बरसाती गीत

Submitted by admin on Sat, 02/27/2010 - 08:25
पेली पोथी रे बीमा खोली के राखी
दूजली हांता का मांय म्हारा वीरा
आवो म्हारा मेव राजा बरसो नी बरसो
बरसो नी बरसो, बरसो नी बरसो.........आवो

राम लखन जाग्या, जाग्या सीत मरूर
खेड़ा-खेड़ा पे जाग्या हे हनुमान्या
आवो म्हारा मेव राजा बरसो नी बरसो
बरसो नी बरसो, बरसो नी बरसो.........आवो

तमारा बर्स्या से धरती मां निबजे
ऐ दुनिया में होवे सुवकाल रे इंदर राजा
आवो म्हारा मेव राजा बरसो नी बरसो
बरसो नी बरसो, बरसो नी बरसो.........आवो

नाचे है मोर मेंढक राणी बोल
ए फूटया पीपल पान जाम्बू ऐ पाक्या
आवो म्हारा मेंव राजा बरसो नी बरसो
बरसो नी बरसो, बरसो नी बरसो.........आवो

बाजे नगारा इन्दर गड़ गाजे
लिम्बोली री गदराणी आम्बा ऐ पाका
आवो म्हारा मेंव राजा बरसो नी बरसो
बरसो नी बरसो, बरसो नी बरसो.........आवो

मदरी री बोले कोयल कूँकूँ बोले
ऐ पपैयो बोले जंगल नीचे झीणो मौर
आवो म्हारा मेंव राजा बरसो नी बरसो
बरसो नी बरसो, बरसो नी बरसो.........आवो

हे मेघराज! आप पानी बरसाओ, किसान लोग, आस लगाये आपकी राह देख रहे हैं। आपके बरसने से धरती फूलेगी, फसलें लहरा उठेंगी। राम लक्ष्मण जाग गये हैं और सीता मैया भी जाग गई हैं। हनुमान जी भी जाग गये हैं। मोर अपना नाच दिखा रहा है। मेंढक रानी टर्र-टर्र कर अपनी आवाज सुना रही हैं। पीपल के पत्ते नये आ गये हैं, जामुन भी पक गये हैं। आप इस तरह गरजो की गरजने की आवाज नगाड़ों जैसी लगे। नीम की निम्बोली भी पक गई है, आम भी पक गये हैं। कोयल मदहोश होकर कहूँ-कहूँ की बोली बोल रही है। मोर पीहूं-पीहूं की बोली बोल रहा है, और मोर नाच रहा है अपने पंख फैलाकर। मेंढक अपनी आवाज निकाल रहा है। मेघराजा आप बरसो, आपके बरसने से दुनिया वालों को दाना-पानी मिलेगा। खुशियाँ ही खुशियाँ लोगों को उत्साहित करेंगी, आप बरसो।

मेवाजी आप बरसो ने धरती नीबजे मेवाजी
दुनिया में होवे सुव काल हो इन्दर राजा
धरती अबोलो इन्दर क्यों लीयो........

मेवाजी हाली का हल नीचा राखजो मेवाजी
धोरी की धूर तो उतारो हो इन्दर राजा
धरती अबोलो इन्दर क्यों लीयो........

मेवाजी सुक्या सरवर कुंआ, बावड़ी मेवाजी
बन का पछीड़ा प्यासा जाय हो इन्दर राजा
धरती अबोलो इन्दर क्यों लीयो।

मेवाजी चारा बिना तो भूकी गाय हे मेवाजी
बछड़ा ते भूका बिना दूद हो, इन्दर राजा
धरती अबोलो इन्दर क्यों लीयो।

मेवाजी म्हार भींजईदो रंग भर चूनड़ी मेवाजी
म्हारा सायब री पंचरंगी पागा हो, इन्दर राजा
धरती अबोलो इन्दर क्यों लीयो।

