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ताजा पानी के मोती का उत्‍पादन

Source: 
इंडिया डेवलपमेंट गेटवे

मोती उत्‍पादन क्‍या है?


मोती एक प्राकृतिक रत्‍न है जो सीप से पैदा होता है। भारत समेत हर जगह हालांकि मोतियों की माँग बढ़ती जा रही है, लेकिन दोहन और प्रदूषण से इनकी संख्‍या घटती जा रही है। अपनी घरेलू माँग को पूरा करने के लिए भारत अंतराष्ट्रीय बाजार से हर साल मोतियों का बड़ी मात्रा में आयात करता है। सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेश वॉटर एक्‍वाकल्‍चर, भुवनेश्‍वर ने ताजा पानी के सीप से ताजा पानी का मोती बनाने की तकनीक विकसित कर ली है जो देशभर में बड़ी मात्रा में पाये जाते हैं।

प्राकृतिक रूप से एक मोती का निर्माण तब होता है जब कोई बाहरी कण जैसे रेत, कीट आदि किसी सीप के भीतर प्रवेश कर जाते हैं और सीप उन्‍हें बाहर नहीं निकाल पाता, बजाय उसके ऊपर चमकदार परतें जमा होती जाती हैं। इसी आसान तरीके को मोती उत्‍पादन में इस्‍तेमाल किया जाता है।

है और यह कैल्शियम कार्बोनेट, जैपिक पदार्थों व पानी से बना होता है। बाजार में मिलने वाले मोती नकली, प्राकृतिक या फिर उपजाए हुए हो सकते हैं। नकली मोती, मोती नहीं होता बल्कि उसके जैसी एक करीबी चीज होती है जिसका आधार गोल होता है और बाहर मोती जैसी परत होती है। प्राकृतिक मोतियों का केंद्र बहुत सूक्ष्‍म होता है जबकि बाहरी सतह मोटी होती है। यह आकार में छोटा होता और इसकी आकृति बराबर नहीं होती। पैदा किया हुआ मोती भी प्राकृतिक मोती की ही तरह होता है, बस अंतर इतना होता है कि उसमें मानवीय प्रयास शामिल होता है जिसमें इच्छित आकार, आकृति और रंग का इस्‍तेमाल किया जाता है। भारत में आमतौर पर सीपों की तीन प्रजातियां पाई जाती हैं- लैमेलिडेन्‍स मार्जिनालिस, एल.कोरियानस और पैरेसिया कोरुगाटा जिनसे अच्‍छी गुणवत्‍ता वाले मोती पैदा किए जा सकते हैं।

उत्‍पादन का तरीका


इसमें छह प्रमुख चरण होते हैं- सीपों को इकट्ठा करना, इस्‍तेमाल से पहले उन्‍हें अनुकूल बनाना, सर्जरी, देखभाल, तालाब में उपजाना और मोतियों का उत्‍पादन।

i) सीपों को इकट्ठा करना


तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा किया जाता है और पानी के बरतन या बाल्टियों में रखा जाता है। इसका आदर्श आकार 8 सेंटी मीटर से ज्‍यादा होता है।

ii) इस्‍तेमाल से पहले उन्‍हें अनुकूल बनाना


इन्‍हें इस्‍तेमाल से पहले दो-तीन दिनों तक पुराने पानी में रखा जाता है जिससे इसकी माँसपेशियाँ ढीली पड़ जाएं और सर्जरी में आसानी हो।

iii) सर्जरी


सर्जरी के स्‍थान के हिसाब से यह तीन तरह की होती है- सतह का केंद्र, सतह की कोशिका और प्रजनन अंगों की सर्जरी। इसमें इस्‍तेमाल में आनेवाली प्रमुख चीजों में बीड या न्‍यूक्लियाई होते हैं, जो सीप के खोल या अन्‍य कैल्शियम युक्‍त सामग्री से बनाए जाते हैं।

सतह के केंद्र की सर्जरी: इस प्रक्रिया में 4 से 6 मिली मीटर व्‍यास वाले डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध आदि के आकार वाले सीप के भीतर उसके दोनों खोलों को अलग कर डाला जाता है। इसमें सर्जिकल उपकरणों से सतह को अलग किया जाता है। कोशिश यह की जाती है कि डिजायन वाला हिस्‍सा सतह की ओर रहे। वहाँ रखने के बाद थोड़ी सी जगह छोड़कर सीप को बंद कर दिया जाता है।

