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ताजा पानी के मोती का उत्‍पादन

Source: 
इंडिया डेवलपमेंट गेटवे

मोती उत्‍पादन क्‍या है?


मोती एक प्राकृतिक रत्‍न है जो सीप से पैदा होता है। भारत समेत हर जगह हालांकि मोतियों की माँग बढ़ती जा रही है, लेकिन दोहन और प्रदूषण से इनकी संख्‍या घटती जा रही है। अपनी घरेलू माँग को पूरा करने के लिए भारत अंतराष्ट्रीय बाजार से हर साल मोतियों का बड़ी मात्रा में आयात करता है। सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेश वॉटर एक्‍वाकल्‍चर, भुवनेश्‍वर ने ताजा पानी के सीप से ताजा पानी का मोती बनाने की तकनीक विकसित कर ली है जो देशभर में बड़ी मात्रा में पाये जाते हैं।

प्राकृतिक रूप से एक मोती का निर्माण तब होता है जब कोई बाहरी कण जैसे रेत, कीट आदि किसी सीप के भीतर प्रवेश कर जाते हैं और सीप उन्‍हें बाहर नहीं निकाल पाता, बजाय उसके ऊपर चमकदार परतें जमा होती जाती हैं। इसी आसान तरीके को मोती उत्‍पादन में इस्‍तेमाल किया जाता है।

है और यह कैल्शियम कार्बोनेट, जैपिक पदार्थों व पानी से बना होता है। बाजार में मिलने वाले मोती नकली, प्राकृतिक या फिर उपजाए हुए हो सकते हैं। नकली मोती, मोती नहीं होता बल्कि उसके जैसी एक करीबी चीज होती है जिसका आधार गोल होता है और बाहर मोती जैसी परत होती है। प्राकृतिक मोतियों का केंद्र बहुत सूक्ष्‍म होता है जबकि बाहरी सतह मोटी होती है। यह आकार में छोटा होता और इसकी आकृति बराबर नहीं होती। पैदा किया हुआ मोती भी प्राकृतिक मोती की ही तरह होता है, बस अंतर इतना होता है कि उसमें मानवीय प्रयास शामिल होता है जिसमें इच्छित आकार, आकृति और रंग का इस्‍तेमाल किया जाता है। भारत में आमतौर पर सीपों की तीन प्रजातियां पाई जाती हैं- लैमेलिडेन्‍स मार्जिनालिस, एल.कोरियानस और पैरेसिया कोरुगाटा जिनसे अच्‍छी गुणवत्‍ता वाले मोती पैदा किए जा सकते हैं।

उत्‍पादन का तरीका


इसमें छह प्रमुख चरण होते हैं- सीपों को इकट्ठा करना, इस्‍तेमाल से पहले उन्‍हें अनुकूल बनाना, सर्जरी, देखभाल, तालाब में उपजाना और मोतियों का उत्‍पादन।

i) सीपों को इकट्ठा करना


तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा किया जाता है और पानी के बरतन या बाल्टियों में रखा जाता है। इसका आदर्श आकार 8 सेंटी मीटर से ज्‍यादा होता है।

ii) इस्‍तेमाल से पहले उन्‍हें अनुकूल बनाना


इन्‍हें इस्‍तेमाल से पहले दो-तीन दिनों तक पुराने पानी में रखा जाता है जिससे इसकी माँसपेशियाँ ढीली पड़ जाएं और सर्जरी में आसानी हो।

iii) सर्जरी


सर्जरी के स्‍थान के हिसाब से यह तीन तरह की होती है- सतह का केंद्र, सतह की कोशिका और प्रजनन अंगों की सर्जरी। इसमें इस्‍तेमाल में आनेवाली प्रमुख चीजों में बीड या न्‍यूक्लियाई होते हैं, जो सीप के खोल या अन्‍य कैल्शियम युक्‍त सामग्री से बनाए जाते हैं।

