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खासम-खास

Submitted by UrbanWater on Mon, 07/20/2020 - 08:26
अविरल नदी, फोटो : needpix.com
मनुष्य की विकास यात्रा का इतिहास बताता है कि मानव सभ्यता का विकास नदियों के किनारे हुआ है। यह विकास चाहे भारत में हुआ हो या मिश्र में, या अन्य और किसी जगह, या बिहार में, सब जगह उसका आधार नदी और उसका कछार ही रहा है। मानव सभ्यता का यह विकास, नदी और मनुष्य के अन्तरंग सम्बन्ध का जीता-जागता प्रमाण है लेकिन यह सम्बन्ध नदी और मनुष्य के बीच क्यों बना और क्यों विकास की धारा नदी के किनारे ही प्रवाहित हुई, पर बहुत ही कम लोगों ने विचार किया है। उससे जुडा साहित्य भी सहजता से उपलब्ध नही है। आइए उस संभावना को समझने का प्रयास करें।

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Submitted by UrbanWater on Tue, 08/04/2020 - 13:17
Source:
दरभंगा में टूटे तटबंध की मरम्मत में जुटे स्थानीय लोग
मोहम्मदीन किशनगंज के बहादुरगंज ब्लॉक के सतमेढ़ी गांव में रहते हैं। इस गांव के 40 घर नदी में समा चुके हैं और जो घर बच गए, उनमें घुटना भर पानी भरा हुआ है। लोग माल-असबाब लेकर सूखे स्थानों और रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं।  स्थानीय जन प्रतिनिधि शाहबीर आलम ने कहा कि घर ध्वस्त होने के बाद वह प्रशासन के पास गए थे, तो प्रशासन ने सर्वे किया और मदद के नाम पर एक पॉलीथिन, चूड़ा, चना और चीनी दे दिया। इसके बाद से प्रशासन की तरफ से कोई भी इनकी हालत देखने नहीं आया।
Submitted by HindiWater on Tue, 08/04/2020 - 12:45
Source:
पहाड़ को जल संकट से उबारने में जुटे चंदन
उत्तराखंड़ का भौगोलिक और पौराणिक महत्व किसी भी अन्य क्षेत्र की अपेक्षा कईं ज्यादा अलौकिक और वृहद है। उत्तराखंड़ के संदर्भ में कहा जाता है कि ‘पहाड़ की जवानी पहाड़ के किसी काम नहीं आती। वो तो रोजगार की तलाश में मैदानों में चली जाती है। पहाड़ों पर तो बचते हैं, बूढ़े मां-बाप और बच्चे।’’ जो लोग बचे हैं, वें चौड़ी पत्ती वाले जंगलों के कम होने से हर साल जल संकट और जंगल की आग तथा प्राकृतिक आपदाओं का सामना करते हैं, लेकिन नैनीताल के किसान ‘चंदन नयाल’ की जवानी न केवल पहाड़ के काम आ रही है, बल्कि वे दूसरों के लिए भी प्ररेणास्रोत बन गए हैं। पर्यावरण संरक्षण की तरफ कदम बढ़ाते हुए उन्होंने नौकरी छोड़ 40 हजार से ज्यादा पेड़ लगाए व सैंकड़ों चाल-खाल और खंतियों का निर्माण किया है। पेश है चंदन सिंह नयाल से बातचीत के कुछ अंश -
Submitted by HindiWater on Sun, 08/02/2020 - 13:50
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SANDRP
भारत में जून-जुलाई 2020 में राज्यवार बारिश, फोटो - Zee News
दक्षिण पश्चिम मानसून 2020 की पहली छमाही के दौरान भारत में 453.3 मिमी वर्षा हुई थी, जो सामान्य अवधि में 452.2 मिमी की सामान्य वर्षा से सिर्फ 1.1 मिमी अधिक थी। जुलाई में सामान्य वर्षा 285.3 मिमी होती है, लेकिन इस बार 9.9 प्रतिशत कम, यानि 257.1 मिमी वर्षा दर्ज की गई।

