प्रयास

आसमां में सुराख से कम नहीं यह जीत

Source: 
हरिद्वार, दैनिक जागरण, 7 फरवरी 2010
अनशनकरी स्वामी यजनानंद : को जूस पिलाकर अनशन तुड़वाते अग्नि अखाड़े के महामंडलेश्वर रामकृष्णानंदअनशनकरी स्वामी यजनानंद : को जूस पिलाकर अनशन तुड़वाते अग्नि अखाड़े के महामंडलेश्वर रामकृष्णानंद

गंगा में खनन के कुछ मुद्दों पर मातृसदन के आंदोलन के आगे शासन झुका


मातृसदन का आंदोलन अखिरकार रंग लाया। तमाम सख्ती के बाद शासन को अखिरकार झुकना पड़ा। शासन ने अधिसूचना जारी कर कुंभ क्षेत्र को मातृसदन की मांग के अनुसार जियापोता तक बढ़ाने का ऐलान कर दिया। इसके साथ ही 6 फरवरी को एडीएम ने मातृसदन के प्रमुख स्वामी शिवानंद व उनके शिष्य यजनानंद ब्रह्मचारी का अनशन तो तुड़वा दिया, लेकिन क्षेत्र को खनन मुक्त कराने की मांग लेकर स्वामी दयानंद का अनशन अभी जारी है। ज्ञातव्य है कि सैकड़ों ट्रैक्टर, ट्रक, जेसीबी मशीन के भयंकर खनन से गंगा भयानक रूप से प्रदूषित हो रही है।

खास संगठन

जल संगठन गतिविधियां

चाल-खाल से बचाओ जंगल

Author: 
सुरेश भाई
एक सुंदर चालएक सुंदर चाल जलवायु परिवर्तन के दौर में यह स्थिति कभी बढ़ेगी तो कभी घट भी सकती है। अब अनियमित वर्षा को जल संरचनाए ही समेट पायेंगी। यह ध्यान देने योग्य है कि पहाड़ी राज्यों को ढालदार पहाड़ियों पर जल संरचनायें बनाकर धरती में जलधारण क्षमता को भी बढ़ाया जा सकता है। धरती के ऊपर पुराने समय में लोगों ने स्वयं के उपयोग एवं पशुओं के पेयजल के लिए चाल-खाल बनाये थे। इसमें से अब अधिकांश संरचनायें सीमेंटेड हो गयी है। फलस्वरूप इनका पानी सूख गया है। अब ऊपरी ढालदार पहाड़ियों पर उगने वाली चौड़ी पत्तियों के जंगल भी कम हो गये हैं।

जम्मू के लुप्त होते ताल

Source: 
tribuneindia.com, dailyexcelsior.com
कठुआ में उपेक्षित तालाबकठुआ में उपेक्षित तालाब
जम्मू एवं कश्मीर राज्य का जम्मू क्षेत्र आज पानी के संकट से जूझ रहा है। समुद्र तल से करीब 300 से 1000 मीटर की ऊंचाई पर बसे इस क्षेत्र में किसी समय सैकड़ो तालाब व जलाशय मौजूद थे। इस क्षेत्र के अंतर्गत जम्मू, सांबा, कठुआ एवं उधमपुर जिले शामिल हैं, जो कि कण्डी बेल्ट के नाम से जाना जाता है। कभी भरे पूरे ताल तलैयों के क्षेत्र के तौर पर मशहूर
इस खबर के स्रोत का लिंक: 
http://www.tribuneindia.com http://www.dailyexcelsior.com

सबकी दीदी, राधा दीदी

वेब/संगठन: 
raviwar com
Author: 
प्रसून लतांत
राधा भट्टराधा भट्टराधा भट्ट यूं तो पहाड़ की आम महिलाओं जैसी ही नजर आती हैं. लेकिन वे आम नहीं हैं. साधारण तो कतई नहीं. हां, आप उनसे बातचीत करें तो परत दर परत संघर्ष और अनुशासन का एक ऐसा रचनात्मक संसार खुलता चला जाता है, जो उन्हें सबसे अलग करता है.

नरबदा अरे माता तो लगै हो . . .

Author: 
प्रो. नर्मदाप्रसाद गुप्त

प्राचीनता


नर्मदाघाटी के भू स्तरों की खोजों से पता चलता है कि नर्मदाघाटी की सभ्यता सिन्धुघाटी की सभ्यता से बहुत पुरानी है। नर्मदाघाटी में प्राप्त भैंसा, घोड़े, रिनोसिरस, हिप्पोपोटेमस, हाथी और मगर की हड्डियों तथा प्रस्तर-उद्योग से पता चलता है कि यह भूभाग आदिम मानव का निवास था। इसी क्षेत्र में 1872 ई. में खोजी गयी स्फटिक चट्टान से निर्मित एक तराशी प्रस्तर कुल्हाड़ी को भारत में प्राप्त प्रागैतिहासिक चिन्हों में सबसे प्राचीन बताया गया है। और उसे पूर्व-चिलयन युग का माना गया है।

