सीधे गंगा में जा रहा सीवर का गन्दा पानी

Submitted by editorial on Thu, 10/18/2018 - 12:09
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राष्ट्रीय सहारा, 18 अक्टूबर, 2018

ऋषिकेश में गंगा नदी में गिरता नालाऋषिकेश में गंगा नदी में गिरता नालाऋषिकेशः देशभर में गंगा स्वच्छता को लेकर कई कार्यक्रम किये गए लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ और ही बयान कर रही है। तीर्थ नगरी के कई आश्रमों का गन्दा पानी सीधे गंगा में प्रवाहित हो रहा है। जिसके लिये सरकार कोई रणनीति नहीं बना पा रही है। जिससे तीर्थ नगरी का रुख करने वाले पर्यटकों की आस्था को ठेस पहुँच रही है।

चुनाव अधिसूचना जारी होने के साथ ही नगरीय क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता भी लागू हो गई है। जिस कारण अब चुनाव के बाद ही सीवर के खुले नालों को टेप करने का कार्य किया जाएगा। तीर्थ नगरी अपनी खूबसूरती के लिये पूरे विश्व भर में जानी जाती है। यहाँ की नदियाँ पहाड़ों की गोद में बहती हुई वातावरण को और भी ज्यादा संवाद देती हैं। ऋषिकेश के आश्रम और अन्य धार्मिक चीजें पर्यटन को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। लेकिन इसी बीच कुछ ऐसे नजारे भी यहाँ देखने को मिलते हैं। जिनकी वजह से ऋषिकेश की बुरी छवि लोगों तक पहुँचती है। यहाँ के आश्रमों से बहता गन्दा पानी जो सीधा जाकर गंगा में विसर्जित हो रहा है।

सरकार ने गंगा स्वच्छता को लेकर कई दावे किये थे और साथ ही गंगा की अविरलता और स्वच्छता को बनाए रखने के लिये प्रयास भी किये थे। लेकिन तीर्थ नगरी में ही इन दावों की हवा निकल रही है। जमीनी स्तर पर मोक्षदायिनी माँ गंगा की हालत दयनीय है। जो तीर्थ नगरी के हालात को साफ बयाँ कर रही है। मुनिकिरेती पार्किंग और गढ़वाल मण्डल विकास निगम गेस्ट हाउस के नजदीक सीवर का गन्दा पानी सीधे गंगा में प्रवाहित हो रहा है और मोक्षदायिनी में गिरकर उसे मैला कर रहा है। जिसेक कारण इससे आस-पास गंगा में डुबकी लगाने वाले लोगों को दूषित पानी से स्नान करना पड़ रहा है।

बरसात के समय क्षेत्र में अक्सर सीवर लाइनें चोक हो जाती हैं, जिससे सीवर का दूषित जल गंगा में गिरकर उसे प्रदूषित करता है। जिससे यहाँ हर रोज आने वाले हजारों श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुँचती है। इतना कुछ होने के बाद भी अभी तक इसका स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है। क्षेत्र में सीवर के गंगा में गिरने से आस-पास के लोगों को दुर्गन्ध के चलते परेशानी झेलनी पड़ती है। ऐसी स्थिति में अक्सर श्रद्धालु गंगा जल से आचमन व उसमें डुबकी लगाने से कतराते हैं। सरकार के स्वच्छ गंगा मिशन की इस तरह धज्जियाँ उड़ने के बाद अब लोग उम्मीद हारते दिख रहे हैं।

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