सतह कोशिका की सर्जरी: यहाँ सीप को दो हिस्‍सों- दाता और प्राप्तकर्त्ता कौड़ी में बाँटा जाता है। इस प्रक्रिया के पहले कदम में उसके कलम (ढके कोशिका के छोटे-छोटे हिस्‍से) बनाने की तैयारी है। इसके लिए सीप के किनारों पर सतह की एक पट्टी बनाई जाती है जो दाता हिस्‍से की होती है। इसे 2/2 मिली मीटर के दो छोटे टुकड़ों में काटा जाता है जिसे प्राप्‍त करने वाले सीप के भीतर डिजायन डाले जाते हैं। यह दो किस्‍म का होता है- न्‍यूक्‍लीयस और बिना न्‍यूक्‍लीयस वाला। पहले में सिर्फ कटे हुए हिस्‍सों यानी ग्राफ्ट को डाला जाता है जबकि न्‍यूक्‍लीयस वाले में एक ग्राफ्ट हिस्‍सा और साथ ही दो मिली मीटर का एक छोटा न्‍यूक्‍लीयस भी डाला जाता है। इसमें ध्‍यान रखा जाता है कि कहीं ग्राफ्ट या न्‍यूक्‍लीयस बाहर न निकल आएँ।

प्रजनन अंगों की सर्जरी: इसमें भी कलम बनाने की उपर्युक्‍त प्रक्रिया अपनाई जाती है। सबसे पहले सीप के प्रजनन क्षेत्र के किनारे एक कट लगाया जाता है जिसके बाद एक कलम और 2-4 मिली मीटर का न्‍यूक्‍लीयस का इस तरह प्रवेश कराया जाता है कि न्‍यूक्‍लीयस और कलम दोनों आपस में जुड़े रह सकें। ध्‍यान रखा जाता है कि न्‍यूक्‍लीयस कलम के बाहरी हिस्‍से से स्‍पर्श करता रहे और सर्जरी के दौरान आँत को काटने की जरूरत न पड़े।

iv) देखभाल
इन सीपों को नायलॉन बैग में 10 दिनों तक एंटी-बायोटिक और प्राकृतिक चारे पर रखा जाता है। रोजाना इनका निरीक्षण किया जाता है और मृत सीपों और न्‍यूक्‍लीयस बाहर कर देने वाले सीपों को हटा लिया जाता है।

v) तालाब में पालन
देखभाल के चरण के बाद इन सीपों को तालाबों में डाल दिया जाता है। इसके लिए इन्‍हें नायलॉन बैगों में रखकर (दो सीप प्रति बैग) बाँस या पीवीसी की पाइप से लटका दिया जाता है और तालाब में एक मीटर की गहराई पर छोड़ दिया जाता है। इनका पालन प्रति हेक्‍टेयर 20 हजार से 30 हजार सीप के मुताबिक किया जाता है। उत्‍पादकता बढ़ाने के लिए तालाबों में जैविक और अजैविक खाद डाली जाती है। समय-समय पर सीपों का निरीक्षण किया जाता है और मृत सीपों को अलग कर लिया जाता है। 12 से 18 माह की अवधि में इन बैगों को साफ करने की जरूरत पड़ती है।

vi) मोती का उत्‍पादन


पालन अवधि खत्‍म हो जाने के बाद सीपों को निकाल लिया जाता है। कोशिका या प्रजनन अंग से मोती निकाले जा सकते हैं, लेकिन यदि सतह वाला सर्जरी का तरीका अपनाया गया हो, तो सीपों को मारना पड़ता है। विभिन्‍न विधियों से प्राप्‍त मोती खोल से जुड़े होते हैं और आधे होते हैं; कोशिका वाली विधि में ये जुड़े नहीं होते और गोल होते हैं तथा आखिरी विधि से प्राप्‍त सीप काफी बड़े आकार के होते हैं।

ताजा पानी में मोती उत्‍पादन का खर्च


• ये सभी अनुमान सीआईएफए में प्राप्‍त प्रायोगिक परिणामों पर आधारित हैं।

• डिजायनदार या किसी आकृति वाला मोती अब बहुत पुराना हो चुका है, हालांकि सीआईएफए में पैदा किए जाने वाले डिजायनदार मोतियों का पर्याप्‍त बाजार मूल्‍य है क्‍योंकि घरेलू बाजार में बड़े पैमाने पर चीन से अर्द्ध-प्रसंस्‍कृत मोती का आयात किया जाता है। इस गणना में परामर्श और विपणन जैसे खर्चे नहीं जोड़े जाते।