मेवाजी धरऊँ दिसा से उठा बादली, मेवाजी
बरसण लागा चारी खुटहो, इन्दर राजा
धरती अबोलो इन्दर क्यों लीयो।

मेवाजी हाली का हल तो जोतावजो मेवाजी
धोरी का जूड़ा खांदे मेलो हो, इन्दर राजा
धरती अबोलो इन्दर क्यों लीयो।

मेघराज! आप बरसो तो धरती हरी-भरी रहेगी। धरती हरी भरी रहेगी तो दुनिया खुशहाल रहेगी। इन्द्रदेवता आपने धरती से अबोला क्यों ले रखा है। हाली के हल नीचे रखे हैं। हल चलेगा तो उनकी धूल उतर जायेगी। इन्द्रराजा! कुआँ, बावड़ी सब सूख गये हैं। घास नहीं उगी तो गाय बछड़े भी भूखे हैं। मेघराजा! पानी बरसा कर मेरी चुनरी भिंजा दो। उत्तर दिशा से बदली उठी है और चारों दिशा से बरसने लगी हैं। मेरे पति की पचरंगी पगड़ी गीली कर दो, लेकिन आप बरसो।

म्हारा काकाजी का कुवे झूलों वाद्यो वो मैंडक राणी
हा वो फदक राणी आप बोलो तो मेवलो बरसेगो

राणी जी मेवलो बरसे ने हिवेड़ा हरके वो मैंडक राणी
हा वो फदक राणी आप बोलो तो मेवलो बरसेगो

म्हारा फुफाजी की फुलवाड़ी सूकेवो मैंडक राणी
हा वो फदक राणी आप बोलो तो मेवलो बरसेगो

म्हारा बीराजी की बावड़ी भराजो वो मैंडक राणी
हा वो फदक राणी आप बोलो तो मेवलो बरसेगो

म्हारा मामाजी को मन हरसावो वो मैंडक राणी
हा वो फदक राणी आप बोलो तो मेवलो बरसेगो

म्हारा दादा का कुवले झूलो बांदेयावो मैंडक राणी
हा वो फदक राणी आप बोलो तो मेवलो बरसेगो

जब पानी नहीं बरसता तो सूप के अन्दर मेंढक जिंदा रखकर मेंढक की टाँग बाँध देते है। महिलायें मिलकर सब घर-घर जाकर गीत गाती है।

मेंढक रानी मेरे पिताजी के कुँए पर झूला बाँधों। मेंढक रानी आप उस झूले पर बैठकर बोलोगी तो पानी बरसेगा। पानी बरसेगा तो हम लोग खुश होएँगे। मेंढक रानी मेरे भाई की बावड़ी (कुआँ) पानी से भरवाना। मेंढक रानी मेरे फुफाजी की फुलवारी (बगीचा) सूख रहा है। उसे हरा-भरा कर देना। मेंढक रानी मेरे मामाजी को खुश कर दो। पानी बरसेगा तो सब खुश होंगे।

डेडक माता पाणी दे
पाणी की पड़ताल दे
म्हारा मामा को बाड़ सूके-बाड़ सूके
भूरा भूके भों-भों-भट

डेडक माता पाणी दे
पाणी की पड़ताल दे
म्हारा काकाजी की मक्का सूके-मक्का सूके
कुतरा भूके भों-भों भट

डेडक माता पाणी दे
पाणी की पड़ताल दे
म्हारा बीराजी को कुवों सूके-कूवों सूके
कुतरा भूके भों-भों-भट

डेडक माता पाणी दे
पाणी की पड़ताल दे
म्हारा फूफाजी की फूलवारी सूके-फूलवारी सूके
कुतरा भूके भों-भों भट.......

