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मेघ पाईन अभियान क्या है?

मेघ पाईन अभियान

मेघ पाईन अभियान क्या है?


यह एक प्रयास है वर्षाजल के प्रासंगिकता को पहचानने व उसके संग्रहण को व्यापक स्तर पर फैलाने का, जो उत्तर बिहार के ग्रामीण इलाकों में रह रहे लाखों लोगों को साफ व सुनिश्चित पेयजल उपलब्ध कराने में मदद देना।

मेघ पाइन अभियान का मुख्य उददेश्य


1- उत्तर बिहार के ग्रामीण लोगों के बीच वैचारिक व व्यवहारिक बदलाव लाकर स्थानीय जल प्रबंधन तकनीकों को प्रभावी तरीके से पूर्णजीवित व स्थापित करना है और
2- स्थानीय जल प्रबन्धन द्वारा पीने योग्य, अन्य घरेलू कार्यों और खेती के उपयोग के लिए बढ़ते पानी की मांग को पूरा करने हेतु प्रभावित लोगों को नये उपायों से जोड़ना व प्रेरित करना है

उत्तर बिहार एक परिचय

जलवायु परिवर्तन का जल संसाधनों पर प्रभाव

जल संसाधन पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव पर, केन्द्रीय जल आयोग और राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान के द्वारा जल संसाधन मंत्रालय के मार्गदर्शन में, 2008 में तैयार की गई रिपोर्ट, भारत सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई पहली आधिकारिक रिपोर्ट है। के जलवायु परिवर्तन का जल संसाधनों, ग्लेशियरों और बर्फ पिघलनें, नदी व्यवस्था के अपवाह और भूजल में उनके योगदान पर प्रभाव आदि पर फील्ड डाटा इस रिपोर्ट में उपलब्ध कराया गया है। रिपोर्ट में, भारत के जल संसाधनों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव पर उपलब्ध अध्ययनों, देश में पानी की जरूरतों, जलवायु, नदी घाटियों,वर्तमान जल संसाधनों और भविष्य की मांग और आपूर्ति आदि में बदलाव और संबंधित जलीय घटनाओं और खतरों की पहचान और खतरों को टालने के लिए रणनीतियों पर भी चर्चा की गई है।

जल प्रौद्योगिकी केन्द्र

जल प्रौद्योगिकी केन्द्रजल प्रौद्योगिकी केन्द्र

परिचय


भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (भा.कृ.अनु.सं.) नई दिल्ली में स्थित जल प्रौद्योगिकी केन्द्र (डब्ल्यू.टी.सी.), 1969 में कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय (डेविस) संयुक्त राज्य अमेरिका के तकनीकी सहयोग और फोर्ड फाउन्डेशन के आंशिक वित्तिय सहायता से बनी एक ऐसी अंतर विभागीय सुविधा है जो अनुसंधान, अध्यापन, प्रशिक्षण एवम् विस्तार के लिए कार्य करती है।

अध्ययन व जाग्रति यात्रा

सिम्पोडियम ऑफ एडवोकेसी फॉर हिमालयन ईशूज (साही), एक जाग्रति यात्रा का आयोजन कर रहा है। साही, हिमाचल और उत्तराखण्ड के 15 गैर सरकारी संगठनों का संगठन है। यात्रा रेणुका जी से प्रारम्भ होकर पौंटा साहिब में समाप्त होगी।

इस यात्रा के दौरान गिरि नदी पर प्रस्तावित रेणुका बाँध से निचले क्षेत्र में पानी के प्रवाह में कमीं आने से लोगों और कृषि पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन भी किया जाएगा।

15 जनवरी से शुरु होने वाली यह यात्रा 42 किमी. तक की दूरी तय करेगी।

रेणुका जी पहुँचने वाले यात्रियों को वाया नाहन होकर पहुँचना होगा, सभी साथी हिमाचल टूरिज्म के टूरिस्ट सेन्टर में इकट्ठा होंगे।

अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करें-
सुभाष मेंढापुरकर- 09418022118

"कंक्रीट के पहाड: हिमालय में बांध निर्माण"

सैन्ड्रप: रिपोर्ट का लोकार्पण

"कंक्रीट के पहाड: हिमालय में बांध निर्माण" "
रिपोर्ट का उद्घाटन समारोह, सोमवार, 12 जनवरी, 2009 को 2.30 बजे से 4 बजे शाम को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (Annex), कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित किया जा रहा है, सैन्ड्रप सभी को इस रिपोर्ट के लोकार्पण अवसर पर आमंत्रित करता है। मंथन अध्ययन केन्द्र के श्रीपाद धर्माधिकारी हिमालय में बांध निर्माण पर अपना अध्ययन प्रस्तुत करेंगें। रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन और हिमालय में डैम के बीच के संबंध को पर प्रकाश डाला जाएगा।

जल और ऊर्जा प्रयोक्ता फेडरेशन ऑफ नेपाल से रतन भंडारी, भारत चालित जल विद्युत कार्यक्रम का नेपाल में प्रभाव पर प्रस्तुति देंगें।

"आयोजन तिथिः "सोमवार, 12 जनवरी, 2009

"समयः "दोपहर 2.30 बजे से सांय 4 बजे तक

अधिक जानकारी के लिए देखें- संलग्नक
"स्थानः "इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (Annex),
कॉन्फ्रेंस हॉल-3

इस माह का संगठन

जलधारा अभियान

फोटो साभार - हिन्दू

और अधिक संगठनों की जानकारी के लिए क्लिक करें संगठनात्मक डाटाबेस.

सबसे अधिक पढ़े गये लेख

शख्सियत

बाढ़ के साथ बढ़ने की कला

बाढ़अनुपम मिश्रसमाज ने पीढ़ियों से, शताब्दियों से यहां फिसलगुड्डी की तरह फुर्ती से उतरनेवाली नदियों के साथ जीवन जीने की कला सीखी थी, बाढ़ के साथ बढ़ने की कला सीखी थी. उसने और उसकी फसलों ने बाढ़ में डूबने के बदले तैरने की कला सीखी थी. वह कला आज धीरे-धीरे मिटती जा रही है. अब उत्तर बिहार लोग मानते हैं कि इन नदियों ने उन्हें दुख के अलावा कुछ नहीं दिया है.

पानी के लोग

विश्व जल दिवस

वर्षाजल२२ मार्च याने विश्व जल दिवस। पानी बचाने के संकल्प का दिन। पानी के महत्व को जानने का दिन और पानी के संरक्षण के विषय में समय रहते सचेत होने का दिन। आँकड़े बताते हैं कि विश्व के १.४ अरब लोगों को पीने का शुद्ध पानी नही मिल रहा है। प्रकृति जीवनदायी संपदा जल हमें एक चक्र के रूप में प्रदान करती है, हम भी इस चक्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। चक्र को गतिमान रखना हमारी ज़िम्मेदारी है, चक्र के थमने का अर्थ है, हमारे जीवन का थ