सतह के केंद्र की सर्जरी: इस प्रक्रिया में 4 से 6 मिली मीटर व्‍यास वाले डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध आदि के आकार वाले सीप के भीतर उसके दोनों खोलों को अलग कर डाला जाता है। इसमें सर्जिकल उपकरणों से सतह को अलग किया जाता है। कोशिश यह की जाती है कि डिजायन वाला हिस्‍सा सतह की ओर रहे। वहाँ रखने के बाद थोड़ी सी जगह छोड़कर सीप को बंद कर दिया जाता है।

सतह कोशिका की सर्जरी: यहाँ सीप को दो हिस्‍सों- दाता और प्राप्तकर्त्ता कौड़ी में बाँटा जाता है। इस प्रक्रिया के पहले कदम में उसके कलम (ढके कोशिका के छोटे-छोटे हिस्‍से) बनाने की तैयारी है। इसके लिए सीप के किनारों पर सतह की एक पट्टी बनाई जाती है जो दाता हिस्‍से की होती है। इसे 2/2 मिली मीटर के दो छोटे टुकड़ों में काटा जाता है जिसे प्राप्‍त करने वाले सीप के भीतर डिजायन डाले जाते हैं। यह दो किस्‍म का होता है- न्‍यूक्‍लीयस और बिना न्‍यूक्‍लीयस वाला। पहले में सिर्फ कटे हुए हिस्‍सों यानी ग्राफ्ट को डाला जाता है जबकि न्‍यूक्‍लीयस वाले में एक ग्राफ्ट हिस्‍सा और साथ ही दो मिली मीटर का एक छोटा न्‍यूक्‍लीयस भी डाला जाता है। इसमें ध्‍यान रखा जाता है कि कहीं ग्राफ्ट या न्‍यूक्‍लीयस बाहर न निकल आएँ।

प्रजनन अंगों की सर्जरी: इसमें भी कलम बनाने की उपर्युक्‍त प्रक्रिया अपनाई जाती है। सबसे पहले सीप के प्रजनन क्षेत्र के किनारे एक कट लगाया जाता है जिसके बाद एक कलम और 2-4 मिली मीटर का न्‍यूक्‍लीयस का इस तरह प्रवेश कराया जाता है कि न्‍यूक्‍लीयस और कलम दोनों आपस में जुड़े रह सकें। ध्‍यान रखा जाता है कि न्‍यूक्‍लीयस कलम के बाहरी हिस्‍से से स्‍पर्श करता रहे और सर्जरी के दौरान आँत को काटने की जरूरत न पड़े।

iv) देखभाल
इन सीपों को नायलॉन बैग में 10 दिनों तक एंटी-बायोटिक और प्राकृतिक चारे पर रखा जाता है। रोजाना इनका निरीक्षण किया जाता है और मृत सीपों और न्‍यूक्‍लीयस बाहर कर देने वाले सीपों को हटा लिया जाता है।

v) तालाब में पालन
देखभाल के चरण के बाद इन सीपों को तालाबों में डाल दिया जाता है। इसके लिए इन्‍हें नायलॉन बैगों में रखकर (दो सीप प्रति बैग) बाँस या पीवीसी की पाइप से लटका दिया जाता है और तालाब में एक मीटर की गहराई पर छोड़ दिया जाता है। इनका पालन प्रति हेक्‍टेयर 20 हजार से 30 हजार सीप के मुताबिक किया जाता है। उत्‍पादकता बढ़ाने के लिए तालाबों में जैविक और अजैविक खाद डाली जाती है। समय-समय पर सीपों का निरीक्षण किया जाता है और मृत सीपों को अलग कर लिया जाता है। 12 से 18 माह की अवधि में इन बैगों को साफ करने की जरूरत पड़ती है।

vi) मोती का उत्‍पादन


पालन अवधि खत्‍म हो जाने के बाद सीपों को निकाल लिया जाता है। कोशिका या प्रजनन अंग से मोती निकाले जा सकते हैं, लेकिन यदि सतह वाला सर्जरी का तरीका अपनाया गया हो, तो सीपों को मारना पड़ता है। विभिन्‍न विधियों से प्राप्‍त मोती खोल से जुड़े होते हैं और आधे होते हैं; कोशिका वाली विधि में ये जुड़े नहीं होते और गोल होते हैं तथा आखिरी विधि से प्राप्‍त सीप काफी बड़े आकार के होते हैं।

