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खासम-खास

समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

Content

पृथ्वी की प्यास बुझाने को पुरुषार्थ जरूरी है

Submitted by HindiWater on Tue, 07/16/2019 - 12:32
Source
झंकार, दैनिक जागरण, 14 जुलाई 2019

पृथ्वी की प्यास बुझाने को पुरुषार्थ जरूरी है।पृथ्वी की प्यास बुझाने को पुरुषार्थ जरूरी है।

पृथ्वी प्रकृति के उत्पादों का ही दूसरा नाम है, मतलब पृथ्वी में उसका आवरण। पृथ्वी का इतिहास इस बात का साक्षी है कि जीवन की उत्पत्ति हवा, पानी, मिट्टी के कारण ही संभव हुई है। इसकी अन्य आवश्यकताओं का बोझ भी इन्हीं पर पड़ा है। अपने जीवन को प्रभु की कृपा मान लें या प्रकृति की, बात एक ही है। पृथ्वी की पहली शिक्षा इसको समझने की ही है, जिसको समझने में हम पूरी तरह चूक चुके हैं। शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी 84 लाख योनियों का स्थान भी है। मतलब इसमें पेड़, पौधों से लेकर वन्य जीव व हर तरह के जीव जुड़े हैं, इसलिए पृथ्वी को मां का दर्जा प्राप्त है। इसकी कृपा में इतने जीव पलते हैं,

प्रकृति से छेड़छाड़ का नतीजा है जल संकट

Submitted by UrbanWater on Tue, 07/16/2019 - 11:51
Author
विवेकानंद माथने
देश में पानी का संकट लगातार बढ़ रहा है।देश में पानी का संकट लगातार बढ़ रहा है। देश में पानी का संकट लगातार बढ़ रहा है। सभी जगह ‘पानी का संकट और उसे दूर करने के उपायों’ पर मंथन हो रहा है। पानी के संकट के लिये जनसंख्या में बढ़ोतरी, पानी का दुरुपयोग और सिंचाई के लिये पानी की बर्बादी के लिये सर्वसामान्य लोगों और किसानों को जिम्मेदार ठहराने का काम जारी है।प्रकृति से छेड़छाड़ के कारण बारिश का मिजाज बदला है, अब पहले जैसी रिमझिम रिमझिम बारिश कम ही होती है। लेकिन देश में सौ साल की बारिश की गिनती बताती है कि बारिश की मात्रा लगभग समान है। देश के अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्र में औसत बारिश हर साल जितनी होनी चाहिये उतनी ही हो रही है। ऋतु चक्र में बदलाव के कारण चार साल में एक बार बारिश की कमी और अधिक होना भी प्रकृति चक्र के अनुरुप ही है।

तिरुपति पर मंडरा रहा जल संकट

Submitted by UrbanWater on Mon, 07/15/2019 - 13:50
तिरुपति पर मंडरा रहा जल संकट   ।तिरुपति पर मंडरा रहा जल संकट । मानसून आ चुका है, बिहार जैसे राज्य जो कुछ दिनों पहले सूखे की मार झेल रहे थे, अब वो बाढ़ की वजह से परेशान हैं। लेकिन कुछ जगहों पर मानसून बहुत कम पहुंचा है जिस वजह से वहां सूखे के हालात बने हुए हैं। आंध्र प्रदेश के तिरुमाला-तिरुपति मानसून आन के बाद भी जल संकट से गुजर रहा है। यहां के लोग हर रोज अगले दिल के पानी की समस्या को लेकर सोते हैं। यहां के लोगों की आंखों में पानी की कमी का डर देखा जा सकता है। तिरूपति में खाली बर्तन पकड़े लोग और टैंकर आगे लगी कतार देखना आम बात है।

प्रयास

पहली बार बिजली से रोशन हुआ गांव, ग्रामीणों को मिला साफ पानी

Submitted by HindiWater on Thu, 07/11/2019 - 16:56
राजघाट में अथक प्रयासों के बाद लगाई गई पानी की टंकियां।राजघाट में अथक प्रयासों के बाद लगाई गई पानी की टंकियां। आज देश में जहां एक ओर शहरों को ‘‘स्मार्ट सिटी’’ और गांवों को ‘‘स्मार्ट गांव’’ बनाया जा रहा है, तो वहीं देश के करीब एक लाख गांव विकास की मुख्यधारा से दूर हैं। यहां लोगों के पास जीवनयापन तक के लिए पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं। ये लोग पीने के पानी से लेकर भोजन और बिजली तक के लिए मोहताज हैं। रोजगार के अभाव में बच्चें शिक्षा से वंचित हैं। नेता और मंत्री तो दूर गांव में अभी सड़क तक नहीं पहुंची है। पेयजल की पर्याप्त सुविधा न होने के कारण कई गांवों के लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। विकास की पहुंच से दूर होने के कारण कोई इस गांव में शादी नहीं करता है, जिस कारण गांव में आखिरी शादी 22 साल पहले हुई थी। इन एक लाख गांवों पर न तो कभी दिल्ली के वातानुकुलित दफ्तरों में बैठकर योजनाएं तैयार करने वाली सरकार की नजर गई और न ही लाखों रुपये वेतन लेने वाले प्रशासनिक अधिकारियों की।

नोटिस बोर्ड

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
Source
दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

