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खासम-खास

Submitted by HindiWater on Thu, 12/31/2020 - 13:34
गोंडकालीन सगड़ा बावडी, जबलपुर, मध्यप्रदेश
सदियों से बावडी हमारी सनातन जल प्रदाय व्यवस्था का अभिन्न अंग रही है। अलग-अलग इलाकों में बावडियों को अलग-अलग नामों यथा सीढ़ीदार कुआ या वाउली या बाव इत्यादि के नाम से पुकारा जाता है। अंग्रेजी भाषा में उसे स्टेप-वैल कहा जाता है। इस संरचना में पानी का स्रोत भूजल होता है। भारत में इस संरचना का विकास, सबसे पहले, देश के पानी की कमी वाले पश्चिमी हिस्से में हुआ। वहाँ यह अस्तित्व में आई और समय के साथ फली-फूली। दक्षिण भारत में भी उसका विस्तार हुआ। देश के उन हिस्सों में वह भारतीय संस्कृति और संस्कारों का हिस्सा बनी। सम्पन्न लोगों के लिए सामाजिक दायित्व बनी।

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Submitted by UrbanWater on Wed, 12/16/2020 - 09:08
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बिहार की नदियाँ, फोटो: needpix.com

बिहार की नदियाँ, फोटो : needpix.com

Submitted by HindiWater on Mon, 12/14/2020 - 14:54
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नदियों को सदानीरा बनाए बिना जल संकट खत्म नहीं होगा
केन्द्र सरकार ने सेन्ट्रल वाटर कमीशन और सेन्ट्रल ग्राउन्ड वाटर बोर्ड का गठन किया है। इसी अनुक्रम में मौटे तौर पर राज्यों के जल संसाधन विभागों ने भी अपनी-अपनी व्यवस्था कायम की हैं। यह अलग बात है कि नदियों को सदानीरा रखना उनके अजेन्डे पर नहीं है। यही अनदेखी नदियों के गैरमानसूनी प्रवाह के घटने या समाप्त होने तथा जल संकट की असली वजह है। आई.आई.टी और अनेक इंजीनियरिंग कालेज, कई सालों से, वाटर सेक्टर की मांग के अनुरुप अमला तैयार कर रहे हैं। इसके अलावा,देश में प्रशिक्षण  अनुसन्धान के लिए माकूल व्यवस्था है। सम्पादित कामों से असहमति के लिए एक्टिविस्टों की प्रतिकूल टिप्पणियाँ और उदाहरण उपलब्ध हैं। अर्थात्,जल सेक्टर (सतही और भूजल) के समग्र अध्ययन की समीक्षा करने के लिए माकूल अवसर तथा उदाहरण उपलब्ध हैं। इन सब सुविधाओं, अवसरों तथा चुनौतियों के बावजूद जल सेक्टर की चुनौतिया साल दर साल बढ़ रही हैं। उदाहरण के लिए नदियों के असमय सूखने की समस्या है। भूजल स्तर की गिरावट की समस्या है। पानी की गुणवत्ता की गहराती समस्या है। बांधों तथा तालाबों में गाद जमाव की समस्या है।
Submitted by HindiWater on Tue, 12/08/2020 - 12:38
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ICAR-IARI, Pusa
बिक्री और किमतों में कमी आने से खराब हो रही हैं सब्जी की फसलें
देशभर में कोविड-19 महामारी तेजी से फैल रही है । अब कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही हैं । इस संक्रमण का असर देश के किसानों और फसलों पर हो रहा हैं इस वक्त ज्यादतर हिस्सों में फसल पककर तैयार हो चुकी हैं और कटने को तैयार हैं । हालांकि, संक्रमण के डर और लॉकडाउन के चलते किसानों को अपनी फसल काटने में अनेक समस्याएं उत्पन हो रही हैं ।  किसानों की फसल पककर तैयार है, लेकिन 21 दिनों के लॉकडाउन की वजह से कृषि मजदूर नहीं मिल रहे हैं । दरअसल थ्रेसिंग मशीने ज्यादतर गेंहू कटाई के सीजन में पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे इलाको से बुंदेलखण्ड क्षेत्र में आती हैं और किराये पर फसल निकालने की काम करती हैं लेकिन लॉकडाउन के कारण थ्रेसिंग मशीने समय से नही पहुंच सका है। 