ताजा पानी में मोती उत्‍पादन का खर्च


• ये सभी अनुमान सीआईएफए में प्राप्‍त प्रायोगिक परिणामों पर आधारित हैं।

• डिजायनदार या किसी आकृति वाला मोती अब बहुत पुराना हो चुका है, हालांकि सीआईएफए में पैदा किए जाने वाले डिजायनदार मोतियों का पर्याप्‍त बाजार मूल्‍य है क्‍योंकि घरेलू बाजार में बड़े पैमाने पर चीन से अर्द्ध-प्रसंस्‍कृत मोती का आयात किया जाता है। इस गणना में परामर्श और विपणन जैसे खर्चे नहीं जोड़े जाते।

• कामकाजी विवरण

• 1. क्षेत्र 0.4 हेक्‍टेयर

• 2. उत्‍पाद डिजायनदार मोती

• 3. भंडारण की क्षमता 25 हजार सीप प्रति 0.4 हेक्‍टेयर

4. पैदावार अवधि डेढ़ साल

क्रम संख्‍या

सामग्री

राशि(लाख रुपये में)

I.

व्यय

क.

स्थायी पूँजी

1.

परिचालन छप्पर (12 मीटर 5 मीटर)

1.00

2.

सीपों के टैंक (20 फेरो सीमेंट/एफआरपी टैंक 200 लीटर की क्षमता वाले प्रति डेढ़ हजार रुपये)

0.30

3.

उत्पादन इकाई (पीवीसी पाइप और फ्लोट)

1.50

4.

सर्जिकल सेट्स (प्रति सेट 5000 रुपये के हिसाब से 4 सेट)

0.20

5.

सर्जिकल सुविधाओं के लिए फर्निचर (4 सेट)

0.10

कुल योग

3.10

ख.

परिचालन लागत

1.

तालाब को पट्टे पर लेने का मूल्य (डेढ़ साल के लिए)

0.15

2.

सीप (25,000 प्रति 50 पैसे के हिसाब से)

0.125

3.

डिजायनदार मोती का खाँचा (50,000 प्रति 4 रुपये के हिसाब से)

2.00

4.

कुशल मजदूर (3 महीने के लिए तीन व्यक्ति 6000 प्रति व्यक्ति के हिसाब से

1.08

5.

मजदूर (डेढ़ साल के लिए प्रबंधन और देखभाल के लिए दो व्यक्ति प्रति व्यक्ति 3000 रुपये प्रति महीने के हिसाब से

1.08

6.

उर्वरक, चूना और अन्य विविध लागत

0.30

7.

मोतियों का फसलोपरांत प्रसंस्करण (प्रति मोती 5 रुपये के हिसाब से 9000 रुपये)

0.45

कुल योग

4.645

ग.

कुल लागत

1.

कुल परिवर्तनीय लागत

4.645

2.

परिवर्तनीय लागत पर छह महीने के लिए 15 फीसदी के हिसाब से ब्याज

0.348

3.

स्थायी पूँजी पर गिरावट लागत (प्रतिवर्ष 10 फीसदी के हिसाब से डेढ़ वर्ष के लिए)

0.465

4.

स्थायी पूँजी पर ब्याज (प्रतिवर्ष 15 फीसदी के हिसाब से डेढ़ वर्ष के लिए

0.465

कुल योग

5.923

II.

कुल आय

1.

मोतियों की बिक्री पर रिटर्न (15,000 सीपों से निकले 30,000 मोती यह मानते हुए कि उनमें से 60 फीसदी बचे रहेंगे)

डिजायन मोती (ग्रेड ए) (कुल का 10 फीसदी) प्रति मोती 150 रुपये के हिसाब से 3000

4.50

डिजायन मोती (ग्रेड बी) (कुल का 20 फीसदी) प्रति मोती 60 रुपये के हिसाब से 6000

3.60

कुल रिटर्न

8.10

III.

