एसयूवी कारें हवा में घोल रही सबसे ज्यादा ज़हर (CO2)

Submitted by HindiWater on Wed, 10/30/2019 - 13:33

फोटो - DNA India

जर्मनी के कार्ल बेंज (Karl Benz) ने वर्ष 1885 में पहली ऑटोमोबाइल/कार मैनहेम बनाई थी। यहां से लोगों को आवाजाही के लिए एक नया साधन मिला। विज्ञान और तकनीक के साथ जब आधुनिकता ने रफ्तार पकड़ी तो तेज दौड़ने वाली कारों के विभिन्न प्रकार के माॅडल बनाए जाने लगे। वाहनों को लोगों की जरूरत के हिसाब से बनाया जाने लगा। बैंकों ने कार के लिए लोन उपलब्ध कराना शुरू किया तो लगभग हर घर तक कार पहुंच गई। धीरे धीरे बाजार में कार की मांग बढ़ने लगी। कंपनियों ने विभिन्न प्रकार के माॅडल आकर्षक फीचर के साथ बाजार में उतारे। शुरूआत में तो लोगों को एमयूवी (मल्टी यूटिलिटी व्हीकल) माॅडल पसंद आते थे, लेकिन फिर कंपनियों ने हाईवे, शहर, जंगल रोड सहित सभी प्रकार की सड़कों पर चलने वाली आरामदायक कार बाजार में उतारी, जिसे ‘‘एसयूवी’’ सेगमेंट (स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल) नाम दिया गया। वर्तमान में ये लोगों की सबसे पसंदीदा कार बन गई है, लेकिन पसंदीदा होने के साथ साथ एसयूवी पर्यावरण के लिए खतरा भी है, क्योंकि विश्वभर में कार्बन डाइऑक्साइड (carbon dioxide) के उत्सर्जन में एसयूवी (SUV) कार का दूसरा सबसे बड़ा योगदान है। 

एसयूवी (SUV) कार 1980 से ही काफी लोकप्रिय हैं, लेकिन वर्ष 2010 से इनकी लोकप्रियता काफी बढ़ी है। वर्ष 2010 से 2018 के बीच में ही एसयूवी के मार्केट शेयर 17 प्रतिशत से बढ़कर 39 प्रतिशत हो गए थे। इसकी प्रसिद्धि का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2018 में दुनियाभर में एसयूवी सेगमेंट की करीब 35 मिलियन कारें बेची गई थीं। तो वहीं आईईए के आंकड़ों के अनुसार यूनाइटेड स्टेट (यूएस) में बिकने वाली हर दो कारों में से एक एसयूवी होती है, जबकि यूरोप में हर तीन कार में से एक, चीन में दस कार में से चार और भारत में दस कार में से तीन एसयूवी कार होती हैं। किंतु ये कारें बड़ी और भारी होती हैं, जिस कारण अधिक कार्बन डाइऑक्साइड (carbon dioxide) का उत्सर्जन करती हैं। अधिक मात्रा में उत्सर्जन के कारण हुए अध्ययन ने विशेषज्ञों के कई भ्रम तोड़ दिए, जिससे वे भी भौचक्का हैं। 

दरअसल अभी तक माना जाता था कि लोहा, स्टील, सीमेंट, एल्यूमीनियम, विमानन सहित विभिन्न भारी उद्योग कार्बन डाइऑक्साइड का अधिक उत्सर्जन करते हैं, लेकिन हाल ही में सामने आया कि बिजली को छोड़कर किसी भी ऊर्जा क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन में भारी वृद्धि नहीं हुई है, पर एसयूवी कार्बन उत्सर्जन के मामले में भारी उद्योग (लोहा, स्टील, सीमेंट और एल्यूमीनियम), विमानन और शिपिंग से आगे निकल गई है। आईईए के आंकड़ों के अनुसार ऊर्जा क्षेत्र से वर्ष 2010 से 2018 के बीच सबसे अधिक 1405 मेगाटन कार्बन डाइऑक्साइड (carbon dioxide) का उत्सर्जन हुआ। वहीं एसयूवीज़ से 544 मेगाटन उत्सर्जन हुआ, जो कि यूके और नीदरलैंड द्वारा संयुक्त रूप से उत्सर्जित किए जाने वाली कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर है, जबकि भारी उद्योग से 365 मेगाटन, ट्रक से 311 मेगाटन, विमानन से 233 मेगाटन, शिपिंग से 80 मेटागन और अन्य कारों से -75 मेगाटन कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन हुआ था। अध्ययन में सामने आया कि एसयूवी के बाजार का विस्तार होने के साथ ही वाहनों से कार्बन डाइऑक्साइड (carbon dioxide) के उत्सर्जन में चार गुना वृद्धि हुई है। परिवहन सांख्यिकी विभाग के एक गार्जियन विश्लेषण के अनुसार, वर्तमान में यूके (UK) में लगभग 5 मिलियन लाइसेंस प्राप्त एसयूवी हैं।

The Gurdian में छपी एक रिपोर्ट में अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की प्रमुख ऊर्जा मॉडेलर लॉरा कोज़ी कहती हैं कि "हम खुद इस परिणाम से काफी हैरान थे।" हालाकि विशेषज्ञ इस बात पर जोर दे रहे हैं कि परिवहन क्षेत्र में, विशेषकर बड़े शहरों में, त्वरित डीकार्बोनाइजेशन के लिए यात्री कारों की संख्या में कमी करने की आवश्यकता हैं। हालाकि कई देशों में पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए एसयूवी वाहनों का विरोध किया जा रहा है। हाल ही में बर्लिन में लोगों ने प्रदर्शन कर वाहनों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। वहीं इंग्लैंड ने 2040 तक पेट्रोल डीजल कारों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का वादा किया है, हालाकि इसमे हाइब्रिड कारों को छूट देने की बात भी कही गई है। तो वहीं चीन, कोस्टा रिका, डेनमार्क, फ्रांस, आयरलैंड, आइसलैंड, इजाराइल, नीदरलैंड, नॉर्वे, यूके, श्रीलंका आदि देशों ने वायु प्रदूषण (air pollution) को ध्यान में रखते हुए डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर बैन लगाने का वर्ष घोषित कर दिया है। हालाकि भारत, जो वायु प्रदूषण (air pollution) से सबसे ज्यादा प्रभावित है, इसके बावजूद भी यहां डीजल वाहनों (diesel vehicles) पर प्रतिबंध लगाने की कोई पहले होती नहीं दिख रही है। लेकिन भारत सहित सभी देशों की सरकारों और जनता को समझना होगा कि शुद्ध वायु से ज्यादा जरूरी इंसान के लिए न तो एसयूवी (SUV) कार हैं और न ही सामान्य कार। इसलिए खुद के जीवन की रक्षा के लिए हमें अपने कुछ शौक कुर्बान करने होंगे तथा पर्यावरण के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वहन करना होगा।

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