उफ! ये किल्लत

Submitted by editorial on Sat, 06/09/2018 - 15:02
Source
कादम्बिनी, मई, 2018

गर्मियाँ आते ही हर साल पानी का संकट आ जाता है। नदियों से भरे इस देश में पानी का संकट भी हमारे ही कारण आया है। पानी के साथ हमने बहुत नाइंसाफी की है। हम जल्द न चेते, तो जल का संकट हमारे वजूद का संकट बन जाएगा।

पिछले दिनों मैंने दिल्ली में अपने पापा को फोन किया और उनसे पूछा कि- “गर्मियाँ किस तरह से कट रही हैं?” उन्होंने मुझे कहा कि- “मौसम तो अभी गर्म नहीं हुआ, लेकिन पानी की कटौती चालू हो गई है। यहाँ तक कि जिस सोसाइटी में हमारा घर है वहाँ पर दो दिन से पानी नहीं आया।” पहले दिन पीने के पानी का इन्तजाम तो उन्होंने बाजार से मँगवाकर कर लिया, लेकिन दूसरे दिन माँग बढ़ने के कारण बाजार में पीने वाला पानी भी खत्म हो गया और उनके बुरे हाल हो गये, फिर मैंने पापा से कहा कि वे इस बात की सोसाइटी ऑफिस में शिकायत कर दें, तो शिकायत करने पर पता चला कि अब से गर्मी खत्म होने तक यही हाल रहने वाला है।

यह बात मुझे काफी अजीब लगी, क्योंकि मैंने सोचा कि जब यह हाल दिल्ली यानी राजधानी में रहने वाले लोगों का है, तो फिर गाँवों में रहने वाले लोगों पर क्या बीत रही होगी? इस बात का अन्दाजा लगाना मुश्किल है। पापा की मदद के लिये मैंने पास में रहने वाले अपने कुछ दोस्तों से कहा और फिर उन्होंने अपनी गाड़ी से कुछ पानी मेरे घर पहुँचाया। उस दिन मैंने सोचा कि अब गर्मी खत्म होने के बाद ही मम्मी पापा से मिलने जाऊँगी।

मुझे याद है कि जब मैं छोटी थी और गर्मियाँ आती थीं, तो मम्मी-पापा स्टोर रूम से बड़े-बड़े ड्रम निकाल देते थे, ताकि पानी भरकर उसमें रख सकें। गर्मियों के दिनों में जहाँ पानी की किल्लत और गर्मी परेशान करती है; वहीं बच्चों की छुट्टियाँ पड़ने के कारण मेहमान भी ज्यादा आते हैं, इसलिये उन लोगों को कोई दिक्कत न हो, इसलिये पहले ही पानी भरकर रख लिया जाता था, हालांकि पानी की कमी कई बार मुम्बई में भी हो जाती है। मुम्बई में भी गर्मी में जब पानी की ज्यादा किल्लत होने लगती है, तो सोसाइटी एक तय समय के अनुसार ही पानी मुहैया कराती है, हालांकि यह विकल्प मुझे अच्छा लगता है, क्योंकि इससे लोग बिना कारण पानी बर्बाद नहीं करते।

गर्मियाँ आ गई हैं और इसी के साथ आ गई है हर रोज होने वाली पानी की समस्या। सर्दियों में तो फिर भी हालात कुछ सामान्य रहते हैं, लेकिन जैसे-जैसे गर्मियाँ आती हैं पारा चढ़ने के बाद यह समस्या बढ़ने लगती है। दिन-प्रतिदिन पानी की समस्या बढ़ती ही जा रही है।

अब आप इसी से अन्दाजा लगा लीजिए कि इससे बड़ी विडम्बना क्या होगी कि कभी दुनिया में सबसे ज्यादा बारिश वाली जगह चेरापूँजी में भी अब लोगों को पीने के पानी के लिये तरसना पड़ता है। मुझे खुशी है कि मुझे पानी को बचाने के बारे में तथा जागरुकता निर्माण करने के अभियान के लिये चुना गया, लेकिन जब मैंने अपनी टीम के साथ देश में चल रही पानी की समस्याओं पर रिसर्च की, तो मैं हैरान हो गई थी। मुझे हैरानी इस बात से हुई कि नदियों से भरे इस देश में अभी भी कई लोग ऐसे हैं जिन्हें पानी के लिये मीलों दूर चलना पड़ता है।

रिसर्च से मिले आँकड़ों के हिसाब से ग्रामीण इलाकों की बात करें, तो वहाँ 60 से 70 फीसदी लोग अब भी प्रदूषित पानी पीने को ही मजबूर हैं। उनके यहाँ पर न तो कोई फिल्टर होता है और न ही साफ पानी। मेरी टीम ने मुझे बताया कि हालात इतने खराब हैं कि पीने के पानी की कमी के चलते देश में हर साल बहुत से लोग पेट और संक्रमण की विभिन्न बीमारियों की चपेट में आकर दम तोड़ देते हैं। दूषित पानी पीने से लोगों की तबियत दिन-ब-दिन खराब हो रही है।

अब जबकि सन 2028 तक आबादी के मामले में चीन को पछाड़कर देश के पहले स्थान पर पहुँचने की बात कही जा रही है, तो यह समस्या और भयावह हो सकती है। एक ओर तो गाँवों में साफ पानी नहीं मिलता, तो दूसरी ओर महानगरों में वितरण की कमियों के चलते रोजाना लाखों गैलन साफ पानी बर्बाद हो जाता है।

पानी की कमी से जूझ रहे लोगों की मदद करने के लिये मैं देश में एक एनजीओ से मिल रही हूँ और हम एक साथ काम कर रहे हैं तथा इसका प्रसार करने के लिये सबसे बढ़िया तरीके का पता लगा सकें और उन नये अभियानों में ग्रामीण भारत के लोगों को भी जोड़ सकें, ताकि वे आगे जाकर इस अभियान को बढ़ाएँ और भारत के भविष्य को बीमार होने से बचा सकें।

(लेखिका प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री हैं)

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