शुद्ध आय (कुल आय-कुल लागत)

2.177



स्रोत: सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेशवॉटर एक्‍वाकल्‍चर, भुवनेश्‍वर, उड़ीसा

Gorakhpur, sant kabir nagar me moti ki kheti

नमस्कार, किसान भाइयों, आप सभी को Ak pearl forming and training centre की तरफ से धनतेरस, दीपावली, भैयादूज की अग्रिम शुभकामनायें,
किसान भाइयों,अगर आप कम से कम लागत में ज्यादा लाभ कमाना चाहते हैं, तो मोती की खेती आपके लिए एक बेहतर विकल्‍प हो सकती है,हमारे यहां मोती की खेती की वैज्ञानिक विधि पर आधारित सम्पूर्ण प्रशिक्षण दिया जाता है, 1. किसानों को सीप उपलब्ध कराना,
२.तीनो प्रकार की सर्जरी, (मेंटल कैविटी, मेंटल टिशू, जननअंग) की जानकारी देना.
३.सरजरी का प्रेक्टिकल कराना,
४.सीप का भोजन व देखरेख करना,
५.पानी की मुफ्त में गुणवत्ता की जाचकरना,
६.सीप से मोती प्राप्त करना,
७.मोती बेचने में सहायता करना,
८.मरे हुए सीप के खोल से आकर्षक वस्तुएं बनाना,
९.मोती की खेती में प्रयोग होने वाले सभी उपकरण और सामान उपलब्ध कराना,
१०.पशिक्षण के दौरान रहना और खाने की व्यवस्था करना
सम्पर्क करें/ह्वाट्सअप करे - 09648834147, 8299329916

मोती की खेती की सही सलाह

सभी किसान भाइयों को इण्डियन पर्ल फार्म एण्ड ट्रेनिंग इन्सटीट्यूट खुरजा की तरफ से दीपावली की शुभकामनायें !!!

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हमारे यहां मोती की खेती वैज्ञानिक विधि पर आधारित सम्पूर्ण प्रशिक्षण दिया जाता है |

1. सबसे जरूरी जानकारी कि सीप को ऑपरेशन से पहले व ऑपरेशन के बाद सर्वाईव कैसे करना है ?
2. पर्ल फार्मिंग के लिए पीने वाला साफ पानी जरूरत होती है. पानी की मुफ्त में गुणवत्ता की जाच करना free water testing.
3. How to maintain perfect pond Temprature
सिखाना.
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10.सीप की 4 types सरजरी के बारे detailed सिखाना
11.सीप कैसे खोलना है सिखाना.
12.सीप nucleus कैसे डालें सिखाना.
13.मोती की खेती में प्रयोग होने वाले सभी उपकरण और सामान उपलब्ध कराना,

केवल इण्डियन पर्ल फार्म एण्ड ट्रेनिंग इन्सटीट्यूट खुरजा सिटी ही पूरे दो दिन यानी 16 से 20 घंटे की ट्रेनिंग देता है |

और अन्त में मेरी सभी पर्ल फार्मिंग सीखने वालो को सलाह है की अपना फ़ोन नंबर कमेंट बॉक्स में न छोड़े बल्कि 7310743426, 9717443729 तथा 9540883888 पर कॉल/whatsapp कर सही मार्गदर्शन प्राप्त करे

मै मोती की खेती सीखना चहाता

मै मोती की खेती सीखना चहाता हू।

Training

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Pearl farming

मोती की खेती किसान की आय का उत्तम विकल्प
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उत्तर प्रदेश में मोती की खेती

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मोती की खेती की सही सलाह

कुछ स्वनामधन्य ट्रेनर 6 घंटा या 1 दिन में मोती की खेती की ट्रेनिग दे कर किसानो का कल्याण कर रहे हैं |
कुछ ट्रेनर खाने पीने का लालच दे रहे हैं तो कुछ मोती अादि जैसे फ्री गिफ्ट और कुछ घुमाने फिराने का, अाखिर क्यों? भाइयो आपको परफेक्ट ट्रेनिंग कोई क्यों नहीं देना चाहता है? क्योंकि सभी का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा लोगो को अपना ग्राहक बनाना है सिखाना नहीं |
लालच में कुछ किसान फंस रहे हैं |