ब्रह्मपुत्र नदी के कटाव से असम में जबरदस्त भूक्षरण

Source: 
ptinews.com, deccanherald.com, hinduonnet.com
ब्रह्मपुत्र नदी में भूक्षरण ब्रह्मपुत्र नदी में भूक्षरण
असम में ब्रह्मपुत्र नदी के तट के इलाके जबरदस्त कटाव से प्रभावित हो रहे हैं। लगातार हो रहे कटाव से राज्य की करीब चार हजार वर्ग किलो मीटर भूमि का क्षरण हो चुका है और इससे करीब 2,500 गांवो में बसे 50 लाख से ज्यादा लोग प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं। एक अनुमान के मुताबिक राज्य में होने वाला यह भूक्षरण करीब 80 वर्ग किलो मीटर प्रतिवर्ष के हिसाब से बढ़ रहा है। इस मामले में राज्य के जल संसाधन विभाग ने 25 संवेदनशील और अति क्षरणीय स्थलों की पहचान की है।
इस खबर के स्रोत का लिंक: 

छत्तीसगढ़ में है नदियों का गुम्फन

Author: 
शांति यदु
हमारी भारतीय संस्कृति में अन्य प्राकृतिक उपादानों की तरह नदियों का भी अपना एक अलग विशेष महत्व है। वेद पुराणों में नदियों की यशोगाथा विद्यमान है। नदियाँ हमारे लिए प्राणदायिनी माँ की तरह हैं। नदियों के साथ हमारे सदैव से भावनात्मक संबंध रहे हैं औऱ हमने नत-मस्तक होकर उनके प्रति अपनी श्रद्धा व आस्था प्रकट की है। नदियाँ केवल जल-प्रदायिनी एवं मोक्षदायिनी ही नहीं हैं, बल्कि संस्कारदायिनी भी हैं। नदियाँ विश्व की माताओं की तरह हैं। जिस तरह शिशु माँ के सान्निध्य में अँगुली पकड़कर चलना सीखता है। उसी तरह नदियों के बहते जल का वेग हमें जीवन के हर मोड़ पर गतिशील बने रहने का संदेश देता है। माँ के ममत्व से जिस तरह बच्चे तृप्त होते हैं, उसी तरह पावन नदियों का जल ग्रहण कर हम अपनी तृषा की तृप्ति करते है

वो वनस्पतियाँ जो गंगा जल को अमृत बनाती हैं

Author: 
डॉ भगवती प्रसाद पुरोहित
गंगाजल कभी खराब नहीं होता है। इसके पीछे वैज्ञानिक तथ्य यह है कि गौमुख से गंगोत्री तक की गंगायात्रा में हिमालय पर्वत पर उगी ढेर सारी जड़ी-बूटियां गंगा जल को स्पर्श कर अमृत बनाती हैं। साथ ही गंगा जल में बैट्रियाफौस नामक पाये जाने वाला बैक्टीरिया अवांछनीय पदार्थों को खाकर शुद्ध बनाये रखता है। और दूसरा बड़ा कारण है कि हिमालय की मिट्टी में गंधक होता है जो गंगा जल में घुलकर गंगा जल को शुद्ध बनाता है।

वर्षा जल संग्रह एवं प्रबंधन (प्रशिक्षण निदेशिका)

वर्षा जल संग्रह एवं प्रबंधन (प्रशिक्षण निदेशिका)वर्षा जल संग्रह एवं प्रबंधन (प्रशिक्षण निदेशिका) सबको, साफ, स्वच्छ, सदा पानी के उद्देश्य के लिए काम कर रहा संगठन अर्घ्यम ने डेवलपमेंन्ट अल्टरनेटिव के साथ मिलकर वर्षा जल संग्रह एवं प्रबंधन (प्रशिक्षण निदेशिका) तैयार की है। यह प्रशिक्षण निदेशिका बुंदेलखंड के भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाई गयी है। बुंदेलखंड पिछले कई सालों से सूखे की चपेट में हैं। पिछले 3-4 सालों के अंदर ही सूखे की मार की वजह से चार सौ से ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की है। जीविका के आधार खेत, चारागाह, जंगल

हिमाचल की तीन नदियों में खनन पर रोक

Source: 
in.news.yahoo.com, indianexpress.com, tribuneindia.com
चक्की नदीचक्की नदी
हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय के तहत राज्य से होकर बहने वाली तीन नदियों में खनन पर रोक लगा दी है। इन नदियों में कांगड़ा जिले की चक्की एवं न्यूगल नदियां एवं बिलासपुर जिले की सीयर नदी शामिल हैं। इस निर्णय के बाद इन नदियों पर रेत एवं पत्थरों का खनन पूरी तरह