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खासम-खास

Submitted by HindiWater on Tue, 03/23/2021 - 16:43
सामाजिक स्वीकार्यता की कसौटी पर बांध
भारतीय समाज लगभग 6000 साल पहले से पानी से दो मोर्चों पर जूझ रहा है। पहला मोर्चा है बाढ़ और दूसरा मोर्चा है पानी की बारहमासी निरापद आपूर्ति। सभी जानते हैं कि, बाढ, अस्थायी आपदा है इसलिए भारतीय समाज ने बसाहटों को, नदियों सुरक्षित दूरी पर बसाया। दूसरे मोर्चे पर सफलता हासिल करने के लिए उन कुदरती लक्षणों को समझने का प्रयास किया जो पानी की सर्वकालिक एवं सर्वभौमिक उपलब्धता सुनिश्चित करते है। लगता है, यही जद्दोजहद जल संरचनाओं के विकास का आधार बनी होगी।

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Submitted by HindiWater on Sun, 04/18/2021 - 15:40
Source:
समुद्र से जुड़ी कुछ दिलचस्प जानकारियां
मुद्रक जन्म धरती की सतह में स्तिथ  पानी से भरे विशाल गढ्डे से हुआ दरअसल जब पृथ्वी  का जन्म हुआ तो वह एक आग का गोला था पृथ्वी जब ठंडी होने लगी तो उसके चारों ओर गैस के बादलों का निर्माण हुआ ठंड होने से ये बादल काफी भर गए और उनसे लगातार बारिश होने लगी और धरती ठंडी होने पर वो विशाल गढ्डे भरने लगे और फिर निर्माण हुआ बड़े बड़े समुद्रों और महासागर का। 
Submitted by HindiWater on Fri, 04/16/2021 - 15:10
Source:
सुरंगों का गुरुकुल
अच्युथ भट के परिवार ने अपनी जमीन में ही 20 सुरंगे बना रखी हैं, जिनमें से 14 सुरंगें उनकी जरूरत को पूरा कर रही हैं। इनसे उन्हें केवल सिंचाई के लिए ही नहीं बल्कि पीने और रोजमर्रा के घरेलू कामों के लिए भी पर्याप्त मात्रा में पानी मिल जाता है। इतना ही नहीं उन्हें पानी लेने के लिए कोई बिजली या एक पैसा तक खर्च नहीं करना पड़ता क्योंकि वहां पानी को बहने के लिए बिजली-पानी नहीं गुरुत्वाकर्षण चाहिए। है न आश्चर्यजनक! कि पानी अपने आप गुरुत्वाकर्षण से बहता है। कई साल पहले इस परिवार को 15 एकड़ का बंजर पहाड़ी ढाल मिला जहां आप भी 5 एकड़ पर नारियल और .... के पेड़ लहलहा रहे हैं, यही बंजर पहाड़ी ढाल आज सुरंगों से भरा है। दरअसल यहां की मिट्टी और ढाल की वजह से कुंए जैसी कोई भी व्यवस्था पानी के लिए नहीं बनाई जा सकती। अच्युथ भट के बेटे काविन्दा भट ने बड़े ही उत्साह से कहा कि अगर कभी पानी की कमी महसूस होगी तो हम और एक नई सुरंग बना लेंगे।
Submitted by HindiWater on Thu, 04/15/2021 - 17:42
Source:
बिकते नही है प्राकृतिक संसाधन
पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से प्रभावित है, जहां एक तरफ बाढ़ का खतरा हमेशा बना रहता है तो वही दूसरी तरफ सूखा पड़ने से भी पानी की जबरदस्त किल्लत होती है   इस प्रकार के प्राकृतिक आपदाओं के लिए कहीं न कहीं हम सभी जिम्मेदार है। एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन, प्रकृति में संतुलन बनाए रखने वाले फंगस के काम करने के तरीकों पर प्रभाव डाल रहा है। एक अन्य रिपोर्ट पौधों के 350 गुना तेजी से विलुप्त होने के बारे में सचेत कर रही है। वहीं इन सब से समुद्र भी अछूता नहीं है वहां भी कुछ न कुछ उथल-पुथल जारी है।

