अनशनकरी स्वामी यजनानंद : को जूस पिलाकर अनशन तुड़वाते अग्नि अखाड़े के महामंडलेश्वर रामकृष्णानंद
एक सुंदर चाल
जलवायु परिवर्तन के दौर में यह स्थिति कभी बढ़ेगी तो कभी घट भी सकती है। अब अनियमित वर्षा को जल संरचनाए ही समेट पायेंगी। यह ध्यान देने योग्य है कि पहाड़ी राज्यों को ढालदार पहाड़ियों पर जल संरचनायें बनाकर धरती में जलधारण क्षमता को भी बढ़ाया जा सकता है। धरती के ऊपर पुराने समय में लोगों ने स्वयं के उपयोग एवं पशुओं के पेयजल के लिए चाल-खाल बनाये थे। इसमें से अब अधिकांश संरचनायें सीमेंटेड हो गयी है। फलस्वरूप इनका पानी सूख गया है। अब ऊपरी ढालदार पहाड़ियों पर उगने वाली चौड़ी पत्तियों के जंगल भी कम हो गये हैं।
कठुआ में उपेक्षित तालाब
राधा भट्टराधा भट्ट यूं तो पहाड़ की आम महिलाओं जैसी ही नजर आती हैं. लेकिन वे आम नहीं हैं. साधारण तो कतई नहीं. हां, आप उनसे बातचीत करें तो परत दर परत संघर्ष और अनुशासन का एक ऐसा रचनात्मक संसार खुलता चला जाता है, जो उन्हें सबसे अलग करता है.
ब्रह्मपुत्र नदी में भूक्षरण
वर्षा जल संग्रह एवं प्रबंधन (प्रशिक्षण निदेशिका)
सबको, साफ, स्वच्छ, सदा पानी के उद्देश्य के लिए काम कर रहा संगठन अर्घ्यम ने डेवलपमेंन्ट अल्टरनेटिव के साथ मिलकर वर्षा जल संग्रह एवं प्रबंधन (प्रशिक्षण निदेशिका) तैयार की है। यह प्रशिक्षण निदेशिका बुंदेलखंड के भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाई गयी है। बुंदेलखंड पिछले कई सालों से सूखे की चपेट में हैं। पिछले 3-4 सालों के अंदर ही सूखे की मार की वजह से चार सौ से ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की है। जीविका के आधार खेत, चारागाह, जंगल
चक्की नदी