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खासम-खास

समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

Content

धरती की कोख सोखने की तैयारी

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 15:10
भारत इस समय गंभीर जल संकट से जूझ रहा है।भारत इस समय गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। भारत इस समय गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। साफ पानी न मिलने के कारण हर साल दो लाख लोग जान गवां रहे हैं। देश के करीब 60 लाख लोग पानी की गंभीर किल्लत का सामना कर रहे हैं। वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि बढ़ती आबादी के कारण 2030 तक भारत में पानी की मांग उपलब्धता से दोगुनी हो जाएगी। 2030 के बाद ये संकट और भी ज्यादा गहरा सकता है। जिससे भारत की जीडीपी में 6 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन इन सभी समस्याओं के बीच उत्तर प्रदेश में पांच करोड़ यूकेलिप्टिस के पौधे लगाने का निर्णय धरती की कोख को सोखने की तैयारी करने के समान प्रतीत हो रहा है। जिससे पानी की भीषण कमी झेल रहे उत्तर प्रदेश में निकट भविष्य में पानी की और बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। जिसका नुकसान आसपास के इलाकों को भी उठाना पड़ेगा।

अब गंगा को बचाने की जिम्मेदारी हमारी है

Submitted by UrbanWater on Tue, 06/18/2019 - 14:48
Source
दैनिक जागरण, 13 जून 2019
50 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका केवल गंगा के जल पर निर्भर है।50 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका केवल गंगा के जल पर निर्भर है। 50 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका केवल गंगा के जल पर निर्भर है। इसमें भी 25 करोड़ लोग तो पूर्ण रूप से गंगा के जल पर आश्रित हैं। स्पष्ट है कि गंगा आस्था ही नहीं, आजीविका का भी स्रोत है। नदियां केवल जल का नहीं बल्कि जीवन का भी स्रोत होती है। विश्व की अनेक संस्कृतियों और सभ्यताओं का जन्म नदियों के तट पर ही हुआ है। नदियां संस्कृति की संरक्षक हैं और संवाहक भी हैं। नदियों ने मनुष्यों को जन्म तो नहीं, परंतु जीवन दिया है। वास्तव में जिस प्रकार मनुष्य को जीने का अधिकार है, उसी प्रकार हमारी नदियों को भी स्वच्छंद होकर अविरल एवं निर्मल रूप से प्रवाहित होने का अधिकार है। नदियों को जीवनदायिनी कहा जाता है, फिर भी लाखों-करोड़ों लीटर प्रदूषित जल इनमें प्रवाहित किया जाता है। आज नदियों में शौच करना, फूल और पूजन सामग्री डालना, उर्वरक कीटनाशक डालना आम बात हो गई है।

मातृशक्ति ने थामी गंगा रक्षा की कमान, होगा आंदोलन

Submitted by UrbanWater on Mon, 06/17/2019 - 11:31
मातृ सदन में स्वामी शिवानंद और ब्रम्हचारी आत्मबोधानंद।मातृ सदन में स्वामी शिवानंद और ब्रम्हचारी आत्मबोधानंद। गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए मातृसदन बीस वर्षों से संघर्षरत है। हरिद्वार की पवित्र भूमि पर गंगा की रक्षा के लिए मातृसदन के दो संत स्वामी निगमानंद और प्रख्यात वैज्ञानिक स्वामी ज्ञानस्परूप सानंद उर्फ प्रो. जीडी अग्रवाल अपने प्राणों की आहुति दे चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद भी गंगा के प्रति शासन और प्रशासन की उदासीनता कम नहीं हुई। विभिन्न योजनाओं में करोड़ों रुपये व्यय करने के बाद भी गंगा में प्रदूषण कम नहीं हुआ। केंद्र सरकार और नेशनल मिशन फाॅर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) द्वारा गंगा की रक्षा के लिए मातृसदन को दिए लिखित आश्वासन पर भी अभी तक अमल नहीं किया गया है। केंद्र सरकार और एनएमसीजी के इस रवैया से रुष्ठ होकर मातृसदन ने अब पहले से वृहद आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है और इस बार मातृसदन के आंदोलन को देशभर में फैलाते हुए मातृशक्ति मातृसदन के आंदोलन की बागडोर संभालेंगी तथा आंदोलन को धार देने का काम करेंगी।

