पर्यावरणीय क्षरण तथा आपदा प्रबन्धन

Submitted by Hindi on Sun, 04/01/2018 - 17:34
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शिक्षार्थी मार्गदर्शिका

 

पा.स.

अध्याय शीर्षक

कौशल

क्रियाकलाप

26

पर्यावरणीय क्षरण तथा आपदा प्रबन्धन

आत्म बोध, समस्या समाधान, प्रभावी संचार, निर्णय ले पाना, विवेकशील सोच

वातावरण का क्षरण न होने दें

 

 

अर्थ


पेड़ों को गाँवों में खेती करने हेतु तथा शहरों में घर बनाने, बड़ी बिल्डिंग बनाने, सड़क बनाने हेतु काटा जा रहा है। हम प्रदूषण का जो प्रभाव देख रहे हैं वह अत्यधिक गाड़ियों में से निकले धुएँ में कार्बन मोनोऑक्साइड तथा फैक्ट्रियों से निकली हानिकारक गैसों के कारण है। यह सभी मानवी क्रियाएं पर्यावरण को बुरी तरह प्रभावित कर रही हैं। पर्यावरण का क्षय कई तरह की मानव रचित अपदाओं को जन्म दे रहा है। भोपाल गैस त्रासदी, भूस्खलन, लंदन स्मोग ऐसी अपदाओं के कुछ उदाहरण हैं।

 

 

पर्यावरण का अर्थ तथा इसका महत्त्व


- साधरणतः पर्यावरण का अर्थ है हमारा परिवेश जिसमें हम जीवन व्यतीत करते हैं।

- जीवन के चारों ओर उन सभी दशाओं और परिस्थितियों तथा जीवित और अजीवित वस्तुओं के कुल योग के रूप में इसको परिभाषित किया गया है।

- हमारे अस्तित्व के लिये पर्यावरण बहुत महत्त्वपूर्ण है।

- हम पर्यावरण पर अपने भोजन, आश्रय, जल, वायु, भूमि, ऊर्जा औषधि रेशे, उद्योगों के लिये कच्चे माल हेतु निर्भर हैं।

 

पर्यावरण का वर्गीकरणविकास की प्रक्रिया पर आधारित पर्यावरण

 

पर्यावरण की गतिशीलता और विविधता


पर्यावरण की प्रकृति गतिशील है। पर्यावरण कभी स्थिर नहीं रहता। पर्यावरण एक स्थान से दूसरे स्थान पर तथा ऐतिहासिक रूप से एक समय से दूसरे समय में भिन्न होता है। उदाहरण के लिये हिमालय का पर्यावरण बृहत भारतीय मरुस्थल से भिन्न है और वहाँ भी वर्षों और दशकों से एक जैसा नहीं रहा है। किसी स्थान का पर्यावरण एक जैसा नहीं रहता। कुछ परिवर्तन प्राकृतिक रूप से होते हैं जबकि दूसरे परिवर्तन मनुष्य की गतिविधियों के कारण होते हैं। यहाँ तक कि मानव-निर्मित पर्यावरण भी समय और स्थान के साथ बदल रहा है। मानव आवास को ही लें- साधारण झुग्गी व घर गगनचुम्बी इमारतों में बदल गए हैं। गाँवों की जगह शहरों, कस्बों तथा महानगरों ने ले ली है। परिवहन और संचार के साधनों में क्रांतिकारी परिवर्तन हुए हैं।

 

पर्यावरणीय क्षरण के कारणपर्यावरणीय क्षरण के कारणहम अपने पर्यावरण को क्षरण से बचा सकते हैं तथा साथ ही तीन तरीकों से धनोपार्जन भी कर सकते हैं: पुनर्चक्रण, दोबारा प्रयोग करना और उपभोग को घटा करकचरा संयोजन तालिका

 

सतत पोषीय विकास


पर्यावरण क्षरण के परिणाम अधिक गम्भीर हैं। यह एक सशक्त विचार है कि विकास का जो मॉडल मानव समाज द्वारा अपनाया गया है वही पर्यावरणीय क्षरण का प्रमुख कारण हैं। सतत विकस की अवधरणा, जो विकल्प के रूप में सामने आई है, वह पर्यावरणीय क्षरण को रोक सकेगी। सतत विकास को एक ऐसे विकास के रूप में परिभाषित किया जाता है जो भविष्य की पीढ़ियों से अपनी आवश्यकताओं को पूरी करने की क्षमता से समझौता किए बिना वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं की पूर्ति करता है। सततता का अर्थ है कि विकास की आवश्यकताओं का ऐसा प्रबन्धन हो कि जिस प्राकृतिक वातावरण पर हम निर्भर हैं उसे नष्ट किए बिना यह सुनिश्चित करें कि अर्थ व्यवस्था और समाज दोनों बने रहें। हम अपने संसाधनों का विवेकपूर्ण तथा वैज्ञानिक ढंग से उपयोग करके सतत विकास का लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं।

 

 

आपदा प्रबंधन


यह सच है कि आपदा का बढ़ता विध्वंस पर्यावरणीय क्षरण और संसाधन के कुप्रबंधन की वजह से उत्पन्न परिणाम हैं। आपदाएँ सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक हैं, लेकिन उन्हें नियंत्रित किया जा सकता है। आपदा एक त्रासदी है जो नकारात्मक रूप से समाज और पर्यावरण को प्रभावित करती है। आपदाओं को दो वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है- प्राकृतिक आपदा और मानव निर्मित आपदा

 

आपदाएँ

 

बाढ़ और भूस्खलन दोनों तरह से हो सकता है – प्राकृतिक तथा मानव द्वारा। हम आपदाओं को पूरी तरह रोक तो नहीं सकते परन्तु इसके प्रभाव को आवश्यक कदम उठा कर कम किया जा सकता है। इस प्रक्रिया के चार चरण हैं यथा मिटीगेशन (कम करना), तैयारी, अनुक्रिया तथा पुनरुत्थान यदि हम इन चार तरीकों को अपनाएँ और जोखिम की पहले से पहचान कर लें तो आपदा के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

 

आपदा प्रबन्धन

 

स्वयं का मूल्यांकन कीजिए


प्र. पर्यावरणीय क्षरण के अर्थ की उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।

प्र. पर्यावरण स्थायी नहीं हैंइस कथन की उचित उदाहरण देकर पुष्टि कीजिए।

प्र. आप व्यक्तिगत तौर पर पर्यावरण को क्षरण से बचाने के लिये क्या कर सकते हैं?

 

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