प्लास्टिक की इंजीनियरिंग

Submitted by Hindi on Sat, 01/27/2018 - 11:27
Source
नवोदय टाइम्स, 27 जनवरी, 2018

प्लास्टिक कचरा ऐसी समस्या है, जिस पर सबसे ज्यादा बहस होती है। पर्यावरण को इससे काफी नुकसान पहुँचता है। प्लास्टिक के इस्तेमाल पर कई राज्य सरकारों ने पाबंदी भी लगाई पर ज्यादा कामयाबी नहीं मिली। राजगोपालन वासुदेवन ने अपनी खोज से पर्यावरण के दुश्मन प्लास्टिक को बेहद उपयोगी बना दिया और इसीलिये उन्हें ‘प्लास्टिक मैन ऑफ इंडिया’ कहा जाता है। इसी खोज के लिये उन्हें पद्मश्री देने का ऐलान किया गया…

केमिस्ट्री के प्रोफेसर


राजगोपालन वासुदेवन पेशे से केमिस्ट्री के प्रोफेसर हैं। वह मदुरै के टी सी इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाते हैं।

प्रदूषण की वजह से


बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए उन्होंने प्लास्टिक कचरे से सड़क बनाने की खोज की और कामयाब हुए।

सवाल भी उठे


सवाल उठे कि प्लास्टिक कचरे से बनी सड़क गर्म होने पर जहरीली गैस छोड़ेगी, जो नुकसानदेह होगी।

गैस की गुंजाइश नहीं


जहरीली गैस छोड़ने के सवाल पर राजगोपालन का कहना है कि इस तकनीक में 1400 डिग्री सेल्सियस का इस्तेमाल करते हैं, 2700 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान के बाद ही इसमें से गैस निकल पायेगी।

कम खर्च, दोगुनी मजबूती


राजगोपालन के मुताबिक उनकी तकनीक से सड़क में तारकोल की खपत 10 फीसदी कम हो जाती है और सड़क की मजबूती भी दोगुनी हो जाती है

 

15,342 टन प्लास्टिक कचरा रोज देश में निकलता है, 2016 का आँकड़ा यह बताता है।

9,205 टन प्लास्टिक कचरे को रीसाइकिल किया जाता है, बाकी इकट्ठा नहीं हो पाता।

10 साल की मेहनत से राजगोपालन वासुदेवन ने प्लास्टिक कचरे से सड़क बनाने की खोज की थी

11 राज्यों में प्लास्टिक कचरे से अब तक 1 लाख किलोमीटर सड़क तैयार की जा चुकी है। आगे भी काम जारी है

2002 में सबसे पहले मदुरै के टी सी इंजीनियरिंग कॉलेज में प्लास्टिक कचरे से सड़क निर्माण किया

2004 में तमिलनाडु की तत्कालीन सीएम जयललिता को प्रोजेक्ट दिखाया, जिसके बाद उन्हें मिली ख्याति

 


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