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खासम-खास

Submitted by HindiWater on Thu, 12/31/2020 - 13:34
गोंडकालीन सगड़ा बावडी, जबलपुर, मध्यप्रदेश
सदियों से बावडी हमारी सनातन जल प्रदाय व्यवस्था का अभिन्न अंग रही है। अलग-अलग इलाकों में बावडियों को अलग-अलग नामों यथा सीढ़ीदार कुआ या वाउली या बाव इत्यादि के नाम से पुकारा जाता है। अंग्रेजी भाषा में उसे स्टेप-वैल कहा जाता है। इस संरचना में पानी का स्रोत भूजल होता है। भारत में इस संरचना का विकास, सबसे पहले, देश के पानी की कमी वाले पश्चिमी हिस्से में हुआ। वहाँ यह अस्तित्व में आई और समय के साथ फली-फूली। दक्षिण भारत में भी उसका विस्तार हुआ। देश के उन हिस्सों में वह भारतीय संस्कृति और संस्कारों का हिस्सा बनी। सम्पन्न लोगों के लिए सामाजिक दायित्व बनी।

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Submitted by UrbanWater on Mon, 08/24/2020 - 14:15
Source:
Bihar Flood
बिहार का एक बड़ा हिस्सा इन दिनों बाद से प्रभावित है, हर साल बिहार में बाढ़ आती है जिसकी वजह से काफी नुकसान होता है । लेकिन इस सबके बीच बिहार में एक ऐसा गांव भी है जो अब बाढ़ मुक्त हो चुका है । इस गांव में मुखिया के किए गए प्रयासों की वजह से आज ये गांव बाढ़ मुक्त हो चुका है। ऐसा क्या किया इस गांव ने कि सब ओर तबाही के मंजर के बावजूद भी इस गांव में खुशहाली है ना बाढ़ से बेघर होने का खौफ है ना ही गर्मियों में सूखे का। आईये जानते हैं हमारी इस रिपोर्ट में 
Submitted by HindiWater on Mon, 08/24/2020 - 13:19
Source:
छत्तीसगढ़ः पर्यावरण संरक्षण में जुटे वीरेंद्र, 35 तालाब, एक नदी और 2 कुंड किए स्वच्छ
वीरेंद्र का जन्म बालोद जिला के दल्लीराजहरा गांव में एक सामान्य किसान परिवार में हुआ था। बचपन से ही वें प्रकृति से काफी करीब से जुड़े हुए थे। बी.काॅम, एम काॅम और अर्थशास्त्र में एमए की डिग्री लेने के बाद उन्होंने रोजी-रोटी के लिए वर्ष 2000 में निजी स्कूल में पढ़ाना शुरू किया। इसी के साथ 25 बच्चों की टीम बनाकर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का कार्य भी करना शुरू कर दिया। बीस साल पहले घर के पास ही पीपल का एक पौधा रोपकर अपने काम की शुरूआत की। बच्चों को भी वें पढ़ाई के साथ साथ पर्यावरण का महत्व समझाते थे। 
Submitted by UrbanWater on Sat, 08/22/2020 - 10:55
Source:
सहरससा में बाढ़ का कहर
“एक महीना बहुत तकलीफ में गुजरा। ऊपरका (भगवान) के भरोसे बच गए, यही बहुत है।”  43 साल के प्रकाश मुखिया जब ये वाक्य कहते हैं, तो उनकी आवाज में दर्द साफ महसूस किया जा सकता है। वह एक महीने से ज्यादा वक्त तक बाढ़ में अपनी फूस की झोपड़ी में फंसे रहे। अब जाकर पानी उतरा है, तो घर में खाना बनना शुरू हुआ है। प्रकाश इंडिया वाटर पोर्टल के साथ बातचीत में कहते हैं, “4 जुलाई से ही बाढ़ का पानी गांव में आने लगा था। धीरे-धीरे पानी की रफ्तार तेज हो गई और घरों में घुटना भर पानी भर गया।”

प्रयास

Submitted by HindiWater on Fri, 12/25/2020 - 10:11
सूखे बुंदेलखंड़ में जल संरक्षण की मिसाल है जखनी गांव  
जखनी गांववासियों की मेहनत का ही नतीजा है कि 2012 में तत्कालीन जिला कलेक्टर ने जिले के 470 गांवों में जखनी माॅडल को अपनाने का आदेश दे दिया। साथ ही नीति आयोग ने जखनी को देश का पहला ‘जल-ग्राम’ घोषित किया है। इसके अलावा जखनी गांव को माॅडल बना देश के 1034 गांवों को जलग्राम बनाने की घोषणा की गई है।