प्रयास

Submitted by HindiWater on Tue, 07/28/2020 - 21:11
डाकुओं को भी बनाया पर्यावरण प्रेमी, लगाए 26 लाख पौधे
वैसे तो पौधारोपण हम सभी करते हैं, लेकिन कई लोग ऐसे भी हैं, जिनके जीवन का उद्देश्य ही पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण है। ऐसे ही एक व्यक्ति हैं, विष्णु लांबा, जिनकी प्रेरणा से अभी तक 50 लाख पेड़ लगाए जा चुके हैं। साथ ही वे नदियों को खनन मुक्त कराने और पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य कर रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपने जुनून के चलते ही उन्होंने सुख्यात डाकुओं को भी पर्यावरण की मुहिम से जोड़ दिया। पर्यावरण को बचाने के लिए उन्होंने अपना घरबार भी छोड़ दिया। पर्यावरण के प्रति उनके जुनून को देखते हुए दुनिया अब उन्हें ट्रीमैन ऑफ इंडिया के नाम से जानती है। पेश है उनसे बातचीत के कुछ अंश।

नोटिस बोर्ड

Submitted by UrbanWater on Tue, 07/07/2020 - 17:15
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हेल्पलाइन नंबर
संजय झा ने कहा,ट्विटर पर @WRD_Bihar (जल संसाधान विभाग) को टैग करते हुए #HelloWRD के साथ लोग तटबंधों की जानकारी दे सकते हैं। सूचना मिलने पर विभाग तुरंत संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों को सूचित करेगा और त्वरित कार्रवाई की जाएगी।” “ट्विटर के अलावा टोल फ्री नं. 18003456145 पर कॉल कर भी जानकारी साझा की जा सकती है। ये नंबर 24X7 चालू है। इसके साथ ही एक ऐप भी लाया जा रहा है। इस ऐप के जरिए भी जानकारियां दी जा सकती हैं।”
Submitted by HindiWater on Tue, 05/19/2020 - 15:04
Source:
वेबिनारः कोरोनार संकट और लाॅकडाउन हिमालय के परिप्रेक्ष में 
कोरोना संकट और लॉकडाउन को हिमालय क्षेत्र के परिप्रेक्ष में समझने के लिए 21 मई, गुरुवार 4 बजे हमारे पेज Endangered Himalaya में इतिहासकार डॉ. शेखर पाठक के साथ लाइव बातचीत में जुड़ें।  आप Zoom में https://bit.ly/2zmjhHs लिंक में पंजीकरण करके भी जुड़ सकते हैं। इसका आयोजन हिम धारा और रिवाइटललाइज़िग रेनफेड एग्रीकल्चर द्वारा किया जा रहा है।
Submitted by HindiWater on Tue, 05/19/2020 - 14:52
Source:
‘‘वाॅश फाॅर हेल्थी होम्स-भारत’’ पर वेबिनार
‘‘वाॅश फाॅर हेल्थी होम्स-भारत’’ विषय पर सहगल फाउंडेशन और सीएडब्ल्यूएसटी ऑनलाइन वर्कशाप का आयोजन करने जा रहा है। कार्यशाला का उद्देश्य वाॅश के प्रति लोगों को जागरुक करना और प्रेरित करना है। ये वेबिनार निन्मलिखित विषयों से संबंधित रहेगा - 

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खासम-खास

नदी चेतना यात्रा : समाज की प्रजातांत्रिक शक्ति और नदी के प्राकृतिक संसाधनों की बहाली 