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समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
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कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

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पृथ्वी की प्यास बुझाने को पुरुषार्थ जरूरी है

Submitted by HindiWater on Tue, 07/16/2019 - 12:32
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झंकार, दैनिक जागरण, 14 जुलाई 2019

पृथ्वी की प्यास बुझाने को पुरुषार्थ जरूरी है।पृथ्वी की प्यास बुझाने को पुरुषार्थ जरूरी है।

पृथ्वी प्रकृति के उत्पादों का ही दूसरा नाम है, मतलब पृथ्वी में उसका आवरण। पृथ्वी का इतिहास इस बात का साक्षी है कि जीवन की उत्पत्ति हवा, पानी, मिट्टी के कारण ही संभव हुई है। इसकी अन्य आवश्यकताओं का बोझ भी इन्हीं पर पड़ा है। अपने जीवन को प्रभु की कृपा मान लें या प्रकृति की, बात एक ही है। पृथ्वी की पहली शिक्षा इसको समझने की ही है, जिसको समझने में हम पूरी तरह चूक चुके हैं। शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी 84 लाख योनियों का स्थान भी है। मतलब इसमें पेड़, पौधों से लेकर वन्य जीव व हर तरह के जीव जुड़े हैं, इसलिए पृथ्वी को मां का दर्जा प्राप्त है। इसकी कृपा में इतने जीव पलते हैं,

प्रकृति से छेड़छाड़ का नतीजा है जल संकट

Submitted by UrbanWater on Tue, 07/16/2019 - 11:51
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विवेकानंद माथने
देश में पानी का संकट लगातार बढ़ रहा है।देश में पानी का संकट लगातार बढ़ रहा है। देश में पानी का संकट लगातार बढ़ रहा है। सभी जगह ‘पानी का संकट और उसे दूर करने के उपायों’ पर मंथन हो रहा है। पानी के संकट के लिये जनसंख्या में बढ़ोतरी, पानी का दुरुपयोग और सिंचाई के लिये पानी की बर्बादी के लिये सर्वसामान्य लोगों और किसानों को जिम्मेदार ठहराने का काम जारी है।प्रकृति से छेड़छाड़ के कारण बारिश का मिजाज बदला है, अब पहले जैसी रिमझिम रिमझिम बारिश कम ही होती है। लेकिन देश में सौ साल की बारिश की गिनती बताती है कि बारिश की मात्रा लगभग समान है। देश के अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्र में औसत बारिश हर साल जितनी होनी चाहिये उतनी ही हो रही है। ऋतु चक्र में बदलाव के कारण चार साल में एक बार बारिश की कमी और अधिक होना भी प्रकृति चक्र के अनुरुप ही है।

तिरुपति पर मंडरा रहा जल संकट

Submitted by UrbanWater on Mon, 07/15/2019 - 13:50
तिरुपति पर मंडरा रहा जल संकट   ।तिरुपति पर मंडरा रहा जल संकट । मानसून आ चुका है, बिहार जैसे राज्य जो कुछ दिनों पहले सूखे की मार झेल रहे थे, अब वो बाढ़ की वजह से परेशान हैं। लेकिन कुछ जगहों पर मानसून बहुत कम पहुंचा है जिस वजह से वहां सूखे के हालात बने हुए हैं। आंध्र प्रदेश के तिरुमाला-तिरुपति मानसून आन के बाद भी जल संकट से गुजर रहा है। यहां के लोग हर रोज अगले दिल के पानी की समस्या को लेकर सोते हैं। यहां के लोगों की आंखों में पानी की कमी का डर देखा जा सकता है। तिरूपति में खाली बर्तन पकड़े लोग और टैंकर आगे लगी कतार देखना आम बात है।

प्रयास

पहली बार बिजली से रोशन हुआ गांव, ग्रामीणों को मिला साफ पानी

Submitted by HindiWater on Thu, 07/11/2019 - 16:56
राजघाट में अथक प्रयासों के बाद लगाई गई पानी की टंकियां।राजघाट में अथक प्रयासों के बाद लगाई गई पानी की टंकियां। आज देश में जहां एक ओर शहरों को ‘‘स्मार्ट सिटी’’ और गांवों को ‘‘स्मार्ट गांव’’ बनाया जा रहा है, तो वहीं देश के करीब एक लाख गांव विकास की मुख्यधारा से दूर हैं। यहां लोगों के पास जीवनयापन तक के लिए पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं। ये लोग पीने के पानी से लेकर भोजन और बिजली तक के लिए मोहताज हैं। रोजगार के अभाव में बच्चें शिक्षा से वंचित हैं। नेता और मंत्री तो दूर गांव में अभी सड़क तक नहीं पहुंची है। पेयजल की पर्याप्त सुविधा न होने के कारण कई गांवों के लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। विकास की पहुंच से दूर होने के कारण कोई इस गांव में शादी नहीं करता है, जिस कारण गांव में आखिरी शादी 22 साल पहले हुई थी। इन एक लाख गांवों पर न तो कभी दिल्ली के वातानुकुलित दफ्तरों में बैठकर योजनाएं तैयार करने वाली सरकार की नजर गई और न ही लाखों रुपये वेतन लेने वाले प्रशासनिक अधिकारियों की।

नोटिस बोर्ड

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
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दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

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