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खासम-खास

केरल की चेतावनी - सम्भावित कारण

Submitted by editorial on Sat, 09/15/2018 - 15:16
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
इडुक्की में सूखी पेरियार नदीइडुक्की में सूखी पेरियार नदी (फोटो साभार - फर्स्टपोस्ट)भोपाल से प्रकाशित दैनिक अखबार भास्कर (13 सितम्बर, 2018) में ‘केरल की नई मुसीबत’ के शीर्षक से खबर छपी है। इस खबर के अनुसार जहाँ बाढ़ ने तबाही मचाई थी वहाँ नदियाँ और कुएँ सूखे। अखबार आगे लिखता है कि पिछले माह की 100 साल में सबसे भीषण बाढ़ से गुजरे केरल में अब सूखे का संकट मँडरा रहा है। मात्र तीन सप्ताह के अन्दर बाढ़ग्रस्त इलाकों की नदियों और कुओं का जलस्तर गिरना प्रारम्भ हो चुका है।

Content

यह जो इक शहर है बेपानी शिमला...

Submitted by RuralWater on Tue, 04/24/2018 - 18:45
Author
अरुण तिवारी

एक करोड़ लीटर पानी का सूखा टैंकएक करोड़ लीटर पानी का सूखा टैंकशिमला की ठंड, भारत में एक मुहावरे की तरह है। गर्मी में ठंड की बात हो, तो शिमला याद आता है। उत्तर के मैदानी इलाके में ठंड बढ़ जाये तो कहा जाता है कि शिमला की हवा चल गई। और-तो-और यदि ठंड में बर्फ का नजारा देखने की बात हो, तो भी शिमला का ही नाम लिया जाता है।

बंगाल की नदियों का अस्तित्व खतरे में

Submitted by RuralWater on Tue, 04/24/2018 - 18:41
Author
उमेश कुमार राय

गंगा में ऐसे कई पावर प्लांट कूड़ा डालते हैंगंगा में ऐसे कई पावर प्लांट कूड़ा डालते हैंमानव सभ्यता के विकास में नदियों का बड़ा योगदान है। कमोबेश सभी सभ्यताएँ नदियों के किनारे ही विकसित हुईं हैं। वजह है जीवन के लिये जल सबसे जरूरी तत्व है और नदियों को जल के अकूत स्रोत के रूप में देखा गया।

भारत में शायद ही कोई राज्य है, जिससे होकर नदियाँ न गुजरती हों। बंगाल की खाड़ी से सटे पश्चिम बंगाल को तो ‘नदीमातृक’ नाम से नवाजा गया है।

युद्ध और शांति के बीच जल - भाग चार

Submitted by RuralWater on Sat, 04/21/2018 - 19:03
Author
अरुण तिवारी


(प्रख्यात पानी कार्यकर्ता श्री राजेन्द्र सिंह के वैश्विक जल अनुभवों पर आधारित एक शृंखला)
इजराइली जल प्रबन्धन - दादागिरी भी, समझदारी भी

इजराइल का जल प्रबन्धनइजराइल का जल प्रबन्धनइजराइल का फिलिस्तीन की पानी पर दादागिरी का वर्णन आप सुना चुके। इससे पहले कि आप इजराइल के पानी प्रबन्धन के बारे में बताएँ, बेहतर होगा कि वहाँ से जुड़े पानी का कोई और विवाद हो तो पाठकों के साथ शेयर करें?

हाँ, हैं न। इजराइल और जाॅर्डन के बीच पानी का विवाद बहुत पुराना है। यह विवाद, जाॅर्डन नदी के रेपेरियन राइट से जुड़ा है।

प्रयास

आदिवासियों ने सहेजे माता नु वन

Submitted by editorial on Mon, 09/03/2018 - 14:32
Author
मनीष वैद्य
आदिवासियों के प्रयास से हरा-भरा हुआ जंगलआदिवासियों के प्रयास से हरा-भरा हुआ जंगलमध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में अपढ़ समझे जाने वाले आदिवासी समाज ने अपने जंगल को सहेजकर पढ़े-लिखे समाज को एक बड़ा सन्देश दिया है। जिले के 110 गाँवों में खुद आदिवासियों ने अपने बूते आसपास के जंगलों को न सिर्फ सहेजा, बल्कि वहाँ 41 हजार नए पौधों को रोपकर घना जंगल खड़ा करने के लिये भी जतन शुरू कर दिया है।