प्रयास

पटना का ये जंगल हरित क्रांति का पर्याय बन रहा है

Submitted by UrbanWater on Sat, 06/15/2019 - 14:13
Source
वेब
तरुमित्र जंगल।तरुमित्र जंगल। पटना शहर के बीचों बीच दस एकड़ में फैला तरुमित्र जंगल बच्चों का खास दोस्त और शिक्षक बन चुका है। देश-विदेश के पांच हजार से अधिक स्कूल काॅलेज बतौर सदस्य इससे जुडे़ हुए हैं, जिनके हजारों छात्र भी तरुमित्र फोरम के सदस्य हैं। 1986 में पटना में तरुमित्र आश्रम की स्थापना हुई थी, जहां एक समृद्ध जंगल मौजूद है। 500 से अधिक दुर्लभ प्रजातियों के पेड़-पौधे इस जंगल की सुंदरता बढ़ाते हैं।

नोटिस बोर्ड

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
Source
दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

गंगा की जय, सरकार झुकी, मातृसदन के आत्मबोधानंद का अनशन विराम

Submitted by UrbanWater on Sat, 05/04/2019 - 17:50

गंगा अविरलता के लिए चल रहे आत्मबोधानंद के अनशन का फिलहाल विराम  गंगा अविरलता के लिए चल रहे आत्मबोधानंद के अनशन का फिलहाल विराम

गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए 194 दिनों से अनशन कर रहे हरिद्वार के मातृ सदन के आत्माबोधानंद ने नेशनल क्लीन मिशन फाॅर गंगा के निदेशक के लिखित आश्वासन के बाद अपने अनशन को विराम दे दिया है। हालांकि मातृ सदन ने ये भी कहा है कि लिखित आश्वासन के अनुरूप अगर काम नहीं हुआ तो मातृ सदन गंगा की अविरलता के लिए फिर से अनशन पर बैठेगा।

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समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
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कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

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धरती की कोख सोखने की तैयारी

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 15:10
भारत इस समय गंभीर जल संकट से जूझ रहा है।भारत इस समय गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। भारत इस समय गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। साफ पानी न मिलने के कारण हर साल दो लाख लोग जान गवां रहे हैं। देश के करीब 60 लाख लोग पानी की गंभीर किल्लत का सामना कर रहे हैं। वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि बढ़ती आबादी के कारण 2030 तक भारत में पानी की मांग उपलब्धता से दोगुनी हो जाएगी। 2030 के बाद ये संकट और भी ज्यादा गहरा सकता है। जिससे भारत की जीडीपी में 6 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन इन सभी समस्याओं के बीच उत्तर प्रदेश में पांच करोड़ यूकेलिप्टिस के पौधे लगाने का निर्णय धरती की कोख को सोखने की तैयारी करने के समान प्रतीत हो रहा है। जिससे पानी की भीषण कमी झेल रहे उत्तर प्रदेश में निकट भविष्य में पानी की और बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। जिसका नुकसान आसपास के इलाकों को भी उठाना पड़ेगा।

अब गंगा को बचाने की जिम्मेदारी हमारी है

Submitted by UrbanWater on Tue, 06/18/2019 - 14:48
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दैनिक जागरण, 13 जून 2019
50 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका केवल गंगा के जल पर निर्भर है।50 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका केवल गंगा के जल पर निर्भर है। 50 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका केवल गंगा के जल पर निर्भर है। इसमें भी 25 करोड़ लोग तो पूर्ण रूप से गंगा के जल पर आश्रित हैं। स्पष्ट है कि गंगा आस्था ही नहीं, आजीविका का भी स्रोत है। नदियां केवल जल का नहीं बल्कि जीवन का भी स्रोत होती है। विश्व की अनेक संस्कृतियों और सभ्यताओं का जन्म नदियों के तट पर ही हुआ है। नदियां संस्कृति की संरक्षक हैं और संवाहक भी हैं। नदियों ने मनुष्यों को जन्म तो नहीं, परंतु जीवन दिया है। वास्तव में जिस प्रकार मनुष्य को जीने का अधिकार है, उसी प्रकार हमारी नदियों को भी स्वच्छंद होकर अविरल एवं निर्मल रूप से प्रवाहित होने का अधिकार है। नदियों को जीवनदायिनी कहा जाता है, फिर भी लाखों-करोड़ों लीटर प्रदूषित जल इनमें प्रवाहित किया जाता है। आज नदियों में शौच करना, फूल और पूजन सामग्री डालना, उर्वरक कीटनाशक डालना आम बात हो गई है।

