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खासम-खास

Submitted by HindiWater on Mon, 01/13/2020 - 22:17
नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह की बहाली 
भारत की लगभग सभी नदियों का मानसूनी प्रवाह लगभग अप्रभावित है, पर उनके गैर-मानसूनी प्रवाह में कमी आ रही है। अर्थात समस्या केवल नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह के घटने की ही है। गैर-मानसूनी प्रवाह के घटने के कारण छोटी तथा मंझौली नदियाँ मौसमी बनकर रह गई हैं। यह असर व्यापक है।

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Submitted by HindiWater on Thu, 01/23/2020 - 14:45
Source:
योजना, जनवरी, 2020
पर्यावरण और शासनः राजस्थान में फ्लोरोसिस के रोकथाम की कहानी
राजस्थान में 2018 में यूनिसेफ ने डूंगरपुर में जो एक जन-केन्द्रित जिला मंच है, एकीकृत फ्लोरोसिस रोकथाम प्रायोगिक पहल को सहायता प्रदान की। इसका नेतृत्व जिला मजिस्ट्रेट ने किया। इसका उद्देश्य समग्र फ्लोरोसिस रोकथाम पर बल देना था और साथ ही कार्यक्रम निधि का जिलों में योजनाबद्ध गतिविधियों में प्रयोग करना था।
Submitted by HindiWater on Thu, 01/23/2020 - 12:17
Source:
योजना, जनवरी, 2020
पर्यावरण और समुदायः महाराष्ट्र और जल दबाव वाले क्षेत्रों में सतत विकास के लिए महिलाओं के नेतृत्व में किस प्रकार निवेश कर रहा है
महाराष्ट्र ने पिछले पांच सालों में से तीन में सूखा घोषित किया है। राज्य के भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 70 प्रतिशत भाग अर्ध-शुष्क क्षेत्र में स्थित है, जिससे यह जल की कमी की चपेट में है; यह स्थिति सूखे सेऔर अधिक बिगड़ जाती है। इन प्रभावित क्षेत्रों में कृषि उत्पादन और आय में हर वर्ष वृहत उतार-चढ़ाव होता है और यहाँ गरीबी भी बहुत अधिक है, जिसके कारण ये क्षेत्र पिछड़े हुए हैं और कृषि उपज भी कम है।
Submitted by HindiWater on Thu, 01/23/2020 - 12:03
Source:
योजना, जनवरी, 2020
जल ही जीवन है
इस दुनिया में जीवन विविध और अनोखा है लेकिन हम सभी में जो समानता है वह यह है कि हम एक ही दुनिया में साथ रहते हैं और सांस लेते हैं। इसलिए हमारी सामूहिक क्रियाएं हमारे साझा वातावरण पर प्रभाव डालती हैं, जिसने जलवायु से सम्बन्धित मौसम के स्वरूप के बदलते रुख में इजाफा किया है और पर्यावरण की गुणवत्ता को घटाने जैसे नकारात्मक परिणामों में योगदान दिया है।

प्रयास

Submitted by HindiWater on Thu, 01/23/2020 - 11:33
लेविस पुग
लेविस पुग का जन्म पांस दिसंबर 1969 को इंग्लैंड के प्लाईमाउथ में हुआ था। बचपन से ही पर्यावरण के प्रति काफी लगाव होने के साथ ही तैराकी में काफी रूचि थी। अपनी इस रूचि को जीवन का अहम हिस्सा बनाया और वर्ष 1986 में पहली बार 17 वर्ष की आयु में तैराकी की। इसी के एक महीने बाद पुग ने राॅबेल आइलैंड से केपटाउन तक तैराकी की थी।

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Mon, 01/20/2020 - 11:07
Source:
मीडिया महोत्सव-2020
गत वर्षों की भांति इस बार भी 22-23 फरवरी, 2020 (शनिवार-रविवार, चतुर्दशी-अमावस्या, कृष्ण पक्ष, माघ, विक्रम संवत 2076) को “भारत का अभ्युदय : मीडिया की भूमिका” पर केन्द्रित “मीडिया महोत्सव-2020” का आयोजन भोपाल में होना सुनिश्चित हुआ है l
Submitted by HindiWater on Thu, 01/16/2020 - 09:57
Source:
नर्मदा, गंगा, कोसी, पेरियार व अन्य नदी घाटियों पर विचार मंथन
कृपया आपके आने की खबर, सफरनामा, सहभागी व्यक्तियों के नाम, उम्र, संबंधित विशेष कार्य/अनुभव इत्यादि के साथ त्वरित भेजें। 30 जनवरी से पहले भेजने से नियोजन में सहूलियत होगी।
Submitted by HindiWater on Sat, 12/28/2019 - 15:14
Source:
पहाड़ और हम : हिमालय के युवाओं के लिए कार्यशाला
पहाड़ों में एक कहावत है कि ‘पहाड़ का पानी और जवानी कभी पहाड़ के काम नहीं आते। सुनने पर इसका सरल और सीधा मतलब लगता है कि पहाड़ों के युवा नौकरी के अवसर के लिए और पहाड़ों का पानी नदियों के रास्ते यहां से मैदानी इलाकों में चले जाता है – दोनों की ऊर्जा और उर्वरकता का फायदा किसी और को होता है।

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खासम-खास

नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह की बहाली 

Submitted by HindiWater on Mon, 01/13/2020 - 22:17
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह की बहाली 
भारत की लगभग सभी नदियों का मानसूनी प्रवाह लगभग अप्रभावित है, पर उनके गैर-मानसूनी प्रवाह में कमी आ रही है। अर्थात समस्या केवल नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह के घटने की ही है। गैर-मानसूनी प्रवाह के घटने के कारण छोटी तथा मंझौली नदियाँ मौसमी बनकर रह गई हैं। यह असर व्यापक है।