नोटिस बोर्ड

हिमालय में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव पर एकदिवसीय कार्यशाला

Submitted by editorial on Fri, 09/14/2018 - 18:39
Author
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
दिनांक- 15 सितम्बर 2018,
स्थान - मसीही ध्यान केन्द्र, राजपुर, देहरादून
समय - 10-05 बजे तक
दिन - शनिवार

विषय - उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर अध्ययन रिपोर्ट के प्रस्तुतिकरण एवं एक दिवसीय कार्यशाला हेतु सादर निमंत्रण


माउंटेन फोरम हिमालय (mountain forum himalayas - MFH) विगत पन्द्रह वर्षों से पर्वतीय राज्य उत्तराखण्ड और हिमाचल में स्थानीय स्वशासन में महिलाओं, वंचित वर्ग और आमजन की भागीदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से स्थानीय समुदाय, ग्राम स्तरीय संगठन, स्वयंसेवी संगठन के साथ ही सरकार के भी सहयोग ले रही है। एम.एफ.एच. द्वारा समय-समय पर पंचायत प्रतिनिधियों का क्षमता का विकास, पंचायतों का सूक्ष्म नियोजन एवं चुनाव पूर्व मतदाता जागरुकता अभियान जैसी गतिविधियों के माध्यम से राज्य की पंचायती राज व्यवस्था को सुदृढ़ करने का कार्य पिछले काफी सालों से किया जाता रहा है।

युवा वैज्ञानिकों के लिये विज्ञान संचार से जुड़ने का अवसर

Submitted by editorial on Mon, 08/13/2018 - 17:18
Author
उमाशंकर मिश्र
Source
इंडिया साइंस वायर, 13 अगस्त, 2018
विज्ञान संचारकविज्ञान संचारक (फोटो साभार - अवसर) नई दिल्ली। विज्ञान को सरल भाषा में लोगों तक पहुँचाने के लिये अब युवा वैज्ञानिकों का सहारा लिया जाएगा। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने इस सम्बन्ध में एक राष्ट्रीय प्रतियोगिता की घोषणा की है।

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केरल की चेतावनी - सम्भावित कारण

Submitted by editorial on Sat, 09/15/2018 - 15:16
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कृष्ण गोपाल 'व्यास’
इडुक्की में सूखी पेरियार नदीइडुक्की में सूखी पेरियार नदी (फोटो साभार - फर्स्टपोस्ट)भोपाल से प्रकाशित दैनिक अखबार भास्कर (13 सितम्बर, 2018) में ‘केरल की नई मुसीबत’ के शीर्षक से खबर छपी है। इस खबर के अनुसार जहाँ बाढ़ ने तबाही मचाई थी वहाँ नदियाँ और कुएँ सूखे। अखबार आगे लिखता है कि पिछले माह की 100 साल में सबसे भीषण बाढ़ से गुजरे केरल में अब सूखे का संकट मँडरा रहा है। मात्र तीन सप्ताह के अन्दर बाढ़ग्रस्त इलाकों की नदियों और कुओं का जलस्तर गिरना प्रारम्भ हो चुका है।

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यह जो इक शहर है बेपानी शिमला...

Submitted by RuralWater on Tue, 04/24/2018 - 18:45
Author
अरुण तिवारी

एक करोड़ लीटर पानी का सूखा टैंकएक करोड़ लीटर पानी का सूखा टैंकशिमला की ठंड, भारत में एक मुहावरे की तरह है। गर्मी में ठंड की बात हो, तो शिमला याद आता है। उत्तर के मैदानी इलाके में ठंड बढ़ जाये तो कहा जाता है कि शिमला की हवा चल गई। और-तो-और यदि ठंड में बर्फ का नजारा देखने की बात हो, तो भी शिमला का ही नाम लिया जाता है।

बंगाल की नदियों का अस्तित्व खतरे में

Submitted by RuralWater on Tue, 04/24/2018 - 18:41
Author
उमेश कुमार राय

गंगा में ऐसे कई पावर प्लांट कूड़ा डालते हैंगंगा में ऐसे कई पावर प्लांट कूड़ा डालते हैंमानव सभ्यता के विकास में नदियों का बड़ा योगदान है। कमोबेश सभी सभ्यताएँ नदियों के किनारे ही विकसित हुईं हैं। वजह है जीवन के लिये जल सबसे जरूरी तत्व है और नदियों को जल के अकूत स्रोत के रूप में देखा गया।