मातृशक्ति ने थामी गंगा रक्षा की कमान, होगा आंदोलन

Submitted by UrbanWater on Mon, 06/17/2019 - 11:31
मातृ सदन में स्वामी शिवानंद और ब्रम्हचारी आत्मबोधानंद।मातृ सदन में स्वामी शिवानंद और ब्रम्हचारी आत्मबोधानंद। गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए मातृसदन बीस वर्षों से संघर्षरत है। हरिद्वार की पवित्र भूमि पर गंगा की रक्षा के लिए मातृसदन के दो संत स्वामी निगमानंद और प्रख्यात वैज्ञानिक स्वामी ज्ञानस्परूप सानंद उर्फ प्रो. जीडी अग्रवाल अपने प्राणों की आहुति दे चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद भी गंगा के प्रति शासन और प्रशासन की उदासीनता कम नहीं हुई। विभिन्न योजनाओं में करोड़ों रुपये व्यय करने के बाद भी गंगा में प्रदूषण कम नहीं हुआ। केंद्र सरकार और नेशनल मिशन फाॅर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) द्वारा गंगा की रक्षा के लिए मातृसदन को दिए लिखित आश्वासन पर भी अभी तक अमल नहीं किया गया है। केंद्र सरकार और एनएमसीजी के इस रवैया से रुष्ठ होकर मातृसदन ने अब पहले से वृहद आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है और इस बार मातृसदन के आंदोलन को देशभर में फैलाते हुए मातृशक्ति मातृसदन के आंदोलन की बागडोर संभालेंगी तथा आंदोलन को धार देने का काम करेंगी।

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पटना का ये जंगल हरित क्रांति का पर्याय बन रहा है

Submitted by UrbanWater on Sat, 06/15/2019 - 14:13
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तरुमित्र जंगल।तरुमित्र जंगल। पटना शहर के बीचों बीच दस एकड़ में फैला तरुमित्र जंगल बच्चों का खास दोस्त और शिक्षक बन चुका है। देश-विदेश के पांच हजार से अधिक स्कूल काॅलेज बतौर सदस्य इससे जुडे़ हुए हैं, जिनके हजारों छात्र भी तरुमित्र फोरम के सदस्य हैं। 1986 में पटना में तरुमित्र आश्रम की स्थापना हुई थी, जहां एक समृद्ध जंगल मौजूद है। 500 से अधिक दुर्लभ प्रजातियों के पेड़-पौधे इस जंगल की सुंदरता बढ़ाते हैं।

नोटिस बोर्ड

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
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दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

गंगा की जय, सरकार झुकी, मातृसदन के आत्मबोधानंद का अनशन विराम

Submitted by UrbanWater on Sat, 05/04/2019 - 17:50

गंगा अविरलता के लिए चल रहे आत्मबोधानंद के अनशन का फिलहाल विराम  गंगा अविरलता के लिए चल रहे आत्मबोधानंद के अनशन का फिलहाल विराम

गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए 194 दिनों से अनशन कर रहे हरिद्वार के मातृ सदन के आत्माबोधानंद ने नेशनल क्लीन मिशन फाॅर गंगा के निदेशक के लिखित आश्वासन के बाद अपने अनशन को विराम दे दिया है। हालांकि मातृ सदन ने ये भी कहा है कि लिखित आश्वासन के अनुरूप अगर काम नहीं हुआ तो मातृ सदन गंगा की अविरलता के लिए फिर से अनशन पर बैठेगा।

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