नोटिस बोर्ड

Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Source:
अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 16:26
Source:
Aqua Foundation
एक्वा फाउंडेशन
सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं, नवीन प्रौद्योगिकियों और अत्याधुनिक अनुसंधान में नवीनतम रुझानों के बारे में जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। आपसे निवेदन है कि अपनी संस्था से अधिक से अधिक प्रतिभागियों का नामांकन करे (online Register as delegate) कार्यक्रम का ब्रोशर यहां डाउनलोड करें.  अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट देखें  World Aqua Congress.  तारीख : अक्टूबर 29- 30, 2020 समयः प्रातः 9:00 बजे से सांय 6ः00 बजे 
Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 14:54
Source:
वर्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन
आजकल विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में भिन्नता दिखाई दे रही है। बाढ़ और सुखाड़ पहले से अधिक बारबार होने लगे है,पहले से अधिक तबाही लाने लगे है ऐसे में जरूरी है जलवायू परिवर्तन के प्रभावों के मद्देनजर जल साधानो के प्रबंधन की रणनीति और तरीकों में बदलाव पर विचार करे । इस संबंध में CII वाटर इंस्टीट्यूट द्वारा  03 नवंबर, 2020 को "पानी के सुरक्षित भविष्य के लिए जोखिम से लचीलापन की ओर बढ़ना' पर  एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन करने जा रहा है।

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खासम-खास

बावडी: कुछ अनछुए पहलू

Submitted by HindiWater on Thu, 12/31/2020 - 13:34
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
bavdi:-kuch-anachue-pahloo
गोंडकालीन सगड़ा बावडी, जबलपुर, मध्यप्रदेश
सदियों से बावडी हमारी सनातन जल प्रदाय व्यवस्था का अभिन्न अंग रही है। अलग-अलग इलाकों में बावडियों को अलग-अलग नामों यथा सीढ़ीदार कुआ या वाउली या बाव इत्यादि के नाम से पुकारा जाता है। अंग्रेजी भाषा में उसे स्टेप-वैल कहा जाता है। इस संरचना में पानी का स्रोत भूजल होता है। भारत में इस संरचना का विकास, सबसे पहले, देश के पानी की कमी वाले पश्चिमी हिस्से में हुआ। वहाँ यह अस्तित्व में आई और समय के साथ फली-फूली। दक्षिण भारत में भी उसका विस्तार हुआ। देश के उन हिस्सों में वह भारतीय संस्कृति और संस्कारों का हिस्सा बनी। सम्पन्न लोगों के लिए सामाजिक दायित्व बनी।

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बिहारः एक गांव जहां अब बाढ़ नहीं आती

Submitted by UrbanWater on Mon, 08/24/2020 - 14:15
Author
इंडिया वाटर पोर्टल (हिंदी)
bihar-ek-gaanv-jahan-ab-badha-nahin-ati
Bihar Flood
बिहार का एक बड़ा हिस्सा इन दिनों बाद से प्रभावित है, हर साल बिहार में बाढ़ आती है जिसकी वजह से काफी नुकसान होता है । लेकिन इस सबके बीच बिहार में एक ऐसा गांव भी है जो अब बाढ़ मुक्त हो चुका है । इस गांव में मुखिया के किए गए प्रयासों की वजह से आज ये गांव बाढ़ मुक्त हो चुका है। ऐसा क्या किया इस गांव ने कि सब ओर तबाही के मंजर के बावजूद भी इस गांव में खुशहाली है ना बाढ़ से बेघर होने का खौफ है ना ही गर्मियों में सूखे का। आईये जानते हैं हमारी इस रिपोर्ट में 

छत्तीसगढ़ः पर्यावरण संरक्षण में जुटे वीरेंद्र, 35 तालाब, एक नदी और 2 कुंड किए स्वच्छ

