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खासम-खास

Submitted by HindiWater on Mon, 01/13/2020 - 22:17
नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह की बहाली (अर्थात सदा नीरा नदियाँ)
भारत की लगभग सभी नदियों का मानसूनी प्रवाह लगभग अप्रभावित है, पर उनके गैर-मानसूनी प्रवाह में कमी आ रही है। अर्थात समस्या केवल नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह के घटने की ही है। गैर-मानसूनी प्रवाह के घटने के कारण छोटी तथा मंझौली नदियाँ मौसमी बनकर रह गई हैं। यह असर व्यापक है।

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Submitted by HindiWater on Fri, 11/29/2019 - 12:14
Source:
अमर उजाला, 29 नवमन्बर, 2019
पहाड़ी उत्पादों से दिखाई आजीविका की राह
पहाड़ी अनाज से तैयार विभिन्न प्रकार के उत्पाद जैसे- चौलाई व झंगोरे के लड्डू व मंडुवे के बिस्कुट से लेकर अन्य उत्पादों को आजीविका के रूप में अपनाकर पहाड़ की महिलाओं ने करीब 500 करोड़ का कारोबार खडा कर दिया है। महिलाओं ने गाँव में ही आजीविका के लिए कदम आगे बढ़ाए हैं। घर से लेकर खेतीबाड़ी के काम काज के साथ इन महिलाओं को गाँव में ही अच्छी आमदनी हो रही है। पहाड़ी अनाजों से विभिन्न उत्पाद बनाना आजीविका का सबसे बड़ा साधन बन सकता है।
Submitted by HindiWater on Fri, 11/29/2019 - 11:19
Source:
दैनिक जागरण, 29 नवम्बर, 2019
अल्कोहल के अणु घटा सकते हैं प्रदूषण

वायु प्रदूषण वर्तमान में सबसे बड़ी वैश्विक समस्याओं में से एक है। दुनियाभर के वैज्ञानिक इससे निपटने के लिए रास्ते तलाश रहे हैं। इसी दिशा में अमरिका शोधकर्ताओं की उम्मीद एक किरण दिखाई दी है। एक अध्ययन के आधार पर उन्होंने दावा किया है कि वातावरण में प्रचुर मात्रा में मौजूद अल्कोहल के अणु प्रदूषण फैलाने वाले उन खतर

Submitted by HindiWater on Thu, 11/28/2019 - 12:02
Source:
नैनीताल एक धरोहर
ग्रीष्मकालीन राजधानी
1858 के अन्त तक अंग्रेजों ने देशी राज-रजवाड़ों और साहूकारों की निष्ठापूर्ण स्वामी भक्ति तथा सक्रिय सहयोग के बूते सैनिक विद्रोह को क्रूरता के साथ कुचल दिया था। इसके बाद उत्तराखण्ड समेत सम्पूर्ण भारत में ब्रिटिश शासन की जड़ें और अधिक मजबूत हो गई थीं।

प्रयास

Submitted by HindiWater on Fri, 01/17/2020 - 11:25
महिलाओं द्वारा बनाया गया बर्तन बैंक।
इंदौर जिले के इस गांव में कहीं भी प्लास्टिक का उपयोग नहीं होता है। दुकान से समाना लाना हो या बाजार से सब्जी, सभी अपने साथ कपड़े का थैला लेकर जाते हैं। दूध लाने के लिए स्टील की केतली या कोई अन्य बर्तन लेकर जाते हैं। स्कूल के बच्चों ने भी किताबों पर चढ़ाने वाले प्लास्टिक कवर से दूरी बना ली है, अब किताबों और कॉपियों पर केवल कागज का कवर ही चढ़ाया जाता है।

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Thu, 01/16/2020 - 09:57
Source:
नर्मदा, गंगा, कोसी, पेरियार व अन्य नदी घाटियों पर विचार मंथन
कृपया आपके आने की खबर, सफरनामा, सहभागी व्यक्तियों के नाम, उम्र, संबंधित विशेष कार्य/अनुभव इत्यादि के साथ त्वरित भेजें। 30 जनवरी से पहले भेजने से नियोजन में सहूलियत होगी।
Submitted by HindiWater on Sat, 12/28/2019 - 15:14
Source:
पहाड़ और हम : हिमालय के युवाओं के लिए कार्यशाला
पहाड़ों में एक कहावत है कि ‘पहाड़ का पानी और जवानी कभी पहाड़ के काम नहीं आते। सुनने पर इसका सरल और सीधा मतलब लगता है कि पहाड़ों के युवा नौकरी के अवसर के लिए और पहाड़ों का पानी नदियों के रास्ते यहां से मैदानी इलाकों में चले जाता है – दोनों की ऊर्जा और उर्वरकता का फायदा किसी और को होता है।
Submitted by HindiWater on Wed, 11/27/2019 - 13:25
Source:
"संजॉय घोष मीडिया अवार्ड्स-2019" के लिए आवेदन
गैर-लाभकारी संगठन चरखा विकास संचार नेटवर्क ने 'संजॉय घोष मीडिया अवार्ड्स 2019’ की घोषणा की है। इसके अंतर्गत उन लेखकों को मंच प्रदान किया जाएगा जो ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं में छुपी ऐसी प्रतिभाओं को उजागर करने का हौसला रखते हैं, जो मीडिया की नजरों से अब तक दूर रहा है।

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खासम-खास

नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह की बहाली (अर्थात सदा नीरा नदियाँ)