हे मेंढक माता! आप बोलो तो पानी बरसेगा। इतना पानी बरसाओ की पानी की झड़ी लग जाये, मेरे मामा का गन्ने का खेत सूख रहा है। मेरे काकाजी के मक्का का खेत सूख रहा है। मेरे भाई का कुआँ सूख रहा है। मेरे फूफाजी की फुलवारी सूख रही है। आप इतना पानी बरसाओ कि बाढ़ (गन्ने का खेत) हरा-भरा हो जाये, इतना पानी बरसाओ मेरे भाई का कुआँ पूरा भर जाये। इतना पानी बरसाओ कि मेरे फूफाजी के फूलों का बगीचा खिल जाये।

लागो हे मास असाड़, हां जी असाड़
बरसाती बादल जी, आविया म्हारा राज
हो बरसाती बादल...........

जागेगा धरती का भाग, हाँ जी कंई भाग
इन्दर राजा जी, जागीया म्हारा राज
हो बरसाती बादल...........

बादल गरजे ने कड़के बीज, हाँ जी कंई बीज
बरसण लागी जी बादल्या, म्हारा राज
हो बरसाती बादल............

मेवलो बरसेगा चारी खूंट, हां जी कंई खूंट
बावेगा नद्दी जी नालियाँ, म्हारा राज
हो बरसाती बादल...........

आवेगा इन्दारी काली रात, हां जी कंई रात
चमकण लागी जी बिजलीयां, म्हारा राज
हो बरसाती बादल...........

जोवे बिरहणी पल-पल बाट, हां जी कंई बाट
पीत्तम घर पर नी आविया, म्हारा राज
हो बरसाती बादल जी, आविया..........

आषाढ़ का महीना लग गया है, बरसाती बादल अब आयेंगे, धरती के भाग्य जाग गये हैं। बादल गरज रहे हैं, बिजलियाँ कड़क रही हैं। बिजली कड़कते ही मूसलाधार वर्षा हो रही है। यह वर्षा चारों कोने में बरसेगी। पत्नी अपने पति का रास्ता देख रही है कि कब घर आयेंगे, लेकिन वह घर नहीं आये।

धरऊ दिसा से बादली उलटी हो बरसा लागी
मूसल धार सीख देवो तो घरे जावां

म्हारा घर में रामजी गायां हो भेस्या
हो बारा भेस्या का दुदड़ा दोय
सीख देवो तो घरे जावां

म्हारा घर में पिरभू, लाडू हो पेड़ा
जीमेगा श्री भगवान
सीख देवो तो घरे जावां

म्हारा तो घर में पिरभू दिवड़ी घणेरी
हो दिवला बलेगा सारी रेन
सीख देवो तो घरे जावां

म्हारा घर में पिरभू कुटम कबीला
हो सुख संपत को बास
सीख देवो तो घरे जावां

तांबा का हंडा में तातो सो पाणी
हो न्हावेगा श्री भगवान
सीख देवो तो घरे जावां

सोना की सार जड़ावा का पासा
जीतेगा श्री भगवान
सीख देवो तो घरे जावां

पाक सा पान कलाई को चूनो
हो चाबेगा श्री भगवान
सीख देवो तो घरे जावां

हिंगलू का ढोल्या ने मिसरू की गादी
हो पोड़ेगा श्री भगवान
सीख देवो तो घरे जावां

उत्तर दिशा से बदली चढ़ी है और बरसने लगी है। आप जल्दी से मुझे ज्ञान दो तो घर जाऊँ। प्रभु मेरे घर में गाय, भैंस की कोई कमी नहीं, दूध की नदियाँ बहती हैं। मेरे घर में लड्डू पेड़ों की कोई कमी नहीं है। श्री भगवान को भी जिमाऊंगी, प्रभु मेरे घर में मेरी बेटियां हैं जो मेरे परिवार का उजाला बनेंगी, मेरा परिवार भी बहुत बड़ा है, सुख संपत्ति है, किसी तरह की कोई कमी नहीं है। मैंने तुम्हारे लिए हण्डे में पानी गरम रखवाया है। नहलाने के लिए। जड़ाऊ के पासे रखे हैं। आपके खेलने के लिए सोने की सार है। आपके लिए रेशम के गादी गलीचे आपके आराम करने के लिए लगवाये हैं। लेकिन प्रभु ज्ञान की कमी है, वह आपसे मिलेगा तो हम धन्य हो जायेंगे।

