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खासम-खास

Submitted by Editorial Team on Thu, 05/13/2021 - 10:25
हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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Submitted by Shivendra on Sat, 12/04/2021 - 12:32
Source:
छोटे प्रयास भी बड़े नतीजे देते है
दरअसल,यह नाला खीरी रजवहे से शुरू होकर करीब दो दर्जन गांवों से होते हुए खपटिहा से चार किलोमीटर आगे लपरी नदी में जाकर मिलता है। इस नाले में दो दर्जन गांवों के बारिश का पानी बहता आ रहा है। अगर इस नाले को बंद कर दिया जाता है तो बरसात के दिनों में यहां से पानी के निकलने में दिक्कत होगी। जिसके कारण आसपास के इलाके के लोगों के सामने नई समस्या खड़ी हो सकती है। सिंचाई विभाग बाढ़ खंड के अधीक्षण अभियंता एसके सिंह ने कहा कि प्राकृतिक नाले के स्वरूप में छेड़छाड़ किया जाना नियम विरुद्ध है। ऐसा नहीं होना चाहिए ।
Submitted by Shivendra on Wed, 12/01/2021 - 11:37
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स्मार्ट सिटीज वर्ल्ड
इलेक्ट्रिक कार चार्जर स्टेशन
इलेक्ट्रिक गाड़ी में किसी तरह का कार्बन उत्सर्जन नहीं होता है। एक रिपोर्ट के अनुसार  एक डीजल या पेट्रोल गाड़ी की तुलना में एक इलेक्ट्रिक गाड़ी के सड़क पर चलने से लगभग 1.5 मिलियन ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी आती है। इस कमी को आप ऐसे समझ सकते हैं कि लंदन से बार्सिलोना की चार रिटर्न फ्लाइटों के उड़ने से इतने कार्बन का उत्सर्जन होता है। नीति आयोग की “India’s Electric Mobility Transformation रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2030 तक 70 फीसदी कॉमर्शियल गाड़ियां, 40 फीसदी बस, और 80 फीसदी तक दो पहिया और तीन पहिया वाहन इलेक्ट्रिक हो चुके होंगे। इससे CO2 उत्सर्जन में लगभग 846 मिलियन टन की कमी आएगी। वहीं इन इलेक्ट्रिक गाड़ियों के चलते लगभग 474 मिलियन टन तेल की बचत होगी जिसकी कीमत लगभग 207.33 बिलियन डॉलर होगी।
Submitted by Shivendra on Tue, 11/30/2021 - 11:30
Source:
राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन की कार्यकारिणी में पास हुआ प्रकृति केंद्रित विकास का प्रस्ताव
आंदोलन के राष्ट्रीय संगठन मंत्री बसवाराज पाटिल (बिरापुर) ने कहा कि भारत ही विश्व की प्राचीन सभ्यता और संस्कृति है। भारत ने विश्व के मानवता को कल्याण का मार्ग दिखाया है। आज जरूरत है अपनी प्राचीन परंपरा को सहेजते हुए विकास को ओर बढ़ने की। राष्ट्रीय कार्यकारी संयोजक सुरेंद्र सिंह विष्ट ने व्यवस्था परिवर्तन पर चर्चा करते हुए कहा कि रचनात्मक आंदोलन के जरिए व्यवस्था परिवर्तन की ओर बढ़ना चाहिए।

प्रयास

Submitted by Shivendra on Sat, 08/14/2021 - 17:50
महिला मंगल दल कार्यकर्ताओं के साथ उनके प्रेरणास्त्रोत मोहन चंद्र कांडपाल,फोटो:पानी बोओ
सीड’ आज 15 गांवों में बालवाड़ियां चला रही है। इनमें ढाई से 5 साल तक के बच्चों को न सिर्फ रोजाना 4 घंटे देखभाल की जाती है, बल्कि तरह-तरह के खेलों, बाल-कार्यों, भावगीतों इत्यादि के जरिए उनको पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबसे बढ़-चढ़कर अपनी मिट्टी से प्रेम करना सिखाया जाता है। ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ ‘मिलकर के हम काम करेंगे’ और ‘आज हिमालय जागेगा, दूर कुल्हाड़ा भागेगा।’ जैसे नारे पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधने का काम बखूबी करते रहे हैं। प्राइमरी में पढ़ रहे बच्चों के लिए शाम को गांव में संध्या केंद्र चलाते हैं, यहां बच्चे न सिर्फ अपने स्थानीय परिवेश के बारे में चर्चा करते हैं, बल्कि नन्हें हाथों से गांव के झरने, नौले-धारे आदि की साफ करने का, पॉलिथीन के बेकार थैली में पेड़-पौधे लगाने जैसा कार्य करके बड़ों को प्रेरणा दे रहे हैं। कांडे गांव की जानकी कांडपाल बताती हैं कि घर में पड़ी प्लास्टिक की थैली खाली होते ही बच्चों में उसे पाने की होड़ मची रहती है।

