पर्यावरण बचाने को लिया जाएगा लोकगीतों का सहारा

Submitted by Hindi on Thu, 01/04/2018 - 12:20
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राष्ट्रीय सहारा, 03 जनवरी, 2018

सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अलावा पुस्तक मेले में पर्यावरण से जुड़े विषयों पर सेमिनार का भी आयोजन किया जाएगा। इनमें पंजाब में काली नदी (व्यास की सहायक नदी) पर काम करने वाले पर्यावरणविद संत बलबीर सिंह सिचेवाल ‘पर्यावरण संरक्षण’ पर अपने विचार रखेंगे। जाने-माने पर्यावरणविद स्व. अनुपम मिश्र द्वारा पर्यावरण के क्षेत्र में किये गये काम को लेकर एक परिचर्चा का आयोजन किया जाएगा। इस परिचर्चा में स्व. मिश्र की पुस्तक ‘आज भी खरे हैं तालाब’ पर भी चर्चा होगी।

विश्व पुस्तक मेले में इस बार अवधी और भोजपुरी की लोक गायिका मालिनी अवस्थी समेत शास्त्रीय नृत्यांगना सोनल मानसिंह, पर्यावरणविद बलविर सिंह सिंचेवाला समेत पर्यावरण को बचाने के काम में जुटे विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े दर्जन भर लोग अपने-अपने तरीके से पर्यावरण को किस तरह से बचाया जा सकता है पर विचार विमर्श करेंगे। कुछ नाट्य दल पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिये नुक्कड़ नाटक का भी मंचन करेंगे। सनद रहे कि इस बार आयोजित हो रहे पुस्तक मेले की थीम ‘एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेंट चेंज’ है। पुस्तक मेला 6-14 जनवरी तक प्रगति मैदान में चलेगा।

शनिवार से प्रगति मैदान में शुरू होने जा रहे नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में इस बार लोक गायिका मालिनी अवस्थी को बुलाया गया है। वह यहाँ पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करने वाले लोकगीत गाएँगी। लोकगीतों के माध्यम से वह पर्यावरण बचाने की गुहार यहाँ आने वाले पुस्तक प्रेमियों से लगाएँगी, जबकि भारतीय शास्त्रीय नृत्यांगना सोनल मानसिंह (ओडिसी नृत्य) पर्यावरण से जुड़े नृत्य पेश करेंगी। इसके अलावा गुजराती भाषा समेत अन्य भारतीय भाषाओं में नुक्कड़ नाटकों का भी मंचन होगा। पुस्तक मेला आयोजक नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) सूत्रों के अनुसार नुक्कड़ नाटक मंचन करने वाले समूह को यह हिदायत दी गई है कि वह ऐसे नाटकों का मंचन करें जिससे उसे देखने वाले दर्शकों के बीच पर्यावरण की महत्ता और पर्यावरण किस तरह से बचाया जा सकता है। इसके बारे में सन्देश दिया जा सके। इसके अलावा अगर पर्यावरण दूषित होगा तो हमें उसका किस तरह का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अलावा पुस्तक मेले में पर्यावरण से जुड़े विषयों पर सेमिनार का भी आयोजन किया जाएगा। इनमें पंजाब में काली नदी (व्यास की सहायक नदी) पर काम करने वाले पर्यावरणविद संत बलबीर सिंह सिचेवाल ‘पर्यावरण संरक्षण’ पर अपने विचार रखेंगे। जाने-माने पर्यावरणविद स्व. अनुपम मिश्र द्वारा पर्यावरण के क्षेत्र में किये गये काम को लेकर एक परिचर्चा का आयोजन किया जाएगा। इस परिचर्चा में स्व. मिश्र की पुस्तक ‘आज भी खरे हैं तालाब’ पर भी चर्चा होगी। संस्कृत के जानेमाने स्कॉलर बलदेवानंद सागर ‘संस्कृत साहित्य में पर्यावरण’ पर परिचर्चा करेंगे। इसके साथ ही पुस्तक मेले में ‘भविष्य की योजनाओं’ पर एक चर्चा का आयोजन होगा। इसमें जाने-माने विद्वान अपने-अपने विचार रखेंगे।

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