धरउ दीसा से मेवाजी उमड्या
उगमणी दिसा रो चड़ाव
गिरधानी गेरी-गेरी पड़े रे फुंवार

आप बरसो तो धरती नीबजे
दुनिया में होवे सुवकाल।
गिरधानी गेरी-गेरी पड़े रे फुंवार

हालीड़ा ने मेल्या रास पराणा
धोरीड़ा ने मेल्या जोतर जूड़ा
गिरधानी गेरी-गेरी पड़े रे फुंवार

गाया ने छोड्या धातवा बाछरू
बालुड़ा ने छोड़या माँ का दूद
गिरधानी गेरी-गेरी पड़े रे फुंवार

उत्तर दिशा से मेघराजा उमड़े हैं, पूर्व दिशा में बादल छा गये हैं, गहरी-गहरी फुहार गिरने लगी हैं। मेघ आप बरसोगे ते धरती फलेगी-फूलेगी, दुनिया में खुशहाली आयेगी। किसान (हाली) ने रस्सी और डंडा एक तरफ रख दिया है। बैलों के जोत और जुड़े भी खोलकर रख दिये। गायों ने अपने बछड़े को दूध नहीं पिलाया, छोटे बच्चे ने माँ का दूध पीना नहीं छोड़ा है। गिरधारी! बड़ी-बड़ी फुहारों की वर्षा हो रही है।

काली कंठी रो मेवो उलट्यो
मेवाजी हो झड़ीयां मांडी दी

लटपट बांदी हो बीराजी पागड़ी
बेन्या के सिगरत पावणा

दूंरा दिसा से बीराजी आवीया
आई-आई हो नदियाँ पूर

उतरो-उतरो नी हो गंगा बेनोली
चड़ाऊ कुकड़ा बोकड़ा

लटपट बांदी हो काकोसा पागड़ी
भतीजी री सिगरत पांवणा

दूंरा दिसा से काकोसा आवीया
आई-आई हो नदियाँ पूर

उतरो-उतरो नी हो गंगा बेनोली
चड़ाऊँ थारे कुकड़ा बोकड़ो

मेघराजा इतने घनघोर चढ़े हैं कि झड़ी लग गई है। झड़ी देख भाई को बहन की याद आयी, काका को भतीजी की याद आयी। दोनों ने उल्टी-पुल्टी ही पगड़ी सिर बाँध ली और चल दिये। बहन ने दूर से देखा तो नदी माता से गुहार करने लगी कि- हे गंगा बहन! तुम उफान मत आना, तुम्हें मैं चढ़ौत्री चढ़ाऊँगी, क्योंकि मेरा भाई और काका आ रहे हैं।

धरऊ दिसा से मेवाजी ऊमक्या
उगमणी दिसा को चड़ाव
गिरधारी गिर नी पड़े फुंवार

आप बरसो तो मेवाजी मालवो निबजे
दुनिया में होवे सुवकाल
गिरधारी गिर नी पड़े फुंवार

हालीड़ा ने मेल्या रास पिरणा
धोरी ने मेल्या जूतर जूड़ा
गिरधारी गिर नी पड़े फुंवार

गव्वा ने छोड़या धावत सा बाछरू
छोड़या दूदड़ा पीणा,
गिरधारी गिर नी पड़े फुंवार

उत्तर दिशा से मेघराज उठे हैं और पूर्व दिशा तक चढ़ गये हैं। मेघराजा! आप बरसोगे तो मालवा में फसल अच्छी होगी। मेघराजा! हाली (किसान) ने रस्सी और डंडा रख दिया है। बैल के जूतर और जूड़े भी खोलकर रख दिये हैं।

लाग्यो हे मास असाड़, हांजी लाग्यो हे मास असाड़
बरसाता बादल जी आविया म्हारा राज

दोहा- धरऊ दिसा की बादली
घटा उठी घनगोर
बरसण लाग्यो मेवलो बोले ढाढर मोर
लाग्यो हे मास........