चैक करें कि अापका ट्रेनर ये सब सिखाना चाहता है या नहीं

1. सबसे जरूरी जानकारी कि सीप को ऑपरेशन से पहले व ऑपरेशन के बाद सर्वाईव कैसे करना है ?
2. पर्ल फार्मिंग के लिए पीने वाला साफ पानी or खारा पानी जरूरत होती है ?
3. खारा पानी होने पर सीप मर जाती है ?
4. Temprature ?
5. सीप कैसे खोलना है ?
6. सीप खोलने के बाद रेत/beed कैसे डालें ?
7. झील्ली के अन्दर कैसे रेत/beed डालें ?
8. सीप की सरजरी के बारे ?

धोखे से बचो
केवल इण्डियन पर्ल फार्म एण्ड ट्रेनिंग इन्सटीट्यूट खुरजा सिटी ही पूरे दो दिन यानी 16 से 20 घंटे की ट्रेनिंग देता है |

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तॉजा पानी से मोती का उतपादन

मुजे ट्नीग लेनी है.

Pearl forming in U. P

Take Pearl farming training at Akpearl forming and training centre and be a part of a pearl farming h company . Various benefits that a trainee gets while getting trained at Akpearl forming and training centre -

1) Free water test - We provide you free of cost water testing facility of your site at the time of training which can cost you 3000-4000 Rs if you do it at your own expense. The various tests which we do for our trainees at our training centre are as follows:- (A) PH TEST (B) AMMONIA TEST (C) NITRATE TEST 
(D) NITRITE TEST (E) CHLORINE TEST
We as pioneers in pearl farming recommend you do at all these tests before starting your pearl farm over the water that you will use in your pond then to regret after 10 months. Most common reason for mortality of mussels is the presence of these harmful chemicals compounds in water. So test water before using it in pond.

(2) Contract farming - Whosoever takes training from our training institutecan sell his/ her pearls directly to our fixed customers and company at a fixed price. So by this amazing option the first timers in pearl farming don't have to search for any market for selling there pearls. With the help of contract farming now you don't have to search for any market and there will be no fear and dilemma of failure in pearl farming business and they're will be a sure shot income for every beginner as well.

(3) Technical Assistance - There is a thin line between success and failure of any business. After taking training at Akpearl forming and training centre we give you complete technical assistance for 10 months or till you get your first harvest free of cost. It becomes very important for us to guide every trainee who gets trained from our institute till he /she succeeds as nobody can remember everything that is being taught in training centre for 2 days. In order to cover up this aspect we also give you training manuals free of cost to all our trainees so that they can refer to it whenever they forget anything.

Regards
Arvind Chaudhary (Founder)Akpearl forming and training centre
Training Day - Saturday, Sunday, Monday every week
Contact - 9648834147
Facebook - https://www.facebook.com/akpearl.tk
Website -http//:Akpearl.tk
Address- city -. Khalilabad, near - gorakhpur, district - sant kabir nagar, state - Uttar Pradesh
Email - skpearls81@gmail.com अगर आप छोटे से इन्‍वेस्‍टमेंट से लाखों कमाना चाहते हैं तो आपके लिए मोती की खेती एक बेहतर विकल्‍प हो सकती है। मोती की मांग इन दिनों घरेलू और अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में काफी अधिक है, इसलिए इसके अच्‍छे दाम भी मिल रहे हैं। मोती के बारे में कुछ खास बातें-

मोती की खेती के लिए किसी प्रकार की  शैक्षिक योग्यता की जरूरत नही होती है|मोती की खेती  बिना पढ़े लिखे लोग भी कर सकते हैं |मोती  की खेती भारत में कहीं भी किया जा सकता है|

हमारे यहाँ हप्ते में तीन दिन ट्रेनिंग दी जाती है -

सनिवार (saturday)रविवार (sunday)शोमवार(monday)

  ट्रेनिग के लिए सम्पर्क करें - arvind Chaudhary (Uttar Pradesh) 

Whatsapp/call -    09648834147

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अधिक जानकारी के किये हमारे वेबसाइट