प्रयास

Submitted by HindiWater on Mon, 02/15/2021 - 16:21
उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा
उत्तराखंड में 2013 में आई आपदा और फिर 7 फरवरी को चमोली के तपोवन में आई जलप्रलय की घटनाएँ पूरी दुनिया को बड़े बांधों के निर्माण और पर्यावरण असंतुलन से होने वालेदुष्परिणामों से आगाह कर रही है। यह बड़े बांध स्थानीय जनता को न तो सिंचाई और न ही पेयजल की पूर्ति करते हैं बल्कि इसके विपरीत प्राकृतिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों के लिएगंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं। बड़े बांधों में बहुत अधिक जलराशि एकत्रित होने से पहाड़ों परअत्यधिक दबाव पड़ता है। इसके निर्माण के दौरान भारी मशीनरी और विस्फोटकों आदि काप्रयोग होता है, जो पहाड़ों की नींव को भी हिला देते हैं, जिससे पहाड़ों में भूस्खलन, भूकंप आदिकी संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। चूँकि बड़े बांधों को भरने के लिए नदियों का प्रवाह रोकना पड़ताहै, इसलिए नदी के पानी से जो नैसर्गिक भूमिगत जलसंचय होता है, उसमें भी व्यवधान पड़ता है। 

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Thu, 01/21/2021 - 15:14
Source:
वेटलैंड्स डे इंटरनेशनल साउथ एशिया
विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल
रामसर कन्वेन्शन में वेटलैंड्स को शामिल किए जाने पर  हर वर्ष की तरह इस बार भी 02 फरवरी 2021 को भारत सहित पूरे विश्व मे वेटलैंड्स डे मनाया जाएगा।  इस दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को वेटलैंड्स डे के प्रति जागरूक करना है। इस वर्ष विश्व वेटलैंड्स दिवस का विषय "वेटलैंड्स और जल " (Wetlands and water) है।
Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Source:
अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 16:26
Source:
Aqua Foundation
एक्वा फाउंडेशन
सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं, नवीन प्रौद्योगिकियों और अत्याधुनिक अनुसंधान में नवीनतम रुझानों के बारे में जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। आपसे निवेदन है कि अपनी संस्था से अधिक से अधिक प्रतिभागियों का नामांकन करे (online Register as delegate) कार्यक्रम का ब्रोशर यहां डाउनलोड करें.  अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट देखें  World Aqua Congress.  तारीख : अक्टूबर 29- 30, 2020 समयः प्रातः 9:00 बजे से सांय 6ः00 बजे 

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खासम-खास

सामाजिक स्वीकार्यता की कसौटी पर बांध

Submitted by HindiWater on Tue, 03/23/2021 - 16:43
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
samajik-svikaryata-ki-kasauti-par-bandh
सामाजिक स्वीकार्यता की कसौटी पर बांध
भारतीय समाज लगभग 6000 साल पहले से पानी से दो मोर्चों पर जूझ रहा है। पहला मोर्चा है बाढ़ और दूसरा मोर्चा है पानी की बारहमासी निरापद आपूर्ति। सभी जानते हैं कि, बाढ, अस्थायी आपदा है इसलिए भारतीय समाज ने बसाहटों को, नदियों सुरक्षित दूरी पर बसाया। दूसरे मोर्चे पर सफलता हासिल करने के लिए उन कुदरती लक्षणों को समझने का प्रयास किया जो पानी की सर्वकालिक एवं सर्वभौमिक उपलब्धता सुनिश्चित करते है। लगता है, यही जद्दोजहद जल संरचनाओं के विकास का आधार बनी होगी।

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समुद्र से जुड़े ज्ञान से भरपूर रोचक तथ्य

Submitted by HindiWater on Sun, 04/18/2021 - 15:40
samudra-se-jude-gyan-se-bharpur-rochak-tathy
समुद्र से जुड़ी कुछ दिलचस्प जानकारियां
मुद्रक जन्म धरती की सतह में स्तिथ  पानी से भरे विशाल गढ्डे से हुआ दरअसल जब पृथ्वी  का जन्म हुआ तो वह एक आग का गोला था पृथ्वी जब ठंडी होने लगी तो उसके चारों ओर गैस के बादलों का निर्माण हुआ ठंड होने से ये बादल काफी भर गए और उनसे लगातार बारिश होने लगी और धरती ठंडी होने पर वो विशाल गढ्डे भरने लगे और फिर निर्माण हुआ बड़े बड़े समुद्रों और महासागर का। 