Submitted by HindiWater on Mon, 08/24/2020 - 13:19
chhattisgarh-ke-jal-yoddha-virendra-singh-ne-nadi-aur-talaab-kiye-saaf
छत्तीसगढ़ः पर्यावरण संरक्षण में जुटे वीरेंद्र, 35 तालाब, एक नदी और 2 कुंड किए स्वच्छ
वीरेंद्र का जन्म बालोद जिला के दल्लीराजहरा गांव में एक सामान्य किसान परिवार में हुआ था। बचपन से ही वें प्रकृति से काफी करीब से जुड़े हुए थे। बी.काॅम, एम काॅम और अर्थशास्त्र में एमए की डिग्री लेने के बाद उन्होंने रोजी-रोटी के लिए वर्ष 2000 में निजी स्कूल में पढ़ाना शुरू किया। इसी के साथ 25 बच्चों की टीम बनाकर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का कार्य भी करना शुरू कर दिया। बीस साल पहले घर के पास ही पीपल का एक पौधा रोपकर अपने काम की शुरूआत की। बच्चों को भी वें पढ़ाई के साथ साथ पर्यावरण का महत्व समझाते थे। 

बिहार बाढ़: मचान बना ठिकाना,  भुने चावल और मक्का से बुझाई पेट की आग

Submitted by UrbanWater on Sat, 08/22/2020 - 10:55
Author
उमेश कुमार राय
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सहरससा में बाढ़ का कहर
“एक महीना बहुत तकलीफ में गुजरा। ऊपरका (भगवान) के भरोसे बच गए, यही बहुत है।”  43 साल के प्रकाश मुखिया जब ये वाक्य कहते हैं, तो उनकी आवाज में दर्द साफ महसूस किया जा सकता है। वह एक महीने से ज्यादा वक्त तक बाढ़ में अपनी फूस की झोपड़ी में फंसे रहे। अब जाकर पानी उतरा है, तो घर में खाना बनना शुरू हुआ है। प्रकाश इंडिया वाटर पोर्टल के साथ बातचीत में कहते हैं, “4 जुलाई से ही बाढ़ का पानी गांव में आने लगा था। धीरे-धीरे पानी की रफ्तार तेज हो गई और घरों में घुटना भर पानी भर गया।”

प्रयास

सूखे बुंदेलखंड में जल संरक्षण की मिसाल है जखनी गांव  

Submitted by HindiWater on Fri, 12/25/2020 - 10:11
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सूखे बुंदेलखंड़ में जल संरक्षण की मिसाल है जखनी गांव  
जखनी गांववासियों की मेहनत का ही नतीजा है कि 2012 में तत्कालीन जिला कलेक्टर ने जिले के 470 गांवों में जखनी माॅडल को अपनाने का आदेश दे दिया। साथ ही नीति आयोग ने जखनी को देश का पहला ‘जल-ग्राम’ घोषित किया है। इसके अलावा जखनी गांव को माॅडल बना देश के 1034 गांवों को जलग्राम बनाने की घोषणा की गई है।

नोटिस बोर्ड

हिंदी पत्रकारों के लिए सीएसई-एएईटीआई की ओर से ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स

Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Author
इंडिया वाटर पोर्टल (हिंदी)
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अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

एक्वा फाउंडेशन की XIV वर्ल्ड एक्वा कांग्रेस

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 16:26
ekva-foundation-key-XIV-world-ekva-kangres
Source
Aqua Foundation
एक्वा फाउंडेशन
सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं, नवीन प्रौद्योगिकियों और अत्याधुनिक अनुसंधान में नवीनतम रुझानों के बारे में जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। आपसे निवेदन है कि अपनी संस्था से अधिक से अधिक प्रतिभागियों का नामांकन करे (online Register as delegate) कार्यक्रम का ब्रोशर यहां डाउनलोड करें.  अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट देखें  World Aqua Congress.  तारीख : अक्टूबर 29- 30, 2020 समयः प्रातः 9:00 बजे से सांय 6ः00 बजे 

भविष्य में किस तरह पानी को किया जा सकता है सुरक्षित 

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 14:54
bhavishya-mein-kiss-tarah-pani-ko-kia-jaa-sakata-hai-surakshit
वर्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन
आजकल विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में भिन्नता दिखाई दे रही है। बाढ़ और सुखाड़ पहले से अधिक बारबार होने लगे है,पहले से अधिक तबाही लाने लगे है ऐसे में जरूरी है जलवायू परिवर्तन के प्रभावों के मद्देनजर जल साधानो के प्रबंधन की रणनीति और तरीकों में बदलाव पर विचार करे । इस संबंध में CII वाटर इंस्टीट्यूट द्वारा  03 नवंबर, 2020 को "पानी के सुरक्षित भविष्य के लिए जोखिम से लचीलापन की ओर बढ़ना' पर  एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन करने जा रहा है।

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