एजी सैंया भादव मइना की काली रात
चमकण लागी जी बिजल्यां म्हारा राज
लाग्यो हे मास......

काली पिली बादली हुई इन्दारी रात
बरसण लागे मेवलो कोये करे पुकार
लाग्यो हे मास........


एजी सैंया पाणी बरसे है मूसलधार
कुवा तो भारिया जी नीर से म्हारा राज
लाग्यो हे मास........

उत्तर दिशा से उठी घनघोर बदली बरसने लगी है, मोर भी पिया-पिया बोलकर नाचने लगे है। भादौं माह की काली रात में बिजलियाँ चमक रही हैं, काली-पीली बादलियाँ हो रही हैं, मेघ राग सुना रही हैं। पानी मूसलाधार बरस रहा है, क्योंकि आषाढ़ माह लग गया है।

या तो कंकू पिगाणी म्हारा हात में
हूं तो इन्दर बदावा ने जऊं हो सहेली म्हारा
हांहो गोठन म्हारी, मंगल गांवा तो मेवाजी बरसेगा

या तो नारेला रो डोडो म्हारा हात में
हूं तो इन्दर बदावा ने जऊं हो सहेली म्हारा
हांहो गोठन म्हारी, मंगल गांवा तो मेवाजी बरसेगा

या तो गंगाजल झारी म्हारा हात में
हूं तो इन्दर बदावा ने जऊं हो सहेली म्हारा
हांहो गोठन म्हारी, मंगल गांवा तो मेवाजी बरसेगा

या तो हार ने फूल म्हारा हात में
हूं तो इन्दर बदावा ने जऊं हो सहेली म्हारा
हांहो गोठन म्हारी, मंगल गांवा तो मेवाजी बरसेगा

(महिलायें पूजा का समान लेकर इन्द्र देवता को मनाने के लिए गीत गा रही हैं।)

कंकू, हल्दी, मेंहदी, चावल लेकर मेघराजा से विनती कर रही हैं। हाथ में नारियल, गंगाझारी, हार, फूल, प्रसाद लेकर इन्द्र देवता को मनाने जा रही हैं और मंगलगीत गा रही हैं कि मेघराजा आप बरसो। आपकी यहाँ बहुत जरूरत है, आपकी हम हर मानता पूरी करेंगे, लेकिन आप बरसो।

दल बादली रो पाणी सैंया कुण तो भरे
मैं तो भरा म्हारी सहेल्यां भरे
दल बादली से पाणी सैंया, कुण तो भरे

इत्तल पित्तल रो म्हारो बेवड़ो बादीला
पाणी लेवां चाली रे तलाव
दल बादली से पाणी सैंया, कुण तो भरे

कुण जी खोदाया कुवा बावड़ी बादीला
कुण जी खोदाया रे तालाब
दल बादली से पाणी सैंया, कुण तो भरे

ससराजी खोदाया कुवा बावड़ी बादीला
सासुजी खोदाया रे तलाब
दल बादली को पाणी सैंया, कुण तो भरे

रात री सूती ने म्हारे सपनो जी आयो
जागत जीव रो जंजाल
दल बादली से पाणी सैंया, कुण तो भरे

पानी इतना बरसा है कि कुआँ तालाब, बावड़ी सब पर गये हैं। ऐसे में सहेलियाँ इकट्ठी होकर पानी भरने चली हैं। और आपस में बातें भी करती जाती हैं। एक अपने पति से कहकर जा रही है कि मैं पीतल का घड़ा लेकर अपनी सहेलियों के साथ पानी लेने जा रही हूँ।