नोटिस बोर्ड

Submitted by Editorial Team on Thu, 10/07/2021 - 11:03
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चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

अभी‌ ‌तक‌ ‌हम‌ ‌अलग‌ ‌–अलग‌ ‌माध्यमों‌ ‌पर‌ ‌तरह‌ ‌–तरह‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌देखते‌ ‌आये‌ ‌हैं.‌ ‌क्या‌ ‌आपने‌ ‌कभी‌ ‌सोचा‌ ‌है‌ ‌कि‌ ‌जो‌ ‌सिनेमा‌ ‌हमें‌ ‌देखने‌ ‌को‌ ‌मिलता‌ ‌रहा‌ ‌है‌ ‌क्या‌ ‌उसके‌ ‌अलावा‌ ‌भी‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌कोई‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌है.‌ ‌और‌ ‌यह‌ ‌भी‌ ‌कि‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌से‌ ‌आपका‌ ‌भी‌ ‌रिश्ता‌ ‌बन‌ ‌सकता‌ ‌है। दोस्तों,‌ ‌प्रतिरोध‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌अभियान‌ ‌सम्भावना‌ ‌ट्रस्ट‌ ‌के‌ ‌साथ‌ ‌मिलकर‌ ‌आगामी‌ ‌18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर‌ ‌हिमांचल‌ ‌के‌ ‌पालमपुर‌ ‌शहर‌ ‌में‌ ‌चार‌ ‌दिनी‌ ‌वर्कशॉप‌ ‌आयोजित‌ ‌कर‌ ‌रहा‌ ‌है‌। ‌जिसके‌ ‌लिए‌ ‌हम‌ ‌आपको‌ ‌न्योता‌ ‌दे‌ ‌रहे‌ ‌हैं।

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
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एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।
Submitted by Shivendra on Sat, 07/17/2021 - 12:48
Source:
गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।

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खासम-खास

हिन्दुकुश हिमालय पर्वतमाला: दी थर्ड पोल

Submitted by Editorial Team on Thu, 05/13/2021 - 10:25

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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छोटे प्रयास भी बड़े नतीजे देते है

Submitted by Shivendra on Sat, 12/04/2021 - 12:32
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छोटे प्रयास भी बड़े नतीजे देते है
दरअसल,यह नाला खीरी रजवहे से शुरू होकर करीब दो दर्जन गांवों से होते हुए खपटिहा से चार किलोमीटर आगे लपरी नदी में जाकर मिलता है। इस नाले में दो दर्जन गांवों के बारिश का पानी बहता आ रहा है। अगर इस नाले को बंद कर दिया जाता है तो बरसात के दिनों में यहां से पानी के निकलने में दिक्कत होगी। जिसके कारण आसपास के इलाके के लोगों के सामने नई समस्या खड़ी हो सकती है। सिंचाई विभाग बाढ़ खंड के अधीक्षण अभियंता एसके सिंह ने कहा कि प्राकृतिक नाले के स्वरूप में छेड़छाड़ किया जाना नियम विरुद्ध है। ऐसा नहीं होना चाहिए ।

भारत में 2030 तक 70 फीसदी कॉमर्शियल गाड़ियां होंगी इलेक्ट्रिक

Submitted by Shivendra on Wed, 12/01/2021 - 11:37
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स्मार्ट सिटीज वर्ल्ड
इलेक्ट्रिक कार चार्जर स्टेशन
इलेक्ट्रिक गाड़ी में किसी तरह का कार्बन उत्सर्जन नहीं होता है। एक रिपोर्ट के अनुसार  एक डीजल या पेट्रोल गाड़ी की तुलना में एक इलेक्ट्रिक गाड़ी के सड़क पर चलने से लगभग 1.5 मिलियन ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी आती है। इस कमी को आप ऐसे समझ सकते हैं कि लंदन से बार्सिलोना की चार रिटर्न फ्लाइटों के उड़ने से इतने कार्बन का उत्सर्जन होता है। नीति आयोग की “India’s Electric Mobility Transformation रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2030 तक 70 फीसदी कॉमर्शियल गाड़ियां, 40 फीसदी बस, और 80 फीसदी तक दो पहिया और तीन पहिया वाहन इलेक्ट्रिक हो चुके होंगे। इससे CO2 उत्सर्जन में लगभग 846 मिलियन टन की कमी आएगी। वहीं इन इलेक्ट्रिक गाड़ियों के चलते लगभग 474 मिलियन टन तेल की बचत होगी जिसकी कीमत लगभग 207.33 बिलियन डॉलर होगी।

राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन की कार्यकारिणी में पास हुआ प्रकृति केंद्रित विकास का प्रस्ताव

Submitted by Shivendra on Tue, 11/30/2021 - 11:30
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राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन की कार्यकारिणी में पास हुआ प्रकृति केंद्रित विकास का प्रस्ताव
आंदोलन के राष्ट्रीय संगठन मंत्री बसवाराज पाटिल (बिरापुर) ने कहा कि भारत ही विश्व की प्राचीन सभ्यता और संस्कृति है। भारत ने विश्व के मानवता को कल्याण का मार्ग दिखाया है। आज जरूरत है अपनी प्राचीन परंपरा को सहेजते हुए विकास को ओर बढ़ने की। राष्ट्रीय कार्यकारी संयोजक सुरेंद्र सिंह विष्ट ने व्यवस्था परिवर्तन पर चर्चा करते हुए कहा कि रचनात्मक आंदोलन के जरिए व्यवस्था परिवर्तन की ओर बढ़ना चाहिए।

प्रयास

गांवों को जगाता एक शिक्षक

Submitted by Shivendra on Sat, 08/14/2021 - 17:50
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6 जुलाई 2003,जनसत्ता
महिला मंगल दल कार्यकर्ताओं के साथ उनके प्रेरणास्त्रोत मोहन चंद्र कांडपाल,फोटो:पानी बोओ
सीड’ आज 15 गांवों में बालवाड़ियां चला रही है। इनमें ढाई से 5 साल तक के बच्चों को न सिर्फ रोजाना 4 घंटे देखभाल की जाती है, बल्कि तरह-तरह के खेलों, बाल-कार्यों, भावगीतों इत्यादि के जरिए उनको पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबसे बढ़-चढ़कर अपनी मिट्टी से प्रेम करना सिखाया जाता है। ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ ‘मिलकर के हम काम करेंगे’ और ‘आज हिमालय जागेगा, दूर कुल्हाड़ा भागेगा।’ जैसे नारे पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधने का काम बखूबी करते रहे हैं। प्राइमरी में पढ़ रहे बच्चों के लिए शाम को गांव में संध्या केंद्र चलाते हैं, यहां बच्चे न सिर्फ अपने स्थानीय परिवेश के बारे में चर्चा करते हैं, बल्कि नन्हें हाथों से गांव के झरने, नौले-धारे आदि की साफ करने का, पॉलिथीन के बेकार थैली में पेड़-पौधे लगाने जैसा कार्य करके बड़ों को प्रेरणा दे रहे हैं। कांडे गांव की जानकी कांडपाल बताती हैं कि घर में पड़ी प्लास्टिक की थैली खाली होते ही बच्चों में उसे पाने की होड़ मची रहती है।

नोटिस बोर्ड

चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

Submitted by Editorial Team on Thu, 10/07/2021 - 11:03
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चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

अभी‌ ‌तक‌ ‌हम‌ ‌अलग‌ ‌–अलग‌ ‌माध्यमों‌ ‌पर‌ ‌तरह‌ ‌–तरह‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌देखते‌ ‌आये‌ ‌हैं.‌ ‌क्या‌ ‌आपने‌ ‌कभी‌ ‌सोचा‌ ‌है‌ ‌कि‌ ‌जो‌ ‌सिनेमा‌ ‌हमें‌ ‌देखने‌ ‌को‌ ‌मिलता‌ ‌रहा‌ ‌है‌ ‌क्या‌ ‌उसके‌ ‌अलावा‌ ‌भी‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌कोई‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌है.‌ ‌और‌ ‌यह‌ ‌भी‌ ‌कि‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌से‌ ‌आपका‌ ‌भी‌ ‌रिश्ता‌ ‌बन‌ ‌सकता‌ ‌है। दोस्तों,‌ ‌प्रतिरोध‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌अभियान‌ ‌सम्भावना‌ ‌ट्रस्ट‌ ‌के‌ ‌साथ‌ ‌मिलकर‌ ‌आगामी‌ ‌18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर‌ ‌हिमांचल‌ ‌के‌ ‌पालमपुर‌ ‌शहर‌ ‌में‌ ‌चार‌ ‌दिनी‌ ‌वर्कशॉप‌ ‌आयोजित‌ ‌कर‌ ‌रहा‌ ‌है‌। ‌जिसके‌ ‌लिए‌ ‌हम‌ ‌आपको‌ ‌न्योता‌ ‌दे‌ ‌रहे‌ ‌हैं।

एक्वा कांग्रेस के 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की महत्वपूर्ण जानकारियां

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
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Source
एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।

गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग का आयोजन 

Submitted by Shivendra on Sat, 07/17/2021 - 12:48
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गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।

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