प्रयास

Submitted by HindiWater on Mon, 02/15/2021 - 16:21
उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा
उत्तराखंड में 2013 में आई आपदा और फिर 7 फरवरी को चमोली के तपोवन में आई जलप्रलय की घटनाएँ पूरी दुनिया को बड़े बांधों के निर्माण और पर्यावरण असंतुलन से होने वालेदुष्परिणामों से आगाह कर रही है। यह बड़े बांध स्थानीय जनता को न तो सिंचाई और न ही पेयजल की पूर्ति करते हैं बल्कि इसके विपरीत प्राकृतिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों के लिएगंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं। बड़े बांधों में बहुत अधिक जलराशि एकत्रित होने से पहाड़ों परअत्यधिक दबाव पड़ता है। इसके निर्माण के दौरान भारी मशीनरी और विस्फोटकों आदि काप्रयोग होता है, जो पहाड़ों की नींव को भी हिला देते हैं, जिससे पहाड़ों में भूस्खलन, भूकंप आदिकी संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। चूँकि बड़े बांधों को भरने के लिए नदियों का प्रवाह रोकना पड़ताहै, इसलिए नदी के पानी से जो नैसर्गिक भूमिगत जलसंचय होता है, उसमें भी व्यवधान पड़ता है। 

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Thu, 01/21/2021 - 15:14
Source:
वेटलैंड्स डे इंटरनेशनल साउथ एशिया
विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल
रामसर कन्वेन्शन में वेटलैंड्स को शामिल किए जाने पर  हर वर्ष की तरह इस बार भी 02 फरवरी 2021 को भारत सहित पूरे विश्व मे वेटलैंड्स डे मनाया जाएगा।  इस दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को वेटलैंड्स डे के प्रति जागरूक करना है। इस वर्ष विश्व वेटलैंड्स दिवस का विषय "वेटलैंड्स और जल " (Wetlands and water) है।
Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Source:
अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 16:26
Source:
Aqua Foundation
एक्वा फाउंडेशन
सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं, नवीन प्रौद्योगिकियों और अत्याधुनिक अनुसंधान में नवीनतम रुझानों के बारे में जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। आपसे निवेदन है कि अपनी संस्था से अधिक से अधिक प्रतिभागियों का नामांकन करे (online Register as delegate) कार्यक्रम का ब्रोशर यहां डाउनलोड करें.  अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट देखें  World Aqua Congress.  तारीख : अक्टूबर 29- 30, 2020 समयः प्रातः 9:00 बजे से सांय 6ः00 बजे 

Latest

खासम-खास

बावडी: कुछ अनछुए पहलू

Submitted by HindiWater on Thu, 12/31/2020 - 13:34
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
bavdi:-kuch-anachue-pahloo
गोंडकालीन सगड़ा बावडी, जबलपुर, मध्यप्रदेश
सदियों से बावडी हमारी सनातन जल प्रदाय व्यवस्था का अभिन्न अंग रही है। अलग-अलग इलाकों में बावडियों को अलग-अलग नामों यथा सीढ़ीदार कुआ या वाउली या बाव इत्यादि के नाम से पुकारा जाता है। अंग्रेजी भाषा में उसे स्टेप-वैल कहा जाता है। इस संरचना में पानी का स्रोत भूजल होता है। भारत में इस संरचना का विकास, सबसे पहले, देश के पानी की कमी वाले पश्चिमी हिस्से में हुआ। वहाँ यह अस्तित्व में आई और समय के साथ फली-फूली। दक्षिण भारत में भी उसका विस्तार हुआ। देश के उन हिस्सों में वह भारतीय संस्कृति और संस्कारों का हिस्सा बनी। सम्पन्न लोगों के लिए सामाजिक दायित्व बनी।

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पानी रे पानी अभियान के अन्तर्गत पानी पंचायत

Submitted by UrbanWater on Wed, 12/16/2020 - 09:08
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
pani-re-pani-abhiyan-ki-antargat-pani-panchayat
बिहार की नदियाँ, फोटो: needpix.com

अविरल नदी, फोटो : needpix.comबिहार की नदियाँ, फोटो : needpix.com

नदियों को सदानीरा बनाए बिना जल संकट खत्म नहीं होगा

Submitted by HindiWater on Mon, 12/14/2020 - 14:54
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
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नदियों को सदानीरा बनाए बिना जल संकट खत्म नहीं होगा
केन्द्र सरकार ने सेन्ट्रल वाटर कमीशन और सेन्ट्रल ग्राउन्ड वाटर बोर्ड का गठन किया है। इसी अनुक्रम में मौटे तौर पर राज्यों के जल संसाधन विभागों ने भी अपनी-अपनी व्यवस्था कायम की हैं। यह अलग बात है कि नदियों को सदानीरा रखना उनके अजेन्डे पर नहीं है। यही अनदेखी नदियों के गैरमानसूनी प्रवाह के घटने या समाप्त होने तथा जल संकट की असली वजह है। आई.आई.टी और अनेक इंजीनियरिंग कालेज, कई सालों से, वाटर सेक्टर की मांग के अनुरुप अमला तैयार कर रहे हैं। इसके अलावा,देश में प्रशिक्षण  अनुसन्धान के लिए माकूल व्यवस्था है। सम्पादित कामों से असहमति के लिए एक्टिविस्टों की प्रतिकूल टिप्पणियाँ और उदाहरण उपलब्ध हैं। अर्थात्,जल सेक्टर (सतही और भूजल) के समग्र अध्ययन की समीक्षा करने के लिए माकूल अवसर तथा उदाहरण उपलब्ध हैं। इन सब सुविधाओं, अवसरों तथा चुनौतियों के बावजूद जल सेक्टर की चुनौतिया साल दर साल बढ़ रही हैं। उदाहरण के लिए नदियों के असमय सूखने की समस्या है। भूजल स्तर की गिरावट की समस्या है। पानी की गुणवत्ता की गहराती समस्या है। बांधों तथा तालाबों में गाद जमाव की समस्या है।