भारत में शायद ही कोई राज्य है, जिससे होकर नदियाँ न गुजरती हों। बंगाल की खाड़ी से सटे पश्चिम बंगाल को तो ‘नदीमातृक’ नाम से नवाजा गया है।

युद्ध और शांति के बीच जल - भाग चार

Submitted by RuralWater on Sat, 04/21/2018 - 19:03
Author
अरुण तिवारी


(प्रख्यात पानी कार्यकर्ता श्री राजेन्द्र सिंह के वैश्विक जल अनुभवों पर आधारित एक शृंखला)
इजराइली जल प्रबन्धन - दादागिरी भी, समझदारी भी

इजराइल का जल प्रबन्धनइजराइल का जल प्रबन्धनइजराइल का फिलिस्तीन की पानी पर दादागिरी का वर्णन आप सुना चुके। इससे पहले कि आप इजराइल के पानी प्रबन्धन के बारे में बताएँ, बेहतर होगा कि वहाँ से जुड़े पानी का कोई और विवाद हो तो पाठकों के साथ शेयर करें?

हाँ, हैं न। इजराइल और जाॅर्डन के बीच पानी का विवाद बहुत पुराना है। यह विवाद, जाॅर्डन नदी के रेपेरियन राइट से जुड़ा है।

प्रयास

आदिवासियों ने सहेजे माता नु वन

Submitted by editorial on Mon, 09/03/2018 - 14:32
Author
मनीष वैद्य
आदिवासियों के प्रयास से हरा-भरा हुआ जंगलआदिवासियों के प्रयास से हरा-भरा हुआ जंगलमध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में अपढ़ समझे जाने वाले आदिवासी समाज ने अपने जंगल को सहेजकर पढ़े-लिखे समाज को एक बड़ा सन्देश दिया है। जिले के 110 गाँवों में खुद आदिवासियों ने अपने बूते आसपास के जंगलों को न सिर्फ सहेजा, बल्कि वहाँ 41 हजार नए पौधों को रोपकर घना जंगल खड़ा करने के लिये भी जतन शुरू कर दिया है।

नोटिस बोर्ड

हिमालय में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव पर एकदिवसीय कार्यशाला

Submitted by editorial on Fri, 09/14/2018 - 18:39
Author
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
दिनांक- 15 सितम्बर 2018,
स्थान - मसीही ध्यान केन्द्र, राजपुर, देहरादून
समय - 10-05 बजे तक
दिन - शनिवार

विषय - उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर अध्ययन रिपोर्ट के प्रस्तुतिकरण एवं एक दिवसीय कार्यशाला हेतु सादर निमंत्रण


माउंटेन फोरम हिमालय (mountain forum himalayas - MFH) विगत पन्द्रह वर्षों से पर्वतीय राज्य उत्तराखण्ड और हिमाचल में स्थानीय स्वशासन में महिलाओं, वंचित वर्ग और आमजन की भागीदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से स्थानीय समुदाय, ग्राम स्तरीय संगठन, स्वयंसेवी संगठन के साथ ही सरकार के भी सहयोग ले रही है। एम.एफ.एच. द्वारा समय-समय पर पंचायत प्रतिनिधियों का क्षमता का विकास, पंचायतों का सूक्ष्म नियोजन एवं चुनाव पूर्व मतदाता जागरुकता अभियान जैसी गतिविधियों के माध्यम से राज्य की पंचायती राज व्यवस्था को सुदृढ़ करने का कार्य पिछले काफी सालों से किया जाता रहा है।

युवा वैज्ञानिकों के लिये विज्ञान संचार से जुड़ने का अवसर

Submitted by editorial on Mon, 08/13/2018 - 17:18
Author
उमाशंकर मिश्र
Source
इंडिया साइंस वायर, 13 अगस्त, 2018
विज्ञान संचारकविज्ञान संचारक (फोटो साभार - अवसर) नई दिल्ली। विज्ञान को सरल भाषा में लोगों तक पहुँचाने के लिये अब युवा वैज्ञानिकों का सहारा लिया जाएगा। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने इस सम्बन्ध में एक राष्ट्रीय प्रतियोगिता की घोषणा की है।

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