 AK PEARL FARMING A Freshwater Pearl Culture Training Centerनोट- हमारे यहाँ मोती की खेती में उसे होने वाले सभी उपकरण और सामान उचित दाम में मिलते हैं जैसे-

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तालाब के लिए आप

मोती हो या मछली। तालाब चाहिए ठेके पर तो संपर्क करें 100वीघा है। 10लाख रू साल।Vivekkumarchoudhary20@Gmail.com +918650238814 ±918954073921 +919719470511

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खुरजा सिटी

whatsapp/call
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Pearl Farming Training in Ghaziabad Delhi Ncr

हमारे किसान भाई जो मोती की खेती करना चाहते हैं सभी किसानों को 1 साल तक या इसके बाद में भी मोती की खेती से सम्बंधित सभी प्रकार की सहायता और पूरा सहयोग करेंगे।
मोती उत्पादन के बाद उचित मूल्य पर मोती को बेचने में भी सहायता करते है।
मोती की खेती के बारे में किसी भी प्रकार की जानकारी सम्पर्क करें: 7017563576

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Pearl and multipurpose farming

मोती पालन +
मछली पालन +
ज्वेलरी अवं हेंडीक्राफ्ट +
integrated farming +
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(इंडिया और दूसरे देश में केवल मोती पालन की ट्रेनिंग ही दी जाती है ..लेकिन Bamoriya Pearl Farm एक ऐसी संस्था है जो उपरोक्त सभी कोर्स केवल एक फीस में कराती है
साथ ही

" किसान भाइयो और कुछ लोगो की अपील थी की ट्रेनिंग फीस जो की 7000/- जो की ज्यादा है , " जो एक आम आदमी और किसान भाइयो को 7000/- रूपये देना सम्भव नहीं होता है ..इसलिए हमने .आप सभी के लिए उपहार स्वरुप ट्रेनिंग फी 5000/- कर दी है जो की ऑक्टूबर 2017 से की गई है .और ऐसा नहीं है के फीस कम हे तो ट्रेनिंग कम मिलेगी ..मोती पालन के सांथ होने वाले 10-15 व्यवसायों की जानकारी भी मिलेगी ..सभी का शुभ हो .सब खुस रहे . ..हसते रहे मुस्कुराते रहे ..पेड़ बचाएं..पेड़ लगाए ..पानी का दुरूपयोग न करे ..आपका शुभचिंतक ..अमित कुमार बमोरिया
9770085381
9407461361

https://youtu.be/b3A0ZucpBY4

https://youtu.be/aJVjJl0Krao

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इसलिए इसकी कीमत अच्छी मिल रही है। आप 40 हजार रुपए के इंन्‍वेस्‍ट से इससे करीब 8-12 महीने में 2.5- 30 लाख रुपए सालाना यानी हर महीने 20 हजार रुपए से अधिक कमा सकते हैं।
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मोती की खेती की सही सलाह me

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कम फीस के लालच में कुछ किसान फंस रहे हैं |

केवल इण्डियन पर्ल फार्म एण्ड ट्रेनिंग इन्सटीट्यूट खुरजा सिटी ही पूरे दो दिन यानी 16 से 20 घंटे की ट्रेनिंग देता है |

धोखे से बचो

whatsapp/call
9717443729
7310743426
9540883888

moti trening

I am interested Please help me sir

मोती की खेती की सही सलाह

!!Kam fees=kam knowledge valo se savdhan!!

1. पर्ल फार्मिंग के लिए पीने वाला साफ पानी or खारा पानी जरूरत होती है ?
2. खारा पानी होने पर सीप मर जाती है ?
3. Temprature ?
4. सीप कैसे खोलना है ?
5. सीप खोलने के बाद रेत/beed कैसे डालें ?
6. झील्ली के अन्दर कैसे रेत/need डालें ?
7. सीप की सरजरी के बारे ?