एक सहेली पूछती है कि यह कुआँ, बावड़ी और तालाब किसने खुदवाये हैं तो पनिहारी बताती है कि ससुरजी ने तालाब खुदवाया है। आराम से सोती हूँ, बहुत ही मीठे-मीठे सपने आते हैं लेकिन सुबह जल्दी उठकर जब पानी भरने जाना पड़ता है तो यह मेरी परेशानी बन जाता है।

काली घटा को चड्यो बादलो
पणियारी जी रा लोग
नखराली जी रा लोग
जेठ जी उतारो मेंव, म्हारा बालाजी

किनने खोदाया कुवा बावड़ी
किनने खोदाया समंद तलाब
बालाजी........काली घटा को.....

दादोसा खोदाया कुवा बावड़ी
सुसरा जी खोदाया समंद तलाब
बालाजी......काली घट को.....

म्हारी सरेल्यां सब रंगी चंगी
थारो नखरालो भेस
बालाजी.....काली घटा को

ओरा रा सायब घर बसे नखराली
म्हारा रायचन्द परदेस बालाजी
काली घटा को.........

घनघोर बादल छाये हैं पनिहारी पानी भरने चली है, जेठजी जादू-मंतर करके बादलों को वापस पलटा दो। किसने कुआँ और बावड़ी खुदवाये और किसने तालाब खुदवाया है? पिताजी ने कुआं और बावड़ी खुदवाया है और ससुरजी ने तालाब खुदवाया है। मेरी सहेलियाँ इतनी सुन्दर हैं लेकिन मैं भी उनसे कम नहीं पड़ती हूँ। उनके पिया सब घर पर हैं मेरे परदेश गये हैं। घटा-घनघोर चढ़ी है। मेरे पिया घर पर नहीं हैं इसलिए बदली को वापस पलटा दो।

हमारा बीराजी के दोय दो पांगा एक मेंरे ने एक पेटी में धरे
दल बादी को पाणी सैंया कोण भरे
हूं भी भरूं ने म्हारी सैंया भी भरे
दल बादली को पाणी सैंया......

हमारा बीराजी के दोय-दोय जामा, एक पेरे ने एक पेटी में धरे
दल बादली को पाणी सैंया कोण भरे
हूं भी भरूं ने म्हारी सैंया भी भरे.......दल बादली

हमारा बीराजी के दोय-दोय झेला, एक पेरे न एक पेटी में धरे
दल बादली को पाणी सैंया कोण भरे
हूं भी भरूं ने म्हारी सैंया भी भरे.......दल बादली

हमारा बीराजी के दोय-दोय मूंदड़ी एक पेर एक पेटी में धरे
दल बादली को पाणी सैंया कोण भरे
हूं भी भरूं ने म्हारी सैंया भी भरे.......दल बादली

हमारा बीराजी को दोय-दोय मोजड़ी एक पेरे ने एक पेटी में घेर
दल बादली को पाणी सैंया कोण भरे
हूं भी भरूं ने म्हारी सैंया भी भरे.......दल बादली

हमारा बीराजी दोय-दोय बंइरा एक पियर एक सासरे मेले
दल बादली को पाणी सैंया कोण भरे
हूं भी भरूं ने म्हारी सैंया भी भरे.......दल बादली

मेरे भाई के दो जोड़ सिर पर पहनने की पगड़ी है, दो जोड़ कपड़े हैं जिसे वह एक पहनता है तो दूसरा जोड़ा संदूक में रखता है। ऐसे ही मेरे भाई के दो पत्नियाँ हैं, एक ससुराल में रहती है तो एक मायके में रहती है। यह बदली पानी बरसा कर गई है इसका पानी कौन भर कर लायेगा। हारकर मुझे ही भरकर लाना है। सहेलियों के साथ जाकर भरकर लाऊँगी।

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