सुरंगों का गुरुकुल

Submitted by HindiWater on Fri, 04/16/2021 - 15:10
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सुरंगों का गुरुकुल
अच्युथ भट के परिवार ने अपनी जमीन में ही 20 सुरंगे बना रखी हैं, जिनमें से 14 सुरंगें उनकी जरूरत को पूरा कर रही हैं। इनसे उन्हें केवल सिंचाई के लिए ही नहीं बल्कि पीने और रोजमर्रा के घरेलू कामों के लिए भी पर्याप्त मात्रा में पानी मिल जाता है। इतना ही नहीं उन्हें पानी लेने के लिए कोई बिजली या एक पैसा तक खर्च नहीं करना पड़ता क्योंकि वहां पानी को बहने के लिए बिजली-पानी नहीं गुरुत्वाकर्षण चाहिए। है न आश्चर्यजनक! कि पानी अपने आप गुरुत्वाकर्षण से बहता है। कई साल पहले इस परिवार को 15 एकड़ का बंजर पहाड़ी ढाल मिला जहां आप भी 5 एकड़ पर नारियल और .... के पेड़ लहलहा रहे हैं, यही बंजर पहाड़ी ढाल आज सुरंगों से भरा है। दरअसल यहां की मिट्टी और ढाल की वजह से कुंए जैसी कोई भी व्यवस्था पानी के लिए नहीं बनाई जा सकती। अच्युथ भट के बेटे काविन्दा भट ने बड़े ही उत्साह से कहा कि अगर कभी पानी की कमी महसूस होगी तो हम और एक नई सुरंग बना लेंगे।

बिकते नही है प्राकृतिक संसाधन

Submitted by HindiWater on Thu, 04/15/2021 - 17:42
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बिकते नही है प्राकृतिक संसाधन
पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से प्रभावित है, जहां एक तरफ बाढ़ का खतरा हमेशा बना रहता है तो वही दूसरी तरफ सूखा पड़ने से भी पानी की जबरदस्त किल्लत होती है   इस प्रकार के प्राकृतिक आपदाओं के लिए कहीं न कहीं हम सभी जिम्मेदार है। एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन, प्रकृति में संतुलन बनाए रखने वाले फंगस के काम करने के तरीकों पर प्रभाव डाल रहा है। एक अन्य रिपोर्ट पौधों के 350 गुना तेजी से विलुप्त होने के बारे में सचेत कर रही है। वहीं इन सब से समुद्र भी अछूता नहीं है वहां भी कुछ न कुछ उथल-पुथल जारी है।

प्रयास

उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा

Submitted by HindiWater on Mon, 02/15/2021 - 16:21
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Source
चरखा फीचर
उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा
उत्तराखंड में 2013 में आई आपदा और फिर 7 फरवरी को चमोली के तपोवन में आई जलप्रलय की घटनाएँ पूरी दुनिया को बड़े बांधों के निर्माण और पर्यावरण असंतुलन से होने वालेदुष्परिणामों से आगाह कर रही है। यह बड़े बांध स्थानीय जनता को न तो सिंचाई और न ही पेयजल की पूर्ति करते हैं बल्कि इसके विपरीत प्राकृतिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों के लिएगंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं। बड़े बांधों में बहुत अधिक जलराशि एकत्रित होने से पहाड़ों परअत्यधिक दबाव पड़ता है। इसके निर्माण के दौरान भारी मशीनरी और विस्फोटकों आदि काप्रयोग होता है, जो पहाड़ों की नींव को भी हिला देते हैं, जिससे पहाड़ों में भूस्खलन, भूकंप आदिकी संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। चूँकि बड़े बांधों को भरने के लिए नदियों का प्रवाह रोकना पड़ताहै, इसलिए नदी के पानी से जो नैसर्गिक भूमिगत जलसंचय होता है, उसमें भी व्यवधान पड़ता है। 

नोटिस बोर्ड

विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल

Submitted by HindiWater on Thu, 01/21/2021 - 15:14
vishva-vetlands-divas-2021:-vetlands-aur-jal
Source
वेटलैंड्स डे इंटरनेशनल साउथ एशिया
विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल
रामसर कन्वेन्शन में वेटलैंड्स को शामिल किए जाने पर  हर वर्ष की तरह इस बार भी 02 फरवरी 2021 को भारत सहित पूरे विश्व मे वेटलैंड्स डे मनाया जाएगा।  इस दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को वेटलैंड्स डे के प्रति जागरूक करना है। इस वर्ष विश्व वेटलैंड्स दिवस का विषय "वेटलैंड्स और जल " (Wetlands and water) है।

हिंदी पत्रकारों के लिए सीएसई-एएईटीआई की ओर से ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स

Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Author
इंडिया वाटर पोर्टल (हिंदी)
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अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

एक्वा फाउंडेशन की XIV वर्ल्ड एक्वा कांग्रेस

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 16:26
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Source
Aqua Foundation
एक्वा फाउंडेशन
सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं, नवीन प्रौद्योगिकियों और अत्याधुनिक अनुसंधान में नवीनतम रुझानों के बारे में जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। आपसे निवेदन है कि अपनी संस्था से अधिक से अधिक प्रतिभागियों का नामांकन करे (online Register as delegate) कार्यक्रम का ब्रोशर यहां डाउनलोड करें.  अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट देखें  World Aqua Congress.  तारीख : अक्टूबर 29- 30, 2020 समयः प्रातः 9:00 बजे से सांय 6ः00 बजे 

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