• कामकाजी विवरण

• 1. क्षेत्र 0.4 हेक्‍टेयर

• 2. उत्‍पाद डिजायनदार मोती

• 3. भंडारण की क्षमता 25 हजार सीप प्रति 0.4 हेक्‍टेयर

4. पैदावार अवधि डेढ़ साल

क्रम संख्‍या

सामग्री

राशि(लाख रुपये में)

I.

व्यय

क.

स्थायी पूँजी

1.

परिचालन छप्पर (12 मीटर 5 मीटर)

1.00

2.

सीपों के टैंक (20 फेरो सीमेंट/एफआरपी टैंक 200 लीटर की क्षमता वाले प्रति डेढ़ हजार रुपये)

0.30

3.

उत्पादन इकाई (पीवीसी पाइप और फ्लोट)

1.50

4.

सर्जिकल सेट्स (प्रति सेट 5000 रुपये के हिसाब से 4 सेट)

0.20

5.

सर्जिकल सुविधाओं के लिए फर्निचर (4 सेट)

0.10

कुल योग

3.10

ख.

परिचालन लागत

1.

तालाब को पट्टे पर लेने का मूल्य (डेढ़ साल के लिए)

0.15

2.

सीप (25,000 प्रति 50 पैसे के हिसाब से)

0.125

3.

डिजायनदार मोती का खाँचा (50,000 प्रति 4 रुपये के हिसाब से)

2.00

4.

कुशल मजदूर (3 महीने के लिए तीन व्यक्ति 6000 प्रति व्यक्ति के हिसाब से

1.08

5.

मजदूर (डेढ़ साल के लिए प्रबंधन और देखभाल के लिए दो व्यक्ति प्रति व्यक्ति 3000 रुपये प्रति महीने के हिसाब से

1.08

6.

उर्वरक, चूना और अन्य विविध लागत

0.30

7.

मोतियों का फसलोपरांत प्रसंस्करण (प्रति मोती 5 रुपये के हिसाब से 9000 रुपये)

0.45

कुल योग

4.645

ग.

कुल लागत

1.

कुल परिवर्तनीय लागत

4.645

2.

परिवर्तनीय लागत पर छह महीने के लिए 15 फीसदी के हिसाब से ब्याज

0.348

3.

स्थायी पूँजी पर गिरावट लागत (प्रतिवर्ष 10 फीसदी के हिसाब से डेढ़ वर्ष के लिए)

0.465

4.

स्थायी पूँजी पर ब्याज (प्रतिवर्ष 15 फीसदी के हिसाब से डेढ़ वर्ष के लिए

0.465

कुल योग

5.923

II.

कुल आय

1.

मोतियों की बिक्री पर रिटर्न (15,000 सीपों से निकले 30,000 मोती यह मानते हुए कि उनमें से 60 फीसदी बचे रहेंगे)

डिजायन मोती (ग्रेड ए) (कुल का 10 फीसदी) प्रति मोती 150 रुपये के हिसाब से 3000

4.50

डिजायन मोती (ग्रेड बी) (कुल का 20 फीसदी) प्रति मोती 60 रुपये के हिसाब से 6000

3.60

कुल रिटर्न

8.10

III.

शुद्ध आय (कुल आय-कुल लागत)

2.177



स्रोत: सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेशवॉटर एक्‍वाकल्‍चर, भुवनेश्‍वर, उड़ीसा

