सोच, संसाधन और सख्ती से स्वच्छ होगा देश

Submitted by Hindi on Tue, 09/12/2017 - 10:10
Source
दैनिक जागरण, 12 सितम्बर 2017

देश के ज्यादातर सार्वजनिक स्थल किसी भी कूड़ाघर सरीखे ही दिखते हैं। कई स्थानों पर कूड़ेदान रखे ही नहीं जाते। जहाँ कहीं रखे जाते हैं, वहाँ कई दिनों तक उनकी सफाई नहीं होती। ऐसे में पूरी जगह ही गंदगी से घिर जाती है। लिहाजा लोगों को इसे और गंदा करने में कोई शर्म या अफसोस नहीं होता।

कहीं भी थूक देने या सरेराह कचरा फैलाने की हम भारतीयों की आदत देश को स्वच्छ नहीं होने दे रही है। लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरुकता की कमी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चिंता जताई है। 11 सितम्बर को शिकागो सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद के भाषण के 125-वर्ष पूरे होने पर विज्ञान भवन में छात्रों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने इस विषय पर चर्चा की। देश में गंदगी का अंबार लगाने के पीछे तो भारतीय मानसिकता और कुछ संसाधनों का कमी को दोष है। गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानून का न होना भी देश को स्वच्छ बनाने की राह में रोड़ा है।

मानसिकता का मर्म


मनोचिकित्सकों का मानना है कि भारतीय गिल्ट कांप्लेक्स (अपराध बोध ग्रंथि) से ज्यादा शेम कांप्लेक्स (शर्म बोध ग्रंथि) से पीड़ित होते हैं। इसके चलते ही उनकी यह स्वाभावगत समस्या हो गई है कि वे भोजन तो अकेले में करना चाहते हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से गंदगी करने में कोई झिझक नहीं महसूस करते। दरअसल जिस कृत्य को लेकर वे खुद को दोषी नहीं समझते, उसके लिये उनमें शर्म का भाव कैसे जाग्रत हो सकता है। इसी के चलते एक औसत भारतीय अपने घर को तो चकाचक रखता है जबकि सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता और स्वास्थ्य से बेपरवाह रहता है।

ये देश बने नजीर


- सिंगापुर के पास कोई प्राकृतिक संसाधन नहीं। पेयजल के लिये मलेशिया पर निर्भर। यहाँ कभी भी कूड़ा फेंकने पर 200 डॉलर का अर्थदंड। कोई भी दलील नहीं सुनी जाएगी। च्युइंगम पर प्रतिबंध। आवारा कुत्ते यहाँ नहीं पाये जाते।
- उत्तरी अमेरिका में राजमार्गों को अपनाने का कार्यक्रम चलता है। इसके तहत कंपनियाँ और संगठन सड़क के एक हिस्से को साफ रखने की प्रतिबद्धता जाहिर करते हैं।
- केन्या के एक शहर में ऐसे कूड़े से कलाकृतियाँ बनाकर बेची जाती हैं।
- जर्मनी, न्यूयार्क, नीदरलैंड्स और बेल्जियम में कंटेनर डिपोजिट कानून बनाए गये हैं। इसके तहत लोगों को कूड़ा जमा करने के लिये प्रेरित किया जाता है।
- ब्रिटेन में गंदगी फैलाने को दोषी साबित होने पर अधिकतम 2500 पौंड का अर्थदंड लग सकता है।
- अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड्स में गलियों में कूड़ा फेंकने पर पुलिस जुर्माना कर सकती है।

संसाधनों की कमी


देश के ज्यादातर सार्वजनिक स्थल किसी भी कूड़ाघर सरीखे ही दिखते हैं। कई स्थानों पर कूड़ेदान रखे ही नहीं जाते। जहाँ कहीं रखे जाते हैं, वहाँ कई दिनों तक उनकी सफाई नहीं होती। ऐसे में पूरी जगह ही गंदगी से घिर जाती है। लिहाजा लोगों को इसे और गंदा करने में कोई शर्म या अफसोस नहीं होता।

सख्त कानून की जरूरत


भारत में आज तक इस संबंध में कोई केंद्रीय कानून नहीं बनाया गया है। कई शहरों में नगर-पालिकाएँ लोगों को जुर्माने की चेतावनी देती हैं, लेकिन उनको अमल में नहीं लाया जाता।

सिगरेट के टोटे सबसे बड़ा कूड़ा


कूड़े के रूप में दुनिया में सर्वाधिक फेंका जाने वाला सामान सिगरेट के टोटे (बचा हुआ टुकड़ा या पुछल्ला) है। 4.5 ट्रिलियन टोटे सालान फेंके जाते हैं। सिगरेट के इन बचे हुए टुकड़ों के खत्म होने का समय अलग-अलग है। कुछ के खात्में में पांच साल तो कुछ में 400 साल तक लग जाते हैं।

Disqus Comment

More From Author

Related Articles (Topic wise)

Related Articles (District wise)

About the author

नया ताजा