मेरी सभी पर्ल फार्मिंग सीखने वालो को सलाह है की अपना फ़ोन नंबर कमेंट बॉक्स में न छोड़े बल्कि 7310743426, , 9717443729 तथा 9540883888 पर कॉल/whatsapp कर सही मार्गदर्शन प्राप्त करे

For Pearl Farming training contact- 7017563676

कुछ महत्वपूर्ण सवाल-

कैसे करें मोती का उत्पादन?
उत्पादन के बाद क्या है मोती की सही कीमत?
कैसे अपने मोती की गुणवत्ता में सुधार लाये?
कहां और कैसे बेचें अपना मोती?
सम्पर्क करें: 7017563576हमारे किसान भाई जो मोती की खेती में दिलचस्पी रखते हैं। हम मोती की खेती के प्रशिक्षण में पूरी जानकारी प्रदान करते हैं।1. प्रयोगशाला में पास मोती तैयार करने के तरीके2. कैसे बनाना है तालाब या टैंक3. सीप (मोती उत्पादन के लिए सर्वोत्तम प्रजाति)4. सर्जरी के लिए न्यूक्लियस तैयार करना (Beed for Pearl)5. जाल (Net)6. सीप के लिए भोजन तैयार करना (food for Seep)7. मृत सीप बेचना8. उत्पादन के बाद मोती सही मूल्य पर बेचना9. मोती की खेती के साथ साथ मछली पालनऔर कई महत्वपूर्ण जानकारी... 

moti kheti

want training

Pearl farming training

Successful pearl farmer in haryana, next pearl farming training date 07/10/2017 to 08/10/2017, and 14/10 /2017 to15/10 /2017, timing 10am to 5pm, for seat booking call vinod kumar_9050555757

peral forming training

My business plans peral forming sir
But sir my location not training centre
Please help me sir.
Number :-8888906696

I want peral forming training

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My location in Maharashtra

My location in Maharashtra

Pearl farming training

Sir main punjab ka Rehne wala Hu. Kia punjab me aapka koi training center Hai.

pearl farming training

Sir me dehradun se hu or mujhe pearl farming ki training karni h pls koi sbse pass ka training center bataiye

pearl farming training

Sir me dehradun se hu or mujhe pearl farming ki training karni h pls koi sbse pass ka training center bataiye

RAJASTHAN PEARL FARMING and training center iso certified

rajasthan pearl farming and training center (iso certified)adress. vpo.- khadab narehra (bamnala) , tehsil - kotputli , dist. jaipur rajasthan (india) 303105

moti kheti

want traning

Pearl cultivation

I want to know how to cultivate pearl. 

Indian Pearl Farms

Farmers need information about pearl farming. you can call us anytime.We provide you complete solution for Pearl farming.Like: Seeps(with surgery/without surgery), Nucleus, Nets, food for Seeps and also purchase Pearls(from INR100 to INR3000 per piece only after lab testing) and dead Seeps at best price.Call: 7017563576. किसानों को मोती खेती के बारे में जानकारी की आवश्यकता है आप हमें कभी भी कॉल कर सकते हैं
हम आपको पर्ल खेती का पूरा समाधान प्रदान करते हैं।
जैसे: सर्प (सर्जरी के बिना) / सर्जरी के बिना, नाभिक, जाल, सीप के लिए भोजन और मोती भी खरीदते हैं (प्रयोगशाला परीक्षण के बाद प्रति टुकड़ा INR100 से INR3000 तक) और सबसे अच्छा मूल्य पर मृत सीप।
कॉल: 7017563576

Pearl farming training

Next pearl farming training date 23/09/2017 to 24/09/2017 and 30 /09/2017 to 01/10/2017, timing 10am to 5pm, for seat booking call vinod kumar_9050555757

Required oysters ( min size 8 cm)

I require 5000 oysters of sizes 8 to 10 cm.

Supply Freshwater oysters/seeps

Sir, We can provide you freshwater seeps/oysters at any placePlease call us: 7017563576.

Moti ki kheti ki training

Dear Sir/Madam  Please provide me training of moti ki kheti in Maharashtra address and mob no 

Training for Pearl Farming

Sir, You can get training of Pearl farming in Maharastra from Ashok Manwani. 