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कुछ स्वनामधन्य ट्रेनर 6 घंटा या 1 दिन में मोती की खेती की ट्रेनिग दे कर किसानो का कल्याण कर रहे हैं |कुछ ट्रेनर खाने पीने का लालच दे रहे हैं तो कुछ मोती अादि जैसे फ्री गिफ्ट और कुछ घुमाने फिराने का, अाखिर क्यों? भाइयो आपको परफेक्ट ट्रेनिंग कोई क्यों नहीं देना चाहता है? क्योंकि सभी का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा लोगो को अपना ग्राहक बनाना है सिखाना नहीं |लालच में कुछ किसान फंस रहे हैं |चैक करें कि अापका ट्रेनर ये सब सिखाना चाहता है या नहीं1. सबसे जरूरी जानकारी कि सीप को ऑपरेशन से पहले व ऑपरेशन के बाद सर्वाईव कैसे करना है ?2. पर्ल फार्मिंग के लिए पीने वाला साफ पानी or खारा पानी जरूरत होती है ?3. खारा पानी होने पर सीप मर जाती है ?4. Temprature ?5. सीप कैसे खोलना है ?6. सीप खोलने के बाद रेत/beed कैसे डालें ?7. झील्ली के अन्दर कैसे रेत/beed डालें ?8. सीप की 5 सरजरी के बारे ?धोखे से बचोकेवल इण्डियन पर्ल फार्म एण्ड ट्रेनिंग इन्सटीट्यूट खुरजा सिटी ही पूरे दो दिन यानी 16 से 20 घंटे की ट्रेनिंग देता है |और अन्त में मेरी सभी पर्ल फार्मिंग सीखने वालो को सलाह है की अपना फ़ोन नंबर कमेंट बॉक्स में न छोड़े बल्कि 7310743426, 9717443729 तथा 9540883888 पर कॉल/whatsapp कर सही मार्गदर्शन प्राप्त करे

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Regards - arvind Chaudhary https://youtu.be/Nqsj9l56Rl0

मोती पालन (Pearl Farming) एक

मोती पालन (Pearl Farming) एक ऐसा बिसनेस है, जिसमे सिर्फ दस हजार रुपये खर्च करना है, किसी भी लोन की जरुरत नहीं है, और फायदा करोड़ों में कमा सकते हैं. मोती पालन (Pearl Farming Business) की अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें – WhatsApp/call 9717443729, 7310743426, 9540883888

Pearl farming training

First successful pearl farmer in haryana, next pearl farming training date 18/11 /2017 to 19 /11 /2017 and 25/11 /2017 to26 /11 /2017, timing 10am to 5pm, for seat booking call vinod kumar_9050555757

Pearl forming in U. P

Contact - 9648834147
Facebook - https://www.facebook.com/akpearl.tk
Website -http//:Akpearl.tk
Address- city -. Khalilabad, near - gorakhpur, district - sant kabir nagar, state - Uttar Pradesh
Email - skpearls81@gmail.com अगर आप छोटे से इन्‍वेस्‍टमेंट से लाखों कमाना चाहते हैं तो आपके लिए मोती की खेती एक बेहतर विकल्‍प हो सकती है। मोती की मांग इन दिनों घरेलू और अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में काफी अधिक है, इसलिए इसके अच्‍छे दाम भी मिल रहे हैं। मोती के बारे में कुछ खास बातें-
मोती की खेती के लिए किसी प्रकार की शैक्षिक योग्यता की जरूरत नही होती है|मोती की खेती बिना पढ़े लिखे लोग भी कर सकते हैं |मोती की खेती भारत में कहीं भी किया जा सकता है|
हमारे यहाँ हप्ते में तीन दिन ट्रेनिंग दी जाती है -
सनिवार (saturday)रविवार (sunday)शोमवार(monday)

Moti ki kheti in U P, sant kabir nagar, Basti, Gkp

नमस्कार, किसान भाइयों, आप सभी को Ak pearl forming and training centre की तरफ से धनतेरस, दीपावली, भैयादूज की अग्रिम शुभकामनायें,
किसान भाइयों,अगर आप कम से कम लागत में ज्यादा लाभ कमाना चाहते हैं, तो मोती की खेती आपके लिए एक बेहतर विकल्‍प हो सकती है,हमारे यहां मोती की खेती की वैज्ञानिक विधि पर आधारित सम्पूर्ण प्रशिक्षण दिया जाता है, 1. किसानों को सीप उपलब्ध कराना,
२.तीनो प्रकार की सर्जरी, (मेंटल कैविटी, मेंटल टिशू, जननअंग) की जानकारी देना.
३.सरजरी का प्रेक्टिकल कराना,
४.सीप का भोजन व देखरेख करना,
५.पानी की मुफ्त में गुणवत्ता की जाचकरना,
६.सीप से मोती प्राप्त करना,
७.मोती बेचने में सहायता करना,
८.मरे हुए सीप के खोल से आकर्षक वस्तुएं बनाना,
९.मोती की खेती में प्रयोग होने वाले सभी उपकरण और सामान उपलब्ध कराना,
१०.पशिक्षण के दौरान रहना और खाने की व्यवस्था करना
सम्पर्क करें/ह्वाट्सअप करे - 09648834147, 8299329916, https://www.facebook.com/akpearl.tk,
Regards - arvind Chaudhary https://youtu.be/Nqsj9l56Rl0