Submitted by UrbanWater on Mon, 07/20/2020 - 08:26
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
nadi-chetna-yatra
अविरल नदी, फोटो : needpix.com
मनुष्य की विकास यात्रा का इतिहास बताता है कि मानव सभ्यता का विकास नदियों के किनारे हुआ है। यह विकास चाहे भारत में हुआ हो या मिश्र में, या अन्य और किसी जगह, या बिहार में, सब जगह उसका आधार नदी और उसका कछार ही रहा है। मानव सभ्यता का यह विकास, नदी और मनुष्य के अन्तरंग सम्बन्ध का जीता-जागता प्रमाण है लेकिन यह सम्बन्ध नदी और मनुष्य के बीच क्यों बना और क्यों विकास की धारा नदी के किनारे ही प्रवाहित हुई, पर बहुत ही कम लोगों ने विचार किया है। उससे जुडा साहित्य भी सहजता से उपलब्ध नही है। आइए उस संभावना को समझने का प्रयास करें।

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बिहार बाढ़: ’15 दिन पहले ढाई किलो चूड़ा दिया, उसी पर जिंदा हैं’

Submitted by UrbanWater on Tue, 08/04/2020 - 13:17
Author
उमेश कुमार राय
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दरभंगा में टूटे तटबंध की मरम्मत में जुटे स्थानीय लोग
मोहम्मदीन किशनगंज के बहादुरगंज ब्लॉक के सतमेढ़ी गांव में रहते हैं। इस गांव के 40 घर नदी में समा चुके हैं और जो घर बच गए, उनमें घुटना भर पानी भरा हुआ है। लोग माल-असबाब लेकर सूखे स्थानों और रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं।  स्थानीय जन प्रतिनिधि शाहबीर आलम ने कहा कि घर ध्वस्त होने के बाद वह प्रशासन के पास गए थे, तो प्रशासन ने सर्वे किया और मदद के नाम पर एक पॉलीथिन, चूड़ा, चना और चीनी दे दिया। इसके बाद से प्रशासन की तरफ से कोई भी इनकी हालत देखने नहीं आया।

पहाड़ को जल संकट से उबारने में जुटे चंदन

Submitted by HindiWater on Tue, 08/04/2020 - 12:45
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पहाड़ को जल संकट से उबारने में जुटे चंदन
उत्तराखंड़ का भौगोलिक और पौराणिक महत्व किसी भी अन्य क्षेत्र की अपेक्षा कईं ज्यादा अलौकिक और वृहद है। उत्तराखंड़ के संदर्भ में कहा जाता है कि ‘पहाड़ की जवानी पहाड़ के किसी काम नहीं आती। वो तो रोजगार की तलाश में मैदानों में चली जाती है। पहाड़ों पर तो बचते हैं, बूढ़े मां-बाप और बच्चे।’’ जो लोग बचे हैं, वें चौड़ी पत्ती वाले जंगलों के कम होने से हर साल जल संकट और जंगल की आग तथा प्राकृतिक आपदाओं का सामना करते हैं, लेकिन नैनीताल के किसान ‘चंदन नयाल’ की जवानी न केवल पहाड़ के काम आ रही है, बल्कि वे दूसरों के लिए भी प्ररेणास्रोत बन गए हैं। पर्यावरण संरक्षण की तरफ कदम बढ़ाते हुए उन्होंने नौकरी छोड़ 40 हजार से ज्यादा पेड़ लगाए व सैंकड़ों चाल-खाल और खंतियों का निर्माण किया है। पेश है चंदन सिंह नयाल से बातचीत के कुछ अंश -

आंकड़ें: भारत में जून-जुलाई 2020 में राज्यवार बारिश

Submitted by HindiWater on Sun, 08/02/2020 - 13:50
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Source
SANDRP
भारत में जून-जुलाई 2020 में राज्यवार बारिश, फोटो - Zee News
दक्षिण पश्चिम मानसून 2020 की पहली छमाही के दौरान भारत में 453.3 मिमी वर्षा हुई थी, जो सामान्य अवधि में 452.2 मिमी की सामान्य वर्षा से सिर्फ 1.1 मिमी अधिक थी। जुलाई में सामान्य वर्षा 285.3 मिमी होती है, लेकिन इस बार 9.9 प्रतिशत कम, यानि 257.1 मिमी वर्षा दर्ज की गई।