कोविड-19 किसानों की मुसीबत एवं सरकारी राहत

Submitted by HindiWater on Tue, 12/08/2020 - 12:38
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Source
ICAR-IARI, Pusa
बिक्री और किमतों में कमी आने से खराब हो रही हैं सब्जी की फसलें
देशभर में कोविड-19 महामारी तेजी से फैल रही है । अब कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही हैं । इस संक्रमण का असर देश के किसानों और फसलों पर हो रहा हैं इस वक्त ज्यादतर हिस्सों में फसल पककर तैयार हो चुकी हैं और कटने को तैयार हैं । हालांकि, संक्रमण के डर और लॉकडाउन के चलते किसानों को अपनी फसल काटने में अनेक समस्याएं उत्पन हो रही हैं ।  किसानों की फसल पककर तैयार है, लेकिन 21 दिनों के लॉकडाउन की वजह से कृषि मजदूर नहीं मिल रहे हैं । दरअसल थ्रेसिंग मशीने ज्यादतर गेंहू कटाई के सीजन में पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे इलाको से बुंदेलखण्ड क्षेत्र में आती हैं और किराये पर फसल निकालने की काम करती हैं लेकिन लॉकडाउन के कारण थ्रेसिंग मशीने समय से नही पहुंच सका है। 

प्रयास

उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा

Submitted by HindiWater on Mon, 02/15/2021 - 16:21
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Source
चरखा फीचर
उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा
उत्तराखंड में 2013 में आई आपदा और फिर 7 फरवरी को चमोली के तपोवन में आई जलप्रलय की घटनाएँ पूरी दुनिया को बड़े बांधों के निर्माण और पर्यावरण असंतुलन से होने वालेदुष्परिणामों से आगाह कर रही है। यह बड़े बांध स्थानीय जनता को न तो सिंचाई और न ही पेयजल की पूर्ति करते हैं बल्कि इसके विपरीत प्राकृतिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों के लिएगंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं। बड़े बांधों में बहुत अधिक जलराशि एकत्रित होने से पहाड़ों परअत्यधिक दबाव पड़ता है। इसके निर्माण के दौरान भारी मशीनरी और विस्फोटकों आदि काप्रयोग होता है, जो पहाड़ों की नींव को भी हिला देते हैं, जिससे पहाड़ों में भूस्खलन, भूकंप आदिकी संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। चूँकि बड़े बांधों को भरने के लिए नदियों का प्रवाह रोकना पड़ताहै, इसलिए नदी के पानी से जो नैसर्गिक भूमिगत जलसंचय होता है, उसमें भी व्यवधान पड़ता है। 

नोटिस बोर्ड

विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल

Submitted by HindiWater on Thu, 01/21/2021 - 15:14
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वेटलैंड्स डे इंटरनेशनल साउथ एशिया
विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल
रामसर कन्वेन्शन में वेटलैंड्स को शामिल किए जाने पर  हर वर्ष की तरह इस बार भी 02 फरवरी 2021 को भारत सहित पूरे विश्व मे वेटलैंड्स डे मनाया जाएगा।  इस दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को वेटलैंड्स डे के प्रति जागरूक करना है। इस वर्ष विश्व वेटलैंड्स दिवस का विषय "वेटलैंड्स और जल " (Wetlands and water) है।

हिंदी पत्रकारों के लिए सीएसई-एएईटीआई की ओर से ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स

Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Author
इंडिया वाटर पोर्टल (हिंदी)
hindi-patrakaron-ke-liye-cse-aaeti-online-training-course
अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

एक्वा फाउंडेशन की XIV वर्ल्ड एक्वा कांग्रेस

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 16:26
ekva-foundation-key-XIV-world-ekva-kangres
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Aqua Foundation
एक्वा फाउंडेशन
सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं, नवीन प्रौद्योगिकियों और अत्याधुनिक अनुसंधान में नवीनतम रुझानों के बारे में जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। आपसे निवेदन है कि अपनी संस्था से अधिक से अधिक प्रतिभागियों का नामांकन करे (online Register as delegate) कार्यक्रम का ब्रोशर यहां डाउनलोड करें.  अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट देखें  World Aqua Congress.  तारीख : अक्टूबर 29- 30, 2020 समयः प्रातः 9:00 बजे से सांय 6ः00 बजे 

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