलहटी में देखा गया है।

11. प्लेटीहेलमिन्थस- इसका अकेला नमूना स्कैनड्रेट एवं बिना नाम की झीलों के तलछट से प्राप्त किया गया।

12. टार्डीग्राडा- टार्डीग्राडा की दो जातियाँ यहाँ के स्वच्छ जल से प्रतिवेदित हैं। हेफीलेसियम टार्डीग्राडम को स्थलीय मास से स्कैनड्रेट झील के किनारे से प्राप्त किया गया है। स्थलीय टार्डीग्राडा के पाँच वंश हयसीबियस, मिनीबीऑटस, डाईफेस्कॅन, मिलनेसियम एवं स्यूडीसीनीसकस वनस्पति से संबंध प्रतिवेदित हैं।

13. रोटीफर्स- लार्सेमान हिल्स की विभिन्न झीलों से रोटीफर्स की 17 जातियाँ - सिफालोडेला स्टेरिआ, सिफालोडेला वेन्ट्रीपेस, कोलोथीकाओनाटे कर्नुटा, एनसेनट्रम मस्टेला, ऐनसेन्ट्रम स्पाटीटियम, इपीफेनेस सेन्टा, लीपाडेला पाटेला, लीपाडेला एक्यूमिनाटे, नॅथोलका स्पी., टायगुरा क्रिस्टालीन, रेरटीकुला जीलीडा, एडीनेटा ग्राडिरा, एडीनेटा स्पी., हेब्रोट्रोका कॅनस्ट्रिक्टा, फीलोडीना ग्रीगारिआ एवं फीलोडिना की दो जातियाँ प्रतिवेदित हैं।

14. नीमैटोड्स- लार्सेमान हिल्स में बर्फ की चट्टान के समीप किनारे से निमेटोड्स के प्रमुख वंश टास्चीलीनगिआ, अराइओलाइमस, एक्जनोलाइमस, क्रोमाडेरिला, डाप्टोनीमा, हालालीमस, परालीनहोमिअस, सबाटीएरिआ, स्टीफेनोलाइमस, स्फारोलाइमस, एवं थेरिस्टम पाये गये।

15. आर्थोपोडा- आर्थोपोडा की दो जातियाँ- क्लोसिरान डाफनिअॅपसिस, स्टूडेराई एवं कॉपीपीड एकेनथोसाइक्लोप्स मिर्नई को स्वच्छ जलीय झील से सबसे बड़ी संख्या में प्रचुरता से प्राप्त किया गया। यह जातियाँ सामान्यतः उप अंटार्कटिक द्वीप के दक्षिणी इण्डियन ओशन से प्रतिवेदित है। एकेनथोसाइक्लोप्स मिर्नई को प्रथम बार बनगर हिल्स से प्राप्त किया गया।

16. निष्कर्ष- भारत ने अंटार्कटिका में अपने नवीन शोध केन्द्र भारतीय रिसर्च स्टेशन ‘‘भारती’’ की स्थापना लार्सेमान हिल्स क्षेत्र में मार्च 2012 में की जहाँ लगभग विज्ञान की सभी विधाओं के अध्ययन सम्बन्धित विषय विशेषज्ञों द्वारा किये जा रहे हैं। पादप एवं जन्तु समूह के अध्ययन अभी अत्यन्त प्रारम्भिक अवस्था में हैं। यहाँ के पादप एवं जन्तु समूह के अध्ययन से यह ज्ञात हुआ है कि यहाँ के पादप समूह में हरितोद्भिद, शैवाक एवं शैवाल की विभिन्न जातियाँ पायी गयी। जन्तु समूह में अकशेरुकी में प्रोटोजोआ, प्लेटीहेलीमेन्थीस, रोटीफर, टार्डीग्रेड्स, निमेटोड, जलीय आर्थोपोड्स, इत्यादि की विभिन्न जातियाँ एवं कशेरुकी में कुछ जातियाँ पक्षियों की एवं स्तनधारियों की पायी गयीं। अंटार्कटिका के लार्सेमान हिल्स क्षेत्र के पादप एवं जन्तु समूह का अध्ययन इसलिये भी बहुत महत्त्वपूर्ण है क्योंकि मानवजनित गतिविधियों के कारण यहाँ के पादप एवं जन्तु समूह में बदलाव उत्पन्न हो रहे हैं। मानवजनित गतिविधियों पर यदि प्रतिबन्ध नहीं लगाया गया तो यहाँ की जैव विविधता गंभीर रूप से प्रभावित होगी।

आभार- मैं डा.पी. सिंह निदेशक, भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण, कोलकाता एवं निदेशक एन.सी.ए.ओ.आर., गोवा के प्रति आभार व्यक्त करती हूँ जिन्होंने मुझे अध्ययन हेतु भारतीय अभियान दल के साथ जाने की अनुमति एवं आवश्यक सुविधायें प्रदान कीं।

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लेखक परिचय


प्रतिभा गुप्ता
भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण, पर्यावरण वन मंत्रालय एवं जलवायु परिवर्तन, भारत सरकार, आई.एस.आई.एम., कोलकाता-700016, प.बं. भारत

drpratibha2011@rediffmail.com

प्राप्त तिथि-31.07.2016 स्वीकृत तिथि-11.09.2016

Pratibha Gupta
Botanical Survey of India, Ministry of Environment Forests & Climate Change, Government of India, I.S.I.M. Kolkata-700 016, W.B., India
drpratibha2011@rediffmail.com

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