Motion palan

I am Mohd Nishar Ali

Pearl farming training

Next pearl farming training date 16/09/2017 to17/09/2017 and 23/09/2017 to 24/09/2017,timing 10am to 4pm, for seat booking call vinod kumar_9050555757

Pearl and multipurpose farming

Earn upto lakhs by working at home-pearl farming (river shell farming) can be carried out at our home over terrace, in aquarium , water tanks or nearby ponds.
In India, pearls are imported from asian countries of china and japan. Pearl farming is possible in fresh water as well.
Advantages of pearl farming:
(1) The outcome from one pond can be increased by making the multi-purpose use of the same and implementing 8-10 business models.
(2) Improving water level for the upcoming generation.
(3) The leftovers of this can be used for handicrafts purpose, such as making jewellery, along with pearls.
(4) More job opportunities for the localised.
For further information or watching videos related to the same, whatsapp us:9770085381, 9584120929
BAMORIYA PEARL FARM

Pearl and multipurpose farming

निम्न लिखित लोगो को मोती पालन की ट्रेनिंग शुल्क में 1000/- छूट दी जाएगी

Hindi

Vill.Imalara, post.Nagala Sarua,aligarh up. 202142

Hindi

Vill.Imalara, post.Nagala Sarua,aligarh 202142

Pearl and multipurpose farming

प्रिय मित्रो ,
सभी को प्यार भरा नमस्कार .
आशा करता हूँ आप सभी सकुशल होंगे ..मित्रो भारत सरकार (Cifa) और सभी गैर सरकारी संस्थान जो Aquaculture courses कराते है ..सभी recommend करते है की मोती अवं मछली पालन का सही समय सितम्बर माह से शुरू हो जाता है जिसके कारण मेरे पास बहुत फोन आ रहे है ट्रेनिंग के लिए ..आप लोगो के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम में कुछ बदलाव किये है..
सितम्बर माह में -
09-10 , 16-17 & 23 -24
अक्टूबर माह में
1-2 , 14-15& 28-29
नवंबर माह में
04-05 , 11-12& 18-19 and 25-26

दिसंबर माह में
02-03 ,16-17& 25-25 dec
2017

जिसमे
मोती पालन +
मछली पालन +
ज्वेलरी अवं हेंडीक्राफ्ट +
integrated farming +
multipurpose farming आदि शामिल है ..
कृपया सीट लिमिटेड है ..जल्दी बुक करे
(इंडिया और दूसरे देश में केवल मोती पालन की ट्रेनिंग ही दी जाती है ..लेकिन Bamoriya Pearl Farm एक ऐसी संस्था है जो उपरोक्त सभी कोर्स केवल एक फीस में कराती है
साथ ही

मोती पालन की ट्रेनिंग के लिए बमोरिया पर्ल फार्म ही क्यों आते है लोग ! क्योंकि हमे लोगो के बहुमूल्य समय की पहचान है ..हमारा उद्देश्य है लोगो तक सही और संपूर्ण जानकारी पहुंचे .
ट्रेनिंग में निम्नलिखित जानकारीया दी जाती है
1- Multipurpose farming
2- Integrated farming
3- Shells handicraft training
4- pearl & shells jewellery training
5 - fish Farming training
6 - AC room for Trainee #
7 - AC hall for training #
8 - Healthy food #
10 - Training Center at tourist Place #
11 - one Pearl Gift #
12 - one pearl farming Book#
13 - Certificate #
14 - Sample Material #
15 - Complete Training
16 - How to make Tools & moti Beej at home
17 - Marketing Tricks
18 - Arrange Taxi for 50 km #
19 - Kadaknath Murga farming detail
20 - Bater (Quail) Farming
all Facility and Detail are providing in ट्रेनिंग

विडिओ देखने के लिए link पर click करे

https://youtu.be/cRRC_nA8BX4

https://youtu.be/VxW-S0mHVbM

https://youtu.be/aJVjJl0Krao

https://youtu.be/9F9aDvyvT_A

https://youtu.be/rKos0jFooMs

https://youtu.be/ua9gSH0Duik

Amit k bamoriya
9770085381 (Call / Wtsapp)
9407461361 (Call)

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