Submitted by HindiWater on Mon, 01/13/2020 - 22:17
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह की बहाली (अर्थात सदा नीरा नदियाँ)
भारत की लगभग सभी नदियों का मानसूनी प्रवाह लगभग अप्रभावित है, पर उनके गैर-मानसूनी प्रवाह में कमी आ रही है। अर्थात समस्या केवल नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह के घटने की ही है। गैर-मानसूनी प्रवाह के घटने के कारण छोटी तथा मंझौली नदियाँ मौसमी बनकर रह गई हैं। यह असर व्यापक है।

Content

पहाड़ी उत्पादों से दिखाई आजीविका की राह

Submitted by HindiWater on Fri, 11/29/2019 - 12:14
Source
अमर उजाला, 29 नवमन्बर, 2019
पहाड़ी उत्पादों से दिखाई आजीविका की राह
पहाड़ी अनाज से तैयार विभिन्न प्रकार के उत्पाद जैसे- चौलाई व झंगोरे के लड्डू व मंडुवे के बिस्कुट से लेकर अन्य उत्पादों को आजीविका के रूप में अपनाकर पहाड़ की महिलाओं ने करीब 500 करोड़ का कारोबार खडा कर दिया है। महिलाओं ने गाँव में ही आजीविका के लिए कदम आगे बढ़ाए हैं। घर से लेकर खेतीबाड़ी के काम काज के साथ इन महिलाओं को गाँव में ही अच्छी आमदनी हो रही है। पहाड़ी अनाजों से विभिन्न उत्पाद बनाना आजीविका का सबसे बड़ा साधन बन सकता है।

अल्कोहल के अणु घटा सकते हैं प्रदूषण

Submitted by HindiWater on Fri, 11/29/2019 - 11:19
Source
दैनिक जागरण, 29 नवम्बर, 2019
अल्कोहल के अणु घटा सकते हैं प्रदूषण

वायु प्रदूषण वर्तमान में सबसे बड़ी वैश्विक समस्याओं में से एक है। दुनियाभर के वैज्ञानिक इससे निपटने के लिए रास्ते तलाश रहे हैं। इसी दिशा में अमरिका शोधकर्ताओं की उम्मीद एक किरण दिखाई दी है। एक अध्ययन के आधार पर उन्होंने दावा किया है कि वातावरण में प्रचुर मात्रा में मौजूद अल्कोहल के अणु प्रदूषण फैलाने वाले उन खतर

ग्रीष्मकालीन राजधानी

Submitted by HindiWater on Thu, 11/28/2019 - 12:02
Source
नैनीताल एक धरोहर
ग्रीष्मकालीन राजधानी
1858 के अन्त तक अंग्रेजों ने देशी राज-रजवाड़ों और साहूकारों की निष्ठापूर्ण स्वामी भक्ति तथा सक्रिय सहयोग के बूते सैनिक विद्रोह को क्रूरता के साथ कुचल दिया था। इसके बाद उत्तराखण्ड समेत सम्पूर्ण भारत में ब्रिटिश शासन की जड़ें और अधिक मजबूत हो गई थीं।

प्रयास

मध्य प्रदेश का सिंदौड़ा गांव हुआ प्लास्टिक मुक्त, मिल चुका है राष्ट्रीय पुरस्कार

Submitted by HindiWater on Fri, 01/17/2020 - 11:25
महिलाओं द्वारा बनाया गया बर्तन बैंक।
इंदौर जिले के इस गांव में कहीं भी प्लास्टिक का उपयोग नहीं होता है। दुकान से समाना लाना हो या बाजार से सब्जी, सभी अपने साथ कपड़े का थैला लेकर जाते हैं। दूध लाने के लिए स्टील की केतली या कोई अन्य बर्तन लेकर जाते हैं। स्कूल के बच्चों ने भी किताबों पर चढ़ाने वाले प्लास्टिक कवर से दूरी बना ली है, अब किताबों और कॉपियों पर केवल कागज का कवर ही चढ़ाया जाता है।

नोटिस बोर्ड

नर्मदा, गंगा, कोसी, पेरियार व अन्य नदी घाटियों पर विचार मंथन

Submitted by HindiWater on Thu, 01/16/2020 - 09:57
नर्मदा, गंगा, कोसी, पेरियार व अन्य नदी घाटियों पर विचार मंथन
कृपया आपके आने की खबर, सफरनामा, सहभागी व्यक्तियों के नाम, उम्र, संबंधित विशेष कार्य/अनुभव इत्यादि के साथ त्वरित भेजें। 30 जनवरी से पहले भेजने से नियोजन में सहूलियत होगी।

पहाड़ और हम : हिमालय के युवाओं के लिए कार्यशाला

Submitted by HindiWater on Sat, 12/28/2019 - 15:14
पहाड़ और हम : हिमालय के युवाओं के लिए कार्यशाला
पहाड़ों में एक कहावत है कि ‘पहाड़ का पानी और जवानी कभी पहाड़ के काम नहीं आते। सुनने पर इसका सरल और सीधा मतलब लगता है कि पहाड़ों के युवा नौकरी के अवसर के लिए और पहाड़ों का पानी नदियों के रास्ते यहां से मैदानी इलाकों में चले जाता है – दोनों की ऊर्जा और उर्वरकता का फायदा किसी और को होता है।

"संजॉय घोष मीडिया अवार्ड्स-2019" के लिए आवेदन

Submitted by HindiWater on Wed, 11/27/2019 - 13:25
"संजॉय घोष मीडिया अवार्ड्स-2019" के लिए आवेदन
गैर-लाभकारी संगठन चरखा विकास संचार नेटवर्क ने 'संजॉय घोष मीडिया अवार्ड्स 2019’ की घोषणा की है। इसके अंतर्गत उन लेखकों को मंच प्रदान किया जाएगा जो ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं में छुपी ऐसी प्रतिभाओं को उजागर करने का हौसला रखते हैं, जो मीडिया की नजरों से अब तक दूर रहा है।

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