प्रयास

डाकुओं को भी बनाया पर्यावरण प्रेमी, लगाए 26 लाख पौधे

Submitted by HindiWater on Tue, 07/28/2020 - 21:11
treeman-of-india-vishnu-lamba-rajasthan
डाकुओं को भी बनाया पर्यावरण प्रेमी, लगाए 26 लाख पौधे
वैसे तो पौधारोपण हम सभी करते हैं, लेकिन कई लोग ऐसे भी हैं, जिनके जीवन का उद्देश्य ही पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण है। ऐसे ही एक व्यक्ति हैं, विष्णु लांबा, जिनकी प्रेरणा से अभी तक 50 लाख पेड़ लगाए जा चुके हैं। साथ ही वे नदियों को खनन मुक्त कराने और पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य कर रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपने जुनून के चलते ही उन्होंने सुख्यात डाकुओं को भी पर्यावरण की मुहिम से जोड़ दिया। पर्यावरण को बचाने के लिए उन्होंने अपना घरबार भी छोड़ दिया। पर्यावरण के प्रति उनके जुनून को देखते हुए दुनिया अब उन्हें ट्रीमैन ऑफ इंडिया के नाम से जानती है। पेश है उनसे बातचीत के कुछ अंश।

नोटिस बोर्ड

बिहार में बाढ़: आपके इलाके में तटबंध में दरार है तो ऐसे दीजिए जानकारी 

Submitted by UrbanWater on Tue, 07/07/2020 - 17:15
Author
उमेश कुमार राय
bihar-badh:-aapke-ilake-mein-tatabandh-mein-darar-hai-dijie-janakari
हेल्पलाइन नंबर
संजय झा ने कहा,ट्विटर पर @WRD_Bihar (जल संसाधान विभाग) को टैग करते हुए #HelloWRD के साथ लोग तटबंधों की जानकारी दे सकते हैं। सूचना मिलने पर विभाग तुरंत संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों को सूचित करेगा और त्वरित कार्रवाई की जाएगी।” “ट्विटर के अलावा टोल फ्री नं. 18003456145 पर कॉल कर भी जानकारी साझा की जा सकती है। ये नंबर 24X7 चालू है। इसके साथ ही एक ऐप भी लाया जा रहा है। इस ऐप के जरिए भी जानकारियां दी जा सकती हैं।”

वेबिनारः कोरोना संकट और लाॅकडाउन हिमालय के परिप्रेक्ष में 

Submitted by HindiWater on Tue, 05/19/2020 - 15:04
corona-and-lockdown-in-context-of-himalayas
वेबिनारः कोरोनार संकट और लाॅकडाउन हिमालय के परिप्रेक्ष में 
कोरोना संकट और लॉकडाउन को हिमालय क्षेत्र के परिप्रेक्ष में समझने के लिए 21 मई, गुरुवार 4 बजे हमारे पेज Endangered Himalaya में इतिहासकार डॉ. शेखर पाठक के साथ लाइव बातचीत में जुड़ें।  आप Zoom में https://bit.ly/2zmjhHs लिंक में पंजीकरण करके भी जुड़ सकते हैं। इसका आयोजन हिम धारा और रिवाइटललाइज़िग रेनफेड एग्रीकल्चर द्वारा किया जा रहा है।

‘‘वाॅश फाॅर हेल्थी होम्स-भारत’’ पर वेबिनार

Submitted by HindiWater on Tue, 05/19/2020 - 14:52
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‘‘वाॅश फाॅर हेल्थी होम्स-भारत’’ पर वेबिनार
‘‘वाॅश फाॅर हेल्थी होम्स-भारत’’ विषय पर सहगल फाउंडेशन और सीएडब्ल्यूएसटी ऑनलाइन वर्कशाप का आयोजन करने जा रहा है। कार्यशाला का उद्देश्य वाॅश के प्रति लोगों को जागरुक करना और प्रेरित करना है। ये वेबिनार निन्मलिखित विषयों से संबंधित रहेगा - 

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