Pearl farming training

Successful pearl farmer in haryana, next pearl farming training date 11/11/2017 to12/11/2017 and 18/11/2017 to19/11/2017, timing 10am to 5pm, for seat booking call vinod kumar_9050555757

मोती की खेती की सही सलाह

मोती पालन (Pearl Farming) एक ऐसा बिसनेस है, जिसमे सिर्फ दस हजार रुपये खर्च करना है, किसी भी लोन की जरुरत नहीं है, और फायदा करोड़ों में कमा सकते हैं :मोती पालन (Pearl Farming Business) की अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें – 9717443729, 7310743426, 9540883888

Moti ki kheti ki jankari

Gh

moti ki kheti

Moti ki kheti me Kia karna hota h...

मोती की खेती की ट्रेनिंग और जानकारी (Freshwater Pearl Culture)

मीठे पानी के मोती की खेती (Freshwater Pearl Culture)मोती के बढ़ते उत्पादन की वजह से भारत में बने मीठे पानी के मोती की मांगभारतीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में दिनों दिन बढ़ती जा रही है। आजकल ग्राहक चीन में बने प्लास्टिक या कैल्शियम के बने नकली मोती को 200 से 400 रुपये में खरीदने के बजाय भारत में तैयार असली मोती को खरदीने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे है। मछली पालन करने वाले सभी किसान इसके साथ-साथ मोती की खेती में भी बिना ज्यादा खर्च किये अच्छी गुणवत्ता का मोती तैयार कर सकते है। मोती पालन में आप अपनी आय को कई गुना तक बढ़ा सकते है।मोती की खेती की ट्रेनिंग, फार्म सेटअप और जानकारी के लिए सम्पर्क करें:
Call: 7017563576
Whatsapp: 7017563576
Email: indianpearlfarming@gmail.com
https://www.facebook.com/IndianPearlFarms/
https://indianpearlfarming.blogspot.com/#IndianPearlFarming #PearlFarming #PearlTraining #PearlFarmingTraining #FreshwaterPearls #SeepHatchery #RoundNucleus #QualityNucleus

moti ki kheti ki training

मोती पालन (Pearl Farming) एक ऐसा बिसनेस है, जिसमे सिर्फ दस हजार रुपये खर्च करना है, किसी भी लोन की जरुरत नहीं है, और फायदा करोड़ों में कमा सकते हैं :मोती पालन (Pearl Farming Business) की अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें – 9717443729 (Call Time : 2-8 pm) 9540883888 (Whatsapp)

प्रशिक्षण सेंटर के रजिस्ट्रेशन के संदर्भ में

प्रशिक्षण सेन्टर के रजिस्ट्रेसन करवाने
के मानक प्रक्रिया की पूर्ण जानकारी देने का
के कष्ट करें