Content

पर्यावरण और शासनः राजस्थान में फ्लोरोसिस के रोकथाम की कहानी

Submitted by HindiWater on Thu, 01/23/2020 - 14:45
Source
योजना, जनवरी, 2020
पर्यावरण और शासनः राजस्थान में फ्लोरोसिस के रोकथाम की कहानी
राजस्थान में 2018 में यूनिसेफ ने डूंगरपुर में जो एक जन-केन्द्रित जिला मंच है, एकीकृत फ्लोरोसिस रोकथाम प्रायोगिक पहल को सहायता प्रदान की। इसका नेतृत्व जिला मजिस्ट्रेट ने किया। इसका उद्देश्य समग्र फ्लोरोसिस रोकथाम पर बल देना था और साथ ही कार्यक्रम निधि का जिलों में योजनाबद्ध गतिविधियों में प्रयोग करना था।

पर्यावरण और समुदायः महाराष्ट्र और जल दबाव वाले क्षेत्रों में सतत विकास के लिए महिलाओं के नेतृत्व में किस प्रकार निवेश कर रहा है

Submitted by HindiWater on Thu, 01/23/2020 - 12:17
Source
योजना, जनवरी, 2020
पर्यावरण और समुदायः महाराष्ट्र और जल दबाव वाले क्षेत्रों में सतत विकास के लिए महिलाओं के नेतृत्व में किस प्रकार निवेश कर रहा है
महाराष्ट्र ने पिछले पांच सालों में से तीन में सूखा घोषित किया है। राज्य के भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 70 प्रतिशत भाग अर्ध-शुष्क क्षेत्र में स्थित है, जिससे यह जल की कमी की चपेट में है; यह स्थिति सूखे सेऔर अधिक बिगड़ जाती है। इन प्रभावित क्षेत्रों में कृषि उत्पादन और आय में हर वर्ष वृहत उतार-चढ़ाव होता है और यहाँ गरीबी भी बहुत अधिक है, जिसके कारण ये क्षेत्र पिछड़े हुए हैं और कृषि उपज भी कम है।

जल ही जीवन है - भाग 1

Submitted by HindiWater on Thu, 01/23/2020 - 12:03
Source
योजना, जनवरी, 2020
जल ही जीवन है
इस दुनिया में जीवन विविध और अनोखा है लेकिन हम सभी में जो समानता है वह यह है कि हम एक ही दुनिया में साथ रहते हैं और सांस लेते हैं। इसलिए हमारी सामूहिक क्रियाएं हमारे साझा वातावरण पर प्रभाव डालती हैं, जिसने जलवायु से सम्बन्धित मौसम के स्वरूप के बदलते रुख में इजाफा किया है और पर्यावरण की गुणवत्ता को घटाने जैसे नकारात्मक परिणामों में योगदान दिया है।

प्रयास

लेविस पुग ने अंटार्कटिका की पिघलती बर्फ के बीच तैरकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

Submitted by HindiWater on Thu, 01/23/2020 - 11:33
लेविस पुग
लेविस पुग का जन्म पांस दिसंबर 1969 को इंग्लैंड के प्लाईमाउथ में हुआ था। बचपन से ही पर्यावरण के प्रति काफी लगाव होने के साथ ही तैराकी में काफी रूचि थी। अपनी इस रूचि को जीवन का अहम हिस्सा बनाया और वर्ष 1986 में पहली बार 17 वर्ष की आयु में तैराकी की। इसी के एक महीने बाद पुग ने राॅबेल आइलैंड से केपटाउन तक तैराकी की थी।

नोटिस बोर्ड

मीडिया महोत्सव-2020

Submitted by HindiWater on Mon, 01/20/2020 - 11:07
मीडिया महोत्सव-2020
गत वर्षों की भांति इस बार भी 22-23 फरवरी, 2020 (शनिवार-रविवार, चतुर्दशी-अमावस्या, कृष्ण पक्ष, माघ, विक्रम संवत 2076) को “भारत का अभ्युदय : मीडिया की भूमिका” पर केन्द्रित “मीडिया महोत्सव-2020” का आयोजन भोपाल में होना सुनिश्चित हुआ है l

नर्मदा, गंगा, कोसी, पेरियार व अन्य नदी घाटियों पर विचार मंथन

Submitted by HindiWater on Thu, 01/16/2020 - 09:57
नर्मदा, गंगा, कोसी, पेरियार व अन्य नदी घाटियों पर विचार मंथन
कृपया आपके आने की खबर, सफरनामा, सहभागी व्यक्तियों के नाम, उम्र, संबंधित विशेष कार्य/अनुभव इत्यादि के साथ त्वरित भेजें। 30 जनवरी से पहले भेजने से नियोजन में सहूलियत होगी।

पहाड़ और हम : हिमालय के युवाओं के लिए कार्यशाला

Submitted by HindiWater on Sat, 12/28/2019 - 15:14
पहाड़ और हम : हिमालय के युवाओं के लिए कार्यशाला
पहाड़ों में एक कहावत है कि ‘पहाड़ का पानी और जवानी कभी पहाड़ के काम नहीं आते। सुनने पर इसका सरल और सीधा मतलब लगता है कि पहाड़ों के युवा नौकरी के अवसर के लिए और पहाड़ों का पानी नदियों के रास्ते यहां से मैदानी इलाकों में चले जाता है – दोनों की ऊर्जा और उर्वरकता का फायदा किसी और को होता है।

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