बारिश की हर बूँद को प्रकृति का आशीष मान सहेज रहे हैं आशीष

Submitted by editorial on Thu, 07/26/2018 - 17:37
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23 जुलाई 2018, दैनिक भास्कर


रेनवाटर हार्वेस्टिंगरेनवाटर हार्वेस्टिंग डूंगरपुर। बारिश की हर बूँद को प्रकृति का आशीर्वाद मानकर मधुलिका और उनके पति आशीष पांडा सहेज रहे हैं। डूंगरपुर की उपनगरीय बस्ती उदयपुरा में रहने वाले मधुलिका के परिवार ने अपनी घर की छत को इस तरह तैयार किया है कि बरसाती पानी व्यर्थ नहीं जाए। वे अपने मकान की छत पर बरसी हर बूँद को रेन-वाटर हार्वेस्टिंग तकनीक से सहेज रहे हैं। जिस टैंक में वे सहेजा पानी भरते हैं, उसकी क्षमता 45 हजार लीटर है और यह पानी उनके परिवार के पेयजल की जरूरतों को तीन साल तक पूरा कर सकता है।

तकनीकी पक्ष

छत पर गिरने वाली बारिश की बूँदों को पानी के मोटे पाइप के जरिए मकान के पास अंडर ग्राउंड बनाई गई 45 हजार लीटर क्षमता की टंकी में सहेजा जाता है।

जब तेज बारिश होती है तो पहले एक से डेढ़ घंटे तक पानी को टंकी के पास बने खुले बगीचे में बहने दिया जाता है, जिससे छत पर बिखरी मिट्टी पानी के साथ बह जाए। इसके बाद वॉल्व को टंकी की तरफ खोल देते हैं। पूरे बारिश के मौसम में यह टंकी भर जाती है। इसके बाद भी जब बारिश होती है तो इसी टंकी के पास एक अन्य टैंक और बनाया गया है। उस टैंक को नीचे से कच्चा रखा गया है जिससे पानी कच्चे फर्श के जरिए भूगर्भ में धीरे-धीरे सीपेज होकर समा जाता है। इसका फायदा भूजल स्तर को सुधारने में हो रहा है।


बोरवेल रिचार्ज की खुदाईबोरवेल रिचार्ज की खुदाई पानी को फिल्टर कर बुझाते हैं प्यास

घर की मालकिन मधुलिका और उनके पति आशीष बताते हैं कि वे इसी सहेजे गए 45 हजार लीटर पानी को छत पर बनाई गई टंकी में पम्प कर चढ़ाते हैं। फिर उसे सामान्य फिल्टर मशीन के जरिए फिल्टर कर लेते हैं। उन्होंने बताया कि बारिश के पानी में रासायनिक अशुद्धियाँ नहीं के बराबर होती हैं, हां, बैक्टीरिया की अशुद्धियाँ जरूर थोड़ी होती हैं जो उबालने और अल्ट्रा-फिल्टर प्रक्रिया के जरिए दूर हो जाती हैं।

वे बताते हैं कि उनकी बेटी आठ साल की है और जब वह छोटी थी तब से बारिश का पानी उबाल कर पिलाते थे। ऐसे में छोटे बच्चों के लिये भी यह पानी सुरक्षित ही है। यह स्टोर किया हुआ पानी 4 लोगों के परिवार के लिये पेयजल और भोजन पकाने के लिये तीन साल तक काम आता है।


रेनवाटर फर्स्ट फ्लश फिल्टररेनवाटर फर्स्ट फ्लश फिल्टर बाथरूम और रसोई के वेस्ट पानी से बागवानी

मधुलिका जी का परिवार बाथरूम और रसोई से निकलने वाले वेस्ट पानी का उपयोग भी घर के बाहर छोटे से बगीचे में बागवानी के लिये करता है। उन्होंने बगीचे में मौसमी सब्जियाँ उगा रखी हैं।

नहाने, कपड़े और बर्तन धोने के लिये वे हर्बल उत्पाद ही काम में लेते हैं। ऐसे में बाथरूम और रसोई से निकलने वाले पानी में सामान्य रूप से पाए जाने वाले सोडे की मात्रा होती ही नहीं है जिससे पौधों और मिट्टी को नुकसान हो।

रसोई और बाथरूम से निकलने वाले पानी को साफ करने के लिये जरूरी पौधे बगीचे में लगाए गए हैं जो गन्दगी को सोखकर पानी साफ करते हैं।
 


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