call

Pearl culture training date

मोती की खेती की सही सलाह

मोती की खेती की सही सलाहसभी किसान भाइयों को इण्डियन पर्ल फार्म एण्ड ट्रेनिंग इन्सटीट्यूट खुरजा की शुभकामनायें !!.भाइयों! अगर आप कम लागत से ज्यादा लाभ कमाना चाहते हैं, तो मोती की खेती आपके लिए एक बेहतर विकल्‍प हो सकती है.हमारे उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा लोगो को स्वावलंबी बनाना है |हमारे यहां मोती की खेती वैज्ञानिक विधि पर आधारित सम्पूर्ण प्रशिक्षण दिया जाता है |1. सबसे जरूरी जानकारी कि सीप को ऑपरेशन से पहले व ऑपरेशन के बाद सर्वाईव कैसे करना है ?2. पर्ल फार्मिंग के लिए पीने वाला साफ पानी जरूरत होती है. पानी की मुफ्त में गुणवत्ता की जाच करना free water testing.3. How to maintain perfect pond Tempratureसिखाना.4. pH testing at home सिखाना. Free pH testing.5. Amonia testing of the pond.6. न्यूक्लियस materials ki detailed जानकारी करना सिखाना7. तीन तरह के न्यूक्लियस तैयार करना सिखाना8. जाल (nylon Net) तैयार करना सिखाना9. सीप के लिए भोजन तैयार करना सिखाना10.सीप की 4 types सरजरी के बारे detailed सिखाना11.सीप कैसे खोलना है सिखाना.12.सीप nucleus कैसे डालें सिखाना.13.मोती की खेती में प्रयोग होने वाले सभी उपकरण और सामान उपलब्ध कराना,केवल इण्डियन पर्ल फार्म एण्ड ट्रेनिंग इन्सटीट्यूट खुरजा सिटी ही पूरे दो दिन यानी 16 से 20 घंटे की ट्रेनिंग देता है |.और अन्त में मेरी सभी पर्ल फार्मिंग सीखने वालो को सलाह है की अपना फ़ोन नंबर कमेंट बॉक्स में न छोड़े बल्कि 7310743426, 9717443729 तथा 9540883888 पर कॉल/whatsapp कर सही मार्गदर्शन प्राप्त करे

required detail of complite

required detail of complite process of pearl farming for jaipur location

FreshWater Pearl Culture

मीठे पानी के मोती की खेती (Freshwater Pearl Culture): Indian Pearl Farmingहमारे किसान जो भी मोती की खेती करना चाहते है उन सभी में से ज्यादातर किसानों के मोती की खेती से जुड़े कुछ सवाल और उनके जवाब आप सभी के साथ शेयर कर रहे है क्या है मीठे पानी के मोती की खेती (Freshwater Pearl Culture)?जवाब - मीठे पानी के मोती की खेती या Freshwater Pearl Culture एक तरीका है जिससे मीठे पानी के सीप से मोती तैयार होता है।आज बाजार में जो भी मोती हम और आप ज्वेलर्स के पास देखते या खरीदते है ज्यादातर कल्चर्ड मोती ही है। बाजार में आप पूरा गोल (माला बनाने के लिए) और आधा गोल (अंगूठी बनाने के लिए) मोती सभी ज्वेलर्स की दुकान पर देखते है।हमारे किसान द्वारा बनाए गए मोती और बाजार में मिलने वाले मोती में फर्क सिर्फ इतना है ये “मेड इन चाइना” है जिसे ये लोग जापान का मोती का बता के बेच रहे है और हमारा मेड इन इंडिया है। भारत में पूरा गोल और आधा गोल मोती के साथ-साथ हम डिज़ाइनर मोती (लॉकेट बनाने के लिए) भी बनाते है। 
मोती की खेती की ट्रेनिंग, फार्म सेटअप और जानकारी के लिए सम्पर्क करें:
Call: 7017563576
Whatsapp: 7017563576
Email: indianpearlfarming@gmail.com
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Gorakhpur, sant kabir nagar, Basti me moti ki kheti

नमस्कार, किसान भाइयों, आप सभी को Ak pearl forming and training centre की तरफ से धनतेरस, दीपावली, भैयादूज की अग्रिम शुभकामनायें,
किसान भाइयों,अगर आप कम से कम लागत में ज्यादा लाभ कमाना चाहते हैं, तो मोती की खेती आपके लिए एक बेहतर विकल्‍प हो सकती है,हमारे यहां मोती की खेती की वैज्ञानिक विधि पर आधारित सम्पूर्ण प्रशिक्षण दिया जाता है, 1. किसानों को सीप उपलब्ध कराना,
२.तीनो प्रकार की सर्जरी, (मेंटल कैविटी, मेंटल टिशू, जननअंग) की जानकारी देना.
३.सरजरी का प्रेक्टिकल कराना,
४.सीप का भोजन व देखरेख करना,
५.पानी की मुफ्त में गुणवत्ता की जाचकरना,
६.सीप से मोती प्राप्त करना,
७.मोती बेचने में सहायता करना,
८.मरे हुए सीप के खोल से आकर्षक वस्तुएं बनाना,
९.मोती की खेती में प्रयोग होने वाले सभी उपकरण और सामान उपलब्ध कराना,
१०.पशिक्षण के दौरान रहना और खाने की व्यवस्था करना
सम्पर्क करें/ह्वाट्सअप करे - 09648834147, 8299329916,
Regards - arvind Chaudhary

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