कैग रिपोर्ट, राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना हुई फेल

Submitted by editorial on Fri, 09/21/2018 - 17:46
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पीआरएस इण्डिया

राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजनाराष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना (फोटो साभार - एमडीडब्ल्यूएस)राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना (National Rural Drinking Water Programme, NRDWP) लक्ष्यों को हासिल करने में नाकाम साबित हुई है जबकि इस योजना के मद में आवंटित राशि का 90 प्रतिशत हिस्सा खर्च किया जा चुका है। योजना की शुरुआत वर्ष 2009 में हुई थी जिसका उद्देश्य था सभी ग्रामीण भारतीयों को पीने अथवा घरेलू जरूरतों के लिये सतत रूप से पानी उपलब्ध कराना।

वित्तीय वर्ष 2012 से 2017 के लिये किये गए लेखा परीक्षण (audit) से यह बात सामने आई है कि यह योजना अपने लक्ष्य से कोसों दूर है। इस बाबत 9 अगस्त 2018 को भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (Comptroller and Auditor General of India,CAG) द्वारा एक रिपोर्ट जारी की गई है।

कैग की रिपोर्ट के अनुसार इस योजना के धराशायी होने का सबसे बड़ा कारण तयशुदा लक्ष्यों को हासिल करने में राज्यों का ढुलमुल रवैया है। अभी तक 21 राज्यों ने लोगों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के लिये जल सुरक्षा योजना (Water Security Plan) नहीं बनाई है, और न ही योजना के कार्यान्वयन और उसके रख-रखाव सम्बन्धी कोई प्लान तैयार किया है। केन्द्र और राज्य सरकारों के बीच मानकों को हासिल करने के लिये समन्वय की कमी भी इसके फेल होने का बड़ा कारण है।

योजना का लक्ष्य से पीछे रह जाने के अन्य कारणों में हितधारकों की कमी और सामुदायिक स्तर पर सहयोग की कमी, योजना में न्यूनतम सेवा स्तर की बात को शामिल नहीं किया जाना, राज्य स्तरीय योजना अनुमोदन समिति (State Level Scheme Sanctioning Committee) द्वारा इससे सम्बन्धित योजना को स्वीकृति नहीं दिया जाना भी शामिल है।

इतना ही नहीं योजना के कार्यान्वयन के जरूरी राज्य स्तरीय अंगों जैसे स्टेट वाटर एंड सेनिटेशन मिशन (State Water and Sanitation Mission), स्टेट टेक्निकल एजेंसी (State Technical Agency) और ब्लॉक रिसोर्स सेंटर्स (Block Resources Centres) या तो स्थापित ही नहीं किये गए या उनकी कार्य करने की गति काफी धीमी थी।

राष्ट्रीय पेयजल व स्वच्छता परिषद (National Drinking Water and Sanitation Council) अपने कार्यों को सम्पादित करने में लगभग नाकाम रहा। इसका गठन योजना के लक्ष्यों को सुनिश्चित करने के साथ-साथ विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिये किया गया था।

इसके तहत वर्ष 2017 तक सम्पूर्ण ग्रामीण भारतीयों सहित स्कूलों और आँगनबाड़ी केन्द्रों को पाइप द्वारा स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की योजना थी लेकिन इन लक्ष्यों को हासिल नहीं किया जा सका। अब तक केवल 44 प्रतिशत घरों, 85 प्रतिशत स्कूलों और आँगनबाड़ी केन्द्रों में पीने का पानी उपलब्ध कराया जा सका है जबकि इसे शत-प्रतिशत हासिल किये जाने की योजना थी।

तय लक्ष्य के अनुसार दिसम्बर 2017 के अन्त तक हर रोज देश की कुल ग्रामीण आबादी के 50 प्रतिशत हिस्से को 55 लीटर प्रतिव्यक्ति पीने योग्य सप्लाई का पानी उपलब्ध कराए जाने की योजना थी लेकिन ऐसा नहीं हो सका। अभी तक कुल ग्रामीण जनसंख्या के 18 प्रतिशत हिस्से को ही यह सुविधा उपलब्ध कराई जा सकी है। इसके अलावा इस योजना के तहत देश के 35 ग्रामीण घरों में पानी का कनेक्शन मुहैया कराया जाना था लेकिन 17 प्रतिशत घरों में ही यह सुविधा उपलब्ध है।

योजना के लिये वर्ष 2012-2017 के लिये कुल 89,956 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया गया था जिसमें 43,691 करोड़ रुपए केन्द्र और बाकी के 46,265 करोड़ रुपए राज्यों द्वारा खर्च किये जाने थे। इस बजट का 90 प्रतिशत भाग यानि 86,168 करोड़ रुपए किये जा चुके हैं मगर इन वर्षों में योजना काफी धीमी रही।

रिपोर्ट के अनुसार केन्द्र द्वारा राज्यों को राशि आवंटित करने में हुई देरी और राज्यों द्वारा इस मद में राशि को न बढ़ाए जाने की बाध्यता भी इसकी धीमी प्रगति का एक बड़ा कारण है। इस योजना के मद में वित्तीय वर्ष 2013-2014 और 2016-2017 के बीच राशि के आवंटन में कमी आ गई थी और राज्यों को केन्द्र से राशि मिलने में 15 महीनों की देरी हुई थी। कैग ने योजना की हर एक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सक्रियता के साथ राशि के आवंटन की बात कही है।

कैग ने अपनी रिपोर्ट में ठेका प्रबन्धन (Contractual Management) में 2,212 करोड़ रुपए के कुप्रबन्धन की बात को भी उजागर किया है। उसने कहा है कि इस प्रोजेक्ट के फेल होने में अधूरे छोड़े हुए कामों के गैरजरूरी मशीनों की खरीद पर किये गए खर्च का भी योगदान है।

राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना की एक सबसे बड़ी कमी है कि इसमें सतही जल के प्रबन्धन पर विशेष ध्यान नहीं दिया गया है। जरूरी जलीय आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु इसमें 98 प्रतिशत भूजल के इस्तेमाल की बात कही गई है।

इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कैग ने केन्द्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय (Union Ministry of Drinking Water and Sanitation) को इस योजना की सम्भाव्यता और व्यावहारिकता की समीक्षा करने की सलाह दी है। उसने यह भी कहा है कि समुदाय की सहभागिता के साथ ही जल सुरक्षा योजना और वार्षिक कार्य योजनाएँ तैयार की जानी चाहिए। इसके अलावा उसने ठेका प्रबन्धन पर बल देने के साथ ही ठेकेदारों द्वारा समय पर काम न पूरा किये जाने पर आर्थिक दंड लगाने की बात भी कही है।

 

 

 

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